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Shashi Tharoor latest news, Congress vs Tharoor

थरूर ने की राष्ट्र की बात, कांग्रेस ने कहा – चलो भाई निकलो!

Shashi Tharoor ने एक बार फिर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है, जिस पर कांग्रेस नेता के मुरलीधरन ने उन्हें पार्टी से अलग मानने का बयान दिया। जानिए पूरा मामला विस्तार से।Shashi Tharoor Vs Congress: के मुरलीधरन बोले – अब वह हमारे साथ नहीं हैं देश हरपल डिजिटल डेस्क | राजनीतिकांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) एक बार फिर अपनी ही पार्टी की लाइन से अलग खड़े नजर आ रहे हैं। इस बार मामला इतना गंभीर हो गया कि पार्टी के ही वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन (K Muraleedharan) ने उन्हें सार्वजनिक रूप से पार्टी से ‘अलग’ मान लिया है।क्या बोले के मुरलीधरन? 20 जुलाई को मीडिया से बात करते हुए के मुरलीधरन ने साफ कहा कि थरूर अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं होंगे, खासकर केरल के तिरुवनंतपुरम में। “वो CWC में जरूर हैं, लेकिन अब उन्हें ‘हम में से एक’ नहीं माना जाता। उनके हालिया बयानों से पार्टी की एकता पर असर पड़ा है,” मुरलीधरन ने कहा। मुरलीधरन के अनुसार, जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी स्थिति नहीं बदलते, तब तक पार्टी उन्हें मंच नहीं देगी। क्या है विवाद की जड़? दरअसल, कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर ने कहा था: “राष्ट्र सर्वोपरि है, पार्टियां तो देश को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। जब कोई देशहित में केंद्र सरकार या सशस्त्र बलों का समर्थन करता है, तो पार्टी को वह विश्वासघात जैसा लगता है।” थरूर ने यह भी जोड़ा कि वे इस रुख पर कायम रहेंगे क्योंकि यह राष्ट्रहित में है। पहले भी टकराव हो चुका है यह कोई पहला मौका नहीं है जब थरूर की लाइन पार्टी से अलग पड़ी हो। 25 जून को इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर शशि थरूर ने एक अखबार में लेख लिखकर इंदिरा गांधी की निंदा की थी, जिसे लेकर भी मुरलीधरन हमलावर हो गए थे। उन्होंने थरूर से “क्लियर स्टैंड” लेने की बात कही थी—या तो कांग्रेस में रहें या एक नया रास्ता चुनें। पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी शशि थरूर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक शैली और बयानबाज़ी अक्सर पार्टी की असहजता का कारण बनती रही है।यह घटनाक्रम न केवल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह विपक्ष की आंतरिक दरारों को भी उजागर करता है। शशि थरूर बनाम कांग्रेस की यह लड़ाई सिर्फ विचारों की नहीं, बल्कि नेतृत्व और दिशा की भी है।क्या थरूर पार्टी के भीतर बने रहेंगे या नया मोर्चा खोलेंगे?यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि 2025 की राजनीतिक गर्मी और भी तेज़ होने वाली है।
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CoinDCX hack, crypto security breach India, $44 million crypto theft, बिटकॉइन प्राइस इंडिया, ट्रंप क्रिप्टो कानून, GENIUS Act, स्टेबलकॉइन कानून

CoinDCX में आपका खाता तो नहीं है? हैकर्स ने पलक झपकते उड़ा दिए 379 करोड़ रुपये!

India के टॉप क्रिप्टो प्लेटफॉर्म CoinDCX पर हुआ बड़ा सिक्योरिटी ब्रीच। कंपनी को हुआ $44 मिलियन का नुकसान, लेकिन यूज़र्स के फंड सुरक्षित। जानिए पूरी जानकारी।देश हरपल न्यूज़ डेस्क | 21 जुलाई 2025भारत के प्रमुख क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म CoinDCX को एक बड़े सिक्योरिटी ब्रीच का सामना करना पड़ा है, जिसमें कंपनी को करीब $44 मिलियन (लगभग 379 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। CoinDCX ने रविवार 20 जुलाई को इस बात की जानकारी देते हुए यूजर्स को आश्वस्त किया कि उनके फंड्स पूरी तरह से सुरक्षित हैं और निकासी (withdrawal) पर कोई असर नहीं पड़ा है। क्या हुआ CoinDCX के साथ? कंपनी के अनुसार, यह सिक्योरिटी ब्रीच इंटरनल ऑपरेशनल अकाउंट में हुआ था, न कि कस्टमर के वॉलेट्स में। CoinDCX की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस हैक को सीमित कर दिया और कहा कि, “हमारे यूज़र्स का एक भी पैसा प्रभावित नहीं हुआ है। जो अकाउंट प्रभावित हुआ, वह लिक्विडिटी मैनेजमेंट से जुड़ा इंटरनल अकाउंट था।” – सुमित गुप्ता, CEO, CoinDCX CoinDCX के बयान के मुताबिक़, प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग और विड्रॉल सुचारु रूप से जारी हैं और जिस वॉलेट में फंड ट्रांसफर किए गए हैं, उसपर निगरानी की जा रही है। Crypto Regulations और अमेरिका का असर इस घटना के ठीक दो दिन पहले ही अमेरिका में क्रिप्टो को लेकर बड़ा क़ानूनी कदम सामने आया। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जुलाई को स्टेबलकॉइन को लेकर एक ऐतिहासिक कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे GENIUS Act नाम दिया गया है। इस कानून से वैश्विक क्रिप्टो मार्केट में सकारात्मक असर पड़ा है। Binance के आंकड़ों के अनुसार: वहीं इथेरियम 2.79% की बढ़त के साथ ₹3,24,386 पर बना रहा। बिटकॉइन की कीमत 1,20,000 डॉलर को पार कर गई थी। 21 जुलाई को यह ₹1,02,31,343 पर ट्रेड कर रहा था। CoinDCX का मौजूदा यूज़र बेस और एसेट्स CoinDCX की वेबसाइट के मुताबिक़, प्लेटफॉर्म पर: क्या इससे यूज़र्स को डरना चाहिए? इस घटना के बाद CoinDCX ने यूज़र्स को भरोसा दिलाया है कि उनकी फंडिंग से जुड़ा कोई खतरा नहीं है और वे कभी भी अपने पैसे निकाल सकते हैं। यह ब्रीच किसी बाहरी हमले से ज्यादा एक इंटरनल गड़बड़ी लगती है, जिसपर कंपनी गंभीरता से काम कर रही है।
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Voter Fraud Alert

