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व्रत और उपवास में क्या है असली अंतर?

व्रत और उपवास एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनके उद्देश्य बिल्कुल अलग हैं। जानिए व्रत और उपवास में गहरा अंतर और इनसे जुड़ी आस्था की परंपरा। भारत की सनातन परंपरा में व्रत और उपवास का विशेष स्थान है। अधिकतर लोग इन दोनों शब्दों को एक ही अर्थ में लेते हैं, लेकिन सच ये है कि ‘व्रत’ और ‘उपवास’ में बुनियादी और उद्देश्यात्मक अंतर होता है। आइए समझते हैं इन दोनों आध्यात्मिक प्रक्रियाओं के पीछे छिपा हुआ गहरा भाव।हिंदू धर्म में व्रत का अर्थ केवल उपवास करना नहीं होता, बल्कि यह एक धार्मिक संकल्प होता है। कोई व्यक्ति जब किसी देवी-देवता को प्रसन्न करने, किसी विशेष फल की कामना करने या किसी ज्योतिषीय दोष को शांत करने के लिए नियमपूर्वक व्रत करता है, तो वह उसके संकल्प और श्रद्धा का प्रतीक बन जाता है। व्रत: आस्था और कामना से जुड़ा अटूट संकल्प हिंदू धर्म में व्रत का अर्थ केवल उपवास करना नहीं होता, बल्कि यह एक धार्मिक संकल्प होता है। कोई व्यक्ति जब किसी देवी-देवता को प्रसन्न करने, किसी विशेष फल की कामना करने या किसी ज्योतिषीय दोष को शांत करने के लिए नियमपूर्वक व्रत करता है, तो वह उसके संकल्प और श्रद्धा का प्रतीक बन जाता है। उपवास: ईश्वर के निकट जाने का आध्यात्मिक माध्यम ‘उपवास’ शब्द संस्कृत के “उप” (निकट) और “वास” (रहना) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है – परमात्मा के समीप रहना। यह केवल भोजन से दूर रहना नहीं, बल्कि सांसारिक इच्छाओं और मोह-माया से ऊपर उठकर आध्यात्मिक चेतना में प्रवेश करने की प्रक्रिया है। व्रत और उपवास में मूल अंतर क्या है? पहलू व्रत उपवास उद्देश्य सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्रक्रिया नियमबद्ध पूजा, दान, आहार संयम ध्यान, मौन, परमात्मा से जुड़ाव भावना आस्था व डर दोनों हो सकते हैं पूर्ण समर्पण और वैराग्य संबंध देवी-देवता या ग्रह से ब्रह्म और आत्मा से धार्मिकभय या भक्ति – क्यों रखते हैं लोग व्रत? आज भी कई लोग व्रत आस्था से नहीं, बल्कि भय से रखते हैं। जैसे अगर किसी की कुंडली में शनि दोष है, तो वे शनिवार का व्रत करते हैं। कई बार घर की स्त्रियां केवल परंपरा के पालन में व्रत करती हैं, जबकि कुछ लोग इसे आत्मिक अनुशासन के रूप में भी अपनाते हैं। हम कह सकते हैं कि व्रत जहां धर्म और कामना की पूर्ति से जुड़ा है, वहीं उपवास एक आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा है। दोनों की पवित्रता अपने-अपने स्तर पर है, बस इनका उद्देश्य और प्रक्रिया अलग-अलग है। इसलिए अगली बार जब आप व्रत या उपवास करें, तो इनकी आंतरिक भावना को समझें, तभी आप इसके वास्तविक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। देश हरपल की सलाह:अगर आप भी धार्मिक विषयों से जुड़ी और रोचक जानकारी चाहते हैं तो हमारी धर्म और अध्यात्म श्रेणी को ज़रूर पढ़ें।
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Dr S Jaishankar, संसद बहस

राज्यसभा में जयशंकर बोले – “खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे”

