पितृ पक्ष (Pitru Paksha) हिन्दू धर्म में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय है। यह भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की द्वादशी से अमावस्या तक चलता है। आज पितृ पक्ष का तीसरा दिन (Day 3) है।
तीसरे दिन (Day 3) का महत्व
तीसरे दिन विशेष रूप से उन पितरों की याद की जाती है, जिनकी आत्मा शांति की स्थिति में नहीं है। पंडितों के अनुसार, इस दिन किया गया श्राद्ध और तर्पण, पितरों को मोक्ष प्रदान करता है और परिवार में सौभाग्य, सुख-शांति और समृद्धि लाता है।
तीसरे दिन के प्रमुख कर्म
- पितृ तर्पण (Pitra Tarpan): जल अर्पित कर पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना।
- दान और सेवा (Charity & Seva): गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन दान करना।
- विशेष भोजन (Shraddh Bhojan): तिल, चावल और अन्य पवित्र सामग्री से बनाए गए भोजन का पितरों के नाम पर अर्पण।
- पितृ मंत्रों का जाप (Chanting Mantras): “ॐ पितृभ्यो नमः” जैसे मंत्रों का जप करना।
शुभ समय और दिशा
- तर्पण का शुभ समय: सुबह 6:00 बजे से 6:29 बजे तक
- शुभ दिशा: पूर्व दिशा में मुख करके श्राद्ध कर्म करना लाभकारी माना जाता है।
पितृ पक्ष Day 3 का संदेश
पितृपक्ष द्वितीया तिथि न केवल परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह हमें अपने पूर्वजों के योगदान और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना सिखाती है। इस दिन की पूजा से पितरों की आत्मा की शांति होती है और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
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