बिहार में 11 हजार ‘अज्ञात वोटर्स’ और 41 लाख संदिग्ध नामों का खुलासा

बिहार में मतदाता सूची के रिविजन के दौरान 11 हजार अज्ञात और 41 लाख संदिग्ध वोटर्स पाए गए। इसमें मृत, स्थानांतरित और फर्जी नाम शामिल हैं, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा गहराया है। ✍️ देश हरपल न्यूज़ डेस्क | पटना21 जुलाई 2025 चुनाव आयोग की ओर से बिहार में वोटर लिस्ट रिविजन (Special Summary Revision – SSR) के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाले हैं। आयोग ने खुलासा किया है कि जांच के दौरान 11 हजार ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है जो ‘अज्ञात’ हैं — यानी उनके पते पर कोई भी व्यक्ति नहीं मिला और न ही पड़ोसियों को उनके बारे में कोई जानकारी है। सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्ध मतदाताओं के नाम बिहार के बाहर रहने वाले अवैध प्रवासियों से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों ने इस बात की आशंका जताई है कि ये बांग्लादेशी या रोहिंग्या प्रवासी हो सकते हैं जो पड़ोसी राज्यों से बिहार में फर्जी पहचान के जरिए वोटर ID बनवाने में कामयाब हो गए। “जब BLO इन मतदाताओं द्वारा दर्ज किए गए पते पर पहुंचे तो न तो वे लोग वहां पाए गए और न ही उनके बारे में किसी को जानकारी थी,” – TOI को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। 41.6 लाख वोटर्स भी संदिग्ध चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लगभग 41.6 लाख वोटर ऐसे पाए गए जो अपने पते पर मौजूद नहीं थे, जिनमें शामिल हैं: सवाल यह है कि यदि ये सभी नाम अब तक मतदाता सूची में मौजूद थे, तो क्या इनकी आड़ में चुनावों में फर्जी वोटिंग हो रही थी? रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 24 जून 2025 तक इन मृत मतदाताओं के नाम बिहार की वोटर लिस्ट में बने हुए थे। यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। क्या भ्रष्टाचार है इसकी जड़ में? एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बहुत संभव है कि जांच के दौरान पारदर्शिता की कमी, और कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार ने इस स्थिति को जन्म दिया हो।” यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के फर्जी वोटिंग के मामले सामने आए हैं। इससे पहले भी कई राज्यों में इस प्रकार के फर्जी नामांकन और डुप्लीकेट वोटर कार्ड की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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drunk man eats snake

🐍 Snake Shock in Banda: नशे में युवक ने निगल लिया जिंदा सांप, मां ने शोर मचाकर बचाई जान

देश हरपल | बांदा (उत्तर प्रदेश) “शराब के नशे में क्या-क्या कर सकता है इंसान?” — इस सवाल का सबसे चौंकाने वाला जवाब मिला है उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से, जहां हरदौली गांव के रहने वाले अशोक नामक युवक ने नशे में घर में घुसे एक जिंदा सांप को ही निगल लिया। कैसे हुआ ये सब? जानकारी के मुताबिक, बबेरू कोतवाली क्षेत्र के हरदौली गांव में रहने वाला अशोक शराब के नशे में बुरी तरह धुत था। उसी वक्त घर के पास एक सांप आ गया। नशे में बेसुध अशोक ने उसे देखा, पकड़कर सीधे मुंह में डाल लिया और चबाना शुरू कर दिया। मां की सूझबूझ से बची जान अशोक की मां सिया दुलारी ने जब यह भयावह दृश्य देखा तो जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। घरवालों ने किसी तरह अशोक के मुंह से सांप को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक वो सांप को खा चुका था। इस डरावनी घटना के बाद तुरंत उसे बबेरू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। डॉक्टर भी रह गए दंग CHC के डॉक्टर्स के मुताबिक, यह मामला उनके पूरे करियर का सबसे अजीब और खतरनाक केस था। उन्होंने तुरंत इलाज शुरू किया और राहत की बात ये रही कि सांप ज़हरीला नहीं था, वरना मामला जानलेवा हो सकता था। क्या कहता है एक्सपर्ट? स्थानीय वन विभाग के अनुसार, अगर यह सांप ज़हरीला होता तो स्थिति घातक हो सकती थी। डॉ. महेश तिवारी, जो कि बांदा जिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी हैं, उन्होंने कहा, “शराब न केवल मानसिक स्थिति को विकृत करती है, बल्कि जानलेवा निर्णय भी करवा सकती है।” सबक क्या है? यह घटना बताती है कि शराब व्यक्ति को किस हद तक बेकाबू बना सकती है। एक सामान्य व्यक्ति कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाता, लेकिन नशा इंसान को मौत के मुंह तक ले जा सकता है। आपका क्या कहना है इस चौंकाने वाली घटना पर? कमेंट सेक्शन में बताइए और देश की ऐसी ही रोचक खबरों के लिए जुड़े रहिए देश हरपल से।
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Swachh Survekshan 2024, Bhopal clean city, Indore No.1, स्वच्छ भारत मिशन, भोपाल नगर निगम,

