भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में आयोजित अरावली समिट में वैश्विक व्यापार पर “Tariff Volatility” (शुल्क अस्थिरता) के गहरे असर पर आगाह किया। उन्होंने कहा कि यह अस्थिरता पारंपरिक व्यापार गणनाओं को बदल रही है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही है।
वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग पर असर
जयशंकर ने बताया कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग का एक बड़ा हिस्सा एक विशेष क्षेत्र में केंद्रित हो गया है, जिससे व्यापार संरचना में बदलाव आया है। उन्होंने चेताया कि यह बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है।
ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ बढ़ते रुझान
विदेश मंत्री ने कहा कि कई देशों में ग्लोबलाइजेशन (वैश्वीकरण) के खिलाफ रुझान बढ़ रहे हैं, और अमेरिका सहित कुछ देशों के नीतिगत बदलाव “Tariff Volatility” को और बढ़ा रहे हैं। इसका असर व्यापार के पूर्वानुमान पर पड़ रहा है और वैश्विक व्यापार में अस्थिरता पैदा हो रही है।
भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हित
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति “राष्ट्रीय हित” (National Interest) पर आधारित है। उनका कहना था कि भारत अपने रणनीतिक हितों के अनुसार कदम उठाएगा, चाहे वैश्विक मानदंड कुछ भी हों।
वैश्विक व्यापार में स्थिरता की आवश्यकता
उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक व्यापार में स्थिरता और पारदर्शिता के लिए देशों को सहयोग करना होगा, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था टिकाऊ विकास की ओर बढ़ सके।
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