राज्यसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पहलगाम आतंकी हमले, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि पर भारत के सख्त रुख को स्पष्ट किया। जानिए कैसे बदली देश की विदेश नीति और पाकिस्तान को दी गई कड़ी चेतावनी। नई दिल्ली, देश हरपल ब्यूरो –राज्यसभा में मंगलवार को Pahalgam Terror Attack और ‘Operation Sindoor’ को लेकर गहन चर्चा के दूसरे दिन देश के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों पर करारा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब भारत की विदेश नीति बदल चुकी है और पाकिस्तान को आतंकवाद के हर समर्थन की कीमत चुकानी पड़ेगी। Indus Water Treaty पर कड़ा फैसला – “जब तक आतंकवाद रहेगा, संधि स्थगित रहेगी” जयशंकर ने राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा कि Indus Water Treaty (सिंधु जल संधि) को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। उन्होंने इसे “दुनिया का सबसे असाधारण समझौता” बताया, जिसमें भारत ने अपनी नदियों का पानी बिना अधिकार के पाकिस्तान को दिया। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। “अब पाकिस्तान अगर आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता है, तो सिंधु जल नहीं बहेगा। Blood and water cannot flow together.“ उन्होंने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के हितों की चिंता की थी, लेकिन भारतीय राज्यों की अनदेखी कर दी थी। Operation Sindoor के दौरान भारत का रुख स्पष्ट – “कोई मध्यस्थता नहीं” विदेश मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा करते हुए बताया कि जब यह अभियान शुरू हुआ तो कई देशों ने भारत से संपर्क किया कि स्थिति कितनी गंभीर है। लेकिन भारत ने सभी को यह स्पष्ट कर दिया कि: “हम किसी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करते। पाकिस्तान अगर लड़ाई रोकना चाहता है तो उसे डीजीएमओ के माध्यम से Request for Ceasefire करना होगा।” आतंकवाद को Global Agenda पर लाना – मोदी सरकार की उपलब्धि डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में आतंकवाद को Global Agenda पर लाने में सफलता पाई है। चाहे वह BRICS हो, SCO, QUAD या अन्य अंतरराष्ट्रीय मंच। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि 26 साल से वांछित आतंकवादी तहव्वुर राणा को भारत लाने में मोदी सरकार सफल रही है और अब उस पर मुकदमा चल रहा है। ट्रंप और मोदी कॉल पर विपक्ष को जवाब – “22 अप्रैल से 16 जून तक कोई कॉल नहीं हुई” डॉ. जयशंकर ने विपक्ष और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथनों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि 22 अप्रैल से 16 जून के बीच प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि झूठे प्रचार से बचें। भारत की नई विदेश नीति – आत्मनिर्भर और स्पष्ट जयशंकर का संबोधन केवल एक जवाब नहीं था, बल्कि यह देश की बदली हुई विदेश नीति का एलान था। अब भारत आत्मनिर्भर, स्पष्ट और Zero Tolerance for Terrorism की नीति पर चल रहा है।
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Russia Earthquake 2025, Kamchatka Tsunami Alert, Japan Evacuation, US Hawaii Tsunami, Kuril Islands Bhukamp, Pacific Ocean Earthquake, Desh Harpal World News

Russia Earthquake: रूस में आया 8.8 तीव्रता का भूकंप, 12 देशों में Tsunami Alert, Japan से Hawaii तक खतरे की घंटी

Russia में 8.8 तीव्रता का Earthquake आया, जिससे Kamchatka और Kuril Islands प्रभावित हुए। Japan, USA, New Zealand समेत 12 देशों में Tsunami Alert जारी। 🌊 रूस में शक्तिशाली Earthquake से कांपा पूरा प्रशांत क्षेत्र, Japan से लेकर अमेरिका तक Tsunami Alert जारी देश हरपल डेस्क | वर्ल्ड न्यूज़रूस के सुदूर पूर्वी प्रायद्वीप कामचटका (Kamchatka) में बुधवार तड़के दुनिया के छठे सबसे बड़े भूकंप ने दस्तक दी। इस 8.