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Brazil- US Trade War ब्राज़ील और अमेरिका में बढ़ा तनाव, लूला बोले Trump से बात नहीं करूंगा, Modi से करूंगा चर्चा”

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अमेरिका और ब्राज़ील के बीच कूटनीतिक व व्यापारिक विवाद गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में Brazil पर 50% Import Tariff लगा दिया है, जिससे बीफ़, कॉफ़ी और अन्य प्रमुख एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज़ को बड़ा झटका लगा है। यह फैसला ब्राज़ील के जैर बोल्सोनारो के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर लिया गया है। ट्रंप का आरोप है कि बोल्सोनारो पर केस “Political Witch Hunt” है और उन्होंने इसे खत्म करने की मांग की।

Brazil का कड़ा जवाब

राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने ट्रंप के कॉल करने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा,

“मैं Trump को कॉल नहीं करूंगा क्योंकि वो मुझसे बात नहीं करना चाहते।“
लूला ने साफ किया कि वह भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से बातचीत करेंगे। रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin से फिलहाल संपर्क न करने का भी जिक्र किया।

WTO में केस, लोकल इंडस्ट्री को मदद

Brazil सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की तैयारी कर ली है। साथ ही सरकार ने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए Export Financing, Credit Line और Subsidy Packages का ऐलान किया है। लूला ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का जवाब तुरंत प्रतिशोधी टैरिफ से नहीं बल्कि कानूनी रास्ते से दिया जाएगा।

Bolsonaro Case और Judiciary पर हमला

अमेरिका ने ब्राज़ील की सुप्रीम कोर्ट के जज Alexandre de Moraes पर Magnitsky Act Sanctions लगा दी हैं। लूला सरकार ने इसे “Brazilian Democracy पर सीधा हमला” बताया और कहा कि देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की हर हाल में रक्षा की जाएगी। वहीं, बोल्सोनारो इस समय 2022 के कथित Coup Attempt के आरोप में हाउस अरेस्ट में हैं।

Economy Impact: Limited असर

इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का ब्राज़ील की GDP पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा। चीन और भारत के साथ बढ़ते व्यापारिक रिश्तों की वजह से नुकसान सीमित रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में ब्राज़ील की इकोनॉमिक ग्रोथ करीब 2.3% रहने का अनुमान है।

BRICS देशों के साथ नजदीकी

लूला का यह बयान बताता है कि ब्राज़ील अब अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय BRICS Nations (India, China, Russia, South Africa) के साथ संबंध मजबूत करने पर फोकस कर रहा है। यह कदम ग्लोबल पॉलिटिक्स में Multipolar Diplomacy की ओर बढ़ने का संकेत देता है।

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Trump Tariff on India: भारत पर 100% टैरिफ का खतरा टला, रूस से Diesel Deal के बाद बड़ा फैसला