Clean City Glory: भोपाल बना देश का दूसरा सबसे Swachh City, इंदौर फिर नंबर वन

नई दिल्ली/भोपाल।Swachh Survekshan 2024 के नतीजों ने एक बार फिर मध्य प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया है। जहां इंदौर ने लगातार आठवीं बार देश का सबसे साफ शहर बनने का गौरव हासिल किया है, वहीं भोपाल ने इस बार तीन पायदान की छलांग लगाते हुए दूसरा स्थान पाया है।यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। इस पुरस्कार को लेने के लिए भोपाल की महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया कि “छह साल बाद भोपाल फिर से टॉप-2 में आया है, यह पूरे शहर के लिए गर्व का क्षण है।” शहर में जश्न का माहौल, ढोल-नगाड़े और लड्डू वितरण भोपाल की इस ऐतिहासिक सफलता को लेकर नगर निगम कार्यालय में उत्सव का माहौल देखने को मिला।सफाई मित्रों को फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया और मिठाइयां बांटी गईं।निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने ढोल बजाकर अपनी खुशी व्यक्त की। इस मौके पर उन्होंने कहा, स्वच्छता के लिए की गई अहम पहलें: इंदौर ने फिर दिखाया दम, सुपर लीग में मारी बाजी स्वच्छता में इंदौर का मुकाबला इस बार भी कोई नहीं कर पाया। आठवीं बार टॉप पर पहुंचकर इंदौर ने Swachh Survekshan 2024-25 की Super League में भी जीत हासिल की है।सुपर लीग में उन 23 शहरों को शामिल किया गया था जिन्होंने अब तक के किसी सर्वेक्षण में टॉप-3 में जगह बनाई थी। केंद्रीय आयोजन में हुए पुरस्कार वितरण इस आयोजन में देशभर से आए महापौर, निगम आयुक्त और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर मौजूद थे। स्वच्छ सर्वेक्षण की खास बातें: भोपाल की सफाई टीम को सलाम भोपाल की यह रैंकिंग साफ-सफाई के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और नागरिकों की जागरूकता का प्रमाण है। यह भी साबित करता है कि अगर जनता और प्रशासन मिलकर काम करें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। 📌 देश हरपल स्वच्छता के इस उत्सव में भोपाल और इंदौर के नागरिकों को बधाई देता है।
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Rahul Gandhi News, Lucknow Court,

लखनऊ कोर्ट से राहुल गांधी को मानहानि मामले में ज़मानत

लखनऊ से देश हरपल की रिपोर्ट: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आज लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ी राहत मिली। वर्ष 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना को लेकर दिए गए कथित बयान के कारण दर्ज मानहानि के एक मामले में उन्हें जमानत मिल गई है। राहुल गांधी आज दोपहर लखनऊ एयरपोर्ट पर चार्टर्ड फ्लाइट से पहुंचे और सीधे कोर्ट पहुंचे। उन्होंने अदालत में औपचारिक रूप से सरेंडर किया, जिसके बाद उनके वकील ने जमानत याचिका दाखिल की। कोर्ट ने यह याचिका स्वीकारते हुए 20-20 हज़ार रुपये की दो जमानतें भरने की शर्त पर उन्हें जमानत दे दी। क्या था मामला? यह मामला 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के समय का है, जब राहुल गांधी ने कथित रूप से ऐसा बयान दिया था जो सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया।इस बयान के खिलाफ मानहानि की याचिका एक स्थानीय याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया कि इससे सैनिकों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कोर्ट ने राहुल गांधी को इस बयान के सिलसिले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया था, जिसपर उन्होंने आज लखनऊ कोर्ट में हाज़िरी दी और औपचारिक सरेंडर किया कोर्ट की कार्यवाही: राहुल गांधी के वकील ने अदालत से ज़मानत की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए उन्हें राहत दे दी। कोर्ट ने कहा कि उन्हें 20-20 हज़ार रुपये की दो जमानतें देनी होंगी। एयरपोर्ट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का स्वागत लखनऊ एयरपोर्ट पर राहुल गांधी का स्वागत करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।यूपी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, और कई सांसद भी इस दौरान मौजूद रहे। राहुल गांधी कुछ घंटों में ही चार्टर्ड फ्लाइट से वापस दिल्ली रवाना हो गए।
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Shubhanshu Shukla ISS Mission,

