रामपुर। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़ी मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अपने कब्जे में ले लिया है। ईडी के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपए है, जबकि इनकी अनुमानित बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपए आंकी गई है। बुधवार को यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई।
ईडी के अनुसार, जौहर यूनिवर्सिटी का संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वह इसके प्रमुख ट्रस्टी हैं। यूनिवर्सिटी रामपुर के जौहर नगर क्षेत्र में स्थित है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन, ठेकेदारों से प्राप्त रकम और जमीन से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं के जरिए अर्जित धन का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी की संपत्तियां बनाने में किया गया।
पूरा मामला 5 पॉइंट में समझिए
1. 1,170 करोड़ रुपए की बाजार कीमत वाली संपत्तियां अटैच
ईडी के मुताबिक, रामपुर के जौहर नगर और सींगनखेड़ा क्षेत्र में स्थित यूनिवर्सिटी परिसर की जमीन और इमारतें मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पास हैं। आजम खान ट्रस्ट के संस्थापक और यूनिवर्सिटी के मानद कुलाधिपति हैं। एजेंसी ने इन संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपए बताया है, जबकि अनुमानित बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपए है।
2. सरकारी फंड और ठेकेदारों की रकम के दुरुपयोग का आरोप
ईडी की जांच में आरोप लगाया गया है कि सरकारी विकास योजनाओं और ठेकेदारों से प्राप्त धन को ट्रस्ट के खातों में भेजकर यूनिवर्सिटी परिसर के निर्माण में इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, रामपुर नगर पालिका की सफाई मशीन का इस्तेमाल भी यूनिवर्सिटी में किया गया था।
3. किसानों की जमीन और शत्रु संपत्ति पर कब्जे की जांच
ईडी ने रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। इनमें किसानों की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर गैरकानूनी कब्जे से जुड़े मामले शामिल हैं।
4. 78.32 करोड़ के डोनेशन में 66.03 करोड़ रुपए फर्जी होने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, ट्रस्ट ने अपनी बैलेंस शीट में 78.32 करोड़ रुपए का डोनेशन दिखाया था। इसमें से 66.03 करोड़ रुपए के कथित तौर पर फर्जी होने की बात सामने आई है। इसी मामले से जुड़े घटनाक्रम में आयकर विभाग ने पहले ही ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था।
5. गरीब परिवारों के मकान तोड़ने और मलबे के इस्तेमाल का आरोप
जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि वर्ष 2016 में आजम खान के कथित निर्देश पर कई गरीब परिवारों के मकान तोड़े गए थे और उनसे निकले मलबे का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के निर्माण में किया गया। इन आरोपों की जांच के तहत एजेंसियां संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।
ईडी की जांच अभी जारी
ईडी के मुताबिक, इस मामले में जांच जारी है। इससे पहले अगस्त 2026 में एजेंसी ने आजम खान और उनसे जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। उस दौरान कई डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
फिलहाल यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसी की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।


