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युद्ध के बीच बढ़ी घबराहट, कलेक्टर बोले- पेट्रोल-डीजल की नहीं है कमी

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मिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के चलते लोगों में चिंता और बेचैनी बढ़ गई है। इसी के कारण कई जगहों पर जमाखोरी और कालाबाजारी जैसी स्थिति बनती दिख रही है। हालांकि प्रशासन ने लोगों से घबराने की बजाय संयम रखने की अपील की है।

पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक

बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने साफ कहा है कि जिले में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने बताया कि अगर सप्लाई बंद भी हो जाए, तब भी जिले में करीब 5 दिन का पेट्रोल और साढ़े 5 दिन का डीजल स्टॉक मौजूद है।

गैस सिलेंडर की मांग ज्यादा, सप्लाई कम

जहां पेट्रोल-डीजल की स्थिति सामान्य है, वहीं घरेलू गैस सिलेंडर की मांग ज्यादा हो गई है। जिले में रोजाना करीब 9 हजार सिलेंडर आ रहे हैं, जबकि मांग 22 हजार तक पहुंच गई है। यानी करीब 13 हजार सिलेंडरों की कमी बनी हुई है।

घबराहट में बढ़ रही खरीदारी

अधिकारियों के मुताबिक ईंधन की असली कमी नहीं है, बल्कि लोग डर के कारण जरूरत से ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। यही वजह है कि पेट्रोल-डीजल और गैस की बिक्री अचानक बढ़ गई है।

कलेक्ट्रेट बैठक में दी जानकारी

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में बताया कि पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई में कोई बाधा नहीं है। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर भी मिल रहे हैं, लेकिन बढ़ती मांग के कारण दबाव बन रहा है।

डिमांड अचानक बढ़ने की वजह

कलेक्टर ने बताया कि जो लोग पिछले 6-9 महीनों से सिलेंडर नहीं ले रहे थे, वे भी अब बुकिंग करा रहे हैं। इसी कारण मांग बढ़कर 27 हजार सिलेंडर तक पहुंच गई है।

जिले में ईंधन की स्थिति क्या है

जिले में कुल 171 पेट्रोल पंप हैं। वर्तमान में 1209 किलोलीटर पेट्रोल और 1429 किलोलीटर डीजल का स्टॉक मौजूद है। रोजाना 250 किलोलीटर पेट्रोल और 260 किलोलीटर डीजल की खपत हो रही है।

5-7% बढ़ी पेट्रोल-डीजल की बिक्री

ऑयल कंपनियों के अनुसार सामान्य दिनों की तुलना में पेट्रोल-डीजल की बिक्री 5 से 7 प्रतिशत तक बढ़ गई है। लोगों द्वारा स्टॉक करने की आशंका भी जताई जा रही है।

गैस सिलेंडर की डिमांड दोगुनी

पहले जहां रोजाना 9 हजार सिलेंडर की मांग थी, अब यह बढ़कर 22 हजार तक पहुंच गई है। इससे सप्लाई पर दबाव साफ नजर आ रहा है।

कलेक्टर की अपील- पैनिक न हों

कलेक्टर ने लोगों से अपील की है कि घबराएं नहीं और जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें। अनावश्यक स्टोरेज से बचें, क्योंकि इससे कृत्रिम संकट पैदा हो सकता है।

अफवाहों से बन रहा दबाव

प्रशासन का कहना है कि कई जगहों पर अफवाहों के कारण भीड़ बढ़ रही है। लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल और गैस खरीद रहे हैं, जिससे अनावश्यक दबाव बन रहा है।

संयम और जिम्मेदारी जरूरी

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और संसाधनों का समझदारी से उपयोग करें। जहां संभव हो, वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करें ताकि सभी को समान रूप से सुविधा मिल सके।

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Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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Global Protest

Global Protest Network: फ्रांस से भारत तक प्रदर्शनों की चर्चा, 101 संगठनों पर रिपोर्ट

