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India US Trade Deal, 1 August Tariff, US Delegation Visit India, Dairy Sector Employment, India Agriculture Tariff, Biden Trade Policy, BRICS Tariff Warning, Russia Oil Ban

Trade Tension: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अधर में, क्या 1 अगस्त से लागू होगा 26% टैरिफ?

देश हरपल ब्यूरो | नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025 India-US Trade Deal को लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, लेकिन वाशिंगटन में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। भारत का डेलिगेशन अमेरिका से लौट चुका है और अब अमेरिका के डेलिगेशन के अगस्त के दूसरे हफ्ते भारत आने की उम्मीद है। लेकिन बड़ा सवाल ये है – क्या 1 अगस्त से भारत को 26% टैरिफ देना पड़ेगा? अमेरिकी चेतावनी: “1 अगस्त से टैरिफ तय हैं” US Commerce Secretary हॉवर्ड लुटनिक ने 20 जुलाई को दिए गए एक इंटरव्यू में साफ कर दिया: “1 अगस्त से नई टैरिफ दरें लागू होंगी। उसके बाद भी बात हो सकती है, लेकिन टैरिफ देना ही होगा।” इस बयान के बाद भारत में एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर से जुड़े करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यही दो क्षेत्र अमेरिका के मुख्य दबाव बिंदु हैं। भारत का रुख: “डेयरी और मक्का पर नहीं होगा समझौता” सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिका की उन मांगों को मानने से इनकार कर दिया है जिनका सीधा असर देश के कृषि ढांचे और 8 करोड़ डेयरी वर्कर्स की आजीविका पर पड़ता। भारत न तो मक्का (corn) और न ही सोयाबीन पर टैरिफ में कटौती को लेकर राजी है। बातचीत में देरी: अमेरिका ने क्यों नहीं भेजा टैरिफ नोटिस? अब तक अमेरिका ने कम से कम 14 देशों को 25% से 40% टैरिफ को लेकर चिट्ठी भेज दी है। लेकिन भारत को ऐसी कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, जिससे ये उम्मीद बनी हुई है कि बातचीत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। ट्रंप की BRICS चेतावनी और रूस फैक्टर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि BRICS देश डॉलर का विकल्प तलाशते हैं, तो उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। साथ ही, रूसी वस्तुओं पर 100% टैरिफ और रूसी तेल खरीदने वालों पर सख्ती के संकेत भी दिए हैं। भारत इस समय रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, ऐसे में यह चेतावनी भारत की ऊर्जा नीति को प्रभावित कर सकती है। निष्कर्ष: क्या है अगला कदम? अब सबकी निगाहें अगस्त के दूसरे हफ्ते पर हैं, जब अमेरिकी ट्रेड डेलीगेशन भारत आएगा। अगर तब तक समाधान नहीं निकला, तो भारत को बड़ी आर्थिक चोट झेलनी पड़ सकती है, खासतौर पर एक्सपोर्ट और कृषि-आधारित उद्योगों में।
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Vice President Jagdeep Dhankhar resignation, जगदीप धनखड़ इस्तीफा,

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से सियासी गलियारों में हलचल

Breaking Resignation: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई की रात अचानक इस्तीफा देकर पूरे राजनीतिक माहौल को चौंका दिया। ये इस्तीफा तब आया जब उसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था। उन्होंने अपने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह फैसला किसी गहरी हलचल की ओर इशारा कर रहा है। विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को “चौंकाने वाला” बताया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: “इसमें कोई शक नहीं कि उपराष्ट्रपति धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा तरजीह देनी होगी। लेकिन उनके चौंकाने वाले इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है, वो उससे कहीं ज्यादा है। हालांकि, यह अटकलों का समय नहीं है… हम उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं और उनसे फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हैं।” “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देशहित में उन्हें मनाने की कोशिश करनी चाहिए। खासकर किसानों के हितों के लिए यह जरूरी है।” जयराम रमेश ने यह भी बताया कि 21 जुलाई की शाम 5 बजे तक वे अन्य सांसदों के साथ धनखड़ से मिले थे और शाम 7:30 बजे उन्होंने उपराष्ट्रपति से फोन पर भी बात की थी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, “उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है,उपराष्ट्रपति ने कल सदन की अध्यक्षता की,उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है,.ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे” कपिल सिब्बल की भावुक प्रतिक्रिया राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर व्यक्तिगत दुख जताया। उन्होंने कहा: “मैं व्यक्तिगत रूप से उनके इस्तीफे से खुश नहीं हूं क्योंकि मैं अब जब संसद जाऊंगा तो उनसे नहीं मिलूंगा। हमारे वर्षों से पारिवारिक संबंध रहे हैं।” “वे हमेशा सत्ता और विपक्ष के सामंजस्य की बात करते थे। हमारी विचारधाराएं अलग थीं लेकिन आपसी सम्मान बना रहा।” सिब्बल ने आगे बताया कि जब भी उन्हें सदन में बोलने के लिए समय की जरूरत होती थी, वे उपराष्ट्रपति के चैंबर में जाकर मिलते थे, और उन्हें कभी मना नहीं किया गया। अटकलों का दौर हालांकि जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य कारण बताए हैं, लेकिन सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में इस फैसले को लेकर कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। क्या यह कोई आंतरिक असहमति का संकेत है? या कोई रणनीतिक फैसला? इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है
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Vice President Resigns: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

