India और Russia के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने मई 2026 में रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल और अन्य जीवाश्म ईंधनों का आयात किया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मई महीने में रूस से करीब 6.7 अरब डॉलर मूल्य के हाइड्रोकार्बन खरीदे। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कच्चे तेल की रही। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों में सस्ते रूसी तेल की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है।
अप्रैल के मुकाबले 21% बढ़ा आयात
यूरोपीय थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चे तेल का भारतीय आयात अप्रैल की तुलना में 21 फीसदी बढ़ा है। वहीं देश के कुल कच्चे तेल आयात में भी 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने मई में लगभग 4.8 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो रूस से आयात किए गए कुल हाइड्रोकार्बन का करीब 83 फीसदी हिस्सा था।
भारतीय रिफाइनरियों को मिल रहा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इससे ईंधन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है और घरेलू बाजार पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है।
वैश्विक दबाव के बीच मजबूत व्यापारिक रिश्ते
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है। भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर भारत पर
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए रूस से बढ़ती खरीद पर वैश्विक बाजार और पश्चिमी देशों की नजर बनी हुई है।
