Trinamool Congress (TMC) के विधायक हुमायूँ कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में Babri Masjid की प्रतिकृति बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मस्जिद का नींव‑पत्थर 6 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। इस घोषणा ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी।
Kabir का बयान
- हुमायूँ कबीर ने बताया कि मस्जिद “Babri Masjid जैसी” होगी और इसमें मुस्लिम समुदाय और नेताओं की भागीदारी होगी।
- उन्होंने कहा कि मस्जिद के आसपास हॉस्पिटल और गेस्ट‑हाउस जैसी सुविधाएं भी बनाई जाएंगी, ताकि यह सामुदायिक विकास का केंद्र बन सके।
- Kabir ने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत फैसला है और उन्होंने इसे किसी पार्टी अनुमति से जोड़ने से इनकार किया।
विवाद और प्रतिक्रिया
- Kabir के ऐलान के तुरंत बाद कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठन सक्रिय हुए।
- भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने इसे “साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाने वाला कदम” कहा।
- कुछ धार्मिक और सामाजिक समूह इसे हिंदू‑मुस्लिम सौहार्द के लिए खतरा मान रहे हैं।
- नेताओं और विशेषज्ञों ने चेताया कि ऐसे कदम समाज में विभाजन और मतभेद बढ़ा सकते हैं।
TMC की कार्रवाई
- 4 दिसंबर 2025 को TMC ने हुमायूँ कबीर को पार्टी से सस्पेंड कर दिया।
- पार्टी ने कहा कि Kabir का कदम विवादित था और इससे कानून‑व्यवस्था पर असर पड़ सकता था।
- TMC ने स्पष्ट किया कि पार्टी सामुदायिक शांति और सौहार्द को बनाए रखने में विश्वास रखती है और ऐसे कदम का समर्थन नहीं करती।
आगे क्या हो सकता है
- Kabir का प्रस्ताव और सस्पेंशन यह सवाल उठाता है कि क्या धार्मिक प्रतीकों के जरिए राजनीतिक लाभ लेना सही है या इससे समाज में विभाजन बढ़ता है।
- कुछ लोग इसे धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक मानते हैं, वहीं कई इसे सामाजिक संतुलन पर हमला बता रहे हैं।
- यह घटना दिखाती है कि राजनीति, धर्म और सामाजिक जिम्मेदारी कितनी नाजुक संतुलन पर चलते हैं।
पश्चिम बंगाल जैसे विविधतापूर्ण राज्य में ऐसे कदम सोच-समझकर ही उठाए जाने चाहिए। Humayun Kabir का विवाद यह सिखाता है कि धर्म और राजनीति का मेल बहुत संवेदनशील मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
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