BREAKING NEWS: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली:भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। धनखड़ ने राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल के दौरान 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट। झुंझुनू से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा एकदम साधारण पृष्ठभूमि में हुई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और LLB की पढ़ाई पूरी की। जयपुर में वकालत की शुरुआत की और जल्द ही राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ स्वास्थ्य बना वजह या कोई और संकेत? धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह भले ही स्वास्थ्य बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कहीं इसके पीछे कोई आंतरिक मतभेद या रणनीतिक बदलाव तो नहीं? आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता आ सकती है। क्या कहते हैं जानकार? वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और गरिमामय रहा, लेकिन बंगाल से जुड़े उनके बयान हमेशा चर्चा में रहे। निष्कर्ष: जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवेदनशील समय पर आया है जब देश 2026 के आम चुनाव की तैयारियों में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि उनकी जगह अगला उपराष्ट्रपति कौन बनता है, और क्या इससे सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।
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Shashi Tharoor latest news, Congress vs Tharoor

थरूर ने की राष्ट्र की बात, कांग्रेस ने कहा – चलो भाई निकलो!

Shashi Tharoor ने एक बार फिर पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है, जिस पर कांग्रेस नेता के मुरलीधरन ने उन्हें पार्टी से अलग मानने का बयान दिया। जानिए पूरा मामला विस्तार से।Shashi Tharoor Vs Congress: के मुरलीधरन बोले – अब वह हमारे साथ नहीं हैं देश हरपल डिजिटल डेस्क | राजनीतिकांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर (Shashi Tharoor) एक बार फिर अपनी ही पार्टी की लाइन से अलग खड़े नजर आ रहे हैं। इस बार मामला इतना गंभीर हो गया कि पार्टी के ही वरिष्ठ नेता के मुरलीधरन (K Muraleedharan) ने उन्हें सार्वजनिक रूप से पार्टी से ‘अलग’ मान लिया है।क्या बोले के मुरलीधरन? 20 जुलाई को मीडिया से बात करते हुए के मुरलीधरन ने साफ कहा कि थरूर अब कांग्रेस के कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं होंगे, खासकर केरल के तिरुवनंतपुरम में। “वो CWC में जरूर हैं, लेकिन अब उन्हें ‘हम में से एक’ नहीं माना जाता। उनके हालिया बयानों से पार्टी की एकता पर असर पड़ा है,” मुरलीधरन ने कहा। मुरलीधरन के अनुसार, जब तक थरूर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अपनी स्थिति नहीं बदलते, तब तक पार्टी उन्हें मंच नहीं देगी। क्या है विवाद की जड़? दरअसल, कोच्चि में एक कार्यक्रम के दौरान शशि थरूर ने कहा था: “राष्ट्र सर्वोपरि है, पार्टियां तो देश को बेहतर बनाने का माध्यम हैं। जब कोई देशहित में केंद्र सरकार या सशस्त्र बलों का समर्थन करता है, तो पार्टी को वह विश्वासघात जैसा लगता है।” थरूर ने यह भी जोड़ा कि वे इस रुख पर कायम रहेंगे क्योंकि यह राष्ट्रहित में है। पहले भी टकराव हो चुका है यह कोई पहला मौका नहीं है जब थरूर की लाइन पार्टी से अलग पड़ी हो। 25 जून को इमरजेंसी की 50वीं वर्षगांठ पर शशि थरूर ने एक अखबार में लेख लिखकर इंदिरा गांधी की निंदा की थी, जिसे लेकर भी मुरलीधरन हमलावर हो गए थे। उन्होंने थरूर से “क्लियर स्टैंड” लेने की बात कही थी—या तो कांग्रेस में रहें या एक नया रास्ता चुनें। पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी शशि थरूर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के सदस्य हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक शैली और बयानबाज़ी अक्सर पार्टी की असहजता का कारण बनती रही है।यह घटनाक्रम न केवल कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह विपक्ष की आंतरिक दरारों को भी उजागर करता है। शशि थरूर बनाम कांग्रेस की यह लड़ाई सिर्फ विचारों की नहीं, बल्कि नेतृत्व और दिशा की भी है।क्या थरूर पार्टी के भीतर बने रहेंगे या नया मोर्चा खोलेंगे?यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि 2025 की राजनीतिक गर्मी और भी तेज़ होने वाली है।
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CoinDCX hack, crypto security breach India, $44 million crypto theft, बिटकॉइन प्राइस इंडिया, ट्रंप क्रिप्टो कानून, GENIUS Act, स्टेबलकॉइन कानून

CoinDCX में आपका खाता तो नहीं है? हैकर्स ने पलक झपकते उड़ा दिए 379 करोड़ रुपये!

