Rajasthan के हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर चल रहा तनाव सोमवार को अचानक बढ़ गया। कई दिनों से विरोध कर रहे किसानों ने टिब्बी इलाके में हुई महापंचायत के बाद फैक्ट्री साइट की ओर कूच किया। भीड़ बड़ी थी, गुस्सा भी उतना ही। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन किसान आगे बढ़ते गए और देखते-देखते माहौल बिगड़ गया।
कैसे भड़की हिंसा?
प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों ने फैक्ट्री की दीवार गिरा दी। उसके बाद भीड़ में मौजूद उग्र समूह ने निर्माणाधीन परिसर में खड़े दर्जनों वाहनों को आग लगा दी। रिपोर्टों के मुताबिक 10 से 16 वाहन— जिनमें पुलिस की जीपें, मशीनें और निजी गाड़ियाँ शामिल थीं — जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए।
स्थिति तेजी से बिगड़ती देखकर पुलिस को लाठीचार्ज, आंसू-गैस और रबर बुलेट तक का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में कई किसान, पुलिसकर्मी और आसपास मौजूद लोग घायल हो गए।
क्यों भड़का इतना विरोध?
किसानों का कहना है कि एथेनॉल फैक्ट्री उनके खेतों, भूजल और हवा—तीनों को नुकसान पहुंचा सकती है। उनका डर साफ है:
- जमीन और पानी पर असर पड़ेगा
- कचरा और केमिकल गांवों को दूषित करेंगे
- पहले से ही पानी की कमी है, फैक्ट्री इसे और घटा देगी
- ग्रामीणों से बिना सहमति यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया
किसानों का तर्क है कि “विकास ज़रूरी है, लेकिन हमारी ज़िंदगी और खेत किस कीमत पर?”
फैक्ट्री और प्रशासन का पक्ष
फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि यह प्रोजेक्ट Zero Liquid Discharge Technology पर आधारित है, जिसमें गंदा पानी रिसने का खतरा नहीं होगा। कंपनी दावा करती है कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
प्रशासन भी यही कहता है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा। लेकिन ग्रामीणों का भरोसा टूट चुका है—उन्हें लगता है कि वादों की बजाय व्यवहार ज्यादा मायने रखता है।
घटना के बाद क्या बदलाव हुए?
हिंसा रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत:
- इंटरनेट सेवाएँ बंद कीं
- कई क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया
- कुछ स्कूल और दुकानें सुरक्षा के चलते बंद रखीं
- कई लोगों को हिरासत में लिया
माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन नियंत्रण में बताया जा रहा है।
आगे क्या?
स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या फैक्ट्री से ज्यादा बातचीत की कमी है। किसानों को लगता है कि उनकी चिंता को गंभीरता से नहीं लिया गया।
यदि कंपनी और प्रशासन, किसानों को पारदर्शिता के साथ भरोसा दिलाए—पर्यावरण परीक्षण, पानी की खपत, कचरा प्रबंधन और स्थानीय रोजगार पर स्पष्ट लिखित गारंटी दे—तो माहौल शांत हो सकता है।
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