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Bus Accident in Devghar, Kavad Yatra News, Deoghar Basukinath Route, Jharkhand Bus Accident, Devghar Kavad Yatra Tragedy, Sawan Kavad Accident 2025

कांवड़ियों से भरी बस देवघर-बासुकीनाथ मार्ग पर हादसे का शिकार, 6 की मौत, 26 घायल

Devghar से बासुकीनाथ जा रही कांवड़ियों की बस हादसे का शिकार, 6 की मौत, 26 घायल। तेज रफ्तार और नींद में चालक के कारण हुआ हादसा। देवघर, झारखंड – सावन की श्रद्धा भरी कांवड़ यात्रा एक दर्दनाक हादसे में बदल गई जब मंगलवार की सुबह झारखंड के सरठ थाना क्षेत्र के कुरसेला मोड़ के पास कांवड़ियों से भरी बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बिहार के नवादा जिले से आए कांवड़िए देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर बासुकीनाथ धाम की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बस एक तेज़ रफ्तार ट्रक से टकराकर पत्थर और ईंटों के ढेर में जा घुसी। इस भीषण बस हादसे में 6 कांवड़ियों की मौत हो गई, जबकि 26 से अधिक घायल हुए हैं। कई की हालत गंभीर है, जिन्हें रांची रेफर किया गया है। हादसा कैसे हुआ? बस में सवार एक घायल कांवड़िए ने बताया कि बस तेज़ रफ्तार में थी और ड्राइवर को झपकी लग गई, जिसके चलते पहले बस एक ट्रक से टकराई और फिर पत्थर पर चढ़ती हुई ईंटों के ढेर से टकरा गई। हादसे के समय अधिकतर कांवड़िए सो रहे थे, जिससे वे संभल भी नहीं पाए। चश्मदीद की मार्मिक कहानी घायल सुनील कुमार ने रोते हुए बताया, “बस अचानक से लड़खड़ाई और एक बड़े पत्थर से टकरा गई। मैं जैसे-तैसे बाहर निकल पाया, लेकिन मेरी पत्नी सुमन कुमारी अंदर ही फंसी रही। अगर समय पर सहायता मिलती तो शायद मेरी पत्नी भी आज जिंदा होती।” राहत और बचाव कार्य हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस, और ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। देवघर सदर अस्पताल और बासुकीनाथ उप-स्वास्थ्य केंद्र में घायलों को भर्ती कराया गया। कई की हालत नाज़ुक होने के कारण उन्हें रांची मेन हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। स्थानीय लोगों का आक्रोश राधेश्याम सिंह, मोहन महतो और मनोज पासवान जैसे स्थानीय लोगों ने बताया कि कुरसेला मोड़ एक जाना-पहचाना दुर्घटनाग्रस्त स्थल है। इससे पहले भी यहां कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन न प्रशासन ने स्पीड कंट्रोल के उपाय किए और न ही कोई चेतावनी संकेत लगाया। प्रत्यक्षदर्शी रामचंद्र ठाकुर ने कहा, “हम खेत में काम कर रहे थे तभी धमाके जैसी आवाज़ आई। जब पहुंचे तो खून से सने कांवड़िए ईंटों के ढेर में दबे पड़े थे। हमने तुरंत पुलिस को सूचना दी और खुद बचाव शुरू किया।” प्रशासन की कार्रवाई प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। मृतकों की पहचान कर परिजनों को सूचना दी जा रही है। मृतक और घायल ज़्यादातर नवादा जिले के अकबरपुर, हिसुआ और पकरीबरावां प्रखंडों के रहने वाले हैं। सावधानी और सच्चाई यह हादसा श्रद्धालुओं की जान की कीमत पर लापरवाही का नतीजा बन गया है। सावन में लाखों श्रद्धालु देवघर-बासुकीनाथ मार्ग पर यात्रा करते हैं, लेकिन ऐसी घटनाएं चेतावनी देती हैं कि बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट, चालकों की निगरानी, और खतरनाक मोड़ों की मरम्मत अब अनिवार्य है।
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Manish tewari

“भारत की बात सुनाता हूं” – Manish Tiwari और Shashi Tharoor की नाराजगी से Congress बैकफुट पर?

Operation Sindoor पर संसद में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी और शशि थरूर को बोलने से रोके जाने पर पार्टी में नाराजगी उभर आई है। जानिए क्यों Congress ने अपने ही वरिष्ठ नेताओं को बहस से बाहर रखा। देश हरपल डिजिटल डेस्क | नई दिल्लीसंसद में Operation Sindoor पर चल रही बहस ने अब कांग्रेस पार्टी के भीतर ही मतभेदों को उजागर कर दिया है। चंडीगढ़ से कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है, क्योंकि उन्हें लोकसभा में इस मुद्दे पर बोलने का मौका नहीं दिया गया। मनीष तिवारी ने सोमवार को अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने मशहूर देशभक्ति गीत ‘भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं’ की पंक्तियां लिखीं और एक न्यूज रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया, जिसमें बताया गया था कि आखिर थरूर और तिवारी को क्यों नहीं बोलने दिया गया।
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Rishabh Pant injury update,

Manchester Test में Team India को बड़ा झटका: ऋषभ पंत छह हफ्तों के लिए टीम से बाहर!

