खंडवा में 11 साल के बच्चे की पानी में डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान अजीम के रूप में हुई है, जो सोमवार दोपहर से लापता था। देर रात चीरा खदान के गड्ढे के पास उसके कपड़े और चप्पल मिलने के बाद परिजनों को उसके पानी में डूबने की आशंका हुई।
मंगलवार को स्थानीय लोगों ने खदान के गहरे गड्ढे में उसकी तलाश शुरू की। काफी मशक्कत के बाद अजीम का शव पानी के अंदर मिला। लोगों ने उसे बाहर निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद इलाके में मातम पसरा है। वहीं, रहवासियों में प्रशासन की व्यवस्था को लेकर नाराजगी है।
दोपहर से लापता था अजीम
परिजनों के मुताबिक, अजीम सोमवार दोपहर घर से निकला था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। काफी देर तक घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने आसपास के मोहल्लों, रास्तों और संभावित जगहों पर उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
देर रात चीरा खदान के गड्ढे के पास अजीम के कपड़े और चप्पल मिले। इससे परिजनों को आशंका हुई कि वह पानी में गिर गया होगा। पुलिस को भी घटना की सूचना दी गई।
परिजनों का आरोप है कि रात में तलाश करने के बजाय सुबह तलाश करने की बात कही गई। इसके बाद स्थानीय लोग खुद गड्ढे में उतरकर अजीम की तलाश में जुट गए।
गहरे पानी में लोगों ने खोजा शव
रात के समय अंधेरा और गड्ढे में ज्यादा पानी होने के कारण तलाश करना मुश्किल था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने पानी में उतरकर खोजबीन जारी रखी।
मंगलवार को काफी प्रयास के बाद अजीम का शव पानी के अंदर मिला। उसे बाहर निकालकर जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बारिश में तालाब जैसा हो जाता है गड्ढा
हादसे के बाद चीरा खदान के गड्ढे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय निवासी छोटे खान का आरोप है कि खदान के दोनों ओर अब कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं और बड़ी संख्या में लोग यहां रहते हैं। इसके बावजूद गहरे गड्ढे को सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।
रहवासियों के अनुसार, बारिश के दौरान गड्ढे में पानी भर जाता है और यह तालाब जैसा दिखाई देने लगता है। आसपास रहने वाले बच्चों के लिए यह लगातार खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना है कि गड्ढे के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग भी नहीं की गई है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
स्थानीय लोगों का दावा है कि चीरा खदान के इस गड्ढे में पहले भी डूबने की घटनाएं हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि हादसों के बावजूद गड्ढे को बंद कराने या सुरक्षित करने के लिए स्थायी कदम नहीं उठाए गए।
अजीम की मौत के बाद रहवासियों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कराने और गड्ढे को सुरक्षित करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे खुले और पानी से भरे गड्ढों की पहचान कर समय रहते बैरिकेडिंग और सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए, ताकि दोबारा किसी बच्चे की जान खतरे में न पड़े।