Space में जाति की एंट्री! उदित राज बोले – “शुभांशु की जगह दलित को भेजना था

Axiom-4 मिशन से वापसी के बाद बवाल में घिरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला – कांग्रेस नेता ने दे दिया जातीय तड़का नई दिल्ली, देश हरपल ब्यूरो।भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ चुका है। Group Captain शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताकर धरती पर सफल वापसी की है। लेकिन जैसे ही वह वापस लौटे, कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने इस ऐतिहासिक क्षण को विवाद में खींच लिया। क्या कहा कांग्रेस नेता उदित राज ने? डॉ. उदित राज ने शुभांशु की वापसी पर तो उन्हें शुभकामनाएं दीं लेकिन उसके साथ-साथ एक ऐसा बयान भी दे डाला जिसने माहौल गर्मा दिया। उन्होंने कहा: “पहले राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे, तब SC-ST और OBC इतने पढ़े-लिखे नहीं थे। लेकिन अब तो किसी दलित या ओबीसी को भी शुभांशु शुक्ला की जगह भेजा जा सकता था। ऐसा नहीं कि NASA ने कोई परीक्षा लेकर उनका चयन किया हो।” इस बयान पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शुभांशु ने स्पेस में किए 60 वैज्ञानिक प्रयोग Axiom-4 मिशन पर 25 जून को शुभांशु तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ISS के लिए रवाना हुए थे। 18 दिनों के इस मिशन में उन्होंने 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें से 7 भारत के ISRO द्वारा प्रस्तावित थे। शुभांशु शुक्ला अपने साथ 263 किलोग्राम वैज्ञानिक उपकरण और डेटा लेकर लौटे हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। 🇮🇳 भारत के लिए क्यों खास है यह मिशन? शुभांशु शुक्ला भारत के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन के तहत ISS तक सफर किया। ISRO के आगामी Gaganyaan Mission (2027) से पहले यह मिशन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी और वैज्ञानिक प्रयोगशाला साबित हो सकता है। Axiom-4 मिशन पर भारत ने खर्च किए 550 करोड़ रुपये सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत सरकार ने इस मिशन पर करीब ₹550 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश से भारत को न केवल वैश्विक स्पेस कमर्शियल सेक्टर में पहचान मिली, बल्कि तकनीकी रूप से भी कई नई जानकारियां हासिल हुई हैं। NASA और ISRO की साझेदारी यह मिशन अमेरिकी कंपनी Axiom Space और NASA के सहयोग से संचालित हुआ था। भारत की तरफ से ISRO और भारतीय वायुसेना के सहयोग से शुभांशु को प्रशिक्षित किया गया।
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India US Trade Deal 2025

क्या अब भारत में नॉन-वेजिटेरियन गाय का दूध भी मिलेगा …??

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में गायों को दिए जाने वाले नॉन-वेज चारे को लेकर बड़ा विवाद। भारत ने ऐसे दूध के आयात को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। जानें क्या है पूरा मामला। By Desh Harpal |15 July 2025 भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) की राह में एक अद्भुत लेकिन संवेदनशील मुद्दा अड़चन बनकर उभरा है — और वो है: “क्या जिस गाय ने मांस या मछली वाला चारा खाया हो, उसका दूध भारत में पवित्र माना जा सकता है?” 🇮🇳 भारत की चिंता: दूध सिर्फ पोषण नहीं, एक श्रद्धा है! भारत सरकार ने साफ कहा है कि वह ऐसे किसी डेयरी उत्पाद (दूध, घी, मक्खन, पनीर आदि) का आयात नहीं करना चाहती जिसकी उत्पत्ति उन गायों से हो जिन्होंने मांस या मछली आधारित चारा खाया हो। 🔸 भारत की यह मांग सिर्फ व्यापार नहीं, संवेदनशील धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी है।🔸 गाय और उसका दूध हिन्दू समाज में पूजनीय माने जाते हैं। अगर ऐसी गाय को non-vegetarian feed दिया गया हो, तो उसका दूध “अशुद्ध” माना जाता है। 🇺🇸 अमेरिका की प्रैक्टिस: डेयरी गायों को दिया जाता है मांसयुक्त चारा अमेरिका में डेयरी फार्म्स आमतौर पर अपनी गायों को ज़्यादा प्रोटीन और एनर्जी के लिए मांस, रक्त, मछली या हड्डी आधारित आहार देते हैं। ➡️ अमेरिका के लिए यह सामान्य कृषि तकनीक है,➡️ लेकिन भारत के लिए यह अवांछनीय, अनैतिक और धर्मविरोधी है। क्या कहती है भारत की नीति? भारत अमेरिका से डेयरी आयात की इजाज़त तभी देगा जब: भारत का कहना है कि ये मांग World Trade Organization (WTO) के GATT आर्टिकल 20 के तहत पूरी तरह वैध है, क्योंकि यह “सार्वजनिक नैतिकता” (Public Morality) से जुड़ी है। क्या कहता है अमेरिका? अमेरिकी अधिकारी इसे “Non-Tariff Barrier” मानते हैं।उनका कहना है: “भारत की यह मांग वैज्ञानिक रूप से अनावश्यक है। दूध की पौष्टिकता इस बात से नहीं बदलती कि गाय ने क्या खाया।” अमेरिका WTO में भी इस मुद्दे को उठा चुका है और उसे व्यापार में भेदभाव के रूप में देखता है। कितना बड़ा है असर? SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार: 🔸 अमेरिका की दूध कंपनियां भारतीय बाज़ार में सस्ती दरों पर उत्पाद ला सकती हैं,🔸 जिससे भारत का पूरा डेयरी इकोसिस्टम डगमगा सकता है। आर्थिक असर: 1 लाख करोड़ का नुकसान टाल रहा है भारत? एसबीआई की एक रिपोर्ट बताती है कि अगर अमेरिका को भारत में खुलकर दूध और डेयरी उत्पाद बेचने की छूट मिलती है, तो इससे भारतीय किसानों को ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। अमेरिकी उत्पाद ज़्यादा सस्ते हो सकते हैं, जिससे भारत की देसी डेयरी इंडस्ट्री पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। क्यों बन गई यह “रेड लाइन”? भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया: “हम डेयरी को धार्मिक मान्यताओं और किसानों की आजीविका के नज़रिए से देखते हैं। यह हमारे लिए Red Line है।” RSS से जुड़े संगठन और कई धार्मिक संस्थाएँ भी सरकार पर इस बिंदु को लेकर दबाव बना रही हैं। निष्कर्ष: दूध अब सिर्फ दूध नहीं रहा भारत-अमेरिका ट्रेड डील में जहां टेक्नोलॉजी, टैरिफ, और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे हैं, वहीं “गाय का चारा” एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिसने समझौते की संभावनाओं को जटिल बना दिया है। यह विवाद बताता है कि व्यापार केवल पैसा और वस्तुओं का नहीं होता, वह भावनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्य व्यवस्था से भी टकराता है। Quick Facts: बिंदु विवरण समस्या अमेरिका की गायें नॉन-वेज चारा खाती हैं भारत की मांग डेयरी उत्पाद “शुद्ध शाकाहारी” स्रोत से हों अमेरिकी प्रतिक्रिया यह अनावश्यक बाधा है संभावित नुकसान भारतीय किसानों को ₹1 लाख करोड़ का घाटा धार्मिक पहलू हिन्दू धर्म में गाय और उसका दूध पवित्र माने जाते हैं जब बात “भारत-अमेरिका व्यापार डील” की होती है, तो यह सिर्फ टैक्स और टैरिफ की बातचीत नहीं होती। इसमें आस्था, पहचान, और स्थानीय अर्थव्यवस्था की गूंज भी शामिल होती है। गाय के चारे से शुरू हुआ यह विवाद, आज दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा नैतिक और सांस्कृतिक बहस बन चुका है। भारत ने साफ कर दिया है — “दूध वही, जो शुद्ध हो — और शुद्ध वही, जो शाकाहारी हो।”
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Tesla India launch