इंग्लैंड के खिलाफ चल रही एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी (Anderson-Tendulkar Trophy) के मैनचेस्टर टेस्ट (Manchester Test) से एक बड़ी और दुखद खबर सामने आई है। भारत के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज़ ऋषभ पंत (Rishabh Pant) अब आगामी छह हफ्तों के लिए क्रिकेट से दूर रहेंगे। ये हादसा टेस्ट मैच के पहले ही दिन 68वें ओवर में हुआ, जब क्रिस वोक्स (Chris Woakes) की चौथी गेंद पर पंत ने reverse sweep खेलने की कोशिश की। गेंद बल्ले के एज से टकराकर सीधे उनके जूते पर लगी। दुर्भाग्यवश, यह चोट पैरों के उस हिस्से पर लगी जहाँ कोई भी प्रोटेक्शन नहीं होता। इसके बाद पंत दर्द से कराहते हुए ज़मीन पर गिर गए और फिर खड़े तक नहीं हो पाए। मैदान पर टीम इंडिया के फिजियो को तुरंत बुलाया गया। जब पंत ने जूता हटाया, तो चोट की गंभीरता साफ दिख रही थी। उनकी हालत को देखते हुए स्कैन कराया गया और Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, उनके पैर के पंजे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई है। BCCI की मेडिकल टीम ने क्या कहा? BCCI के एक वरिष्ठ सूत्र ने पुष्टि करते हुए कहा: “स्कैन रिपोर्ट में साफ दिख रहा है कि ऋषभ पंत को फ्रैक्चर है। वह कम से कम छह हफ्ते के लिए बाहर रहेंगे। मेडिकल टीम ये देखने की कोशिश कर रही है कि क्या वह painkiller लेकर बल्लेबाज़ी कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल उनकी हालत बेहद सीमित है और बिना सहारे चल भी नहीं पा रहे हैं।“ इसका मतलब साफ है कि पंत 31 जुलाई से 4 अगस्त तक होने वाले आख़िरी टेस्ट में नहीं खेल पाएंगे। ऐसे में चयन समिति ईशान किशन (Ishan Kishan) को टीम में शामिल करने की तैयारी कर रही है। चोटों से परेशान है Team India वैसे भी इस सीरीज़ में भारत खिलाड़ियों की चोट की मार से जूझ रहा है। ऑलराउंडर नितेश कुमार रेड्डी पहले ही घुटने की चोट के कारण पूरी सीरीज़ से बाहर हो चुके हैं। वहीं, तेज़ गेंदबाज़ आकाश दीप (groin injury) और अर्शदीप सिंह (thumb injury) भी चौथे टेस्ट से बाहर हैं। इससे पहले तीसरे टेस्ट में भी भारतीय टीम को प्लेइंग इलेवन में कई बदलाव करने पड़े थे, जिसकी वजह से प्रदर्शन पर असर पड़ा। अब टीम में बदलाव तय, भारत की चुनौती बढ़ी ऋषभ पंत की गैरमौजूदगी भारत के लिए सिर्फ विकेट के पीछे नहीं बल्कि मिडल ऑर्डर बल्लेबाज़ी में भी एक बड़ी कमी लेकर आएगी। पंत ने इस सीरीज़ में अब तक कई महत्वपूर्ण पारियां खेली थीं और इंग्लिश गेंदबाज़ों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था। इशान किशन को उनके रिप्लेसमेंट के तौर पर शामिल किया जाना लगभग तय है, लेकिन उनका टेस्ट अनुभव सीमित है। ऐसे में ओवल टेस्ट में भारत की बल्लेबाज़ी पर और भी दबाव रहेगा।
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Anshul Kamboj Debut,

England के खिलाफ आग उगल सकते हैं अंशुल कांबोज, Team India के नेट्स में कहर बरपाया!

