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RSS : दिल्ली में शुरू हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक, मोहन भागवत देंगे मार्गदर्शन

RSS meeting 2025 : अखिल भारतीय स्तर पर संघ का मंथन, दिल्ली बना केंद्र राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक 4 से 6 जुलाई तक केशव कुंज, दिल्ली में आयोजित हो रही है। इसमें मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले सहित संघ के शीर्ष नेतृत्व द्वारा संगठनात्मक कार्यों पर विचार किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की All India Prant Pracharak Meeting 2025 का आयोजन देश की राजधानी दिल्ली स्थित केशव कुंज में 04 से 06 जुलाई तक हो रहा है। तीन दिवसीय इस संगठनात्मक बैठक में संघ के शीर्ष नेतृत्व समेत अखिल भारतीय स्तर के प्रमुख कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। बैठक में पूजनीय सरसंघचालक मोहन भागवत जी, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी, सभी सह सरकार्यवाह और विभिन्न कार्य विभागों के प्रमुख उपस्थित हैं। इसके साथ ही संघ प्रेरित 32 विभिन्न संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री भी इस चर्चा का हिस्सा हैं। क्या होगी इस बैठक की खास बातें? कौन-कौन होते हैं शामिल? बैठक में संगठनात्मक कार्यों से जुड़े वरिष्ठ प्रचारक, सभी प्रांत प्रचारक, सह-प्रांत प्रचारक, विभाग प्रचारक के साथ-साथ आरएसएस प्रेरित संगठनों जैसे –विद्या भारती, सेवा भारती, भारत विकास परिषद, विश्व हिंदू परिषद (VHP), भारतीय मजदूर संघ (BMS), भारतीय किसान संघ (BKS) आदि के संगठन मंत्री भी मौजूद रहते हैं। क्या होता है ‘केशव कुंज’ का महत्व? दिल्ली का केशव कुंज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक स्थान है, जिसे संघ के दिल्ली क्षेत्र का मुख्यालय माना जाता है। कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय और विचार मंथन यहीं होते रहे हैं। कब-कब होती है यह बैठक? अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक हर वर्ष जुलाई माह के शुरुआत में होती है। इसी तरह से संघ के अन्य वार्षिक कार्यक्रमों में मार्च-अप्रैल में ‘अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा’ और अक्टूबर में कार्यकारी मंडल बैठक प्रमुख होती है। संगठनात्मक चर्चा, कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं इस बैठक में केवल संगठन के कामकाज, सामाजिक कार्यों, प्रचारकों के अनुभवों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा होती है। किसी प्रकार का राजनीतिक एजेंडा या चुनावी रणनीति तय नहीं होती। निष्कर्ष: संगठन की मजबूती के लिए सतत संवाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह बैठक कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शन का बड़ा अवसर होती है। इसमें संगठन के विभिन्न पहलुओं पर गहराई से मंथन कर समाज और राष्ट्र के हित में आगे की योजनाएं बनाई जाती हैं।
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Slice Bank UPI ATM, India first UPI ATM,

Game Changing! Slice Bank ने लॉन्च किया India का 1st UPI ATM, अब बिना कार्ड के निकलेगा कैश