फ्रांस में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी मीडिया संस्थान Fox News Digital की एक रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक संगठनों के बीच संपर्कों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 13 देशों में फैले 101 संगठन प्रदर्शनों को आयोजित करने, उनके बीच तालमेल बनाने और उनके संदेशों को लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय हैं। रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों का भी जिक्र किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद भारत में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस और राहुल गांधी से अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ कथित संपर्कों को लेकर सवाल पूछे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक ध्यान भटकाने की कोशिश बताया है। हालांकि, रिपोर्ट में बताए गए संपर्कों और भारत में प्रदर्शनों को किसी विदेशी नेटवर्क द्वारा सीधे संचालित किए जाने के दावे के बीच अंतर समझना जरूरी है। Fox News Report: 101 संगठनों के Network में कौन-कौन शामिल? पत्रकार Asra Q. Nomani की रिपोर्ट का शीर्षक है, Global ‘Chaos Inc’ grows to 101 groups with plans for new rounds of demonstrations। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पहले 54 संगठनों की पहचान की गई थी, जिनकी संख्या बढ़कर 101 हो गई। ये संगठन 13 देशों में फैले बताए गए हैं। रिपोर्ट में छात्र और युवा समूहों, श्रमिक संगठनों, समाजवादी तथा कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़े समूहों और सामाजिक अभियानों का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि 33 संगठनों का नेतृत्व छात्र या युवा करते हैं। Fox News ने इस नेटवर्क को ‘Red-Green Alliance’ नाम दिया है। रिपोर्ट में ‘Red’ का इस्तेमाल वामपंथी, समाजवादी और कम्युनिस्ट समूहों के लिए, जबकि ‘Green’ का इस्तेमाल इस्लामी संगठनों के संदर्भ में किया गया है। यह रिपोर्ट में इस्तेमाल किया गया वर्गीकरण है। इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि सभी संगठन एक ही नेतृत्व के तहत काम करते हैं। जांच में मुख्य रूप से तीन तरह की गतिविधियों पर ध्यान दिया गया है—प्रदर्शन आयोजित करना, अलग-अलग आंदोलनों के बीच तालमेल बनाना और सोशल मीडिया व मीडिया कवरेज के जरिए उनके संदेशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना। India Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाले प्रदर्शनों का जिक्र Fox News की रिपोर्ट में भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों को भी शामिल किया गया है। ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के बीच हुए थे। रिपोर्ट में भारत के साथ फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का भी उल्लेख है। इसके जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन अलग-अलग देशों में होने वाले विरोध-प्रदर्शनों को एक साझा राजनीतिक विमर्श से जोड़ रहे हैं। यहां सवाल उठता है कि क्या ये संगठन केवल एक-दूसरे के आंदोलनों का समर्थन कर रहे हैं या उनके आयोजन और रणनीति में भी उनकी भूमिका है? इसका जवाब देने के लिए ठोस साक्ष्यों की जरूरत है। किसी प्रदर्शन के समर्थन में बयान देना, सोशल मीडिया पर उसका प्रचार करना और प्रदर्शनकारियों को निर्देश देकर आंदोलन चलाना अलग-अलग बातें हैं। भारत में हुए प्रदर्शनों को विदेशी संगठन द्वारा सीधे संचालित किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र प्रमाण आवश्यक होंगे। Progressive International का नाम क्यों आया? Fox News की रिपोर्ट में Progressive International का खास तौर पर उल्लेख किया गया है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसका घोषित उद्देश्य दुनिया भर की प्रगतिशील राजनीतिक शक्तियों और सामाजिक आंदोलनों के बीच सहयोग बढ़ाना है। रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने 16 अक्टूबर 2026 की अपनी ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे आंदोलनों का एक साथ जिक्र किया था। इसमें इन आंदोलनों के बीच संपर्क बढ़ाने और उन्हें संगठित राजनीतिक शक्ति में बदलने से जुड़े विचार भी सामने आए। Fox News ने इसे अलग-अलग देशों में चल रहे प्रदर्शनों के बीच संभावित राजनीतिक समन्वय के उदाहरण के रूप में पेश किया है। हालांकि, किसी आंदोलन को समर्थन देना और उसके आयोजन को नियंत्रित करना एक जैसी गतिविधियां नहीं हैं। इसलिए Progressive International का नाम रिपोर्ट में आने को भारत में प्रदर्शनों के प्रत्यक्ष संचालन का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। Rahul Gandhi-Sonia Gandhi की मुलाकात पर BJP ने उठाए सवाल Progressive International को लेकर चर्चा के बीच कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी की संगठन के प्रतिनिधिमंडल से हुई मुलाकात भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। अप्रैल 2025 में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ आवास पर Progressive International के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उस समय विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई थी। अब भाजपा इसी मुलाकात का हवाला देकर कांग्रेस से सवाल पूछ रही है कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत में किन मुद्दों पर चर्चा हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के साथ कोई समन्वय किया गया था। हालांकि, मुलाकात का होना और उसके आधार पर प्रदर्शनों के आयोजन में कथित भूमिका का आरोप लगाना दो अलग बातें हैं। सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी से यह साबित नहीं होता कि बैठक में भारत में विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने या किसी सरकार को बदलने की योजना बनाई गई थी। BJP vs Congress: आरोप-प्रत्यारोप से गरमाई राजनीति Fox News की रिपोर्ट सामने आने के बाद भाजपा ने 22 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों और भारत के प्रदर्शनों के बीच कथित संबंधों को लेकर आरोप लगाए। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी Progressive International और अलग-अलग देशों के आंदोलनों के बीच साझा संदेशों का मुद्दा उठाया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से पूछा कि संगठन के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में क्या बातचीत हुई थी और क्या भारत में हुए प्रदर्शनों के दौरान किसी तरह का समन्वय किया गया था। कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि भाजपा कथित वोट चोरी से जुड़े सवालों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। इस विवाद में भाजपा...
Jantar Mantar