India vs England Test Series में Team India के लिए अंशुल कांबोज डेब्यू कर सकते हैं। चोटिल खिलाड़ियों की लिस्ट लंबी होने से युवा तेज गेंदबाज को मौका मिलने की उम्मीद है। मैनचेस्टर टेस्ट में अंशुल कांबोज डेब्यू करेंगे? टीम इंडिया की रणनीति में बड़ा बदलाव संभव भारत और इंग्लैंड (India vs England) के बीच चल रही टेस्ट सीरीज के चौथे मुकाबले में एक नया चेहरा डेब्यू कर सकता है – अंशुल कांबोज। अर्शदीप सिंह और आकाश दीप की फिटनेस को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच, अंशुल को नेट्स में गेंदबाजी करते हुए देखा गया और उन्होंने अपने प्रदर्शन से टीम मैनेजमेंट को प्रभावित किया है। नेट्स में शानदार प्रदर्शनTimes of India की रिपोर्ट के मुताबिक, टीम में शामिल होने के बाद अंशुल ने मैनचेस्टर नेट्स सेशन में 45 मिनट तक नई गेंद से गेंदबाजी की। वह न सिर्फ कोच गौतम गंभीर के साथ गहन चर्चा करते दिखे बल्कि जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज जैसे सीनियर खिलाड़ियों से भी सलाह लेते नजर आए। अन्य खिलाड़ियों की स्थिति इन सब स्थितियों को देखकर यह लगभग तय माना जा रहा है कि नितीश की जगह शार्दुल ठाकुर और आकाश दीप की गैरहाजिरी में प्रसिद्ध कृष्णा या अंशुल कांबोज को प्लेइंग इलेवन में जगह मिल सकती है। प्रसिद्ध कृष्णा की गैर-भागीदारी के बाद कांबोज का पलड़ा भारी लग रहा है। अंशुल कांबोज का रिकॉर्ड
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Mumbai Train Blast,

मुंबई ट्रेन ब्लास्ट के 12 दोषियों की रिहाई पर महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची

मुंबई ट्रेन धमाके: हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट की शरण में, 24 जुलाई से सुनवाई देश हरपल डेस्क | मुंबई:2006 के मुंबई लोकल ट्रेन ब्लास्ट मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा 12 दोषियों को बरी किए जाने के फैसले से महाराष्ट्र सरकार हैरान है और उसने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अर्जेंसी को मानते हुए 24 जुलाई से इस पर सुनवाई शुरू करने का ऐलान किया है। सरकार ने फैसले को बताया ‘चौंकाने वाला’ इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने CJI बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले की गंभीरता पर ज़ोर देते हुए जल्द सुनवाई की मांग की।उन्होंने कहा कि, “राज्य सरकार ने फैसले के खिलाफ अपील पहले ही तैयार कर ली है और यह एक बेहद गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।” CJI गवई ने यह स्पष्ट किया कि कुछ दोषियों को पहले ही रिहा किया जा चुका है, लेकिन फिर भी मामला गुरुवार (24 जुलाई) के लिए लिस्ट किया जाएगा। क्या हुआ था 11 जुलाई 2006 को? 👉 11 जुलाई 2006 को शाम करीब 6:24 से 6:35 बजे के बीच मुंबई की सात अलग-अलग लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के भीतर भयानक धमाके हुए थे।👉 इन बम धमाकों में 189 लोग मारे गए थे और 824 लोग घायल हुए थे।👉 बम प्रेशर कुकर में रखे गए थे और ट्रेनों के फर्स्ट क्लास डिब्बों को निशाना बनाया गया था। 📁 13 आरोपी, 5 को फांसी, 7 को उम्रकैद इस केस में 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा चला था।साल 2015 में MCOCA कोर्ट ने एक आरोपी को बरी कर दिया, जबकि बाकी 12 में से 5 को फांसी और 7 को उम्रकैद की सजा मिली थी।इनमें से एक फांसी की सजा पाए अभियुक्त की 2021 में मौत हो गई थी। हाई कोर्ट का फैसला क्यों विवादित? 📌 21 जुलाई 2025 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले में कई कानूनी खामियां हैं और सबूत पर्याप्त नहीं हैं।📌 कोर्ट ने यह कहते हुए सभी 12 दोषियों को बाइज्ज़त बरी कर दिया कि उनकी सजा न्यायिक प्रक्रिया की कमियों पर आधारित थी।📌 सभी दोषी पिछले 18 साल से जेल में बंद थे। सरकार की दलील: “ये फैसले आतंक के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करते हैं” सरकार का तर्क है कि इस तरह के फैसले, न सिर्फ न्याय प्रक्रिया की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि देश की आतंकवाद के खिलाफ रणनीति को भी कमजोर करते हैं।सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से ‘त्वरित और विशेष’ सुनवाई की मांग की है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।
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Aadhaar FaceRD App, UIDAI New Aadhaar App, Aadhaar Face Authentication, Aadhaar Digital Verification, FaceRD Android App, आधार कार्ड फेस ऑथेंटिकेशन, आधार ऐप गूगल प्ले स्टोर

अब Aadhaar की फोटोकॉपी की झंझट खत्म, UIDAI ने लॉन्च किया नया Face Authentication App