भारत की फिनटेक दुनिया में एक और बड़ा इनोवेशन हुआ है। Slice Bank ने देश का पहला UPI ATM लॉन्च कर दिया है। अब आप बिना डेबिट कार्ड के सिर्फ अपने फोन से QR Code स्कैन कर के कैश निकाल सकेंगे। इस कदम को भारतीय बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक game-changing innovation माना जा रहा है। क्या है UPI ATM और कैसे करता है काम? यह कोई साधारण ATM नहीं है। UPI ATM एक ऐसा स्मार्ट ATM है जिसमें आपको न तो डेबिट कार्ड लगाने की जरूरत है और न ही PIN डालने की। बस UPI ऐप (जैसे कि PhonePe, Google Pay, Paytm आदि) से QR Code स्कैन करिए और तुरंत कैश निकालिए। UPI ATM से पैसे निकालने का तरीका: Cash Deposit की सुविधा भी जल्द: Slice Bank के मुताबिक मशीन में UPI से cash deposit की सुविधा भी हैं । क्यों खास है Slice Bank का UPI ATM? ✅ बिना कार्ड के कैश निकालने की सुविधा।✅ भारत के डिजिटल पेमेंट को और accessible बनाना।✅ ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में banking सुविधा पहुंचाना।✅ फास्ट और secure transactions। भारत में Fintech का बढ़ता दायरा भारत दुनिया का सबसे बड़ा UPI मार्केट बन चुका है। NPCI के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 तक भारत में UPI के जरिए प्रतिदिन 1,200 मिलियन से ज्यादा transactions हो रही हैं। अब UPI ATM के आने से cash withdrawal का तरीका भी पूरी तरह बदलने जा रहा है। Slice Bank कौन है? Slice Bank एक नया-age Fintech platform है, जिसने youth को target करते हुए credit cards, payment apps और BNPL (Buy Now Pay Later) services में नाम कमाया है। अब UPI ATM के जरिए company banking sector में भी बड़ी शुरुआत कर रही है।
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BSNL Profit Comeback

BSNL Profit Comeback: 17 साल बाद भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में ऐतिहासिक वापसी

नई दिल्ली।देश की सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL (भारत संचार निगम लिमिटेड) ने आखिरकार 17 सालों के लंबे घाटे के दौर को पीछे छोड़ते हुए 2024 में मुनाफे की पटरी पर जबरदस्त वापसी की है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2023-24 की तीसरी तिमाही में ₹262 करोड़ और चौथी तिमाही में ₹280 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज कर टेलीकॉम इंडस्ट्री को चौंका दिया है। यह उपलब्धि केवल BSNL के लिए आर्थिक सुधार का संकेत नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विज़न के तहत टेलीकॉम क्षेत्र में सरकारी कंपनियों की मजबूत वापसी का भी प्रतीक है। BSNL के Revival का सफर लंबे समय से घाटे में चल रही BSNL के turnaround के पीछे कई बड़े कदम जिम्मेदार रहे हैं— आर्थिक स्थिति में सुधार के आंकड़े तिमाही मुनाफा (₹ करोड़ में) Q3 FY24 ₹262 करोड़ Q4 FY24 ₹280 करोड़ कुल ₹542 करोड़ इन आंकड़ों से साफ है कि BSNL ने अब स्थायी रूप से लाभ कमाने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। Made in India Network: आत्मनिर्भरता की मिसाल BSNL की सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का बेहतरीन उदाहरण बन रही है। कंपनी ने अपनी अधिकतर टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर ‘Made in India’ उपकरणों पर आधारित रखा है। Private Players को चुनौती BSNL की इस वापसी से Jio, Airtel और Vodafone Idea जैसी प्राइवेट कंपनियों के लिए भी कॉम्पिटिशन बढ़ा है। जहां एक तरफ ये कंपनियां 5G के विस्तार में लगी हैं, वहीं BSNL सस्ते और ग्रामीण फोकस्ड पैक्स के जरिए अपने यूज़र बेस को तेजी से बढ़ा रही है। आगे की रणनीति क्या होगी? सूत्रों के मुताबिक, BSNL अब जल्द ही 5G नेटवर्क rollout की तैयारी कर रही है और आने वाले दो सालों में भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ा टेलीकॉम नेटवर्क बनने का लक्ष्य लेकर चल रही है। निष्कर्ष BSNL की इस शानदार वापसी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सरकारी कंपनियां सही रणनीति के साथ आगे बढ़ें तो वे भी प्राइवेट सेक्टर को टक्कर दे सकती हैं। आने वाले समय में BSNL की यह ग्रोथ इंडियन टेलीकॉम सेक्टर के भविष्य के लिए बेहद सकारात्मक स
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kabaddi player