Jantar Mantar Case: जमानत के बाद भी CJP नेताओं की मुश्किलें बरकरार, फिर बुलाएगी पुलिस

Jantar Mantar पर प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस एक बार फिर पूछताछ के लिए बुला सकती है। दोनों नेता पिछले नोटिस पर क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए थे और उन्होंने इसके लिए अतिरिक्त समय मांगा था। अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। यह मामला 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। CJP के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना चाहते थे। पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बनी। पिछले Notice पर पेश नहीं हुए CJP नेता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पूछताछ के लिए बुलाया था। उन्हें राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होना था। हालांकि, सौरव और आशुतोष तय समय पर नहीं पहुंचे और उन्होंने पुलिस से कुछ अतिरिक्त समय मांगा। अब पुलिस उन्हें दोबारा नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिए कह सकती है। जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस पहले ही मामले दर्ज कर चुकी है। जांच एजेंसी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और लगाए गए आरोपों की पड़ताल कर रही है। Jantar Mantar Protest से कैसे शुरू हुआ विवाद? 13 अक्टूबर को CJP के नेताओं और समर्थकों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी। उनकी प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। पार्टी का आरोप था कि SIR प्रक्रिया के कारण मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की और कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग पार की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस घटना के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ भी कार्रवाई हुई। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर नियमों के उल्लंघन और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत को करना है। सात दिन बाद Jail से मिली थी राहत सौरव दास और आशुतोष रांका करीब सात दिन न्यायिक हिरासत में रहने के बाद 21 अक्टूबर को जेल से बाहर आए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। दोनों नेताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा, उन्हें शांति बनाए रखने और अदालत की शर्तों का पालन करने का आश्वासन देना पड़ा। दोनों ने यह भी भरोसा दिया था कि जंतर-मंतर को दोबारा अधिकृत प्रदर्शन स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। भविष्य में विरोध प्रदर्शन संवैधानिक दायरे में करने की बात भी कही गई थी। हालांकि, जेल से रिहाई का मतलब यह नहीं है कि मामले की जांच खत्म हो गई है। पुलिस अपनी जांच के लिए दोनों नेताओं को पूछताछ में शामिल होने के लिए बुला सकती है। दो FIR के बाद Crime Branch कर रही जांच जंतर-मंतर पर हुए घटनाक्रम को लेकर दिल्ली के कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो FIR दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें सरकारी आदेश की अवहेलना, कथित अनधिकृत प्रवेश और पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल बताए गए हैं। बाद में दोनों मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। अब जांच एजेंसी घटना से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। CJP के एक अन्य सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ऐसे में जांच का दायरा केवल दो नेताओं तक सीमित नहीं है। पुलिस आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर करेगी। अब आगे क्या होगा? फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि सौरव दास और आशुतोष रांका पुलिस के अगले नोटिस पर कब पेश होते हैं। पूछताछ के दौरान पुलिस प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश के आरोपों और दर्ज FIR से संबंधित सवाल पूछ सकती है। दूसरी ओर, CJP मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी मांगें उठा रही है। ऐसे में यह मामला राजनीतिक विरोध, प्रदर्शन की अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच चर्चा में बना हुआ है। अब सबकी नजर दिल्ली पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर है। फिलहाल, दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jio Platforms IPO