अब चेहरा ही पहचान है! UIDAI का नया Aadhaar FaceRD ऐप लॉन्च, डिजिटल पहचान का नया युग शुरू आधार कार्ड अब और ज़्यादा डिजिटल हो गया है। UIDAI ने अपने नए FaceRD App को Google Play Store पर लॉन्च कर दिया है। इस ऐप के आने के बाद अब आपको होटल, एयरपोर्ट, सिम कार्ड लेने या किसी भी जगह आधार कार्ड की फोटोकॉपी देने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। सिर्फ Face Authentication से आपका काम हो जाएगा। क्या है Aadhaar FaceRD App? FaceRD दरअसल एक फेस ऑथेंटिकेशन ऐप है, जिसे UIDAI ने डेवलप किया है। इसके ज़रिए अब Aadhaar से जुड़ी पहचान डिजिटल तरीके से सिर्फ आपके चेहरे को स्कैन कर करके पूरी हो जाएगी। इस ऐप को इसी साल अप्रैल में IT Minister अश्विनी वैष्णव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किया था। उन्होंने कहा था कि यह ऐप भारत की डिजिटल पहचान व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा। FaceRD App कैसे काम करता है? बस! अब आपको कहीं भी पहचान के लिए कोई पेपर या फोटो कॉपी नहीं ले जानी पड़ेगी। iPhone यूज़र्स को इंतजार करना होगा फिलहाल यह ऐप केवल Android यूज़र्स के लिए उपलब्ध है और वो भी Developer Version के रूप में। UIDAI द्वारा iOS वर्जन को लेकर कोई समयसीमा नहीं बताई गई है, लेकिन यह जल्द ही लॉन्च हो सकता है। इससे क्या फायदे होंगे? ✅ फोटोकॉपी की जरूरत खत्म✅ तेज़ और सुरक्षित पहचान प्रक्रिया✅ फेस ऑथेंटिकेशन का आसान इंटरफेस✅ डिजिटल इंडिया मिशन को मजबूत
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Apache Helicopter Joins Indian Army

अब भारत के दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’

Apache Helicopter Joins Indian Army: अब दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’ देश हरपल डेस्क | 22 जुलाई 202515 महीने की देरी के बाद आखिरकार इंडियन आर्मी को उसका पहला Apache AH-64E Attack Helicopter मिल गया है। 22 जुलाई को इसकी पहली खेप में तीन एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर आर्मी एविएशन कोर (AAC) को सौंपे गए। इंडियन आर्मी ने इसकी जानकारी अपने X (Twitter) हैंडल पर दी। मार्च 2024 में ही AAC ने एक स्क्वाड्रन गठित कर दी थी, और पायलट्स की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी। अब अपाचे की तैनाती के साथ भारतीय सेना को युद्धक्षेत्र में एक नई धार मिलने जा रही है। पहले वायुसेना, अब थलसेना में एंट्री पहली बार 1984 में अमेरिका की सेना में शामिल हुआ Apache अब दुनिया के 17 से ज़्यादा देशों की सैन्य ताकत का हिस्सा है, जिनमें भारत भी शामिल है। इंडियन एयरफोर्स में 2015 से 22 अपाचे पहले से सेवा में हैं। उनकी शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को देखते हुए 2020 में थलसेना के लिए 6 अपाचे की डील की गई थी। इस डील की कुल कीमत 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपये) थी। अपाचे की ताकत: घातक हथियारों से लैस Apache AH-64E Guardian को दुनिया का सबसे खतरनाक अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों का संगम देखने को मिलता है। Hellfire Missiles 11 किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइल टैंक, बंकर और हेलीकॉप्टर्स को पलभर में तबाह कर सकती है। ये laser-guided और radar-guided दोनों मोड में काम करती है। Hydra Rockets हर साइड में 19-19 रॉकेट्स वाले लॉन्चर लगे होते हैं। इनके फोल्डिंग फिन्स इन्हें अपने लक्ष्य पर सटीक वार करने में सक्षम बनाते हैं। Chain Gun नीचे की ओर लगी 30 mm की M230 Chain Gun एक मिनट में 600–650 राउंड तक फायर कर सकती है। इसकी मैगजीन में 1200 राउंड्स होते हैं। Ultra-Advanced Sensors इसके रोटर के ऊपर लगा Longbow Radar, सामने Night Vision Sensors और Laser Target Designator इसे रात में भी अचूक बनाते हैं। Radar & IR Jammer दुश्मन की मिसाइल को कंफ्यूज करने के लिए इसमें Radar Jammer और Infrared Jammer भी मौजूद हैं। टेक्निकल फीचर्स: एक नज़र में फीचर डिटेल क्रू 2 (पायलट + गनर) लंबाई 48.16 फीट ऊंचाई 15.49 फीट रोटर डायमीटर 48 फीट वजन (अधिकतम) 10,432 किलोग्राम अधिकतम स्पीड 280 किमी/घंटा क्लाइंब रेट 2,800 फीट/सेकंड ऑपरेशनल ऊंचाई 20,000 फीट शानदार इतिहास: ‘ब्लैक डेथ’ का कहर ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (1991) में जब इराक की सेना पर अमेरिका ने धावा बोला, तो अपाचे ने अकेले ही 500 से ज्यादा टैंकों और सैकड़ों वाहनों को तबाह किया। इराकी सैनिकों ने इसे ‘Black Death’ नाम दिया था। उसके बाद पानामा (Operation Just Cause), गल्फ वॉर (2003) और अफगानिस्तान में भी अपाचे ने अपने जलवे दिखाए। भारत के लिए क्यों है खास? सबसे अहम बात ये है कि अपाचे का Fuselage भारत में बनता है, वह भी Tata Advanced Systems द्वारा। इससे इसकी मेंटेनेंस सस्ती और आसान हो जाती है। अब आर्मी को अगले तीन हेलीकॉप्टर की डिलीवरी का इंतजार है, जिससे पूरी स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हो सकेगी।
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Trade Tension: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अधर में, क्या 1 अगस्त से लागू होगा 26% टैरिफ?

