Nepal की राजनीति में इन दिनों बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। नए प्रधानमंत्री Balendra Shah के पद संभालते ही पूर्व प्रधानमंत्री K. P. Sharma Oli को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई 2025 में हुए चर्चित Gen-Z Protest के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े मामले में की गई है।
सरकारी जांच रिपोर्ट के अनुसार, उस आंदोलन के दौरान हुई झड़पों और अव्यवस्था में करीब 77 लोगों की मौत हुई थी। अब इसी मामले में लापरवाही और प्रशासनिक विफलता के आरोपों की जांच चल रही है।
Gen-Z Protest: कैसे शुरू हुआ नेपाल का बड़ा आंदोलन
साल 2025 में नेपाल के कई शहरों में युवाओं ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए। सोशल मीडिया के जरिए संगठित हुए इन प्रदर्शनों को धीरे-धीरे “Gen-Z Protest” के नाम से पहचान मिली।
प्रदर्शन करने वाले युवाओं की मुख्य मांगें थीं:
- भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
- सरकारी नीतियों में पारदर्शिता
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा
शुरुआत शांतिपूर्ण थी, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात बिगड़ गए। कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिससे हिंसा भड़क गई। सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा और कई शहरों में कर्फ्यू तक लगाना पड़ा।
इन झड़पों के दौरान दर्जनों लोग घायल हुए और 77 लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया।
जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया
घटनाओं के बाद सरकार ने एक जांच आयोग बनाया था। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया कि उस समय की सरकार हालात को संभालने में पूरी तरह सफल नहीं रही।
रिपोर्ट के अनुसार:
- सुरक्षा व्यवस्था में कई स्तरों पर कमी रही
- भीड़ नियंत्रण के लिए समय पर सही रणनीति नहीं अपनाई गई
- प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही देखी गई
इसी आधार पर तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और उस समय के गृह मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश की गई।
बालेन शाह सरकार की कार्रवाई
नए प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में बनी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद इस मामले की फाइलें फिर से खोलीं। जांच एजेंसियों को निर्देश दिए गए कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाए।
इसके बाद पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री ओली को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया और बाद में उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।
सरकार का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक बदले की भावना से नहीं बल्कि जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
हालांकि ओली की पार्टी और समर्थकों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश हो सकती है।
नेपाल में पहले भी कई बार राजनीतिक टकराव देखने को मिला है, इसलिए इस मामले को लेकर बहस तेज हो गई है।
Nepal की राजनीति पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में Nepal की राजनीति को गहराई से प्रभावित कर सकता है। अगर अदालत में आरोप साबित होते हैं तो यह देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटना मानी जाएगी।
फिलहाल पूरा मामला अदालत में जाएगा और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही साफ हो पाएगा कि उस समय की घटनाओं के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
लेकिन इतना तय है कि Gen-Z Protest और उससे जुड़ी यह कार्रवाई नेपाल की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।
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