मध्य पूर्व (Middle East) में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका ने फिलहाल ईरान (Iran) के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान को रोक दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने सेना को व्यापक सैन्य कार्रवाई की तैयारियां रोकने का निर्देश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने चेतावनी दी कि देश के पास Patriot Interceptor Missiles का भंडार तेजी से कम हो रहा है।
रक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि इस समय बड़े पैमाने पर हमला किया जाता है तो अमेरिका की अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में ट्रम्प प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई के बजाय फिलहाल रणनीतिक संयम अपनाने का फैसला किया है।
क्या था अमेरिका का प्लान?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस और पेंटागन ईरान के कुछ अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर बड़े हमले की योजना पर काम कर रहे थे। माना जा रहा था कि यह अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई हो सकती थी।
हालांकि, अंतिम समीक्षा के दौरान रक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को बताया कि हाल के संघर्षों में बड़ी संख्या में Patriot मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा चुका है। ऐसे में नए सैन्य अभियान से अमेरिकी रक्षा क्षमता पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसके बाद हमले की योजना फिलहाल रोक दी गई।
Patriot Missile की कमी क्यों बनी चिंता?
Patriot एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका की सबसे भरोसेमंद रक्षा प्रणालियों में से एक है। इसका उपयोग बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए किया जाता है।
पिछले कुछ महीनों में मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और लगातार सैन्य अभियानों के कारण इन इंटरसेप्टर मिसाइलों की खपत काफी बढ़ गई है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नए मिसाइलों के उत्पादन में समय लगता है, इसलिए मौजूदा स्टॉक को सुरक्षित रखना भी अमेरिका की प्राथमिकता बन गया है।
हमला टला, लेकिन खतरा नहीं
अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। यदि भविष्य में हालात बिगड़ते हैं या अमेरिका और उसके सहयोगियों पर किसी तरह का बड़ा हमला होता है, तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है।
फिलहाल अमेरिका स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सैन्य तैयारियों के साथ-साथ कूटनीतिक विकल्पों पर भी काम कर रहा है।
Middle East में क्यों बढ़ रही है चिंता?
ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल के महीनों में क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों की घटनाओं ने सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। इसके चलते खाड़ी देशों, इजरायल और अन्य सहयोगी देशों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
क्या आगे बदल सकती है रणनीति?
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन का यह फैसला स्थायी नहीं है। यदि Patriot मिसाइलों का उत्पादन बढ़ता है या सुरक्षा हालात बदलते हैं, तो अमेरिका अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है।
फिलहाल अमेरिका का ध्यान अपनी रक्षा क्षमता बनाए रखने, सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित रखने पर है। आने वाले दिनों में ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय घटनाक्रम तय करेंगे कि दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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