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शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर ले जाते समय मरीज की मौत, बेटे ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप

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शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर किए गए 50 वर्षीय हरिराम प्रजापति की रास्ते में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद बेटे अरुण प्रजापति ने शव के पास बैठकर वीडियो बनाया और डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ तथा एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर किए जाने की बात कही है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पैरों में दर्द और मुंह खोलने में परेशानी

मामला खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव का है। अरुण के मुताबिक, दोपहर में उनके पिता हरिराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके पैरों में दर्द था और मुंह भी नहीं खुल पा रहा था।

परिजन उन्हें पहले खनियाधाना के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां कुछ घंटे उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।

बेटे का आरोप- डॉक्टर और स्टाफ ने ठीक से इलाज नहीं किया

अरुण का आरोप है कि रात में शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उनके पिता का उचित इलाज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मरीज के उपचार पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल में गेम खेल रहे थे।

अरुण के मुताबिक, जब उन्होंने पिता का इलाज करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ से कहा तो उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

एंबुलेंस के लिए 4:30 बजे फोन, 6 बजे पहुंची

अरुण ने एंबुलेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, सुबह करीब 4:30 बजे एंबुलेंस के लिए फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस करीब 6 बजे पहुंची

इसके बाद हरिराम को ग्वालियर ले जाने की तैयारी की गई। बेटे का कहना है कि इस दौरान समय निकलता गया और पिता की हालत लगातार बिगड़ती गई।

ड्राइवर से तेज चलाने को कहा, रास्ते में मौत

अरुण के मुताबिक, ग्वालियर जाते समय उन्होंने एंबुलेंस चालक से वाहन तेज चलाने के लिए कहा, लेकिन चालक ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने से इनकार कर दिया।

ग्वालियर पहुंचने से पहले ही हरिराम की हालत और बिगड़ गई और रास्ते में उनकी मौत हो गई। अरुण के अनुसार, सुबह करीब 7:30 बजे ग्वालियर पहुंचने से पहले पिता ने दम तोड़ दिया।

बेटे ने लगाए गंभीर आरोप

अरुण ने वीडियो में आरोप लगाया कि उनके पिता की मौत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और एंबुलेंस व्यवस्था की कथित लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, फिलहाल ये आरोप बेटे के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने क्या कहा?

मेडिकल कॉलेज अधीक्षक आशुतोष चौरसी ने बताया कि मरीज रात करीब 3 बजे रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा था। उस समय मेडिकल कॉलेज के सभी बेड फुल थे। डॉक्टरों ने मरीज को प्राथमिक उपचार दिया और इसके बाद उसे ग्वालियर रेफर कर दिया गया।

जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति

मामले में एक तरफ परिवार ने इलाज में लापरवाही और एंबुलेंस मिलने में देरी के आरोप लगाए हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने और बेड उपलब्ध नहीं होने के बाद ग्वालियर रेफर किए जाने की बात कही है।

अब मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज के अस्पताल पहुंचने का समय, दिए गए उपचार, रेफर करने का चिकित्सकीय कारण और एंबुलेंस कॉल व पहुंचने के समय की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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रिसर्च स्कॉलर्स के समर्थन में उपवास पर बैठे पप्पू यादव, बोले- मांगें नहीं मानीं तो बिहार बंद करेंगे

