छत्तीसगढ़ में जल्द ही स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति हो सकती है। इस पद के लिए फिलहाल दो बड़े नाम सामने हैं—अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता। इनमें अरुणदेव गौतम का पलड़ा फिलहाल भारी माना जा रहा है।
UPSC और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद बढ़ी तेजी
दरअसल, संघ लोक सेवा आयोग ने राज्य सरकार से पूछा था कि अब तक स्थायी DGP की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार किसी भी राज्य में ‘प्रभारी’ DGP नहीं होना चाहिए।
समय-सीमा पूरी होने के बाद अब सरकार पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बढ़ गया है।
दो नामों का पैनल भेजा गया
13 मई 2025 को UPSC ने राज्य सरकार को दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। आमतौर पर तीन नाम भेजे जाते हैं, लेकिन इस बार विकल्प कम होने के कारण सिर्फ दो नाम शामिल किए गए।
जनवरी 2025 से प्रभारी DGP हैं गौतम
पूर्व DGP अशोक जुनेजा के रिटायर होने के बाद जनवरी 2025 में अरुणदेव गौतम को प्रभारी DGP बनाया गया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक स्थायी नियुक्ति जरूरी है।
अरुणदेव गौतम का अनुभव मजबूत
अरुणदेव गौतम 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उनका लंबा व अनुभव से भरा करियर रहा है। वे कई जिलों में एसपी रह चुके हैं और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
राजनांदगांव और बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी पोस्टिंग रही है, जहां उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया।
DGP नियुक्ति के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियम
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, DGP की नियुक्ति UPSC द्वारा भेजे गए वरिष्ठ अधिकारियों के पैनल में से की जाती है।
साथ ही, चयनित अधिकारी को कम से कम दो साल का कार्यकाल देना अनिवार्य होता है, चाहे उसकी रिटायरमेंट डेट कुछ भी हो।
जल्द हो सकता है बड़ा फैसला
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार जल्द ही नए स्थायी DGP के नाम का ऐलान कर सकती है।
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