Jio Platforms IPO: तीसरे दिन 6 गुना पार Subscription, QIBs ने लगाई ताबड़तोड़ बोली

मुकेश अंबानी की कंपनी Jio Platforms के IPO को लेकर शेयर बाजार में काफी चर्चा है। इश्यू के तीसरे दिन निवेशकों ने जमकर बोली लगाई और सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 6 गुना के पार पहुंच गया। सबसे ज्यादा उत्साह बड़े संस्थागत निवेशकों (QIBs) में देखने को मिला, जिन्होंने अपनी कैटेगरी में 13 गुना से ज्यादा बोली लगाई। अब निवेशकों की नजर IPO के अलॉटमेंट और शेयर बाजार में इसकी लिस्टिंग पर है। Jio Platforms IPO को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर 2026 को खुला था। इसमें निवेश करने का आखिरी मौका 23 अक्टूबर को है। शुरुआती दो दिनों से ही इस इश्यू को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। तीसरे दिन सुबह 9:20 बजे तक IPO का सब्सक्रिप्शन 5.72 गुना पहुंच चुका था और कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें और तेजी देखने को मिली। IPO में इतनी मजबूत मांग ने इसे शेयर बाजार की प्रमुख चर्चाओं में शामिल कर दिया है। हालांकि, अंतिम सब्सक्रिप्शन आंकड़े और शुरुआती कारोबारी आंकड़ों में अंतर हो सकता है। QIBs ने 13 गुना से ज्यादा लगाई बोली इस IPO में सबसे ज्यादा दिलचस्पी Qualified Institutional Buyers यानी QIBs ने दिखाई। इस श्रेणी में बड़े संस्थागत निवेशक शामिल होते हैं, जैसे म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थान। दूसरे दिन के अंत तक QIB कैटेगरी 13.29 गुना सब्सक्राइब हो चुकी थी। वहीं, गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) की ओर से भी अच्छी मांग आई। रिटेल निवेशकों ने भी इश्यू में भागीदारी दिखाई। संस्थागत निवेशकों की मजबूत बोली से IPO को लेकर बाजार का उत्साह साफ नजर आता है। हालांकि, ज्यादा सब्सक्रिप्शन का मतलब यह नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर निश्चित रूप से मुनाफा होगा। भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल Jio Platforms का इश्यू Jio Platforms का करीब 30,213 करोड़ रुपये का सार्वजनिक निर्गम आकार के लिहाज से भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल है। इससे पहले Hyundai Motor India का करीब 27,859 करोड़ रुपये का IPO देश का सबसे बड़ा इश्यू था। Platforms का कारोबार टेलीकॉम और डिजिटल सेवाओं से जुड़ा है। कंपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंच रखती है। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और कंपनी की बाजार में मौजूदगी के कारण इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। Jio Platforms IPO का Price Band और जरूरी तारीखें निवेशकों के लिए IPO से जुड़ी जरूरी जानकारी यहां दी गई है: अलॉटमेंट और लिस्टिंग की तारीखों में बदलाव संभव है। निवेशकों को अंतिम जानकारी के लिए कंपनी और स्टॉक एक्सचेंज की आधिकारिक घोषणाएं देखनी चाहिए। GMP पर भी निवेशकों की नजर IPO में मजबूत सब्सक्रिप्शन के बीच ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी रहती है। GMP से बाजार में शेयर की संभावित लिस्टिंग कीमत को लेकर एक संकेत मिल सकता है, लेकिन यह आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। लिस्टिंग के दिन शेयर किस भाव पर खुलेगा, यह बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और कंपनी के मूल्यांकन समेत कई बातों पर निर्भर करेगा। इसलिए सिर्फ GMP देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्या Jio Platforms IPO में निवेश करना सही रहेगा? IPO को मिल रहा शानदार रिस्पॉन्स निश्चित रूप से चर्चा का विषय है, लेकिन निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार की संभावनाओं और शेयर के मूल्यांकन को समझना जरूरी है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि IPO में आवेदन करने से शेयर अलॉट होने की गारंटी नहीं होती। इसी तरह, शेयर अलॉट होने के बाद लिस्टिंग पर फायदा होगा या नुकसान, यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, Jio Platforms IPO में QIBs की मजबूत भागीदारी ने बाजार का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर सब्सक्रिप्शन के अंतिम आंकड़ों, शेयर अलॉटमेंट और संभावित लिस्टिंग पर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Alert: MP में बारिश, नैनीताल में Landslide से 2 की मौत; तमिलनाडु में भारी बारिश