India के टॉप क्रिप्टो प्लेटफॉर्म CoinDCX पर हुआ बड़ा सिक्योरिटी ब्रीच। कंपनी को हुआ $44 मिलियन का नुकसान, लेकिन यूज़र्स के फंड सुरक्षित। जानिए पूरी जानकारी।देश हरपल न्यूज़ डेस्क | 21 जुलाई 2025भारत के प्रमुख क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म CoinDCX को एक बड़े सिक्योरिटी ब्रीच का सामना करना पड़ा है, जिसमें कंपनी को करीब $44 मिलियन (लगभग 379 करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ है। CoinDCX ने रविवार 20 जुलाई को इस बात की जानकारी देते हुए यूजर्स को आश्वस्त किया कि उनके फंड्स पूरी तरह से सुरक्षित हैं और निकासी (withdrawal) पर कोई असर नहीं पड़ा है। क्या हुआ CoinDCX के साथ? कंपनी के अनुसार, यह सिक्योरिटी ब्रीच इंटरनल ऑपरेशनल अकाउंट में हुआ था, न कि कस्टमर के वॉलेट्स में। CoinDCX की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस हैक को सीमित कर दिया और कहा कि, “हमारे यूज़र्स का एक भी पैसा प्रभावित नहीं हुआ है। जो अकाउंट प्रभावित हुआ, वह लिक्विडिटी मैनेजमेंट से जुड़ा इंटरनल अकाउंट था।” – सुमित गुप्ता, CEO, CoinDCX CoinDCX के बयान के मुताबिक़, प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग और विड्रॉल सुचारु रूप से जारी हैं और जिस वॉलेट में फंड ट्रांसफर किए गए हैं, उसपर निगरानी की जा रही है। Crypto Regulations और अमेरिका का असर इस घटना के ठीक दो दिन पहले ही अमेरिका में क्रिप्टो को लेकर बड़ा क़ानूनी कदम सामने आया। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 जुलाई को स्टेबलकॉइन को लेकर एक ऐतिहासिक कानून पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे GENIUS Act नाम दिया गया है। इस कानून से वैश्विक क्रिप्टो मार्केट में सकारात्मक असर पड़ा है। Binance के आंकड़ों के अनुसार: वहीं इथेरियम 2.79% की बढ़त के साथ ₹3,24,386 पर बना रहा। बिटकॉइन की कीमत 1,20,000 डॉलर को पार कर गई थी। 21 जुलाई को यह ₹1,02,31,343 पर ट्रेड कर रहा था। CoinDCX का मौजूदा यूज़र बेस और एसेट्स CoinDCX की वेबसाइट के मुताबिक़, प्लेटफॉर्म पर: क्या इससे यूज़र्स को डरना चाहिए? इस घटना के बाद CoinDCX ने यूज़र्स को भरोसा दिलाया है कि उनकी फंडिंग से जुड़ा कोई खतरा नहीं है और वे कभी भी अपने पैसे निकाल सकते हैं। यह ब्रीच किसी बाहरी हमले से ज्यादा एक इंटरनल गड़बड़ी लगती है, जिसपर कंपनी गंभीरता से काम कर रही है।
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Voter Fraud Alert