देश हरपल ब्यूरो | नई दिल्ली, 22 जुलाई 2025 India-US Trade Deal को लेकर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, लेकिन वाशिंगटन में हुई बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। भारत का डेलिगेशन अमेरिका से लौट चुका है और अब अमेरिका के डेलिगेशन के अगस्त के दूसरे हफ्ते भारत आने की उम्मीद है। लेकिन बड़ा सवाल ये है – क्या 1 अगस्त से भारत को 26% टैरिफ देना पड़ेगा? अमेरिकी चेतावनी: “1 अगस्त से टैरिफ तय हैं” US Commerce Secretary हॉवर्ड लुटनिक ने 20 जुलाई को दिए गए एक इंटरव्यू में साफ कर दिया: “1 अगस्त से नई टैरिफ दरें लागू होंगी। उसके बाद भी बात हो सकती है, लेकिन टैरिफ देना ही होगा।” इस बयान के बाद भारत में एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर से जुड़े करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यही दो क्षेत्र अमेरिका के मुख्य दबाव बिंदु हैं। भारत का रुख: “डेयरी और मक्का पर नहीं होगा समझौता” सूत्रों के अनुसार, भारत ने अमेरिका की उन मांगों को मानने से इनकार कर दिया है जिनका सीधा असर देश के कृषि ढांचे और 8 करोड़ डेयरी वर्कर्स की आजीविका पर पड़ता। भारत न तो मक्का (corn) और न ही सोयाबीन पर टैरिफ में कटौती को लेकर राजी है। बातचीत में देरी: अमेरिका ने क्यों नहीं भेजा टैरिफ नोटिस? अब तक अमेरिका ने कम से कम 14 देशों को 25% से 40% टैरिफ को लेकर चिट्ठी भेज दी है। लेकिन भारत को ऐसी कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है, जिससे ये उम्मीद बनी हुई है कि बातचीत पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। ट्रंप की BRICS चेतावनी और रूस फैक्टर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि BRICS देश डॉलर का विकल्प तलाशते हैं, तो उन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। साथ ही, रूसी वस्तुओं पर 100% टैरिफ और रूसी तेल खरीदने वालों पर सख्ती के संकेत भी दिए हैं। भारत इस समय रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार है, ऐसे में यह चेतावनी भारत की ऊर्जा नीति को प्रभावित कर सकती है। निष्कर्ष: क्या है अगला कदम? अब सबकी निगाहें अगस्त के दूसरे हफ्ते पर हैं, जब अमेरिकी ट्रेड डेलीगेशन भारत आएगा। अगर तब तक समाधान नहीं निकला, तो भारत को बड़ी आर्थिक चोट झेलनी पड़ सकती है, खासतौर पर एक्सपोर्ट और कृषि-आधारित उद्योगों में।
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Vice President Jagdeep Dhankhar resignation, जगदीप धनखड़ इस्तीफा,

