अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि उन्होंने दोनों देशों को 200% टैरिफ (Import Duty) लगाने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद हालात काबू में आए और संभावित युद्ध टल गया।
यह बयान उन्होंने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान दिया, जहां उन्होंने खुद को “शांति स्थापित करने वाला नेता” बताया।
क्या है ट्रंप का दावा?
Trump के अनुसार, मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हालात बेहद गंभीर थे। सीमा पर हवाई टकराव हो रहे थे और कई फाइटर जेट गिराए गए थे। उन्होंने दावा किया कि इस संघर्ष में कुल 11 महंगे लड़ाकू विमान गिराए गए।
उनका कहना है कि उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से सीधे बात की। ट्रंप ने कथित तौर पर कहा कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगा देगा और व्यापारिक रिश्ते प्रभावित होंगे।
Trump ने अपने अंदाज में कहा, “पैसे से बड़ी कोई ताकत नहीं होती।” उनका दावा है कि इसी आर्थिक दबाव के बाद संघर्ष रुक गया और लाखों लोगों की जान बची।
भारत का क्या कहना है?
भारत सरकार ने पहले भी ऐसे दावों को खारिज किया है। आधिकारिक बयान में कहा गया था कि संघर्षविराम (Ceasefire) दोनों देशों के बीच सीधे संवाद से हुआ था, न कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से।
नई दिल्ली का साफ रुख है कि भारत और पाकिस्तान के मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इन्हें आपसी बातचीत से ही सुलझाया जाता है।
जेट गिरने का दावा कितना सही?
ट्रंप ने अलग-अलग मंचों पर जेट गिराए जाने की संख्या बदलकर बताई है—कभी 5, कभी 7 और अब 11। अब तक किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या आधिकारिक सैन्य रिपोर्ट में 11 जेट गिरने की पुष्टि नहीं हुई है।
यही कारण है कि उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
पृष्ठभूमि: मई 2025 का तनाव
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ा था। रिपोर्टों के अनुसार, आतंकी घटना के बाद भारत ने सीमित सैन्य कार्रवाई की थी। इसके जवाब में सीमा पर गोलाबारी और हवाई गतिविधियां बढ़ीं। कुछ दिनों बाद दोनों देशों ने संघर्षविराम की घोषणा की और हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए।
राजनीतिक संदेश या कूटनीतिक सच?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान अमेरिकी राजनीति और उनकी विदेश नीति की छवि से भी जुड़ा हो सकता है। वे अक्सर खुद को मजबूत आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति वाला नेता बताते रहे हैं।
हालांकि, भारत की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट है—किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि सीधे संवाद से तनाव कम हुआ।
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