बिहार में 11 हजार ‘अज्ञात वोटर्स’ और 41 लाख संदिग्ध नामों का खुलासा

बिहार में मतदाता सूची के रिविजन के दौरान 11 हजार अज्ञात और 41 लाख संदिग्ध वोटर्स पाए गए। इसमें मृत, स्थानांतरित और फर्जी नाम शामिल हैं, जिससे फर्जी वोटिंग का खतरा गहराया है। ✍️ देश हरपल न्यूज़ डेस्क | पटना21 जुलाई 2025 चुनाव आयोग की ओर से बिहार में वोटर लिस्ट रिविजन (Special Summary Revision – SSR) के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे लोकतंत्र की नींव को हिलाने वाले हैं। आयोग ने खुलासा किया है कि जांच के दौरान 11 हजार ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है जो ‘अज्ञात’ हैं — यानी उनके पते पर कोई भी व्यक्ति नहीं मिला और न ही पड़ोसियों को उनके बारे में कोई जानकारी है। सूत्रों के मुताबिक, इन संदिग्ध मतदाताओं के नाम बिहार के बाहर रहने वाले अवैध प्रवासियों से जुड़े हो सकते हैं। अधिकारियों ने इस बात की आशंका जताई है कि ये बांग्लादेशी या रोहिंग्या प्रवासी हो सकते हैं जो पड़ोसी राज्यों से बिहार में फर्जी पहचान के जरिए वोटर ID बनवाने में कामयाब हो गए। “जब BLO इन मतदाताओं द्वारा दर्ज किए गए पते पर पहुंचे तो न तो वे लोग वहां पाए गए और न ही उनके बारे में किसी को जानकारी थी,” – TOI को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया। 41.6 लाख वोटर्स भी संदिग्ध चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में लगभग 41.6 लाख वोटर ऐसे पाए गए जो अपने पते पर मौजूद नहीं थे, जिनमें शामिल हैं: सवाल यह है कि यदि ये सभी नाम अब तक मतदाता सूची में मौजूद थे, तो क्या इनकी आड़ में चुनावों में फर्जी वोटिंग हो रही थी? रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 24 जून 2025 तक इन मृत मतदाताओं के नाम बिहार की वोटर लिस्ट में बने हुए थे। यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। क्या भ्रष्टाचार है इसकी जड़ में? एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “बहुत संभव है कि जांच के दौरान पारदर्शिता की कमी, और कहीं न कहीं स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार ने इस स्थिति को जन्म दिया हो।” यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के फर्जी वोटिंग के मामले सामने आए हैं। इससे पहले भी कई राज्यों में इस प्रकार के फर्जी नामांकन और डुप्लीकेट वोटर कार्ड की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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drunk man eats snake

🐍 Snake Shock in Banda: नशे में युवक ने निगल लिया जिंदा सांप, मां ने शोर मचाकर बचाई जान

देश हरपल | बांदा (उत्तर प्रदेश) “शराब के नशे में क्या-क्या कर सकता है इंसान?” — इस सवाल का सबसे चौंकाने वाला जवाब मिला है उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से, जहां हरदौली गांव के रहने वाले अशोक नामक युवक ने नशे में घर में घुसे एक जिंदा सांप को ही निगल लिया। कैसे हुआ ये सब? जानकारी के मुताबिक, बबेरू कोतवाली क्षेत्र के हरदौली गांव में रहने वाला अशोक शराब के नशे में बुरी तरह धुत था। उसी वक्त घर के पास एक सांप आ गया। नशे में बेसुध अशोक ने उसे देखा, पकड़कर सीधे मुंह में डाल लिया और चबाना शुरू कर दिया। मां की सूझबूझ से बची जान अशोक की मां सिया दुलारी ने जब यह भयावह दृश्य देखा तो जोर-जोर से चिल्लाने लगीं। घरवालों ने किसी तरह अशोक के मुंह से सांप को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक वो सांप को खा चुका था। इस डरावनी घटना के बाद तुरंत उसे बबेरू के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाया गया। डॉक्टर भी रह गए दंग CHC के डॉक्टर्स के मुताबिक, यह मामला उनके पूरे करियर का सबसे अजीब और खतरनाक केस था। उन्होंने तुरंत इलाज शुरू किया और राहत की बात ये रही कि सांप ज़हरीला नहीं था, वरना मामला जानलेवा हो सकता था। क्या कहता है एक्सपर्ट? स्थानीय वन विभाग के अनुसार, अगर यह सांप ज़हरीला होता तो स्थिति घातक हो सकती थी। डॉ. महेश तिवारी, जो कि बांदा जिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी हैं, उन्होंने कहा, “शराब न केवल मानसिक स्थिति को विकृत करती है, बल्कि जानलेवा निर्णय भी करवा सकती है।” सबक क्या है? यह घटना बताती है कि शराब व्यक्ति को किस हद तक बेकाबू बना सकती है। एक सामान्य व्यक्ति कभी भी ऐसा कदम नहीं उठाता, लेकिन नशा इंसान को मौत के मुंह तक ले जा सकता है। आपका क्या कहना है इस चौंकाने वाली घटना पर? कमेंट सेक्शन में बताइए और देश की ऐसी ही रोचक खबरों के लिए जुड़े रहिए देश हरपल से।
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Swachh Survekshan 2024, Bhopal clean city, Indore No.1, स्वच्छ भारत मिशन, भोपाल नगर निगम,