कुत्ते के पिल्ले के काटने से State level kabaddi player की मौत

State level kabaddi player Brajesh Solanki from Bulandshahr died tragically a month after being bitten by a puppy. He ignored anti-rabies injection, leading to rabies infection. जानिए पूरा मामला इस रिपोर्ट में। Bulandshahr (देश हरपल ब्यूरो)।State-level kabaddi player Brajesh Solanki की दुखद मौत ने सभी को झकझोर दिया है। मौत की वजह जानकर हर कोई हैरान है—1 महीने पहले एक कुत्ते के पिल्ले ने उन्हें काटा था, और उन्होंने एंटी रेबीज़ इंजेक्शन नहीं लगवाया। ये लापरवाही उनके जीवन का अंत बन गई। गांव फराना, खुर्जा नगर कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले ब्रजेश सोलंकी उत्तर प्रदेश के उभरते हुए कबड्डी खिलाड़ियों में गिने जाते थे। खेल में शानदार प्रदर्शन के चलते वे स्टेट लेवल पर अपनी पहचान बना चुके थे। लेकिन एक छोटे से कुत्ते के पिल्ले के साथ दया दिखाना उनकी जिंदगी पर भारी पड़ गया। क्या हुआ था उस दिन?करीब एक माह पहले, गांव की सड़क पर एक नन्हा पिल्ला फंसा हुआ था। ब्रजेश ने इंसानियत दिखाते हुए उसकी जान बचाई। उसी दौरान पिल्ले ने उन्हें काट लिया। काटने के बाद परिवारवालों और दोस्तों ने उन्हें एंटी रेबीज़ इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने बात को हल्के में ले लिया। रेबीज़ के लक्षण और मौत से पहले की हालत:मौत से पहले सामने आए एक वायरल वीडियो में ब्रजेश असहनीय पीड़ा में दिख रहे हैं। वे बार-बार कह रहे हैं कि उन्हें पानी पीने में तकलीफ हो रही है, जो कि रेबीज़ का सबसे प्रमुख लक्षण होता है। डॉक्टर्स की मानें तो अगर उस वक्त इंजेक्शन लगवा लिया जाता, तो ब्रजेश की जान बच सकती थी। रेबीज़ एक जानलेवा बीमारी है, जो जानवरों के काटने से इंसानों में फैलती है। WHO के अनुसार हर साल लाखों लोग इसकी चपेट में आते हैं, लेकिन समय पर इलाज से इसे रोका जा सकता है। सबक जो हर किसी को समझना चाहिए
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Trump vs Musk 2025