Weather अक्टूबर का महीना खत्म होने को है, लेकिन देश के कई हिस्सों में मौसम अभी भी लोगों को परेशान कर रहा है। मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का दौर जारी रहने की खबर है। वहीं, उत्तराखंड के नैनीताल में भूस्खलन से दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी दी है। ऐसे में लोगों को मौसम का हाल जानकर ही घर से निकलने की सलाह दी जा रही है। MP Weather: मध्य प्रदेश में सात दिन से बारिश, पांच जिलों में अलर्ट की खबर मध्य प्रदेश में अक्टूबर के आखिरी दिनों में भी मौसम का मिजाज बदला हुआ है। कई इलाकों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की खबरें सामने आई हैं। इससे दिन और रात के तापमान में भी बदलाव महसूस किया जा सकता है। प्रदेश में बारिश की गतिविधियों को देखते हुए पांच जिलों में अलर्ट जारी होने की जानकारी दी गई है। हालांकि, 23 अक्टूबर के लिए इन पांच जिलों के नाम की ताजा आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए लोगों को अपने जिले का मौसम अपडेट भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की वेबसाइट या स्थानीय प्रशासन से जरूर देखना चाहिए। बारिश के कारण किसानों की चिंता भी बढ़ सकती है। जिन किसानों की फसल कटकर तैयार है, उन्हें मौसम का पूर्वानुमान देखकर उपज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करनी चाहिए। Nainital Landslide: नैनीताल में भूस्खलन, दो लोगों की मौत उत्तराखंड के नैनीताल में भूस्खलन की खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ी इलाकों में बारिश के बाद मिट्टी ढीली होने से चट्टानों और मलबे के खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सड़क पर चलने वाले लोगों के साथ आसपास रहने वाले परिवारों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक, नैनीताल में लैंडस्लाइड की घटना में दो लोगों की मौत हुई है। हालांकि, घटना की तारीख, सटीक स्थान और मृतकों की संख्या की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस खबर से जुड़े विवरणों को प्रकाशित करने से पहले स्थानीय प्रशासन की जानकारी से सत्यापित करना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में जाने वाले पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले सड़क की स्थिति जांच लें। बारिश के दौरान भूस्खलन संभावित रास्तों पर रुकने या जोखिम लेने से बचना चाहिए। Tamil Nadu Rain Alert: तमिलनाडु में भारी बारिश का अनुमान तमिलनाडु में उत्तर-पूर्वी मानसून के सक्रिय होने के साथ कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। नीलगिरि, कोयंबटूर, सेलम, नमक्कल, डिंडीगुल और मदुरै समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवाएं भी चल सकती हैं। लगातार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने, सड़कों पर यातायात प्रभावित होने और आम लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी होने की आशंका रहती है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। Kerala और Karnataka में भी बदलेगा मौसम दक्षिण भारत के दूसरे राज्यों में भी बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। केरल और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बारिश का पूर्वानुमान है। आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में भी गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम में इस तरह के बदलाव के बीच यात्रियों को अपनी यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेनी चाहिए। खासकर उन इलाकों में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, जहां भारी बारिश के कारण जलभराव या सड़क बंद होने की आशंका हो। बारिश और आंधी के दौरान इन बातों का रखें ध्यान MP से Tamil Nadu तक मौसम पर नजर रखना जरूरी मध्य प्रदेश में बारिश और आंधी की खबरों के बीच उत्तराखंड में भूस्खलन और तमिलनाडु में भारी बारिश की संभावना लोगों के लिए सतर्क रहने का संकेत है। मौसम की स्थिति जिले और इलाके के हिसाब से अलग हो सकती है, इसलिए किसी एक अपडेट को पूरे राज्य पर लागू नहीं मानना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Chinmaya Mission