Clean City Glory: भोपाल बना देश का दूसरा सबसे Swachh City, इंदौर फिर नंबर वन

नई दिल्ली/भोपाल।Swachh Survekshan 2024 के नतीजों ने एक बार फिर मध्य प्रदेश को गौरवान्वित कर दिया है। जहां इंदौर ने लगातार आठवीं बार देश का सबसे साफ शहर बनने का गौरव हासिल किया है, वहीं भोपाल ने इस बार तीन पायदान की छलांग लगाते हुए दूसरा स्थान पाया है।यह सम्मान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। इस पुरस्कार को लेने के लिए भोपाल की महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण पहले ही दिल्ली पहुंच चुके थे। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बताया कि “छह साल बाद भोपाल फिर से टॉप-2 में आया है, यह पूरे शहर के लिए गर्व का क्षण है।” शहर में जश्न का माहौल, ढोल-नगाड़े और लड्डू वितरण भोपाल की इस ऐतिहासिक सफलता को लेकर नगर निगम कार्यालय में उत्सव का माहौल देखने को मिला।सफाई मित्रों को फूलों की माला पहनाकर सम्मानित किया गया और मिठाइयां बांटी गईं।निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने ढोल बजाकर अपनी खुशी व्यक्त की। इस मौके पर उन्होंने कहा, स्वच्छता के लिए की गई अहम पहलें: इंदौर ने फिर दिखाया दम, सुपर लीग में मारी बाजी स्वच्छता में इंदौर का मुकाबला इस बार भी कोई नहीं कर पाया। आठवीं बार टॉप पर पहुंचकर इंदौर ने Swachh Survekshan 2024-25 की Super League में भी जीत हासिल की है।सुपर लीग में उन 23 शहरों को शामिल किया गया था जिन्होंने अब तक के किसी सर्वेक्षण में टॉप-3 में जगह बनाई थी। केंद्रीय आयोजन में हुए पुरस्कार वितरण इस आयोजन में देशभर से आए महापौर, निगम आयुक्त और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर मौजूद थे। स्वच्छ सर्वेक्षण की खास बातें: भोपाल की सफाई टीम को सलाम भोपाल की यह रैंकिंग साफ-सफाई के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और नागरिकों की जागरूकता का प्रमाण है। यह भी साबित करता है कि अगर जनता और प्रशासन मिलकर काम करें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। 📌 देश हरपल स्वच्छता के इस उत्सव में भोपाल और इंदौर के नागरिकों को बधाई देता है।
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Rahul Gandhi News, Lucknow Court,

लखनऊ कोर्ट से राहुल गांधी को मानहानि मामले में ज़मानत

लखनऊ से देश हरपल की रिपोर्ट: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को आज लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट से बड़ी राहत मिली। वर्ष 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना को लेकर दिए गए कथित बयान के कारण दर्ज मानहानि के एक मामले में उन्हें जमानत मिल गई है। राहुल गांधी आज दोपहर लखनऊ एयरपोर्ट पर चार्टर्ड फ्लाइट से पहुंचे और सीधे कोर्ट पहुंचे। उन्होंने अदालत में औपचारिक रूप से सरेंडर किया, जिसके बाद उनके वकील ने जमानत याचिका दाखिल की। कोर्ट ने यह याचिका स्वीकारते हुए 20-20 हज़ार रुपये की दो जमानतें भरने की शर्त पर उन्हें जमानत दे दी। क्या था मामला? यह मामला 2022 की भारत जोड़ो यात्रा के समय का है, जब राहुल गांधी ने कथित रूप से ऐसा बयान दिया था जो सेना की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया गया।इस बयान के खिलाफ मानहानि की याचिका एक स्थानीय याचिकाकर्ता द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें कहा गया कि इससे सैनिकों के मनोबल पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। कोर्ट ने राहुल गांधी को इस बयान के सिलसिले में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए तलब किया था, जिसपर उन्होंने आज लखनऊ कोर्ट में हाज़िरी दी और औपचारिक सरेंडर किया कोर्ट की कार्यवाही: राहुल गांधी के वकील ने अदालत से ज़मानत की मांग की, जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए उन्हें राहत दे दी। कोर्ट ने कहा कि उन्हें 20-20 हज़ार रुपये की दो जमानतें देनी होंगी। एयरपोर्ट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का स्वागत लखनऊ एयरपोर्ट पर राहुल गांधी का स्वागत करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।यूपी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, और कई सांसद भी इस दौरान मौजूद रहे। राहुल गांधी कुछ घंटों में ही चार्टर्ड फ्लाइट से वापस दिल्ली रवाना हो गए।
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Shubhanshu Shukla ISS Mission,