Tesla Launches in Mumbai: टेस्ला की Y मॉडल कार भारत में हुई लॉन्च, महज़ 22,220 देकर अपनी कार ले

Tesla ने भारत में अपने पहले शोरूम की शुरुआत मुंबई के BKC में की है। कंपनी की Y मॉडल इलेक्ट्रिक कार की कीमत ₹61 लाख से शुरू होती है। बुकिंग मात्र ₹22,220 में ऑनलाइन की जा सकती है। जानिए पूरी डिटेल। भारत में टेस्ला की एंट्री, मुंबई BKC में ओपन हुआ पहला शोरूम एलन मस्‍क (Elon Musk) की पॉपुलर इलेक्ट्रिक कार कंपनी Tesla ने अब आधिकारिक तौर पर भारत में कदम रख दिया है। मुंबई के BKC (Bandra Kurla Complex) में टेस्ला का पहला शोरूम खोला गया है, जो शहर के प्रीमियम ऑटो ज़ोन की शान बढ़ा रहा है। शोरूम लॉन्च के साथ ही कंपनी ने भारत के लिए Y Model की उपलब्धता और कीमतों का खुलासा भी कर दिया है। कितनी है टेस्ला Y मॉडल की कीमत? टेस्ला की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार, भारत में Y मॉडल के दो वेरिएंट्स उपलब्ध होंगे: Note: ये कीमतें वैरिएंट और कस्टमाइज़ेशन के अनुसार बदल सकती हैं। कैसे करें टेस्ला कार की बुकिंग? अब आप महज ₹22,220 देकर अपनी ड्रीम टेस्ला कार बुक कर सकते हैं। इसके लिए कोई एजेंट या फिजिकल विजिट की ज़रूरत नहीं — पूरा प्रोसेस ऑनलाइन है। बुकिंग प्रक्रिया: भारत में इलेक्ट्रिक कार मार्केट को मिलेगा बूस्ट टेस्ला की भारत में एंट्री को देश के EV सेगमेंट के लिए एक बड़ा मोमेंटम माना जा रहा है। पहले ही Tata Nexon EV, MG ZS EV और Hyundai Ioniq 5 जैसी गाड़ियां बाज़ार में मौजूद हैं, लेकिन Tesla की ग्लोबल ब्रांडिंग और क्वालिटी इसे खास बनाती है। एलन मस्क का फोकस अब भारत पर एलन मस्क खुद भारत को Tesla की अगली बड़ी मार्केट मानते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी निकट भविष्य में देश में Tesla Gigafactory भी स्थापित कर सकती है, जिससे लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो जाएगी और कीमतें भी कम हो सकती हैं। निष्कर्ष: टेस्ला का भारत में आगमन सिर्फ एक कार की लॉन्च नहीं है, बल्कि ये भविष्य की ओर एक बड़ा कदम है। टेक्नोलॉजी, लग्ज़री और सस्टेनेबिलिटी को मिलाने वाली Tesla Y Model अब भारतीय सड़कों पर जल्द नजर आएगी।
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Trapit Bansal