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से सियासी गलियारों में हलचल

Breaking Resignation: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार, 21 जुलाई की रात अचानक इस्तीफा देकर पूरे राजनीतिक माहौल को चौंका दिया। ये इस्तीफा तब आया जब उसी दिन संसद का मानसून सत्र शुरू हुआ था। उन्होंने अपने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह फैसला किसी गहरी हलचल की ओर इशारा कर रहा है। विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे को “चौंकाने वाला” बताया। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा: “इसमें कोई शक नहीं कि उपराष्ट्रपति धनखड़ को अपने स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा तरजीह देनी होगी। लेकिन उनके चौंकाने वाले इस्तीफे के पीछे जो दिख रहा है, वो उससे कहीं ज्यादा है। हालांकि, यह अटकलों का समय नहीं है… हम उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं और उनसे फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हैं।” “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देशहित में उन्हें मनाने की कोशिश करनी चाहिए। खासकर किसानों के हितों के लिए यह जरूरी है।” जयराम रमेश ने यह भी बताया कि 21 जुलाई की शाम 5 बजे तक वे अन्य सांसदों के साथ धनखड़ से मिले थे और शाम 7:30 बजे उन्होंने उपराष्ट्रपति से फोन पर भी बात की थी। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा, “उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफा चौंकाने वाला और आश्चर्यजनक है,उपराष्ट्रपति ने कल सदन की अध्यक्षता की,उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है,.ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे” कपिल सिब्बल की भावुक प्रतिक्रिया राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर व्यक्तिगत दुख जताया। उन्होंने कहा: “मैं व्यक्तिगत रूप से उनके इस्तीफे से खुश नहीं हूं क्योंकि मैं अब जब संसद जाऊंगा तो उनसे नहीं मिलूंगा। हमारे वर्षों से पारिवारिक संबंध रहे हैं।” “वे हमेशा सत्ता और विपक्ष के सामंजस्य की बात करते थे। हमारी विचारधाराएं अलग थीं लेकिन आपसी सम्मान बना रहा।” सिब्बल ने आगे बताया कि जब भी उन्हें सदन में बोलने के लिए समय की जरूरत होती थी, वे उपराष्ट्रपति के चैंबर में जाकर मिलते थे, और उन्हें कभी मना नहीं किया गया। अटकलों का दौर हालांकि जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे की वजह स्वास्थ्य कारण बताए हैं, लेकिन सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में इस फैसले को लेकर कई राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। क्या यह कोई आंतरिक असहमति का संकेत है? या कोई रणनीतिक फैसला? इसका खुलासा अभी नहीं हुआ है
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Vice President Resigns: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

BREAKING NEWS: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली:भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। धनखड़ ने राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल के दौरान 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट। झुंझुनू से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा एकदम साधारण पृष्ठभूमि में हुई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और LLB की पढ़ाई पूरी की। जयपुर में वकालत की शुरुआत की और जल्द ही राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ स्वास्थ्य बना वजह या कोई और संकेत? धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह भले ही स्वास्थ्य बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कहीं इसके पीछे कोई आंतरिक मतभेद या रणनीतिक बदलाव तो नहीं? आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता आ सकती है। क्या कहते हैं जानकार? वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और गरिमामय रहा, लेकिन बंगाल से जुड़े उनके बयान हमेशा चर्चा में रहे। निष्कर्ष: जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवेदनशील समय पर आया है जब देश 2026 के आम चुनाव की तैयारियों में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि उनकी जगह अगला उपराष्ट्रपति कौन बनता है, और क्या इससे सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।
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PNB

PNB में करोड़ों की Fake Currency का खेल! Saharanpur में CCTV ने बढ़ाया शक, 3 Officers पर Action

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला सामने आने के बाद बैंकिंग सिस्टम में हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध नकली नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं, जबकि विस्तृत जांच में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। वहीं, RBI की जांच के बाद इस पूरे मामले में कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। कैसे सामने आया करोड़ों के नकली नोटों का मामला? मामले की शुरुआत उस समय हुई जब RBI को भेजी गई नकदी में करीब ₹4.36 लाख की कमी सामने आई। इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद बैंक में करेंसी चेस्ट का रिकॉर्ड खंगाला गया और विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच आगे बढ़ी तो बैंक के अंदर रखी नकदी में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। असली Cash की जगह Fake Notes रखने का शक प्रारंभिक जांच में आशंका है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली रकम कब निकाली गई और नकली नोट बैंक के Cash Vault तक कैसे पहुंचे। बैंक के Cash Movement Records, लॉगबुक, ऑडिट रिपोर्ट और कर्मचारियों की ड्यूटी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। CCTV फुटेज में दिखी संदिग्ध गतिविधि इस पूरे मामले में बैंक का CCTV Footage जांच का अहम हिस्सा बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में करेंसी चेस्ट के आसपास एक हाउसकीपिंग कर्मचारी की गतिविधियां दिखाई दी हैं। जांच अधिकारी अब CCTV फुटेज को बैंक के एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और कैश रिकॉर्ड से मिलाकर देख रहे हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि करेंसी चेस्ट तक किस-किस कर्मचारी की पहुंच थी। 3 PNB Officers Suspended मामले में बैंक के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें करेंसी चेस्ट और कैश से जुड़े अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। बैंक ने तीन अधिकारियों को Suspended कर दिया है। हालांकि, निलंबन का मतलब दोष साबित होना नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। SIT के हाथ में जांच, RBI भी कर रहा पड़ताल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT (Special Investigation Team) गठित की है। टीम बैंक के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और नकदी के लेन-देन की पूरी कड़ी को खंगाल रही है। दूसरी ओर, RBI से जुड़ी जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोटों का स्रोत क्या था और वे बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे। ₹17 करोड़ या ₹7.40 करोड़? रकम को लेकर क्यों है Confusion इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा नकली नोटों की रकम को लेकर है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में ₹17 करोड़ तक की रकम का उल्लेख किया गया, जबकि बाद की विस्तृत रिपोर्टों में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात कही गई है। चूंकि जांच और नोटों की गिनती का काम जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। बैंकिंग सिस्टम की Security पर उठे सवाल सहारनपुर के PNB मामले ने बैंक की करेंसी चेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट बैंक के सुरक्षित Cash Vault तक कैसे पहुंचे? नियमित जांच और ऑडिट के दौरान इनकी पहचान क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच एजेंसियां तलाश रही हैं। आने वाले दिनों में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल जांच जारी है और नकली नोटों की वास्तविक मात्रा, असली रकम के नुकसान और इस मामले में शामिल लोगों को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SCO Summit