Space में जाति की एंट्री! उदित राज बोले – “शुभांशु की जगह दलित को भेजना था

Axiom-4 मिशन से वापसी के बाद बवाल में घिरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला – कांग्रेस नेता ने दे दिया जातीय तड़का नई दिल्ली, देश हरपल ब्यूरो।भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ चुका है। Group Captain शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के तहत 18 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर बिताकर धरती पर सफल वापसी की है। लेकिन जैसे ही वह वापस लौटे, कांग्रेस नेता डॉ. उदित राज ने इस ऐतिहासिक क्षण को विवाद में खींच लिया। क्या कहा कांग्रेस नेता उदित राज ने? डॉ. उदित राज ने शुभांशु की वापसी पर तो उन्हें शुभकामनाएं दीं लेकिन उसके साथ-साथ एक ऐसा बयान भी दे डाला जिसने माहौल गर्मा दिया। उन्होंने कहा: “पहले राकेश शर्मा अंतरिक्ष में गए थे, तब SC-ST और OBC इतने पढ़े-लिखे नहीं थे। लेकिन अब तो किसी दलित या ओबीसी को भी शुभांशु शुक्ला की जगह भेजा जा सकता था। ऐसा नहीं कि NASA ने कोई परीक्षा लेकर उनका चयन किया हो।” इस बयान पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। शुभांशु ने स्पेस में किए 60 वैज्ञानिक प्रयोग Axiom-4 मिशन पर 25 जून को शुभांशु तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ ISS के लिए रवाना हुए थे। 18 दिनों के इस मिशन में उन्होंने 60 वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनमें से 7 भारत के ISRO द्वारा प्रस्तावित थे। शुभांशु शुक्ला अपने साथ 263 किलोग्राम वैज्ञानिक उपकरण और डेटा लेकर लौटे हैं, जो भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। 🇮🇳 भारत के लिए क्यों खास है यह मिशन? शुभांशु शुक्ला भारत के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने एक वाणिज्यिक अंतरिक्ष मिशन के तहत ISS तक सफर किया। ISRO के आगामी Gaganyaan Mission (2027) से पहले यह मिशन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी और वैज्ञानिक प्रयोगशाला साबित हो सकता है। Axiom-4 मिशन पर भारत ने खर्च किए 550 करोड़ रुपये सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत सरकार ने इस मिशन पर करीब ₹550 करोड़ का निवेश किया है। इस निवेश से भारत को न केवल वैश्विक स्पेस कमर्शियल सेक्टर में पहचान मिली, बल्कि तकनीकी रूप से भी कई नई जानकारियां हासिल हुई हैं। NASA और ISRO की साझेदारी यह मिशन अमेरिकी कंपनी Axiom Space और NASA के सहयोग से संचालित हुआ था। भारत की तरफ से ISRO और भारतीय वायुसेना के सहयोग से शुभांशु को प्रशिक्षित किया गया।
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इंदौर में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की 46 अचल संपत्तियों का खुलासा, बाजार मूल्य 64 करोड़ रुपये से अधिक

इंदौर में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच में नए खुलासे हुए हैं। लोकायुक्त के मुताबिक, 19 अक्टूबर तक की जांच में फिरोज खान, उनके परिवार, सहयोगियों और संबंधित फर्म के नाम पर कुल 46 अचल संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों की अनुमानित वर्तमान बाजार कीमत 64 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जबकि इनकी कुल गाइडलाइन कीमत करीब 17.19 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों पर अब तक 18.79 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी मिली है। लोकायुक्त संपत्तियों के दस्तावेजों, खरीद में इस्तेमाल की गई राशि और संबंधित लोगों की भूमिका का सत्यापन कर रहा है। जांच अभी जारी है। रंगवासा से लसूड़िया मोरी तक जमीन खरीदने की जानकारी जांच के दौरान इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के ग्राम रंगवासा में कई कृषि भूमि की रजिस्ट्रियां सामने आई हैं। ये जमीनें वर्ष 2023 और 2024 में अलग-अलग तारीखों पर खरीदी गई थीं। इसके अलावा, जुलाई 2024 में लसूड़िया मोरी क्षेत्र में रेड कारपेट के पीछे 11.771 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी मिली है। इस जमीन का गाइडलाइन मूल्य करीब 3.85 करोड़ रुपये बताया गया है। लोकायुक्त के मुताबिक, इन जमीनों की खरीद स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर की गई। जांच में सामने आया है कि यह फर्म फिरोज खान की पत्नी हिना खान और इंदौर निवासी युवराज पंवार के संयुक्त नाम से संचालित है। एजेंसी फर्म से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की भी जांच कर रही है। लोकायुक्त की जांच में अब तक सामने आए आंकड़े लोकायुक्त की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जांच में अब तक ये आंकड़े सामने आए हैं: ये आंकड़े जांच के दौरान अब तक जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं। संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, खरीद के लिए इस्तेमाल की गई राशि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है। 14 अक्टूबर को कई ठिकानों पर हुई थी सर्चिंग लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर को फिरोज खान के विभिन्न आवासों और अन्य ठिकानों पर सर्च कार्रवाई की थी। इसके बाद से जांच एजेंसी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है। जांच में संपत्तियों की खरीद की तारीख, गाइडलाइन मूल्य और अनुमानित बाजार मूल्य का मिलान किया जा रहा है। आय के ज्ञात स्रोतों और संपत्तियों पर किए गए खर्च के बीच संभावित अंतर का आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे की जानकारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर सामने आएगी।