Trump vs Musk: सब्सिडी, EV और ‘Big Beautiful Bill’ पर छिड़ा अमेरिकी पावर वॉर

ट्रम्प बनाम मस्क: अमेरिका में सब्सिडी और भविष्य की जंग वॉशिंगटन – अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और टेस्ला- स्पेसX के CEO एलन मस्क के बीच ज़ुबानी जंग और नीतिगत टकराव खुलकर सामने आ गया है। ताज़ा मामला ट्रम्प के ‘Big Beautiful Bill’ और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सब्सिडी को लेकर उठ खड़ा हुआ है “सब्सिडी बंद, तो मस्क की दुकान बंद” – ट्रम्प का तंज मंगलवार को मीडिया से बातचीत में डोनाल्ड ट्रम्प ने सीधा निशाना साधते हुए कहा, “अगर मस्क को मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाए, तो उन्हें अपनी दुकान समेटकर दक्षिण अफ्रीका लौटना पड़ेगा।” ट्रम्प ने कहा कि इन सरकारी अनुदानों के बिना टेस्ला इलेक्ट्रिक कार नहीं बना पाएगी और न ही स्पेसX अपने रॉकेट या सैटेलाइट लॉन्च कर पाएगी। उन्होंने Department of Government Efficiency (DoGE) को इस मामले की जांच करने का सुझाव दिया ताकि टैक्सपेयर्स के पैसे की बचत की जा सके। मस्क का पलटवार – “ट्रम्प का बिल पागलपन है” टेस्ला और स्पेसX के CEO एलन मस्क ने ट्रम्प के ‘Big Beautiful Bill’ को शनिवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर आड़े हाथों लिया। “यह कानून पूरी तरह से पागलपन है। यह अमेरिका में लाखों नौकरियां खत्म कर देगा और हमारे फ्यूचर इंडस्ट्रीज को खत्म कर देगा।” मस्क ने इसी विवाद के चलते पिछले महीने DoGE प्रमुख पद से इस्तीफा भी दे दिया था। सीनेट में पास हुआ Big Beautiful Bill पर बहस का प्रस्ताव अमेरिकी सीनेट ने इस बिल पर चर्चा शुरू करने की अनुमति दे दी है। 51-49 के वोटों से यह प्रस्ताव पास हुआ। दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी इसके खिलाफ वोट दिया। ट्रम्प चाहते हैं कि 4 जुलाई से पहले इस बिल को पारित कर दिया जाए। इस बिल में टैक्स और सरकारी खर्च में कटौती के प्रावधान हैं, लेकिन मस्क का कहना है कि यह फॉसिल फ्यूल आधारित पुराने उद्योगों को बढ़ावा देता है जबकि भविष्य की तकनीक को नुकसान पहुंचाता है। ट्रम्प vs मस्क: टकराव की पृष्ठभूमि दोनों के बीच विवाद तब और बढ़ गया जब ट्रम्प ने एक रैली में कहा, “मैं EV मैंडेट के खिलाफ हूं। मस्क को यह पहले से पता था। इलेक्ट्रिक गाड़ियां अच्छी हो सकती हैं, लेकिन लोगों को जबरन इन्हें खरीदने पर मजबूर करना गलत है।” इसके जवाब में मस्क ने सोशल मीडिया पर ट्रम्प को “एहसान फरामोश” तक कह डाला और दावा किया कि यदि वो समर्थन न करते, तो ट्रम्प पिछला चुनाव हार जाते। क्या है ‘Big Beautiful Bill’? यह बिल अमेरिका में पुराने इंडस्ट्री सेक्टर्स (जैसे कोल और ऑयल) को टैक्स राहत देने के साथ-साथ सरकार के खर्चों में भारी कटौती की बात करता है। ट्रम्प का मानना है कि इससे अमेरिका की चीन पर निर्भरता घटेगी, जबकि मस्क का मानना है कि इससे अमेरिका की तकनीकी बढ़त खत्म हो जाएगी। सोशल मीडिया वॉर: Truth Social बनाम X इस विवाद ने सोशल मीडिया पर भी तूफान ला दिया। ट्रम्प ने अपने Truth Social अकाउंट से मस्क पर कई हमले किए, वहीं मस्क ने X पर ट्रम्प को पुराने वक्तों की याद दिलाते हुए कई ट्वीट्स किए। निष्कर्ष: ट्रम्प बनाम मस्क – सिर्फ विचारधारा नहीं, भविष्य की लड़ाई ये टकराव सिर्फ दो प्रभावशाली लोगों की तकरार नहीं है। यह अमेरिका की भविष्य की दिशा तय करने वाली बहस है – क्या देश पुराने इंडस्ट्री मॉडल पर चलेगा या फिर नवाचार और टेक्नोलॉजी को प्राथमिकता देगा?
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MP BJP

हेमंत खंडेलवाल निर्विरोध बने मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष

सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने भरवाया हेमंत खंडेलवाल का नामांकन फार्म
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India vs England Birmingham Test 2025

India vs England: Birmingham Test में 3 बड़े बदलाव संभव, Playing-11 में Nitish Reddy और Washington की एंट्री तय!