Meta रूमिंग पैंग को देगा 1670 करोड़ और भारत के त्रपित बंसल को 800 करोड़ का पैकेज

Meta Superintelligence Labs: Zuckerberg की नई चाल से OpenAI और Google में मची हलचल! देश हरपल डिजिटल डेस्क | टेक डेस्कसिलिकॉन वैली में इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में टैलेंट वॉर चरम पर है। Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग अब OpenAI, Google और Anthropic जैसी दिग्गज AI कंपनियों को सीधी चुनौती देने के लिए एक नई ‘सुपर चाल’ चल चुके हैं — Meta Superintelligence Labs (MSL) की शुरुआत के साथ। Meta अब तेजी से AI की सबसे तेज़ और होशियार ब्रेनपावर को अपने पाले में कर रहा है। खास बात है कि , यह जिन प्रतिभाओं को नियुक्त कर रहा है, उन्हें मिलने वाले पैकेज की रकम सुनकर कंपनियों के HR हिल गए हैं — 20 करोड़ डॉलर (1600 करोड़ रुपये तक) के पैकेज दिए जा रहे हैं! Top AI Talent की Meta में एंट्री! इस ‘AI Talent Hunt’ में कई चर्चित नाम शामिल हो चुके हैं: Huiwen Chang: GPT-4o की को-क्रिएटर और Google की मशहूर रिसर्चर, अब की टीम में शामिल हैं। Alexander Wang: पूर्व Scale AI के CEO को ने Superintelligence Labs का Chief AI Officer बनाया है। Nate Friedman: GitHub के पूर्व CEO और VC फर्म NFDG के को-फाउंडर अब AI Products और Applied Research संभालेंगे। Daniel Gross: Safe Superintelligence के पूर्व CEO, अब AI Product Division की कमान। Ruoming Pang: Apple की Foundation Models टीम के हेड रहे Pang को ₹1600 करोड़ के पैकेज पर नियुक्त किया। Trapit Bansal: OpenAI में ‘O-Series’ के डेवलपर, जिन्हें ₹800 करोड़ के ऑफर पर शामिल किया। Shuchao Bi: YouTube Shorts के को-फाउंडर और Google Ads में AI विशेषज्ञ रहे Bi ने भी जॉइन किया। पैकेज में क्या-क्या शामिल है? Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Meta द्वारा दी जा रही compensation में शामिल है: Base SalarySigning BonusMeta Stock (Equity) – जिसमें performance metrics और loyalty-based clauses होते हैं।Extended Contracts – कुछ नियुक्तियाँ चार साल से भी लंबे अनुबंधों पर आधारित हैं। इसमें वो लोग भी हैं जिन्होंने अपने मौजूदा स्टार्टअप्स में बड़ी equity छोड़ Meta जॉइन किया। उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए Signing Bonus को बढ़ाया गया है। Meta का लक्ष्य क्या है? Meta की Superintelligence Labs का लक्ष्य सिर्फ Language Models बनाना नहीं, बल्कि Artificial General Intelligence (AGI) और Superintelligence Systems का निर्माण करना है, जिससे वह OpenAI, Google DeepMind और Anthropic जैसी कंपनियों को सीधे टक्कर दे सके। मार्क ज़करबर्ग ने साफ़ किया है कि AGI पर नियंत्रण रखने के लिए टेक्नोलॉजी की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दिमागों को एक साथ लाना जरूरी है – और अब उसी मिशन पर है। क्या यह टैलेंट वॉर और तेज़ होगी? AI सेक्टर में यह प्रतिस्पर्धा अब केवल इनोवेशन की नहीं रही, बल्कि ‘किसके पास बेहतर ब्रेन है’ इस रेस की भी बन गई है। पहले Apple, फिर OpenAI और अब Meta — हर कंपनी अब AI के अगले अध्याय को लिखने में जुटी है। यह रणनीति न केवल एआई इंडस्ट्री को पुनर्परिभाषित कर रही है, बल्कि एक नया AI साम्राज्य भी बना रही है, जहाँ टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रिलियन-डॉलर वैल्यू का मिलन हो रहा है। भारत से Trapit Bansal और Shuchao Bi जैसे नामों की मौजूदगी भारतीयों के लिए भी गर्व का विषय है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PNB

PNB में करोड़ों की Fake Currency का खेल! Saharanpur में CCTV ने बढ़ाया शक, 3 Officers पर Action