Trump ने भारत पर 100% तक टैरिफ (Tariff) लगाए जाने की आशंका को फिलहाल टाल दिया है। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता खोलने वाले कानून के अहम प्रावधानों को ट्रम्प ने रोक दिया है। 17 अक्टूबर 2026 को सामने आए इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को राहत मिली है, जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं। इस फैसले की खास बात यह है कि अमेरिका ने रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर समझौता करने के कुछ ही दिनों बाद यह कदम उठाया है। एक तरफ ट्रम्प प्रशासन रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति से जुड़ा कानून रोक रहा है, तो दूसरी तरफ ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इस घटनाक्रम ने अमेरिका की रूस नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Trump ने 100% Tariff वाले कानून पर क्यों लगाई रोक? अमेरिका में रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम से कानून लाया गया था। इसका उद्देश्य यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाना था। इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। भारत और चीन जैसे देश भी इसकी जद में आ सकते थे। हालांकि, कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर प्रतिबंधों और शुल्कों से छूट देने का अधिकार दिया गया था। ट्रम्प ने इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए 16 अक्टूबर को कार्यकारी आदेश जारी किया। इसके बाद 17 अक्टूबर को इस फैसले की जानकारी सामने आई। ट्रम्प ने अपने आदेश में कहा कि फिलहाल इन प्रावधानों को लागू न करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। यह रोक स्थायी नहीं है। भविष्य में अमेरिकी प्रशासन जरूरत के मुताबिक इन उपायों को फिर से लागू करने का फैसला ले सकता है। Russia Diesel Deal के बाद बदला अमेरिकी रुख ट्रम्प का यह फैसला रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर हुए समझौते के कुछ दिनों बाद आया है। 9 अक्टूबर को ट्रम्प ने कहा था कि रूस तत्काल 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल अमेरिका और वैश्विक बाजारों में भेजने पर सहमत हुआ है। इस समझौते का उद्देश्य बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद करना बताया गया। अमेरिका में डीजल की महंगाई का असर किसानों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों पर पड़ता है। हालांकि, रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाने के फैसले की अमेरिका में आलोचना भी हुई। कुछ सांसदों ने चिंता जताई कि रूसी ऊर्जा से जुड़े प्रतिबंधों में राहत देने से रूस को आर्थिक फायदा मिल सकता है, जबकि अमेरिका यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर दबाव बनाने की बात करता रहा है। यही वजह है कि रूस से डीजल खरीदने का समझौता और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ रोकने का फैसला अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। भारत को 100% Tariff से कितनी राहत मिली? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। रूस भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। ऐसे में रूसी तेल की खरीद के कारण भारत पर अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की आशंका बनी हुई थी। अगर अमेरिका भारत से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाता, तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते थे। इससे भारतीय निर्यातकों को प्रतिस्पर्धा में परेशानी होती और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर भी दबाव बढ़ सकता था। ट्रम्प के ताजा फैसले से रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत के खिलाफ इस कानून के तहत तत्काल टैरिफ लगाए जाने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत को अमेरिका के सभी टैरिफ से छूट मिल गई है। यह फैसला रूस से संबंधित कानून के खास प्रावधानों पर रोक लगाने से जुड़ा है। अमेरिका की दूसरी व्यापार नीतियां और भारत पर लागू अन्य शुल्क अलग विषय हैं। भारत ने अमेरिका के सामने क्या पक्ष रखा था? रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच पहले भी मतभेद सामने आए हैं। भारत का कहना रहा है कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले देश की जरूरतों, कीमतों और आपूर्ति की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। 17 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय अधिकारियों को उम्मीद थी कि अमेरिका नए कानून के तहत भारत पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा। भारत ने वॉशिंगटन के सामने अपनी चिंताएं भी रखी थीं। अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने भी इससे पहले कहा था कि ट्रम्प इस मामले पर जल्द फैसला लेंगे। अब अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश से भारत पर तत्काल अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका कम हुई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली चर्चा भी महत्वपूर्ण होगी। Trump के फैसले पर अमेरिका में क्यों उठे सवाल? ट्रम्प के फैसले का अमेरिका में कुछ रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए बनाया गया कानून लागू होने से पहले ही रोक देने से यूक्रेन को समर्थन देने की अमेरिकी नीति पर सवाल खड़े होते हैं। कुछ सांसदों ने रूस से डीजल खरीदने के समझौते पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि रूसी ऊर्जा की बिक्री से मिलने वाला पैसा रूस की युद्ध संबंधी गतिविधियों को मदद पहुंचा सकता है। दूसरी ओर, ट्रम्प प्रशासन का जोर अमेरिकी राष्ट्रीय हित, ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू ईंधन की कीमतों पर है। सरकार के सामने चुनौती यह है कि रूस पर दबाव बनाए रखने की नीति और अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। India-US Trade Relations पर क्या होगा असर? भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध दोनों देशों की...
मां कालरात्रि

Navratri 2026: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा, जानें कथा, महत्त्व और मंत्र

नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप देखने में उग्र है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी मानी जाती हैं। उन्हें भय, अज्ञान और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। मां कालरात्रि की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यताओं में मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का वह शक्तिशाली स्वरूप बताया गया है, जो दुष्ट शक्तियों का संहार करता है। उनका उग्र रूप यह संदेश देता है कि बुराई और अन्याय का सामना करने के लिए साहस जरूरी है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः। भोग: मां को गुड़ अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

रायपुर में 13 पुलिसकर्मियों का सम्मान, नवजात को बचाने से लेकर मोबाइल लुटेरे को पकड़ने तक की कार्रवाई