India vs England: Birmingham Test एजबेस्टन में वापसी की उम्मीदें: भारत 3 बड़े बदलावों के साथ उतरेगा बर्मिंघम टेस्ट में बैटिंग में साई की छुट्टी? करुण नायर नंबर 3 पर! लीड्स टेस्ट की पहली पारी में दोनों ही बल्लेबाज (साई और करुण) खाता नहीं खोल सके थे, और दूसरी पारी में भी कोई बड़ी पारी नहीं आई। अब संभावना है कि करुण नायर को एक और मौका मिल सकता है, जबकि साई सुदर्शन को ड्रॉप किया जा सकता है। यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, शुभमन गिल और ऋषभ पंत ने पिछली टेस्ट में शतक जड़े थे, जिससे शीर्ष क्रम लगभग तय ह ऑलराउंड डिपार्टमेंट में 2 बदलाव तय! लीड्स टेस्ट में भारत की हार की एक बड़ी वजह ऑलराउंडर्स का फ्लॉप प्रदर्शन रहा। पिछले मैच में टीम इंडिया ने गेंदबाजी में बुमराह की वापसी तय नहीं, कुलदीप को मौका? जसप्रीत बुमराह की फिटनेस पर अब भी संशय बना हुआ है। टीम के असिस्टेंट कोच रायन टेन डोशेट ने साफ किया है कि “बुमराह उपलब्ध हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अगले 24 घंटे में होगा।” वहीं, कुलदीप यादव की वापसी तय मानी जा रही है। तेज गेंदबाजी अटैक में सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और यदि फिट हुए तो बुमराह को ही बरकरार रखा जाएगा। भारत की संभावित प्लेइंग-11 – बर्मिंघम टेस्ट 2025 एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में पहला टेस्ट 5 विकेट से हार चुकी भारतीय टीम अब सीरीज में वापसी की तैयारी में जुट गई है। 2 जुलाई से एजबेस्टन (Birmingham) में शुरू होने जा रहे दूसरे टेस्ट में टीम इंडिया अपनी Playing-11 में 3 बड़े बदलाव के साथ उतर सकती है। सूत्रों की मानें तो टॉप ऑर्डर बल्लेबाज साई सुदर्शन, ऑलराउंडर शार्दूल ठाकुर और रवींद्र जडेजा को बाहर बैठाया जा सकता है। इनकी जगह बैटिंग ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्‌डी, वॉशिंगटन सुंदर, और कुलदीप यादव को मौका मिलने की संभावना है। बैटिंग में साई की छुट्टी? करुण नायर नंबर 3 पर! लीड्स टेस्ट की पहली पारी में दोनों ही बल्लेबाज (साई और करुण) खाता नहीं खोल सके थे, और दूसरी पारी में भी कोई बड़ी पारी नहीं आई। अब संभावना है कि करुण नायर को एक और मौका मिल सकता है, जबकि साई सुदर्शन को ड्रॉप किया जा सकता है। यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, शुभमन गिल और ऋषभ पंत ने पिछली टेस्ट में शतक जड़े थे, जिससे शीर्ष क्रम लगभग तय है ऑलराउंड डिपार्टमेंट में 2 बदलाव तय! लीड्स टेस्ट में भारत की हार की एक बड़ी वजह ऑलराउंडर्स का फ्लॉप प्रदर्शन रहा। गेंदबाजी में बुमराह की वापसी तय नहीं, कुलदीप को मौका? जसप्रीत बुमराह की फिटनेस पर अब भी संशय बना हुआ है। टीम के असिस्टेंट कोच रायन टेन डोशेट ने साफ किया है कि “बुमराह उपलब्ध हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अगले 24 घंटे में होगा।” वहीं, कुलदीप यादव की वापसी तय मानी जा रही है। तेज गेंदबाजी अटैक में सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और यदि फिट हुए तो बुमराह को ही बरकरार रखा जाएगा। भारत की संभावित प्लेइंग-11 – बर्मिंघम टेस्ट 2025 क्रम खिलाड़ी भूमिका 1. यशस्वी जायसवाल ओपनर 2. केएल राहुल ओपनर 3. करुण नायर टॉप ऑर्डर बैटर 4. शुभमन गिल (कप्तान) मिडिल ऑर्डर 5. ऋषभ पंत (विकेटकीपर) मिडिल ऑर्डर 6. नीतीश कुमार रेड्‌डी बैटिंग ऑलराउंडर 7. वॉशिंगटन सुंदर स्पिन ऑलराउंडर 8. कुलदीप यादव लेग स्पिनर 9. मोहम्मद सिराज तेज गेंदबाज 10. प्रसिद्ध कृष्णा तेज गेंदबाज 11. जसप्रीत बुमराह (यदि फिट) तेज गेंदबाज/कैप्टन मटेरियल 🏴 इंग्लैंड की अटूट प्लेइंग-11 इंग्लिश टीम अपनी जीत वाली प्लेइंग-11 के साथ ही मैदान में उतरेगी: Stokes (C), Crawley, Duckett, Pope, Root, Brook, Smith (WK), Woakes, Bashir, Josh Tongue, Brydon Car निष्कर्ष: इंग्लैंड की अटूट प्लेइंग-11 इंग्लिश टीम अपनी जीत वाली प्लेइंग-11 के साथ ही मैदान में उतरेगी: Stokes (C), Crawley, Duckett, Pope, Root, Brook, Smith (WK), Woakes, Bashir, Josh Tongue, Brydon Carse भारत के लिए यह टेस्ट करो या मरो जैसा है। यदि गिल की कप्तानी में टीम इंडिया वापसी करना चाहती है तो एजबेस्टन में नया कॉम्बिनेशन आज़माना ही होगा।
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Gen Z और पॉडकास्टिंग का रिश्ता: नया ट्रेंड या सच्चा प्यार?