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने न केवल रूस बल्कि पूरे Northern Pacific को दहला दिया। USGS के अनुसार, भूकंप का केंद्र जमीन से 19.3 किलोमीटर नीचे था। इससे उठी 4 मीटर ऊंची सुनामी लहरों ने रूस के Kuril Islands और आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 12 से अधिक देशों में Tsunami Alerts जारी कर दिए गए हैं। रूस: Kuril Islands में आई पहली Tsunami लहर सेवेरो-कुरील्स्क (Severo-Kurilsk) में समुद्र का पानी शहर में घुस गया, जिससे कई घरों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय गवर्नर वालेरी लिमारेंको के अनुसार, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हालांकि, कोई बड़ी जनहानि की सूचना नहीं है। कामचटका के गवर्नर व्लादिमीर सोलोदोव ने बताया कि एक किंडरगार्टन को भी नुकसान पहुंचा है। कई लोग चिकित्सा सहायता के लिए अस्पतालों में पहुंचे हैं। जापान: 20 लाख लोगों की Evacuation, Nuclear Plants बंद Japan Meteorological Agency ने Tsunami की 40 सेमी ऊंची लहरों की पुष्टि की है, जो Hokkaido से Tokyo तक देखी गईं। NHK टेलीविजन के मुताबिक, जापान सरकार ने 2 मिलियन से अधिक लोगों को हटाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया है। Fukushima Nuclear Plant समेत कई परमाणु संयंत्रों में कार्य रोक दिया गया है और सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया है। अब तक किसी नुकसान की खबर नहीं है। अमेरिका: Hawaii और California समेत कई क्षेत्रों में चेतावनी Pacific Tsunami Warning Center ने अमेरिका के Hawaii, Alaska और California Coast को लेकर चेतावनी जारी की है। Ventura, Los Angeles, Santa Barbara, और San Luis Obispo काउंटियों में तेज लहरों की आशंका है। ओरेगन स्टेट ने भी तटीय इलाकों में रात 11:40 बजे के बाद 2 फीट तक की लहरें उठने की संभावना जताई है। New Zealand: Entire Coastline पर चेतावनी New Zealand Civil Defence ने समुद्र तटों से दूर रहने की सलाह दी है। चेतावनी दी गई है कि समुद्र में असामान्य और तेज धाराएं, अप्रत्याशित उछाल वाले ज्वार आ सकते हैं। अन्य देशों में भी Tsunami Alert देश स्थिति चीन पूर्वी तट पर 30 से 100 सेंटीमीटर ऊंची लहरों की आशंका। फिलीपींस 1 मीटर तक की संभावित लहरें, तटीय क्षेत्रों से दूर रहने की चेतावनी। इक्वाडोर गैलापागोस द्वीप समूह में तट खाली करने का आदेश। कनाडा ब्रिटिश कोलंबिया में अलर्ट। पेरू, मेक्सिको, ताइवान, इंडोनेशिया सभी तटीय क्षेत्रों को अलर्ट पर रखा गया है। इतिहास के सबसे शक्तिशाली भूकंपों में एक USGS के मुताबिक, यह भूकंप विश्व इतिहास के Top 10 सबसे शक्तिशाली Earthquakes में शामिल हो गया है। ⏰ भारतीय समयानुसार भूकंप का समय:बुधवार सुबह 4:54 AM 📍 भूकंप की तीव्रता:8.8 Magnitude 📍 गहराई:19.3 KM निष्कर्ष कामचटका से उठी इस भूचाल की लहरों ने एक बार फिर याद दिलाया कि प्रकृति की शक्ति के आगे कोई भी तैयारियां अपर्याप्त हो सकती हैं। वैज्ञानिकों और आपदा एजेंसियों की तत्परता ने जनहानि को सीमित रखने में मदद की है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। देश हरपल इस developing story पर नजर बनाए हुए है।
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Bhopal Heavy Rain, भोपाल जलभराव, Bhopal School Holiday, Bhopal Dam Water Level, बड़ा तालाब पानी लेवल, भोपाल मौसम अपडेट, कोलार रोड बारिश, इको ग्रीन पार्क जलभराव

Heavy Rain Alert: भोपाल में 18 घंटे की बारिश से जलभराव, स्कूल बंद, डैम्स की स्थिति गंभीर