यातायात व्यवस्था संभालने के साथ अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले 13 पुलिसकर्मियों को पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने सम्मानित किया। इन पुलिसकर्मियों ने ड्यूटी के दौरान लावारिस नवजात को अस्पताल पहुंचाया, मोबाइल छीनकर भागने वाले आरोपी को पकड़ा और चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को भी गिरफ्तार कराया। सम्मानित पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि यातायात व्यवस्था संभालना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही ड्यूटी के दौरान अपराध या संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तत्काल कार्रवाई करना भी जरूरी है। बिना नंबर की बाइक रोकी, मोबाइल छीनने का आरोपी पकड़ा 14 अक्टूबर को बंजारी मंदिर के पास यातायात पुलिस ने बिना नंबर प्लेट की बाइक को रोका। इस दौरान धनीराम चंद्रा ने बाइक चालक पर मोबाइल और 700 रुपये छीनने का आरोप लगाया। तलाशी के दौरान पुलिस को मोबाइल मिला, जिसके बाद आरोपी करण पाल को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई में प्रधान आरक्षक विजय मार्कण्डेय समेत पांच पुलिसकर्मी शामिल थे। उर्स मेले में चाकू लहराने वाला ई-रिक्शा चालक पकड़ा 8 अक्टूबर को एवरग्रीन चौक पर उर्स मेले के दौरान ड्यूटी कर रहे आरक्षक ललित कुमार साहू ने चाकू लहराकर लोगों को डराने वाले ई-रिक्शा चालक को पीछा कर पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी को ई-रिक्शा समेत गोलबाजार पुलिस के हवाले कर दिया गया। नकली शराब की सूचना पर जांच, मिला चोरी का मोबाइल 14 अक्टूबर को पंडरी शराब दुकान के पास नकली शराब बेचने की सूचना मिलने पर यातायात पुलिस ने एक संदिग्ध को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास मोबाइल मिला। जांच में मोबाइल चोरी का होने की जानकारी सामने आई। इस कार्रवाई में निरीक्षक अमित पद्मशाली, प्रधान आरक्षक श्रीकांत मिश्रा और आरक्षक रमेंद्र वर्मा शामिल थे। नवजात को छोड़कर भाग रहे व्यक्ति को पकड़ा 13 अक्टूबर को राजेंद्र नगर अंडरब्रिज के पास मदर टेरेसा मिशनरीज के गेट पर एक नवजात को छोड़कर भाग रहे गोंदिया निवासी रफीक शेख को यातायात पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिसकर्मियों ने नवजात को नवकार अस्पताल पहुंचाया और आरोपी को टिकरापारा थाने के सुपुर्द कर दिया। इस कार्रवाई में निरीक्षक गोविंद यादव, प्रधान आरक्षक कुलेश्वर राजपूत और आरक्षक सुनील क्षत्रीय, गोपाल सिंह राजपूत व विजय सेन शामिल थे। पुलिस कमिश्नर ने बढ़ाया पुलिसकर्मियों का उत्साह इन सभी मामलों में तत्परता दिखाने वाले कुल 13 पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

SECL दीपका खदान प्रभावितों की मांगों पर बोर्ड लेगा फैसला, 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे का मामला अटका