पटना। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव रविवार को रिसर्च स्कॉलर्स के आंदोलन के समर्थन में एक दिन के उपवास पर बैठे। वह पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर हाथ में भगत सिंह की तस्वीर लेकर उपवास कर रहे हैं। इस दौरान उनका एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह नीले गमछे से अपना गला घोंटते नजर आए। पप्पू यादव ने कहा कि अगर सरकार ने छात्रों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो उनके पास आंदोलन को और तेज करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने कहा, “अगर सरकार मांगें नहीं मानती है तो बिहार बंद करेंगे और अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठेंगे।” बोले- छात्रों की बात नहीं सुनी जा रही पप्पू यादव ने सरकार पर छात्रों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के बच्चों को ‘बौद्धिक नक्सली’ कह रहे हैं, जबकि बिहार में छात्रों की समस्याओं को सुना नहीं जा रहा है। उन्होंने कहा कि रिसर्च स्कॉलर्स की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए। 13 दिन से आमरण अनशन पर रिसर्च स्कॉलर पटना के गर्दनीबाग में ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले अभ्यर्थी पिछले 13 दिनों से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं। रिसर्च स्कॉलर्स की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापक बहाली में UGC Regulation 2018 के Table 3A को लागू करना शामिल है। इसके अलावा बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने और 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने समेत कई मांगें रखी गई हैं। सहायक प्राध्यापक भर्ती में Table 3A की मांग रिसर्च स्कॉलर्स का कहना है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती प्रक्रिया में UGC Regulation 2018 के Table 3A को लागू किया जाना चाहिए। साथ ही सहायक प्राध्यापक पद के अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करने की मांग भी की जा रही है। उनका कहना है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्तियां स्थायी और नियमित आधार पर होनी चाहिए, ताकि लंबे समय से खाली पड़े पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सके। पप्पू यादव पहले भी पहुंचे थे धरनास्थल पप्पू यादव इससे पहले शुक्रवार को भी गर्दनीबाग पहुंचे थे। उन्होंने रिसर्च स्कॉलर्स से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया था। रविवार को वह एक दिन के उपवास के जरिए आंदोलन में शामिल हुए। धरनास्थल पर पुलिस-प्रशासन अलर्ट सांसद के उपवास और आंदोलन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क है। गर्दनीबाग धरना स्थल के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

वाराणसी एयरपोर्ट पर लाइसेंसी पिस्टल से चली गोली, महिला समेत 2 कर्मचारी घायल

वाराणसी। वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह हथियार की जांच के दौरान एक यात्री की लाइसेंसी पिस्टल से अचानक गोली चल गई। हादसे में एक महिला समेत एयरपोर्ट के दो कर्मचारी घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। आजमगढ़ निवासी कमलेश राय अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की IX-1810 फ्लाइट से मुंबई जाने वाले थे। यात्री ने विमान में ले जाने वाले हथियार की जानकारी पहले ही एयरपोर्ट अधिकारियों को दे दी थी। हथियार की जांच के दौरान हुआ फायर एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, मानक प्रक्रिया के तहत पिस्टल की जांच की जा रही थी। इसी दौरान हथियार से एक राउंड फायर हो गया। गोली पहले फर्श से टकराई और उसके बाद उसके छर्रे पास में मौजूद कर्मचारियों को लगे। बिहार निवासी 32 वर्षीय सुमन की जांघ में गोली लगी, जबकि सिक्योरिटी स्कैनर कर्मचारी रोहित राज के हाथ में छर्रे लगे। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। यात्री को हिरासत में लेकर पूछताछ घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। यात्री कमलेश राय को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। डीसीपी गोमती नीतू कादयान के मुताबिक, यात्री की पिस्टल का ऑल इंडिया परमिट है। बोर्डिंग से पहले मानक प्रक्रिया के तहत हथियार की जांच की जा रही थी और इसी दौरान दुर्घटनावश फायर होने की बात सामने आई है। घायल कर्मचारी ने बताई पूरी घटना एयरपोर्ट कर्मचारी रोहित के अनुसार, वह सुमन के साथ हथियार की एक्स-रे जांच के लिए काउंटर पर मौजूद था। यात्री ने पिस्टल निकाली और उसमें गोली लोड थी। जांच के दौरान ट्रिगर दबने से फायर हो गया। रोहित ने कहा कि गोली सामने खड़ी सुमन के पैर में लगी, जबकि उसके हाथ में छर्रे लगे। हालांकि, ट्रिगर जानबूझकर दबाया गया या गलती से दब गया, इसकी जानकारी वह नहीं बता सकता। स्वतंत्रता दिवस के चलते हाई अलर्ट पर था एयरपोर्ट स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर वाराणसी एयरपोर्ट को 11 से 20 अगस्त तक हाई अलर्ट जोन घोषित किया गया था। ऐसे में एयरपोर्ट परिसर में फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। एडीसीपी गोमती जोन समेत पुलिस और इंटेलिजेंस की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। कमलेश मुंबई के पूर्व पार्षद रह चुके हैं पुलिस के अनुसार, आजमगढ़ के जीयनपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले कमलेश राय मुंबई में पूर्व पार्षद रह चुके हैं। उनका परिवार भी राजनीति से जुड़ा बताया गया है। कमलेश आजमगढ़ में एक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्रबंधक हैं। वह सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और धनंजय सिंह के साथ अपनी तस्वीरें भी साझा कर चुके हैं। 2010 में मुंबई एयरपोर्ट पर भी हुआ था ऐसा हादसा लाइसेंसी हथियार की जांच के दौरान फायर होने का ऐसा ही मामला सितंबर 2010 में मुंबई एयरपोर्ट पर सामने आया था। इंदौर जाने वाले एक यात्री की लाइसेंसी पिस्टल की जांच के दौरान गोली चल गई थी। गोली फर्श से टकराने के बाद टाइल का टुकड़ा महिला स्क्रीनिंग कर्मचारी को लगा था।