भोपाल में लगातार 18 घंटे हुई भारी बारिश से शहर के कई हिस्सों में जलभराव हो गया है। इको ग्रीन पार्क, जानकी सोसायटी समेत अनेक इलाकों में हालात बिगड़े। स्कूलों की छुट्टी घोषित, बड़े तालाब समेत सभी डैम्स की स्थिति पर विशेष रिपोर्ट पढ़ें।भोपाल, देश हरपलभोपाल में बीते 18 घंटे से जारी भारी बारिश के चलते शहर के कई क्षेत्रों में गंभीर जलभराव की स्थिति बन गई है। सोमवार रात से शुरू हुई बारिश मंगलवार शाम तक लगातार जारी रही, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इको ग्रीन पार्क और कोलार रोड स्थित जानकी सोसायटी में 2 से 3 फीट तक पानी भर गया, और इको ग्रीन पार्क की लगभग 100 से ज्यादा घरों में पानी घुस चुका है। Waterlogging Ground Report: प्रशासन की टीम मौके पर कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर SDM रवीशकुमार श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। नगर निगम की टीम और फायर ब्रिगेड लगातार पंप के माध्यम से पानी निकालने का प्रयास कर रही है। इंडस टाउन समेत अशोका गार्डन, लिंक रोड नंबर-1, करोंद, नेहरू नगर जैसे इलाकों से भी जलभराव की सूचना सामने आई है। School Holiday Alert: बुधवार को स्कूल बंद भारी बारिश के मद्देनज़र बुधवार को भोपाल के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की छुट्टी घोषित कर दी गई है। कलेक्टर के आदेश पर DEO एनके अहिरवार ने स्कूल बंद रखने का निर्देश जारी किया है। डैम्स की स्थिति पर नजर: Water Level Updates Minal Residency, JK Road और भारत टॉकीज क्षेत्र में गाड़ियों की कतारें जेके रोड पर मिनाल रेजीडेंसी और सीवेट के सामने करीब दो फीट पानी जमा हो चुका है। वहीं, भारत टॉकीज से लेकर अल्पना तिराहा तक के रास्ते में भारी जलभराव की वजह से ट्रैफिक धीमा हो गया। भोपाल रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। 🔊 डैम गेट खोलने से पहले सायरन बजा, कलियासोत में टेस्टिंग शुरू कलियासोत डैम के एक गेट को टेस्टिंग के लिए खोला गया। सबसे पहले सायरन बजाकर लोगों को अलर्ट किया गया। भले ही यह टेस्टिंग थी, लेकिन इस मानसून में पहली बार डैम गेट खोला गया है। यदि बड़ा तालाब पूरी तरह भरता है तो भदभदा डैम के गेट खोले जाएंगे, जिससे पानी सीधे कलियासोत डैम में पहुंचेगा। भोपाल में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में साढ़े 4 इंच तक बारिश की संभावना जताई है। अब जबकि मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हुआ है, उम्मीद की जा रही है कि अगस्त के पहले हफ्ते में तालाब और डैम्स भर जाएंगे। निष्कर्ष:भोपाल में जारी भारी बारिश ने जहां राहत पहुंचाई है, वहीं जलभराव की स्थिति ने परेशानी भी बढ़ा दी है। प्रशासन अलर्ट मोड में है, लेकिन नागरिकों से सावधानी बरतने और आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने की अपील की गई है।
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Operation Sindoor: ‘जिन्हें भारत का पक्ष नहीं दिखता, उन्हें आईना दिखाने खड़ा हुआ हूं’, पीएम मोदी 

Operation Sindoor: पीएम मोदी ने संसद में खोला 9 तारीख की रात का राज, अमेरिका और पाकिस्तान को दी थी कड़ी चेतावनी नई दिल्ली, देश हरपल।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के तमाम सवालों का करारा जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को लेकर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा किया। पीएम ने पहली बार बताया कि कैसे 9 तारीख की रात अमेरिका के उपराष्ट्रपति लगातार एक घंटे तक उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे सेना के साथ महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त थे। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कहा, किसी ने ऑपरेशन रोकने की नहीं की कोशिश: पीएम मोदी प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि दुनिया के किसी भी नेता ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर को रोकने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि यह भारत के आत्मविश्वास और सैन्य ताकत का प्रमाण है। “ये विजयोत्सव आतंक के ठिकानों को मिट्टी में मिलाने का है। ये विजयोत्सव ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का है,” – पीएम मोदी इस पूरे घटनाक्रम में यह भी स्पष्ट हो गया कि भारत अब आतंक के खिलाफ सिर्फ बयान नहीं, एक्शन की नीति पर काम कर रहा है। विपक्ष पर निशाना: ‘विजयोत्सव’ को भी आलोचना का विषय बना दिया प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी हमला बोलते हुए कहा कि वे देश की सुरक्षा और सेना की जीत को भी राजनीति का विषय बना रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि यह समय एकजुट होकर भारत की ताकत दिखाने का है, ना कि सवाल उठाने का।
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Operation Sindoor, Rahul Gandhi Parliament Speech

Operation Sindoor in Parliament: राहुल गांधी का बड़ा हमला, बोला- आपने रात 1:35 पर पाकिस्तान को फोन क्यों किया?

Operation Sindoor पर राहुल गांधी ने संसद में उठाए सवाल, कहा- आपने पाकिस्तान को पहले ही युद्ध विराम का संदेश क्यों भेजा? नई दिल्ली, देश हरपल ब्यूरो: संसद में आज विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर चर्चा के दौरान सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने पाक प्रायोजित Pahalgam attack की कड़ी निंदा करते हुए भारतीय सेना के शौर्य की सराहना की, लेकिन साथ ही सरकार की रणनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर तीखे सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा, “पहलगाम में जो नृशंस हमला हुआ, वो पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रायोजित था। इस हमले में निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई, और इस सदन के हर सदस्य ने एकजुट होकर पाकिस्तान की आलोचना की।” उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही विपक्ष पूरी तरह से सरकार और सेना के साथ खड़ा था। सेना का सम्मान, पर सरकार की नीति पर सवाल राहुल गांधी ने कहा कि वह Karnal और Kanpur जाकर शहीदों के परिवारों से मिले और उनकी पीड़ा को महसूस किया। “जब मैं सेना के जवानों से हाथ मिलाता हूं, मुझे पता चल जाता है कि वह एक टाइगर है। हमारे सैनिक देश के लिए मरने को तैयार रहते हैं, लेकिन सरकार को भी उनके साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ खड़ा होना चाहिए।” “1:35 AM पर पाकिस्तान को कॉल करना क्या राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाता है?” राहुल गांधी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपने खुद बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 1:05 AM पर शुरू हुआ और 1:35 AM पर पाकिस्तान को फोन कर कहा गया कि हम गैर-सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। “आपने पाकिस्तान को बता दिया कि आप युद्ध नहीं चाहते। आपने उनकी वायु रक्षा प्रणाली पर हमला करने से मना किया। इससे क्या संदेश गया?” राहुल गांधी ने कहा कि इससे भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिन्ह लगते हैं। Air Force को ऑपरेशन की स्वतंत्रता क्यों नहीं दी गई? राहुल ने इंडोनेशिया के रक्षा विशेषज्ञ कैप्टन शिव कुमार का हवाला देते हुए कहा कि भारत ने कुछ विमान खोए क्योंकि हमारे पायलटों को पाकिस्तान की एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला न करने का आदेश मिला था। “जब आप युद्ध के मैदान में हों, तो वायुसेना को पूर्ण स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, जैसे 1971 में इंदिरा गांधी ने मानेकशॉ को दी थी।”
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Coach-Groundsman Clash: ओवल पिच पर गंभीर और क्यूरेटर में भिड़ंत, टीम इंडिया के कैंप में गर्मी

