भाजपा के वरिष्ठ नेता और कवि सत्यनारायण सत्तन ने वंदे मातरम् गीत के 150 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मंच से बिना किसी का नाम लिए तीखा व्यंग्य किया। सत्तन ने कहा—
“जो कभी चने नहीं खा सकते थे, सेव-परमल पर जिंदा थे, अब राजकीय गाड़ियों में घूम रहे हैं।”
यह कार्यक्रम इंदौर के राजवाड़ा में हुआ था। जब सत्तन मंच पर बोल रहे थे, तभी कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की गाड़ी सायरन बजाते हुए पहुंची। नगर अध्यक्ष ने बताया कि “कैलाश जी आ गए”, तो सत्तन मुस्कुराए और बोले—
“ये भी प्रजातंत्र का गौरव है कि जो कल तक झंडा उठाकर घूमते थे, आज गाड़ी में घूम रहे हैं। उनके आने से पहले ही ‘पी-पी-पी-पी’ की आवाज हो रही है।”
सत्तन ने आगे कहा—
“जो लोग कभी चने नहीं खा सकते थे, सेव-परमल पर जिंदा थे, अब आपके पुण्य प्रताप से राजकीय गाड़ियों में बैठकर आपके बीच आने का गौरव पा रहे हैं। ये सम्मान आपने दिया है, तालियां तो बनती हैं।”
उनकी बातों पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।

पुराने कार्यकर्ताओं को याद किया
सत्तन ने कहा कि आज मंच पर नई पीढ़ी के नेता हैं, लेकिन बाहर वही पुराने कार्यकर्ता खड़े हैं जिन्होंने संघर्ष के दिनों में पार्टी का झंडा थामे रखा था। आज वे खड़े होकर आत्मसंतुष्टि पा रहे हैं कि उनके संघर्ष से राष्ट्रप्रेम की मशाल जल रही है।
उन्होंने कहा, “भाजपा भारत माता की जय और राष्ट्र चेतना के जागरण के लिए कार्य कर रही है।”
विजयवर्गीय बोले – ‘वंदे मातरम्’ देश को फिर से खड़ा करने का मंत्र
कार्यक्रम में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, “‘वंदे मातरम्’ सिर्फ गीत नहीं, बल्कि एक मंत्र है। यह भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि जब देश की आज़ादी के 100 साल पूरे हों, तब भारत दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में गिना जाए।”
भाजपा नगर अध्यक्ष बोले – ‘वंदे मातरम् एक ग्रंथ है’
भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कहा कि “‘वंदे मातरम्’ एक ग्रंथ है, जिसने भारत की एकता और बलिदान की भावना को जन्म दिया। इसे गाते-गाते असंख्य क्रांतिकारी हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए।”
यह गीत आज भी भारत माता के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।
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