SCO Summit में Pakistan की Edited Photo पर बवाल, PM Modi और Iran President गायब

SCO Summit से जुड़ी एक तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चल रही तल्खी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक X अकाउंट से शेयर की गई एक तस्वीर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तस्वीर के एडिटेड वर्जन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके साथ खड़े ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर सामने आने के बाद यूजर्स ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अकाउंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास बात यह है कि जिस कार्यक्रम की तस्वीर साझा की गई, उसमें भारत और ईरान दोनों के शीर्ष नेता मौजूद थे। Original Photo और Edited Version को लेकर सवाल SCO Summit की ग्रुप फोटो में संगठन के कई सदस्य देशों के नेता एक साथ नजर आए थे। इसी तस्वीर का एक अलग वर्जन पाकिस्तान PMO के X हैंडल से पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिखाई नहीं देते। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या तस्वीर को जानबूझकर एडिट किया गया था। हालांकि, तस्वीर को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि पोस्ट में मूल तस्वीर के बजाय बदला हुआ फ्रेम क्यों इस्तेमाल किया गया। PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात भी रही अहम SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय हालात पर बातचीत हुई। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक Summit के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रही। यही वजह है कि ग्रुप फोटो से दोनों नेताओं के गायब होने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। Pakistan PM की भी ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी SCO Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी मिले थे, तो ग्रुप फोटो के साझा किए गए वर्जन में उनका नजर नहीं आना आखिर क्यों हुआ। India-Pakistan Relations के बीच बढ़ी चर्चा भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आने वाली छोटी-सी तस्वीर भी राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आई कथित Edited Photo ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल तस्वीर पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने Original Group Photo और पाकिस्तान PMO द्वारा साझा तस्वीर की तुलना करते हुए सवाल पूछे। हालांकि, यह भी जरूरी है कि तस्वीर के पीछे की मंशा को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकाला जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तस्वीर में बदलाव क्यों किया गया था। SCO Summit ने फिर खींचा दुनिया का ध्यान SCO Summit में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। एक तरफ Summit में भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश सुर्खियों में रहा, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर ध्यान खींचा। अब पाकिस्तान PMO की कथित Edited Photo इस पूरे घटनाक्रम में एक नया विवाद बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोगों की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Jantar Mantar FIR Case: प्रदर्शनकारियों को SC से राहत, CJP ने Delhi March टाला

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च भी वापस ले लिया। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह अब इस मार्च का आयोजन नहीं करेगा। यह पूरा मामला जुलाई में हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को वापस लेना आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। बाद में इसी मुद्दे को लेकर CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदर्शनकारियों को राहत सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों की ओर से प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने को लेकर आवेदन किया गया था। सुनवाई के दौरान इन मामलों को खत्म करने का रास्ता निकाला गया। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन से संबंधित करीब 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाने की बात सामने आई। कुछ ऐसे लोगों के मामले अलग रखे गए हैं, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले होने की जानकारी दी गई थी। इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लंबे समय से FIR वापसी की मांग कर रहे संगठन के लिए इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। 5 सितंबर का Delhi March क्यों किया गया था? CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक होना था। संगठन का आरोप था कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग की थी। संगठन ने कहा था कि अगर वादे पूरे नहीं हुए तो वह फिर से सड़कों पर उतरेगा। पहले SC ने मार्च पर रोक लगाने से किया था इनकार इस मामले में घटनाक्रम तेजी से बदला। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन के दौरान अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन पर छोड़ी गई थी। लेकिन इसके अगले ही दिन मामला अलग दिशा में चला गया। 1 सितंबर की सुनवाई के दौरान केंद्र के आश्वासन और कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने खुद 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने की घोषणा कर दी। CJP ने क्यों बदला फैसला? सुप्रीम कोर्ट में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है। यानी जिस मुद्दे को लेकर दोबारा सड़क पर उतरने की तैयारी थी, उसमें कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है। CJI ने भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के सकारात्मक रवैये और बातचीत के महत्व पर जोर दिया। अदालत की टिप्पणी का संदेश साफ था कि खुले मन से बातचीत हो तो विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bhopal