लाहौल-स्पीति में दर्दनाक सड़क हादसा: चंद्रभागा नदी के किनारे गिरी कार, 3 की मौत; चालक समेत 4 घायल

हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति के तिन्दी क्षेत्र में सोमवार शाम दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। शादी समारोह में शामिल होने जा रहे ग्रामीणों से भरी एक कार अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे चंद्रभागा नदी के किनारे जा गिरी। हादसे में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार चालक समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) उदयपुर पहुंचाया गया है। वीर मंदिर के पास मोड़ पर चालक ने खोया नियंत्रण पुलिस जिला मुख्यालय केलांग से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार शाम करीब 4 बजे हुआ। हरियाणा नंबर की i20 कार में सात लोग सवार होकर तिन्दी गांव से सलग्रां गांव में आयोजित शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। इनमें छह लोग सलग्रां गांव और एक व्यक्ति भुजुंड गांव का निवासी था। कार जब तिन्दी के समीप वीर मंदिर के पास एक मोड़ पर पहुंची, तो चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद कार सड़क से नीचे गहरी ढांक में गिरते हुए चंद्रभागा नदी के किनारे जा पहुंची। डीएसपी केलांग केडी शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मामले में नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में चालक की लापरवाही हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है। पुलिस और प्रशासन ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस चौकी तांदी, पुलिस थाना उदयपुर और स्थानीय प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। बचाव दल ने घायलों को निकालकर CHC उदयपुर पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, तीनों मृतकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी कार्रवाई के लिए CHC उदयपुर भेजे गए हैं। हादसे में जान गंवाने वालों के नाम पुलिस के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोग सलग्रां गांव के निवासी थे। चार लोग घायल, चालक भी शामिल हादसे में घायल चारों लोगों की पहचान इस प्रकार हुई है: घटना के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।

परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड: पंजाब सरकार की 3 महिला IAS अधिकारियों की कमेटी से बातचीत बेनतीजा, अंतिम संस्कार से इनकार

पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में परिवार और पंजाब सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। परिजनों की मांगों पर बातचीत के लिए राज्य सरकार की ओर से गठित तीन महिला IAS अधिकारियों की कमेटी की पहली बैठक सोमवार को बेनतीजा रही। परिवार और एक्शन कमेटी ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने तक झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा और धरना जारी रहेगा। सोमवार को तीनों महिला IAS अधिकारी झोटा के पिता भीम सिंह और पत्नी मनप्रीत कौर से मिलने पहुंचीं। इस दौरान परिवार की ओर से गठित एक्शन कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे। बैठक के बाद कमेटी के सदस्यों ने बताया कि सरकार की ओर से रखे गए प्रस्तावों पर सहमति नहीं बन सकी है। मांगपत्र सौंपा, CBI जांच की मांग पर अड़ा परिवार एक्शन कमेटी के सदस्यों के मुताबिक, सरकार की कमेटी को मांगपत्र सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना खत्म नहीं किया जाएगा और अंतिम संस्कार भी नहीं होगा। एक्शन कमेटी ने यह भी कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को परिवार से मिलने आ रहे हैं। कमेटी की मांग है कि अमित शाह परिवार से मुलाकात के दौरान मामले की CBI जांच का ऐलान करें। AAP विधायकों को लानत पत्र देने पहुंचे समर्थक, पुलिस से धक्कामुक्की परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में सोमवार को इंसाफ कमेटी, किसान संगठनों और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के घरों पर लानत पत्र देने का अभियान चलाया। इस दौरान कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। लुधियाना में AAP विधायक अशोक पराशर पप्पी के घर की ओर जा रहे अकाली नेताओं को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोक दिया। नेताओं ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की, जिसके बाद छह नेताओं को आगे जाने की अनुमति दी गई। वहीं, बठिंडा के तलवंडी साबो में विधायक प्रो. बलजिंदर कौर के घर के बाहर पुलिस और किसान व अकाली नेता आमने-सामने आ गए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ते हुए विधायक की कोठी पर लानत पत्र चिपका दिया। मौड़ मंडी में धरने के दौरान अकाली नेताओं में बहस मौड़ मंडी में विधायक सुखबीर सिंह माइसरखाना के घर के बाहर चल रहे धरने के दौरान भी माहौल गरमा गया। यहां अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के हलका इंचार्ज और शिरोमणि अकाली दल (बादल) के एक कार्यकर्ता के बीच तीखी बहस हुई। बताया जा रहा है कि विवाद उस समय शुरू हुआ, जब लक्खा सिधाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर बयान दे रहे थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच पंजाब की अलग-अलग सरकारों के कामकाज, पूर्व अकाली सरकार के फैसलों और भाजपा के साथ गठबंधन जैसे मुद्दों पर बहस हुई। पिता बोले- पत्नी भी एक्शन कमेटी में होंगी शामिल परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा कि अब उनकी बहू मनप्रीत कौर खुद एक्शन कमेटी में शामिल होंगी और मीडिया को भी संबोधित करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक्शन कमेटी के कुछ सदस्यों ने पहले अमित शाह के विरोध का ऐलान किया था। भीम सिंह के मुताबिक, यदि गृह मंत्री का विरोध किया जाता है, तो परिवार इसे अपने विरोध के रूप में देखेगा। फिलहाल परिवार अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। सरकार और एक्शन कमेटी के बीच बातचीत में सहमति नहीं बनने से मामले का समाधान निकलने का इंतजार जारी है।