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला सामने आने के बाद बैंकिंग सिस्टम में हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध नकली नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं, जबकि विस्तृत जांच में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। वहीं, RBI की जांच के बाद इस पूरे मामले में कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। कैसे सामने आया करोड़ों के नकली नोटों का मामला? मामले की शुरुआत उस समय हुई जब RBI को भेजी गई नकदी में करीब ₹4.36 लाख की कमी सामने आई। इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद बैंक में करेंसी चेस्ट का रिकॉर्ड खंगाला गया और विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच आगे बढ़ी तो बैंक के अंदर रखी नकदी में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। असली Cash की जगह Fake Notes रखने का शक प्रारंभिक जांच में आशंका है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली रकम कब निकाली गई और नकली नोट बैंक के Cash Vault तक कैसे पहुंचे। बैंक के Cash Movement Records, लॉगबुक, ऑडिट रिपोर्ट और कर्मचारियों की ड्यूटी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। CCTV फुटेज में दिखी संदिग्ध गतिविधि इस पूरे मामले में बैंक का CCTV Footage जांच का अहम हिस्सा बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में करेंसी चेस्ट के आसपास एक हाउसकीपिंग कर्मचारी की गतिविधियां दिखाई दी हैं। जांच अधिकारी अब CCTV फुटेज को बैंक के एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और कैश रिकॉर्ड से मिलाकर देख रहे हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि करेंसी चेस्ट तक किस-किस कर्मचारी की पहुंच थी। 3 PNB Officers Suspended मामले में बैंक के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें करेंसी चेस्ट और कैश से जुड़े अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। बैंक ने तीन अधिकारियों को Suspended कर दिया है। हालांकि, निलंबन का मतलब दोष साबित होना नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। SIT के हाथ में जांच, RBI भी कर रहा पड़ताल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT (Special Investigation Team) गठित की है। टीम बैंक के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और नकदी के लेन-देन की पूरी कड़ी को खंगाल रही है। दूसरी ओर, RBI से जुड़ी जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोटों का स्रोत क्या था और वे बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे। ₹17 करोड़ या ₹7.40 करोड़? रकम को लेकर क्यों है Confusion इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा नकली नोटों की रकम को लेकर है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में ₹17 करोड़ तक की रकम का उल्लेख किया गया, जबकि बाद की विस्तृत रिपोर्टों में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात कही गई है। चूंकि जांच और नोटों की गिनती का काम जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। बैंकिंग सिस्टम की Security पर उठे सवाल सहारनपुर के PNB मामले ने बैंक की करेंसी चेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट बैंक के सुरक्षित Cash Vault तक कैसे पहुंचे? नियमित जांच और ऑडिट के दौरान इनकी पहचान क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच एजेंसियां तलाश रही हैं। आने वाले दिनों में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल जांच जारी है और नकली नोटों की वास्तविक मात्रा, असली रकम के नुकसान और इस मामले में शामिल लोगों को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SCO Summit

SCO Summit में Pakistan की Edited Photo पर बवाल, PM Modi और Iran President गायब

SCO Summit से जुड़ी एक तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चल रही तल्खी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक X अकाउंट से शेयर की गई एक तस्वीर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तस्वीर के एडिटेड वर्जन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके साथ खड़े ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर सामने आने के बाद यूजर्स ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अकाउंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास बात यह है कि जिस कार्यक्रम की तस्वीर साझा की गई, उसमें भारत और ईरान दोनों के शीर्ष नेता मौजूद थे। Original Photo और Edited Version को लेकर सवाल SCO Summit की ग्रुप फोटो में संगठन के कई सदस्य देशों के नेता एक साथ नजर आए थे। इसी तस्वीर का एक अलग वर्जन पाकिस्तान PMO के X हैंडल से पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिखाई नहीं देते। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या तस्वीर को जानबूझकर एडिट किया गया था। हालांकि, तस्वीर को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि पोस्ट में मूल तस्वीर के बजाय बदला हुआ फ्रेम क्यों इस्तेमाल किया गया। PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात भी रही अहम SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय हालात पर बातचीत हुई। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक Summit के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रही। यही वजह है कि ग्रुप फोटो से दोनों नेताओं के गायब होने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। Pakistan PM की भी ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी SCO Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी मिले थे, तो ग्रुप फोटो के साझा किए गए वर्जन में उनका नजर नहीं आना आखिर क्यों हुआ। India-Pakistan Relations के बीच बढ़ी चर्चा भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आने वाली छोटी-सी तस्वीर भी राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आई कथित Edited Photo ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल तस्वीर पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने Original Group Photo और पाकिस्तान PMO द्वारा साझा तस्वीर की तुलना करते हुए सवाल पूछे। हालांकि, यह भी जरूरी है कि तस्वीर के पीछे की मंशा को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकाला जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तस्वीर में बदलाव क्यों किया गया था। SCO Summit ने फिर खींचा दुनिया का ध्यान SCO Summit में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। एक तरफ Summit में भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश सुर्खियों में रहा, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर ध्यान खींचा। अब पाकिस्तान PMO की कथित Edited Photo इस पूरे घटनाक्रम में एक नया विवाद बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोगों की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Jantar Mantar FIR Case: प्रदर्शनकारियों को SC से राहत, CJP ने Delhi March टाला

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च भी वापस ले लिया। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह अब इस मार्च का आयोजन नहीं करेगा। यह पूरा मामला जुलाई में हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को वापस लेना आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। बाद में इसी मुद्दे को लेकर CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदर्शनकारियों को राहत सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों की ओर से प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने को लेकर आवेदन किया गया था। सुनवाई के दौरान इन मामलों को खत्म करने का रास्ता निकाला गया। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन से संबंधित करीब 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाने की बात सामने आई। कुछ ऐसे लोगों के मामले अलग रखे गए हैं, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले होने की जानकारी दी गई थी। इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लंबे समय से FIR वापसी की मांग कर रहे संगठन के लिए इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। 5 सितंबर का Delhi March क्यों किया गया था? CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक होना था। संगठन का आरोप था कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग की थी। संगठन ने कहा था कि अगर वादे पूरे नहीं हुए तो वह फिर से सड़कों पर उतरेगा। पहले SC ने मार्च पर रोक लगाने से किया था इनकार इस मामले में घटनाक्रम तेजी से बदला। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन के दौरान अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन पर छोड़ी गई थी। लेकिन इसके अगले ही दिन मामला अलग दिशा में चला गया। 1 सितंबर की सुनवाई के दौरान केंद्र के आश्वासन और कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने खुद 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने की घोषणा कर दी। CJP ने क्यों बदला फैसला? सुप्रीम कोर्ट में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है। यानी जिस मुद्दे को लेकर दोबारा सड़क पर उतरने की तैयारी थी, उसमें कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है। CJI ने भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के सकारात्मक रवैये और बातचीत के महत्व पर जोर दिया। अदालत की टिप्पणी का संदेश साफ था कि खुले मन से बातचीत हो तो विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bhopal

