देश भर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान अनेक सरकारी कर्मचारियों को बूथ स्तर पर ड्यूटी दे दी गई है। रोज़मर्रा की नौकरी के साथ यह अतिरिक्त ज़िम्मेदारी कई जगहों पर मुश्किलें खड़ी कर रही थी। इसी मुद्दे पर Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है, जिसमें कर्तव्य भी है और राहत भी।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश: जिम्मेदारी निभाना ज़रूरी
अदालत ने कहा कि:
- जो कर्मचारी ECI (Election Commission of India) की ड्यूटी पर तैनात हैं, उन्हें अपना काम ज़रूर करना होगा।
- चुनावी कार्य केवल “अतिरिक्त काम” नहीं है, बल्कि कानूनी दायित्व है।
इसमें BLOs, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, क्लर्क और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
लेकिन राहत भी: जरूरत पड़े तो Extra Staff लगाया जाए
Supreme Court ने यह भी स्पष्ट कहा कि:
- अगर किसी जिले या क्षेत्र में कर्मचारियों पर अत्यधिक बोझ है,
- तो राज्य सरकारें अतिरिक्त लोग नियुक्त कर सकती हैं।
- ताकि किसी को अनुचित तनाव या शारीरिक परेशानी न हो।
यह निर्देश ऐसे समय आया है जब कई क्षेत्रों में कर्मचारी सुबह बहुत जल्दी और रात देर तक SIR कार्य कर रहे थे।
कर्मचारियों की पीड़ा भी सुनी गई
याचिका में बताया गया कि:
- कुछ कर्मचारियों पर काम का बोझ इतना बढ़ गया कि मानसिक व शारीरिक थकान की स्थिति आ गई।
- कथित तौर पर कुछ दुःखद घटनाएँ भी सामने आईं।
सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशीलता के साथ कहा:
यदि किसी कर्मचारी के पास वाजिब कारण है, वह ड्यूटी से छूट की मांग कर सकता है।
राज्य सरकार को केस-टू-केस आधार पर विचार करना चाहिए।
कानूनी स्थिति: FIR तक का अधिकार
चुनाव आयोग के पास कानूनन अधिकार है कि:
- यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी से बचता है,
- तो उसके खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है।
मुआवजे का प्रश्न
याचिका में मांग की गई थी कि जिन कर्मचारियों की मृत्यु या नुकसान SIR कार्य के दौरान हुआ, उनके परिवार को मुआवजा मिले।
Supreme Court ने कहा:
- ऐसे मामलों में व्यक्तिगत आवेदन दिए जा सकते हैं।
- राज्य सरकारें उस पर फैसला करेंगी।
यह परिवारों को न्याय पाने का सीधा रास्ता देता है।
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है
- चुनावी ड्यूटी ज़रूरी है, इसलिए इसे टाला नहीं जा सकता।
- लेकिन काम के बोझ, स्वास्थ्य, परिवार और सम्मान का ख्याल रखना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
- अब हर राज्य को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- स्टाफ पर्याप्त हो,
- घंटों का दबाव कम हो,
- और किसी को अन्यायपूर्ण मानसिक बोझ न झेलना पड़े।
Human Touch: ड्यूटी भी, इंसानियत भी
इस आदेश का सार यह है:
“Democracy का पहिया तभी चलेगा, जब काम करने वाले इंसान टूटे नहीं।”
- शिक्षक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, पंचायत कर्मचारी, BLO – ये सिर्फ सरकारी पद नहीं हैं,
- ये परिवार वाले, जिम्मेदार लोग हैं।
- उनके लिए सम्मान, सहयोग और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है जितना चुनाव।
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