दशहरे पर PM मोदी और अमित शाह होंगे शामिल, रामलीला स्थलों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

राजधानी दिल्ली में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस बार दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अलग-अलग रामलीला आयोजनों में शामिल होंगे। दोनों नेताओं के आगमन को देखते हुए आयोजन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली में इंद्रप्रस्थ रामलीला समिति के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, अमित शाह लाल किला स्थित माधवदास पार्क में श्री धार्मिक रामलीला समिति के आयोजन में शिरकत करेंगे। दोनों नेता प्रतीकात्मक रूप से धनुष से बाण चलाकर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर रहेंगी। आयोजन स्थलों पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन और यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। दर्शकों की संभावित भीड़ को देखते हुए आसपास की सड़कों पर यातायात प्रतिबंध और रूट डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं। लोगों को आयोजन स्थलों पर जाने से पहले यातायात संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। डिजिटल आतिशबाजी और हाईटेक पुतले होंगे आकर्षण दिल्ली की प्रमुख रामलीला समितियों ने दशहरा उत्सव को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की हैं। इस बार डिजिटल आतिशबाजी, आधुनिक तकनीक से तैयार विशाल पुतले और भव्य मंचन दर्शकों के लिए खास आकर्षण होंगे। रामलीला आयोजनों में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन समितियां उत्सव को यादगार बनाने के साथ-साथ दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए भी तैयारियां कर रही हैं। Desh Har Pal वेबसाइट पर देश-दुनिया, राजनीति और त्योहारों से जुड़ी ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें।

दिल्ली में 6 नए बायोगैस प्लांट लगेंगे, CM रेखा गुप्ता ने किया गोयला डेयरी प्लांट का उद्घाटन

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को कैबिनेट मंत्री आशीष सूद के साथ गोयला डेयरी में 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायोगैस प्लांट का उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दिल्ली में 6 और बायोगैस प्लांट स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही डेयरी कॉलोनियों में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 50 करोड़ रुपये देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य डेयरी से निकलने वाले गोबर का उचित निस्तारण करना, प्रदूषण कम करना और पशुपालकों को अतिरिक्त आय का अवसर देना है। रोज 200 टन गोबर से बनेगी कंप्रेस्ड बायोगैस मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि गोयला डेयरी में प्रतिदिन करीब 200 टन गोबर निकलता है। उचित निस्तारण नहीं होने पर इसके नालियों के माध्यम से यमुना तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। नए बायोगैस प्लांट में गोबर से प्रतिदिन लगभग 14 हजार घन मीटर कच्ची बायोगैस और 5.6 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) तैयार की जाएगी। तैयार गैस की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिए इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) को की जाएगी। कार्यक्रम में दिल्ली की महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत और विधायक संदीप सहरावत सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। नांगली प्लांट में 55 हजार टन गोबर का निस्तारण मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 200-200 टन प्रतिदिन क्षमता वाले तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए जा चुके हैं। सितंबर 2025 में शुरू हुए नांगली प्लांट में एक साल के भीतर करीब 55 हजार टन गोबर का निस्तारण किया गया। सरकार की योजना दिल्ली में ऐसे और संयंत्र स्थापित कर डेयरी क्षेत्रों में गोबर के प्रबंधन को बेहतर बनाने की है। इससे कचरे के रूप में जमा होने वाले गोबर का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकेगा। पशुपालकों को गोबर के मिलेंगे 67 पैसे प्रति किलो इस परियोजना के तहत संबंधित एजेंसी डेयरी संचालकों से 67 पैसे प्रति किलो की दर से गोबर खरीदेगी। इससे पशुपालकों को गोबर से अतिरिक्त कमाई होगी और उसके निस्तारण की समस्या भी कम हो सकेगी। इसके अलावा, डेयरी कॉलोनियों में जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए घोषित 50 करोड़ रुपये से स्थानीय स्तर पर सफाई और जलभराव से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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