छत्तीसगढ़ के हरदीबाजार में SECL की दीपका खदान विस्तार परियोजना से प्रभावित भू-विस्थापितों ने अधिग्रहित जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद बने मकानों के मुआवजे में कटौती का मुद्दा उठाया है। प्रभावितों ने मांग की है कि 500 रजिस्ट्री धारकों को भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा दिया जाए। इस मामले में अंतिम निर्णय SECL कोल कंपनी का बोर्ड लेगा। एरिया प्रबंधन ने बोर्ड के अधिकारियों से चर्चा कराने का आश्वासन दिया है। मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव आंदोलन की तैयारी चल रही थी। हालांकि, SECL प्रबंधन के साथ करीब चार घंटे चली त्रिपक्षीय वार्ता में सकारात्मक चर्चा के बाद भू-विस्थापितों ने फिलहाल आंदोलन टाल दिया है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने निर्णय के लिए समय मांगा है। विधायक की मौजूदगी में हुई त्रिपक्षीय वार्ता खदान प्रभावितों और SECL प्रबंधन के बीच पाली SDM रोहित सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इसकी अध्यक्षता कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने की। 16 अक्टूबर को प्रस्तावित CMD कार्यालय के घेराव की सूचना मिलने के बाद एरिया प्रबंधन ने वार्ता बुलाई थी। SECL दीपका सभागार में हुई बैठक में भू-विस्थापितों ने अपनी मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। इससे पहले 21 सितंबर को CMD मुख्यालय में भी मांगों पर चर्चा हुई थी, लेकिन प्रभावितों के मुताबिक उस समय कोई ठोस जवाब नहीं मिला। इसके बाद आंदोलन की चेतावनी दिए जाने पर प्रबंधन दो बार समय मांग चुका था। बैठक में ग्राम पंचायत हरदीबाजार के सरपंच लोकेश्वर कंवर ने भू-विस्थापितों के हित से जुड़े छह बिंदु रखे। सभी मुद्दों पर क्रमवार चर्चा की गई। उपसरपंच रेखा जायसवाल ने बहू के नाम पर नापी किए गए मकानों के लिए भी 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजा देने की मांग उठाई। प्रबंधन ने इस विषय पर चर्चा के बाद सकारात्मक निर्णय लेने का भरोसा दिलाया। 1800 मकानों को छह महीने में हटाने पर सहमति बैठक में हरदीबाजार के विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जानकारी के मुताबिक, प्रभावितों ने बसाहट नहीं लेने पर सहमति जताई है। छह महीने के भीतर नापी किए गए करीब 1800 मकानों को तोड़कर दूसरी जगह बसने वाले प्रभावितों को बसाहट के एवज में 15 लाख रुपये अतिरिक्त देने की बात सामने आई है। वहीं, SECL में नियमित रोजगार के लिए 52 डिसमिल जमीन का कटऑफ तय किया गया है। यानी इससे कम जमीन के मालिकाना हक वाले प्रभावितों को कंपनी में नियमित रोजगार नहीं मिलेगा। इसके अलावा, हरदीबाजार की 212 एकड़ जमीन का अधिग्रहण SECL नहीं कर रही है। कंपनी ने इसकी वजह संबंधित जमीन पर कोयला उपलब्ध नहीं होना बताई है। 2004 और 2010 में दो चरणों में हुआ था अधिग्रहण दीपका खदान के विस्तार के लिए हरदीबाजार गांव की जमीन का अधिग्रहण वर्ष 2004 और 2010 में दो चरणों में किया गया था। आरोप है कि अधिग्रहण के बाद भी तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री के जरिए जमीन की खरीदी-बिक्री होती रही और इसके बाद वहां मकान भी बनाए गए। SECL ने 26 अगस्त 2024 को अंतिम ड्रोन सर्वे कराया था। कंपनी के प्रावधानों के मुताबिक, इस सर्वे से पहले बने मकानों के लिए सोलेशियम सहित मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि ड्रोन सर्वे के बाद बने मकानों के लिए 40 प्रतिशत सिंगल मुआवजे का प्रावधान बताया गया है। इसी अंतर के कारण अधिग्रहण के बाद जमीन खरीदने वाले रजिस्ट्री धारक 100 प्रतिशत सोलेशियम के साथ मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रभावितों का कहना है कि 26 अगस्त 2024 के अंतिम ड्रोन सर्वे को मकानों के मुआवजे के लिए कटऑफ माना जाना चाहिए। अब SECL बोर्ड के फैसले पर टिकी नजर बैठक में SECL के जीएम शरद तिवारी, गेवरा जीएम अशोक कुमार और CMD मुख्यालय के लैंड एक्विजिशन एंड रिहैबिलिटेशन (L&R) विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा ग्राम पंचायत रेंकी के सरपंच तीजराम उर्रे, उपसरपंच शिव यादव, पूर्व जनपद सदस्य अनिल टंडन, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश जायसवाल और अन्य लोग शामिल हुए। फिलहाल 500 रजिस्ट्री धारकों के मुआवजे पर अंतिम फैसला SECL बोर्ड को लेना है। अन्य मांगों पर भी प्रबंधन ने समय मांगा है। ऐसे में भू-विस्थापितों को अब कंपनी के अगले निर्णय का इंतजार है।

WhatsApp का नया फीचर: बिना अकाउंट और ऐप के भी कर सकेंगे कॉल, जानें कैसे करेगा काम

