अमेरिका और ब्राज़ील के बीच कूटनीतिक व व्यापारिक विवाद गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में Brazil पर 50% Import Tariff लगा दिया है, जिससे बीफ़, कॉफ़ी और अन्य प्रमुख एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज़ को बड़ा झटका लगा है। यह फैसला ब्राज़ील के जैर बोल्सोनारो के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को लेकर लिया गया है। ट्रंप का आरोप है कि बोल्सोनारो पर केस “Political Witch Hunt” है और उन्होंने इसे खत्म करने की मांग की।
Brazil का कड़ा जवाब
राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने ट्रंप के कॉल करने के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा,
“मैं Trump को कॉल नहीं करूंगा क्योंकि वो मुझसे बात नहीं करना चाहते।“
लूला ने साफ किया कि वह भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping से बातचीत करेंगे। रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin से फिलहाल संपर्क न करने का भी जिक्र किया।
WTO में केस, लोकल इंडस्ट्री को मदद
Brazil सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में अमेरिका के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की तैयारी कर ली है। साथ ही सरकार ने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए Export Financing, Credit Line और Subsidy Packages का ऐलान किया है। लूला ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ का जवाब तुरंत प्रतिशोधी टैरिफ से नहीं बल्कि कानूनी रास्ते से दिया जाएगा।
Bolsonaro Case और Judiciary पर हमला
अमेरिका ने ब्राज़ील की सुप्रीम कोर्ट के जज Alexandre de Moraes पर Magnitsky Act Sanctions लगा दी हैं। लूला सरकार ने इसे “Brazilian Democracy पर सीधा हमला” बताया और कहा कि देश की न्यायपालिका की स्वतंत्रता की हर हाल में रक्षा की जाएगी। वहीं, बोल्सोनारो इस समय 2022 के कथित Coup Attempt के आरोप में हाउस अरेस्ट में हैं।
Economy Impact: Limited असर
इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ का ब्राज़ील की GDP पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा। चीन और भारत के साथ बढ़ते व्यापारिक रिश्तों की वजह से नुकसान सीमित रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2025 में ब्राज़ील की इकोनॉमिक ग्रोथ करीब 2.3% रहने का अनुमान है।
BRICS देशों के साथ नजदीकी
लूला का यह बयान बताता है कि ब्राज़ील अब अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय BRICS Nations (India, China, Russia, South Africa) के साथ संबंध मजबूत करने पर फोकस कर रहा है। यह कदम ग्लोबल पॉलिटिक्स में Multipolar Diplomacy की ओर बढ़ने का संकेत देता है।
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