Sealing Action पर Bhopal में बवाल: व्यापारियों और पुलिस में भिड़ंत, शंख-डमरू बजाकर प्रदर्शन

Bhopal में Sealing Action को लेकर व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। कार्रवाई के विरोध में जुटे कारोबारियों और पुलिस के बीच मंगलवार को धक्का-मुक्की हो गई। कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके दौरान कुछ कारोबारी गिर गए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। Sealing के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी बड़ी संख्या में एकजुट हुए। कारोबारियों का कहना है कि कार्रवाई से उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे प्रशासन और सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर व्यापारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी बीच कुछ कारोबारी बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ गए। पुलिस और व्यापारियों के बीच इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बैरिकेड्स के पास हुई धक्का-मुक्की प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब व्यापारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को हटाने की कोशिश की। आगे बढ़ने की कोशिश में कुछ कारोबारी गिर गए। पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, कुछ देर बाद स्थिति को संभाल लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद व्यापारियों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी और बढ़ती दिखाई दी। थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार से लगाई गुहार व्यापारियों के विरोध का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए विरोध जताया। व्यापारियों का कहना था कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और सीलिंग कार्रवाई को लेकर सरकार उनकी मांगों पर विचार करे। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध के जरिए सरकार और प्रशासन तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना है कि वे टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं। व्यापारियों की मांग पर अब नजर भोपाल में Sealing Action को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासन और कारोबारियों के बीच चल रहे विवाद को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और प्रशासन व्यापारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल प्रदर्शन के दौरान पुलिस और व्यापारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद मामला चर्चा में है। व्यापारियों का विरोध यह संकेत दे रहा है कि सीलिंग कार्रवाई का मुद्दा अभी शांत होने वाला नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Bus में नाबालिग से कथित गैंगरेप, 47 KM तक चलता रहा सफर; Rahul Gandhi ने पूछा- Checking क्यों नहीं?

दिल्ली-NCR में चलती स्लीपर बस के अंदर नाबालिग छात्रा के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही, लेकिन रास्ते में किसी चेकपोस्ट पर उसकी जांच नहीं हुई। मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है। घटना सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब बस इतने लंबे रूट से होकर गुजरी तो पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? बारिश और अंधेरे के बीच बस में बैठी छात्रा रिपोर्टों के मुताबिक, नाबालिग छात्रा बारिश और अंधेरे के बीच रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके में पहुंची थी। वह नोएडा में अपने रिश्तेदार के पास जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान एक स्लीपर बस वहां पहुंची। आरोप है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने छात्रा को मदद का भरोसा देकर बस में बैठाया। इसके बाद बस दिल्ली की तरफ बढ़ गई। पुलिस के अनुसार, परी चौक से कश्मीरी गेट तक का सफर करीब 47 किलोमीटर का था। इसी सफर के दौरान छात्रा के साथ कथित अपराध हुआ। एक दिन पहले भी आरोपियों पर गंभीर आरोप जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना से एक दिन पहले भी ड्राइवर और कंडक्टर पर छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बस और उससे जुड़े अन्य सबूतों को कब्जे में लिया है। CCTV फुटेज समेत दूसरे डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों की भी जांच की जा रही है। Driver और Conductor गिरफ्तार पुलिस ने मामले में बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बस किस रास्ते से गुजरी और रास्ते में किन-किन जगहों पर रुकी। बस की जांच भी की जा रही है ताकि घटना से जुड़े जरूरी सबूत जुटाए जा सकें। Bus में पर्दे, CCTV को लेकर भी सवाल स्लीपर बसों में यात्रियों की Privacy के लिए पर्दे लगाए जाते हैं, लेकिन इसी व्यवस्था ने सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्टों में बस में CCTV की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि लंबी दूरी तक चलने वाली स्लीपर बसों में यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त Monitoring क्यों नहीं होती? Rahul Gandhi ने Police Checking पर उठाए सवाल मामले पर राहुल गांधी ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक नाबालिग के साथ बस के अंदर इतनी गंभीर घटना हुई और वाहन करीब 47 किलोमीटर तक चलता रहा। उन्होंने सवाल किया कि रास्ते में मौजूद पुलिस व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने बसों की Checking और Monitoring को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने इस घटना का संदर्भ देते हुए Nirbhaya Case की याद भी दिलाई और कहा कि वर्षों बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वही सवाल सामने आना चिंताजनक है। 47 KM का सफर और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल इस घटना ने दिल्ली-NCR की Public Transport Safety पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आखिर सड़कों पर चलने वाली बसों की Monitoring किस तरह होती है? क्या संदिग्ध बसों की नियमित Checking होती है? क्या हर स्लीपर बस में CCTV और Emergency Support की पर्याप्त व्यवस्था है? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल रोजाना हजारों लोग करते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की तस्वीर साफ होगी। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि Public Transport में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिस्टम की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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