Team India के हेड कोच Gautam Gambhir और ओवल पिच क्यूरेटर Lee Fortis के बीच जोरदार बहस। इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम टेस्ट से पहले मैदान पर हुआ टकराव। जानिए पूरा मामला। पूरा मामला: कोच गंभीर और क्यूरेटर फोर्टिस में तीखी झड़प भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का अंतिम मुकाबला 31 जुलाई से लंदन के ओवल मैदान में खेला जाना है, लेकिन उससे पहले ही मैदान पर गरमा-गरमी का माहौल बन गया। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और ओवल के पिच क्यूरेटर ली फोर्टिस के बीच मंगलवार को विवाद इतना बढ़ गया कि गंभीर को गुस्से में फोर्टिस को जाने का इशारा करते हुए देखा गया। क्या था विवाद का कारण? ईएसपीएनक्रिकइंफो (source) के अनुसार, जब भारतीय टीम वैकल्पिक प्रैक्टिस सेशन के लिए ओवल पहुंची, तब फोर्टिस ने टीम के खिलाड़ियों को पिच के करीब आने से रोका। क्यूरेटर को चिंता थी कि पिच को नुकसान हो सकता है। इस दौरान भारतीय बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक बातचीत कर ही रहे थे कि गंभीर बीच में आ गए और फोर्टिस से कहने लगे: “आप हमें ये मत बताइए कि हमें क्या करना है। आप सिर्फ एक ग्राउंड्समैन हैं, अपनी हद में रहें।” वीडियो हुआ वायरल, कोटक ने दी सफाई इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला और गरमाया। इसके बाद कोच कोटक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सफाई दी कि उन्होंने और टीम ने रबर स्पाइक्स पहने हुए थे और वे बस विकेट को देखने गए थे। पिच से 2.5 मीटर दूर रहने की हिदायत उन्हें असामान्य लगी क्योंकि मैच अगले दिन था और मैदान पर कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया था। “यह कोई 200 साल पुराना धरोहर नहीं है जिसे छूना मना हो। हम सिर्फ पिच को देख रहे थे,” – कोटक। आखिर क्यों उभरा ये मुद्दा? कोटक के अनुसार, विवाद की असली जड़ बातचीत का लहजा था। उन्होंने इशारा किया कि जब आप विशेषज्ञों से बात करते हैं, तो भाषा और व्यवहार संतुलित होना चाहिए। यह मामला सिर्फ पिच नहीं, बल्कि पेशेवर सम्मान और कम्युनिकेशन पर भी सवाल उठाता है।
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Operation Sindoor: लोकसभा में प्रियंका गांधी का तीखा हमला, बोलीं – सरकार ने लोगों को भगवान भरोसे छोड़ दिया

नई दिल्ली, देश हरपल ब्यूरो।लोकसभा में मंगलवार को Operation Sindoor पर हुई बहस के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले को सुरक्षा में गंभीर चूक बताते हुए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की मांग की। प्रियंका गांधी ने संसद में सवाल उठाते हुए कहा, “पहलगाम की बायसरन घाटी में सुरक्षा क्यों नहीं थी? हजारों लोग वहां जाते हैं, क्या सरकार को इसका अंदाज़ा नहीं था? सरकार ने नागरिकों को भगवान भरोसे छोड़ दिया।” उन्होंने तीखे लहजे में पूछा कि जब वहां कोई सुरक्षा बल मौजूद नहीं था, तो जिम्मेदारी कौन लेगा? जनता भगवान भरोसे, सरकार प्रचार में व्यस्त: प्रियंका प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार केवल इवेंट और प्रचार में व्यस्त है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। “इस सरकार को जनता की चिंता नहीं, सिर्फ अपनी छवि की पड़ी है। जनता के सवालों से ये सरकार हमेशा बचती है।