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित रामावतार सिंह और पुरस्कार विजेता अर्चना धुरंधर की सेवा को सलाम

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पुलिस विभाग के दो अधिकारियों की सेवा और उपलब्धियां खास चर्चा में हैं। एक ओर रामावतार सिंह हैं, जिन्हें विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है। उन्होंने नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP सुरक्षा, चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वहीं दूसरी ओर रायपुर शहर की एकमात्र महिला टीआई अर्चना धुरंधर हैं। महिलाओं और अवयस्क बच्चों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निराकरण और पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार मिल चुका है। नक्सल प्रभावित इलाकों में VIP मूवमेंट बड़ी चुनौती रामावतार सिंह ने अपने सेवाकाल में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी ड्यूटी की। उनका कहना है कि ऐसे इलाकों में VIP मूवमेंट सामान्य शहरों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण होता है। सुरक्षा के लिए पहले से विस्तृत प्लानिंग करनी पड़ती है। VIP के रूट, फोर्स की तैनाती, जवानों के ठहरने की व्यवस्था और पूरे सुरक्षा बंदोबस्त की मॉनिटरिंग तक कई स्तरों पर तैयारी की जाती थी। नक्सल गतिविधियों वाले क्षेत्रों में रूट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता था। उन्होंने बताया कि VIP ड्यूटी सिर्फ सड़क पर जवान तैनात करने तक सीमित नहीं होती। कार्यक्रम स्थल, आने-जाने वाले रास्तों और आसपास के इलाकों का आकलन कर फोर्स की जरूरत और उसकी तैनाती तय की जाती है। चुनाव और कानून-व्यवस्था में भी निभाई जिम्मेदारी रामावतार सिंह ने निर्वाचन ड्यूटी के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। चुनाव के समय संवेदनशील इलाकों और मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती होती है। उनके लंबे सेवाकाल में VIP बंदोबस्त, निर्वाचन ड्यूटी और कानून-व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। इन्हीं विशेष सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। सम्मानित अधिकारियों की सूची में उनका नाम सबसे ऊपर रहा, जिसे उन्होंने गर्व का पल बताया। महिलाओं और बच्चों के मामलों में भरोसा सबसे जरूरी अर्चना धुरंधर का पुलिसिंग का क्षेत्र अलग है। वह महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ काम करती हैं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात धैर्य से सुनना और उसे भरोसा दिलाना सबसे जरूरी होता है। कई महिलाएं और बच्चे डर या परेशानी की स्थिति में थाने पहुंचते हैं। ऐसे में पहले उन्हें सहज किया जाता है। इसके बाद पूरी बात सुनकर कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाती है। अर्चना के मुताबिक, जब शिकायतकर्ता को यह भरोसा होता है कि उसकी समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है, तब वह अपनी बात खुलकर बता पाता है। 4 साल की बच्ची का मामला आज भी याद अर्चना ने अपने सेवाकाल के एक मामले को याद करते हुए बताया कि 2011 में राजनांदगांव में महिला चौकी प्रभारी रहते हुए उनके पास 4 साल की बच्ची से रेप का मामला आया था। मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्ची को सुरक्षित बचाया गया और आरोपी को सजा दिलाई गई। अर्चना के मुताबिक, वह बच्ची आज भी उनके करीब है। वह इस मामले को अपने सेवाकाल की सबसे संतोषजनक उपलब्धियों में मानती हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि बच्ची को समय पर न्याय मिला और आरोपी को सजा हुई। 2008 से पुलिस सेवा में हैं अर्चना अर्चना धुरंधर वर्ष 2008 से सब इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में हैं। वह अपने पुरस्कारों का श्रेय वरिष्ठ अधिकारियों, सहकर्मियों, कर्मचारियों और काउंसलर्स की पूरी टीम को देती हैं। उनके अनुसार, राज्यपाल पुरस्कार और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार महिलाओं और अवयस्क बच्चों की शिकायतों के त्वरित निराकरण तथा पारिवारिक विवादों में सुलह कराने के कार्य के लिए दिए गए हैं। दो अलग जिम्मेदारियां, लक्ष्य एक- सेवा रामावतार सिंह और अर्चना धुरंधर की जिम्मेदारियां भले अलग रही हों, लेकिन दोनों के काम का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा और उन्हें न्याय दिलाना रहा है। रामावतार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा, VIP मूवमेंट और चुनाव जैसी चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं, जबकि अर्चना ने महिलाओं और बच्चों की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ सुना और उनके समाधान के लिए काम किया। एक अधिकारी को विशेष सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक मिला, तो दूसरी अधिकारी को महिलाओं और बच्चों के मामलों में उल्लेखनीय कार्य के लिए राज्यपाल और रानी सुबरन कुंवर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सीहोर में अब तक 26.75 इंच बारिश, पिछले साल से 0.74 इंच कम; अगले 48 घंटे भी बारिश के आसार

