भारत की राजनीति के संयमित और सादगी-भरे चेहरों में से एक, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल (Shivraj Patil) अब हमारे बीच नहीं रहे। 12 दिसंबर 2025 की सुबह, महाराष्ट्र के लातूर स्थित उनके आवास पर उनका 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पिछले कुछ समय से वे अस्वस्थ थे और परिवार के साथ ही रह रहे थे।
उनके निधन के साथ भारतीय राजनीति ने एक ऐसा नेता खो दिया, जिसकी पहचान शांति, मर्यादा और धैर्य थी। पाटिल अपने पीछे बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना और दो पोतियों को छोड़ गए।
Shivraj Patil: एक विनम्र नेता की लंबी राजनीतिक यात्र
Shivraj Patil का करियर लगभग चार दशकों में फैला रहा।
उनका सफर एक नगरपालिका अध्यक्ष के रूप में शुरू हुआ, फिर वे महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे और उसके बाद राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर पहुंच गए।
मुख्य पद जिनसे वे देश की राजनीति में पहचान बने:
- लोकसभा अध्यक्ष (1991–1996)
- केंद्रीय गृह मंत्री (2004–2008)
- पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक
- लातूर लोकसभा क्षेत्र से सात बार सांसद
उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो कानून, संविधान और संसदीय परंपराओं के प्रति बेहद संवेदनशील थे। संसद में उनकी भाषा और संयम आज भी उदाहरण के रूप में याद किया जाता है।
26/11 के बाद दिया था नैतिक जिम्मेदारी का उदाहरण
गृह मंत्री के रूप में पाटिल का कार्यकाल चुनौतियों भरा रहा।
26/11 मुंबई आतंकी हमले के बाद देशभर में सुरक्षा पर उठे सवालों के बीच उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया। उस समय उनका निर्णय कई लोगों के लिए राजनीतिक ईमानदारी का प्रतीक बना।
देशभर से श्रद्धांजलि, PM–President ने जताया शोक
उनके निधन पर राजनीतिक जगत में गहरा दुख व्यक्त किया गया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “अनुभवी और समर्पित नेता” बताया।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि देश ने “एक प्रतिष्ठित जनसेवक” को खो दिया।
- कई दलों के नेताओं ने उनके शांत स्वभाव और संविधान-सम्मत राजनीति की प्रशंसा की।
एक सादा और शांत व्यक्तित्व – जनता के लिए समर्पित जीवन
Shivraj Patil को उनके समर्थक हमेशा याद रखेंगे—
उनकी सादगी,
उनकी शांत भाषा,
और जनता के प्रति उनका कर्तव्यबोध।
वे उन नेताओं में से थे जो कम बोलते थे, लेकिन जिस काम को हाथ में लेते थे, उसे पूरी गंभीरता से निभाते थे।
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