WhatsApp ने यूजर्स के लिए ‘गेस्ट कॉलिंग’ फीचर पेश किया है। इसकी मदद से अब ऐसे लोगों को भी WhatsApp कॉल में शामिल किया जा सकेगा, जिनके पास न तो WhatsApp अकाउंट है और न ही उनके मोबाइल या कंप्यूटर में ऐप इंस्टॉल है। इसके लिए सिर्फ कॉल का लिंक शेयर करना होगा। गेस्ट यूजर वेब ब्राउजर के जरिए कॉल से जुड़ सकेंगे। इस फीचर से पर्सनल बातचीत के साथ ऑनलाइन मीटिंग करना भी आसान हो सकता है। आइए, सवाल-जवाब के जरिए जानते हैं WhatsApp के गेस्ट कॉलिंग फीचर से जुड़ी जरूरी बातें। सवाल 1. WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर क्या है? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर की मदद से आप ऐसे व्यक्ति को भी WhatsApp कॉल में शामिल कर सकते हैं, जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नहीं करता। इसके लिए सामने वाले व्यक्ति को न तो ऐप डाउनलोड करना होगा और न ही अकाउंट बनाना पड़ेगा। कॉल शुरू करने वाला यूजर लिंक शेयर करेगा और गेस्ट उस लिंक के जरिए कॉल में शामिल हो सकेगा। सवाल 2. बिना ऐप इंस्टॉल किए कॉल से कैसे जुड़ेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर Google Chrome या Safari जैसे वेब ब्राउजर में कॉल लिंक खोलकर जुड़ सकता है। इसके लिए डिवाइस में WhatsApp ऐप इंस्टॉल होना जरूरी नहीं होगा। हालांकि, कॉल से जुड़ने के लिए जरूरी ब्राउजर और डिवाइस सपोर्ट उपलब्ध होना चाहिए। सवाल 3. गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कौन-कौन से फीचर्स मिलेंगे? जवाब: गेस्ट यूजर्स को कॉल के दौरान कुछ प्रमुख सुविधाएं मिलेंगी। इनमें शामिल हैं: इन सुविधाओं से ऑनलाइन चर्चा और मीटिंग में हिस्सा लेना आसान हो सकता है। सवाल 4. क्या गेस्ट कॉलिंग फीचर सुरक्षित है? जवाब: WhatsApp के मुताबिक, गेस्ट कॉलिंग के जरिए होने वाली कॉल भी एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित रहेंगी। इसका उद्देश्य कॉल में शामिल लोगों के बीच बातचीत को निजी बनाए रखना है, ताकि कोई अनधिकृत तीसरा पक्ष उसे सुन या एक्सेस न कर सके। सवाल 5. क्या कोई भी व्यक्ति लिंक से सीधे कॉल में शामिल हो सकता है? जवाब: नहीं, गेस्ट यूजर को कॉल में शामिल करने के लिए होस्ट की मंजूरी जरूरी होगी। जब कोई व्यक्ति लिंक खोलकर कॉल से जुड़ने की कोशिश करेगा, तो उसे पहले वेटिंग रूम में रखा जाएगा। कॉल शुरू करने वाला होस्ट मंजूरी देने के बाद ही उसे कॉल में शामिल कर सकेगा। सवाल 6. गेस्ट यूजर्स पर क्या पाबंदियां होंगी? जवाब: कॉल की सुरक्षा और निजता बनाए रखने के लिए गेस्ट यूजर्स पर कुछ सीमाएं रहेंगी। वे: इसके अलावा, होस्ट किसी भी समय गेस्ट यूजर को कॉल से बाहर कर सकता है। सवाल 7. इस फीचर से यूजर्स को क्या फायदा होगा? जवाब: गेस्ट कॉलिंग फीचर से उन लोगों के साथ बातचीत करना आसान होगा, जो WhatsApp इस्तेमाल नहीं करते या अपने डिवाइस में नया ऐप इंस्टॉल नहीं करना चाहते। इसके प्रमुख फायदे हैं: सवाल 8. Google Calendar और Outlook के साथ क्या नया अपडेट आएगा? जवाब: दी गई जानकारी के मुताबिक, Meta ने Google Calendar और Outlook के साथ WhatsApp कॉल इंटीग्रेशन की योजना बताई है। इसके जरिए यूजर्स कैलेंडर इनवाइट के साथ WhatsApp कॉल का लिंक भी साझा कर सकेंगे। इस सुविधा के लिए WhatsApp प्लगइन इंस्टॉल करने और अकाउंट कनेक्ट करने की जरूरत हो सकती है। इसकी उपलब्धता और लॉन्च की तारीख से जुड़ी जानकारी आधिकारिक अपडेट के आधार पर देखनी चाहिए। क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षा तकनीक है, जिसमें बातचीत को इस तरह सुरक्षित किया जाता है कि उसे केवल अधिकृत प्रतिभागी ही समझ सकें। WhatsApp कॉल में इसका उद्देश्य कॉल करने वाले और कॉल रिसीव करने वाले लोगों की बातचीत को निजी रखना है। इससे सेवा देने वाली कंपनी समेत अन्य पक्षों के लिए बातचीत की सामग्री तक पहुंचना मुश्किल होता है। निष्कर्ष: WhatsApp का गेस्ट कॉलिंग फीचर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जिन्हें बिना अकाउंट बनाए किसी कॉल या ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होना है। हालांकि, फीचर की उपलब्धता और इससे जुड़ी शर्तों की पुष्टि WhatsApp के आधिकारिक अपडेट से करना बेहतर होगा।

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