सीहोर। जिले में मानसूनी गतिविधियों के चलते रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। कहीं रिमझिम तो कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। भू-अभिलेख विभाग की ओर से 16 अगस्त को जारी दैनिक वर्षा आंकड़ों के अनुसार, सीहोर जिले में 1 जून से अब तक औसतन 26.75 इंच बारिश दर्ज की गई है। सीहोर में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश 1 जून से 16 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक सीहोर वर्षामापी केंद्र में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसके बाद रहटी में 29.58 इंच, भैरूंदा में 27.12 इंच और बुधनी में 26.37 इंच बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में आष्टा में 26.18 इंच, इछावर में 25.82 इंच, श्यामपुर में 24.75 इंच और जावर में सबसे कम 21.45 इंच बारिश हुई है। पिछले साल के मुकाबले 0.74 इंच कम बारिश पिछले साल इसी अवधि तक सीहोर जिले में औसतन 27.49 इंच बारिश हुई थी। इस साल यह आंकड़ा 26.75 इंच है। यानी पिछले साल की तुलना में अब तक करीब 0.74 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। जिले की सामान्य औसत वार्षिक बारिश 45.21 इंच है। ऐसे में सीहोर में अभी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा होने में काफी बारिश बाकी है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मानसूनी सिस्टम और सक्रिय ट्रफ लाइन के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में लगातार नमी पहुंच रही है। इसके प्रभाव से सीहोर और आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला बना हुआ है। अगले 48 घंटे भी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। जिले के कई हिस्सों में रिमझिम से लेकर हल्की और मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की भी संभावना है। ऐसे में मौसम का यह दौर अगले दो दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है।

गोपाल भार्गव बोले- भाजपा का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘कुत्तों की चिंता नहीं की जाती’

सागर। रहली विधानसभा से 9 बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता अपने आप को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री भी है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान मंच से संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “लोग तो ऐसे भौंकते रहते हैं। हाथी अपनी मस्त चाल चलता है और कुत्ते उसके पीछे लगे रहते हैं। कुत्तों की चिंता नहीं की जाती।” बोले- 2-4 चीटियां मिलकर गन्ना नहीं खींच सकतीं गोपाल भार्गव ने कहा कि ऐसी कोशिश करने वालों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता खुद को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र है और सभी लोग बराबर हैं। कोई सेवक के रूप में काम कर रहा है तो कोई जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। भार्गव ने इसी दौरान उदाहरण देते हुए कहा कि “2-4 चीटियां मिलकर गन्ने को नहीं खींच सकतीं।” निवास बोर्ड पर चिपकाया गया था ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ का पर्चा दरअसल, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति ने गढ़ाकोटा स्थित गोपाल भार्गव के निवास ‘गणनायक’ के बाहर सड़क पर लगे निवास बोर्ड पर ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ लिखा हुआ पंपलेट चिपका दिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। वीर दुर्गादास राठौर जयंती कार्यक्रम के दौरान जब एक व्यक्ति ने इसी घटना का जिक्र किया, तब गोपाल भार्गव ने मंच से यह बयान दिया। ‘सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं’ भार्गव के बयान का संदेश साफ था कि राजनीतिक पद या भूमिका को लेकर किसी बाहरी व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी में महत्वपूर्ण है और लोकतंत्र में सभी को बराबर अधिकार प्राप्त हैं।

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