Sealing Action पर Bhopal में बवाल: व्यापारियों और पुलिस में भिड़ंत, शंख-डमरू बजाकर प्रदर्शन

Bhopal में Sealing Action को लेकर व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। कार्रवाई के विरोध में जुटे कारोबारियों और पुलिस के बीच मंगलवार को धक्का-मुक्की हो गई। कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके दौरान कुछ कारोबारी गिर गए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। Sealing के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी बड़ी संख्या में एकजुट हुए। कारोबारियों का कहना है कि कार्रवाई से उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे प्रशासन और सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर व्यापारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी बीच कुछ कारोबारी बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ गए। पुलिस और व्यापारियों के बीच इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बैरिकेड्स के पास हुई धक्का-मुक्की प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब व्यापारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को हटाने की कोशिश की। आगे बढ़ने की कोशिश में कुछ कारोबारी गिर गए। पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, कुछ देर बाद स्थिति को संभाल लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद व्यापारियों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी और बढ़ती दिखाई दी। थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार से लगाई गुहार व्यापारियों के विरोध का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए विरोध जताया। व्यापारियों का कहना था कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और सीलिंग कार्रवाई को लेकर सरकार उनकी मांगों पर विचार करे। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध के जरिए सरकार और प्रशासन तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना है कि वे टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं। व्यापारियों की मांग पर अब नजर भोपाल में Sealing Action को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासन और कारोबारियों के बीच चल रहे विवाद को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और प्रशासन व्यापारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल प्रदर्शन के दौरान पुलिस और व्यापारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद मामला चर्चा में है। व्यापारियों का विरोध यह संकेत दे रहा है कि सीलिंग कार्रवाई का मुद्दा अभी शांत होने वाला नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Bus में नाबालिग से कथित गैंगरेप, 47 KM तक चलता रहा सफर; Rahul Gandhi ने पूछा- Checking क्यों नहीं?

दिल्ली-NCR में चलती स्लीपर बस के अंदर नाबालिग छात्रा के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही, लेकिन रास्ते में किसी चेकपोस्ट पर उसकी जांच नहीं हुई। मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है। घटना सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब बस इतने लंबे रूट से होकर गुजरी तो पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? बारिश और अंधेरे के बीच बस में बैठी छात्रा रिपोर्टों के मुताबिक, नाबालिग छात्रा बारिश और अंधेरे के बीच रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके में पहुंची थी। वह नोएडा में अपने रिश्तेदार के पास जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान एक स्लीपर बस वहां पहुंची। आरोप है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने छात्रा को मदद का भरोसा देकर बस में बैठाया। इसके बाद बस दिल्ली की तरफ बढ़ गई। पुलिस के अनुसार, परी चौक से कश्मीरी गेट तक का सफर करीब 47 किलोमीटर का था। इसी सफर के दौरान छात्रा के साथ कथित अपराध हुआ। एक दिन पहले भी आरोपियों पर गंभीर आरोप जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना से एक दिन पहले भी ड्राइवर और कंडक्टर पर छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बस और उससे जुड़े अन्य सबूतों को कब्जे में लिया है। CCTV फुटेज समेत दूसरे डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों की भी जांच की जा रही है। Driver और Conductor गिरफ्तार पुलिस ने मामले में बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बस किस रास्ते से गुजरी और रास्ते में किन-किन जगहों पर रुकी। बस की जांच भी की जा रही है ताकि घटना से जुड़े जरूरी सबूत जुटाए जा सकें। Bus में पर्दे, CCTV को लेकर भी सवाल स्लीपर बसों में यात्रियों की Privacy के लिए पर्दे लगाए जाते हैं, लेकिन इसी व्यवस्था ने सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्टों में बस में CCTV की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि लंबी दूरी तक चलने वाली स्लीपर बसों में यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त Monitoring क्यों नहीं होती? Rahul Gandhi ने Police Checking पर उठाए सवाल मामले पर राहुल गांधी ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक नाबालिग के साथ बस के अंदर इतनी गंभीर घटना हुई और वाहन करीब 47 किलोमीटर तक चलता रहा। उन्होंने सवाल किया कि रास्ते में मौजूद पुलिस व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने बसों की Checking और Monitoring को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने इस घटना का संदर्भ देते हुए Nirbhaya Case की याद भी दिलाई और कहा कि वर्षों बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वही सवाल सामने आना चिंताजनक है। 47 KM का सफर और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल इस घटना ने दिल्ली-NCR की Public Transport Safety पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आखिर सड़कों पर चलने वाली बसों की Monitoring किस तरह होती है? क्या संदिग्ध बसों की नियमित Checking होती है? क्या हर स्लीपर बस में CCTV और Emergency Support की पर्याप्त व्यवस्था है? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल रोजाना हजारों लोग करते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की तस्वीर साफ होगी। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि Public Transport में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिस्टम की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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