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही होती है, लेकिन यहां सिर्फ बहानों और पुराने इतिहास की बातें करके वर्तमान की ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ा जा रहा है। TRF को लेकर भी घेरा, पूछा- किसकी ज़िम्मेदारी? प्रियंका गांधी ने जम्मू-कश्मीर में हमले के लिए ज़िम्मेदार आतंकी संगठन TRF (The Resistance Front) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “TRF ने कई हमले किए, लेकिन उसे 2023 में आतंकी संगठन घोषित किया गया। क्या सरकार को पहले इसकी भनक तक नहीं लगी?” उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्री या खुफिया एजेंसियों ने अब तक कोई जवाबदेही ली? “क्या किसी ने इस्तीफा दिया? खुफिया विभाग गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है — इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने यह भी जोड़ा कि 11 वर्षों से केंद्र में एक ही सरकार है, फिर ज़िम्मेदारी से कैसे भागा जा सकता है? अमित शाह को लेकर तीखे तंज प्रियंका गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह के भाषण पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे पंडित नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी के आंसुओं की बात तो करते हैं, लेकिन सीजफायर के फैसले पर चुप हैं। उन्होंने पूछा, “जब हमारे जवान शहीद हो रहे हैं, तब संघर्षविराम क्यों घोषित किया गया? क्या यह जनता और सेना के हित में था या कोई राजनीतिक मजबूरी?” उन्होंने कहा कि देश के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। निष्कर्ष: Operation Sindoor के बहाने संसद में विपक्ष ने सरकार की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए हैं। प्रियंका गांधी के इस हमले से सत्तापक्ष को जवाब देना कठिन होता जा रहा है। क्या सरकार अब इन आरोपों पर कोई सफाई देगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
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Operation Sindoor: Lok Sabha में गरजे अमित शाह, बोले– पाकिस्तान को बचाने में क्यों लगी है कांग्रेस?

Operation Sindoor पर लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने पी. चिदंबरम के बयान पर तीखा हमला बोला। बोले- कांग्रेस पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश कर रही है। आतंकियों की पहचान हो चुकी है, मददगार पकड़े गए हैं। Operation Sindoor पर लोकसभा में मंगलवार को गहमागहमी देखने को मिली। गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन रखते हुए कांग्रेस और विशेष रूप से पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “चिदंबरम पाकिस्तान को क्लीन चिट देने की कोशिश कर रहे हैं और यह बयान देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।” “पाकिस्तान को क्यों बचा रही है कांग्रेस?” – शाह का सीधा सवाल गृह मंत्री ने चिदंबरम के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या पुख्ता सबूत है कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे। शाह ने जवाब में कहा, “हमारे पास सबूत हैं – मारे गए आतंकियों के पास पाकिस्तान की बनी चॉकलेट, वोटर ID और हथियार मिले हैं। उनके मददगारों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।” 22 अप्रैल के हमले के बाद कैसे शुरू हुआ ऑपरेशन सिंदूर? शाह बोले – आतंकवादी मारे गए लेकिन विपक्ष को दुःख है अमित शाह ने कहा, “जब हमने तीन आतंकियों को मारा तो अपेक्षा थी कि पूरे सदन में संतोष होगा, लेकिन विपक्ष के चेहरों पर स्याही छा गई। ऐसा लगता है उन्हें आतंकियों के मारे जाने से दुख है।” 