मध्यप्रदेश के खंडवा जिला अस्पताल में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। इलाज के दौरान एक गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इस घटना के बाद गुस्साए परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा कर दिया। मृतका के पति ने दोषी डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है और पत्नी का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया है।
7 अक्टूबर को कराया था भर्ती, डॉक्टरों ने कहा था – अब सब ठीक है
मृतका आरती के पति अभिषेक ने बताया कि उन्होंने 7 अक्टूबर को अपनी पत्नी को कमर दर्द की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टरों ने 12 घंटे में 4 इंजेक्शन लगाए और 9 अक्टूबर को छुट्टी देते हुए कहा कि अब वह ठीक हैं।
फिर बिगड़ी तबीयत, बच्चे की मौत की खबर, ऑपरेशन में 5 घंटे की देरी
11 अक्टूबर को आरती की तबीयत फिर खराब हो गई, तो अभिषेक उसे दोबारा अस्पताल लेकर पहुंचे। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि गर्भ में बच्चे की मौत हो चुकी है। अभिषेक का आरोप है कि इसके बावजूद ऑपरेशन करने में 5 घंटे की देरी की गई, जिससे हालत और बिगड़ गई।
डॉक्टर की अमानवीय टिप्पणी से भड़के परिजन
अभिषेक ने यह भी आरोप लगाया कि इलाज के दौरान एक डॉक्टर ने स्टाफ से कहा —
“खून वाली पेशेंट को बाहर रखो, मुझे खून भरी लात मार रही है।”
इस अमानवीय टिप्पणी से परिजनों का गुस्सा और बढ़ गया, उन्होंने इसे डॉक्टरों की असंवेदनशीलता बताया।
इंदौर रेफर करने से रोका, ICU में तोड़ा दम
12 अक्टूबर की रात डॉक्टरों ने पहले आरती को इंदौर रेफर करने की बात कही, लेकिन कुछ देर बाद कहा कि मरीज ठीक है और इलाज यहीं होगा। अभिषेक का कहना है कि उन्होंने खून की व्यवस्था भी की, फिर भी पत्नी का इलाज सही तरीके से नहीं किया गया। 13 अक्टूबर की सुबह आरती की हालत अचानक बिगड़ गई और ICU में भर्ती करने के बाद सुबह 6 बजे उसकी मौत हो गई।
पति ने कलेक्टर से की शिकायत, FIR की मांग पर अड़े
अभिषेक ने इसे डॉक्टरों की लापरवाही बताया है। उन्होंने डॉक्टर लक्ष्मी डूडवे, नेहा पंवार और अन्य स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कलेक्टर को आवेदन सौंपा है। अभिषेक ने साफ कहा है कि जब तक दोषियों पर FIR दर्ज नहीं होती, तब तक वह पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे।
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