Chinmaya Mission के 75 साल पूरे: PM Modi की मौजूदगी में भव्य Global Sammelan

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिन्मय मिशन (Chinmaya Mission) के 75 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ में हिस्सा लिया। इस आयोजन में स्वामी चिन्मयानंद की आध्यात्मिक विरासत को याद किया जा रहा है। कार्यक्रम से जुड़ी सबसे खास चर्चा प्रधानमंत्री मोदी की स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम से बातचीत को लेकर है। हालांकि, इस बातचीत के पूरे विवरण की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इसे विस्तार से बताया जा सकता है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक चल रहे इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश से हजारों लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, वेदांत और भगवद्गीता के संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। Chinmaya Mission के 75 साल, दुनिया भर में 350 से ज्यादा केंद्र चिन्मय मिशन की स्थापना वर्ष 1951 में स्वामी चिन्मयानंद ने की थी। उन्होंने भगवद्गीता और वेदांत के ज्ञान को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। आज मिशन का नेटवर्क भारत के साथ-साथ कई दूसरे देशों में भी फैला हुआ है। मिशन की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दुनिया भर में इसके 350 से अधिक केंद्र हैं। इन केंद्रों पर आध्यात्मिक प्रवचन, गीता अध्ययन, ध्यान और भारतीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 75 साल का यह सफर केवल एक धार्मिक संगठन के विस्तार की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय दर्शन को नई पीढ़ी से जोड़ने के लंबे प्रयास का भी हिस्सा है। Bharat Mandapam में Global Sammelan का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा। आयोजन से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, इसमें 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की उम्मीद है। सम्मेलन में चिन्मय मिशन की यात्रा, स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित कार्यक्रम रखे गए हैं। देश-विदेश से आए प्रतिभागियों को आध्यात्मिक विचारों के आदान-प्रदान का अवसर भी मिल रहा है। इस आयोजन के जरिए मिशन अपने 75 वर्षों के काम को याद करने के साथ आगे की योजनाओं पर भी ध्यान दे रहा है। Swami Chinmayananda ने भगवद्गीता को आम लोगों तक पहुंचाया स्वामी चिन्मयानंद का मानना था कि धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसे जीवन में अपनाना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने भगवद्गीता और वेदांत को सरल तरीके से समझाने पर जोर दिया। उनकी शिक्षाओं में आत्मचिंतन, जीवन में अनुशासन और अपने कर्तव्यों को समझने जैसे विषय महत्वपूर्ण रहे। चिन्मय मिशन आज भी अध्ययन सत्रों, प्रवचनों और युवाओं से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से इन विचारों को आगे बढ़ा रहा है। 40,000 किलोमीटर से ज्यादा की Chinmaya Amrit Yatra मिशन की 75वीं वर्षगांठ के कार्यक्रमों में ‘चिन्मय अमृत यात्रा’ भी शामिल रही। इस पहल के तहत चिन्मय युवा केंद्र के 15 युवा सदस्यों ने देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की और भगवद्गीता के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस यात्रा में 40,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की गई। इस दौरान युवाओं से संवाद और आध्यात्मिक गतिविधियों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का अवसर मिला। एक लाख से अधिक लोगों ने किया गीता पाठ चिन्मय मिशन की वर्षगांठ के दौरान भगवद्गीता को लेकर भी विशेष पहल की गई। ‘चिन्मय गीता समर्पण’ कार्यक्रम में दुनिया भर के एक लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से भगवद्गीता के 15वें अध्याय का सामूहिक पाठ किया। इसके अलावा, ‘गीता पंचामृत’ पहल के जरिए गीता के पांच प्रमुख श्लोकों के संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। सामूहिक हवन और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम भी वर्षगांठ समारोह का हिस्सा रहे। 75 साल की विरासत को आगे बढ़ाने पर जोर चिन्मय मिशन की 75वीं वर्षगांठ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और उसके वैश्विक प्रसार को समझने का अवसर है। मिशन के केंद्र शिक्षा, आध्यात्मिक अध्ययन, सांस्कृतिक गतिविधियों और समाज सेवा से जुड़े कार्यक्रम संचालित करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में आयोजित यह सम्मेलन स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं को याद करने और आने वाली पीढ़ियों तक उनके विचार पहुंचाने के प्रयासों को नई पहचान दे रहा है। निष्कर्ष: चिन्मय मिशन के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित यह वैश्विक सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा, भगवद्गीता और स्वामी चिन्मयानंद की विरासत पर केंद्रित है। दुनिया भर में 350 से अधिक केंद्रों के जरिए मिशन आज भी आध्यात्मिक शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता से जुड़े कार्य कर रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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