💣 100 KM अंदर घुसकर किया गया पाकिस्तान में हमला – शाह का बड़ा दावा शाह ने कहा कि इस बार की कार्रवाई PoK नहीं बल्कि पाकिस्तान की ज़मीन पर 100 किलोमीटर अंदर घुसकर की गई। उन्होंने बताया कि इसमें हाफिज मोहम्मद जमील, मुदस्सर खादियान और याकूब मलिक जैसे खूंखार आतंकवादी मारे गए। उन्होंने दावा किया कि इस बार सिर्फ आतंकियों के 9 अड्डे तबाह किए गए, कोई सिविलियन नहीं मारा गया। सीजफायर क्यों हुआ? शाह ने बताया कारण 8 मई को पाकिस्तान की ओर से रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी के जवाब में भारत ने 9 मई को एयरबेस को टारगेट किया। पाकिस्तान के DGMOs ने 10 मई को फोन कर संघर्ष विराम की मांग की, जिसे भारत ने शाम 5 बजे स्वीकार किया। इतिहास का हवाला: नेहरू और कांग्रेस की भूलें गिनाईं अमित शाह ने कहा, “1948 में नेहरू के एकतरफा सीजफायर ने PoK को स्थायी कर दिया। 1971 के युद्ध में 93 हजार युद्धबंदियों और जीती हुई जमीन को भी कांग्रेस सरकार ने लौटा दिया। सिंधु जल संधि में भी 80% पानी पाकिस्तान को दे दिया गया। क्या यही नीति राष्ट्रहित की थी?” पोटा पर कांग्रेस का विरोध – आतंकवाद को समर्थन? शाह ने बताया कि 2002 में POTA (Prevention of Terrorism Act) लाया गया था जिसे कांग्रेस ने गिरा दिया। 2004 में सत्ता में आते ही इसे हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस वोटबैंक के लिए आतंकियों को बचाती रही है। निष्कर्ष: ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में हुई चर्चा ने एक बार फिर आतंकवाद पर राजनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया है। जहां सरकार ने इसे ‘स्ट्रेटजिक मास्टरस्ट्रोक’ बताया, वहीं विपक्ष ने सवाल उठाए। लेकिन गृह मंत्री ने तथ्यों, सबूतों और ऐतिहासिक संदर्भों से अपना पक्ष स्पष्ट किया।
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Heavy Rain Alert: मध्यप्रदेश के 25 जिलों में भारी बारिश, कई नदियां उफान पर, स्कूलों में छुट्टी

मध्यप्रदेश के 25 जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, नीमच सहित कई जिलों में जलभराव और नदियों के उफान से जनजीवन प्रभावित। जानें जिलेवार स्थिति।प्रदेश के कई जिलों में बारिश का कहर, जलभराव से लोग बेहाल मध्यप्रदेश में मॉनसून एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुका है। राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, नीमच, गुना सहित 25 से ज्यादा जिलों में लगातार बारिश हो रही है। कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं रिमझिम बूंदाबांदी का सिलसिला जारी है। बारिश से नर्मदा, गाडगंगा, ब्राह्मणी, और ताल जैसी प्रमुख नदियां उफान पर हैं, जिससे सड़कों पर जलभराव, पुल बंद, और स्कूलों की छुट्टियों की नौबत आ गई है। जिलेवार बारिश और उससे जुड़ी मुख्य घटनाएं शाजापुर, पचमढ़ी, नर्मदापुरम, खरगोन, रतलाम, बालाघाट, सिंगरौली जैसे जिलों में भी रुक-रुक कर बारिश जारी है। भोपाल में सोमवार सुबह से रिमझिम बारिश हो रही है। IMD ने Yellow Alert जारी किया है। राजगढ़ के खिलचीपुर में गाडगंगा नदी उफान पर है, शहर में कई घर और दुकानें जलमग्न हो गए। ब्यावरा में नाले में जलस्तर बढ़ने से घुरेल मार्ग बंद हो गया है। नीमच जिले के सिंगोली क्षेत्र में ब्राह्मणी और ताल नदी के उफान से नीमच-कोटा हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। गुना में अलर्ट के चलते 8वीं तक के स्कूलों में मंगलवार को छुट्टी घोषित की गई है। शिवपुरी में सिद्धेश्वर मंदिर मार्ग पर दो मगरमच्छ खुलेआम घूमते नजर आए। राहगीर ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया। सीहोर के इच्छावर में झरने में डूबे दो छात्रों के शव सोमवार को बरामद हुए। मंदसौर के भानपुरा में ‘बड़े महादेव झरने’ पर प्रशासनिक रोक के बावजूद लोग रील्स बनाते दिखे।
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अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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