🎧 Gen Z का नया प्यार: पॉडकास्ट — जहां बातें बनती हैं, रिश्ते गहराते हैं!

🗓️ 28 जून 2025 | देश हरपल डेस्क | युवा संवाद कभी चाय, कभी चैट… और अब पॉडकास्ट!Gen Z अब न तो टीवी का इंतज़ार करती है और न ही अखबार का। इनकी दुनिया बस एक “प्ले बटन” में सिमट गई है। जहाँ पहले “कुल्फी-चाट” सुकून देती थी, अब वही राहत स्पॉटिफाई की आवाज़ों में मिलती है। हाँ जनाब, बात हो रही है पॉडकास्ट की!पॉडकास्ट — जो पहले रेडियो का कूल वर्जन था, अब Gen Z की पहचान बन गया है। “पॉडकास्ट सुनते हैं, क्योंकि यही आजकल पर्सनैलिटी का पासपोर्ट है!”— दर्शन एस., 24 वर्षीय वकील, चेन्नई पॉडकास्ट: बस सुनो और अपनाओ इन आवाज़ों में वो ‘फॉर्मल इंटरव्यू’ वाली बोरियत नहीं, बल्कि कॉलेज कैंटीन की सी खुलापन है। पॉडकास्ट अब Gen Z के लिए म्यूजिक से ज़्यादा, वीडियो से बेहतर और स्क्रॉलिंग से शांत है। पॉडकास्टर्स: अब सिर्फ़ क्रिएटर नहीं, क्रांतिकारी हैं चेन्नई की Safa Salsabeel Z., 22 वर्षीय साहित्य छात्रा हैं, लेकिन 7 पॉडकास्ट शो की ‘रचयिता’ भी।विषय? “ये कोई टाइम पास नहीं… ये तो सबसे तेज़ रचनात्मक विद्रोह है!”— सफा ज़ेड. Gen Z सुनता क्या है? “Perfect एडिटिंग नहीं चाहिए, दिल से निकली बातें चाहिए।”— कहती हैं आज की युवा पीढ़ी। उनके पसंदीदा टॉपिक्स: मतलब ये कि जब Gen Z ‘शावर’ में होती है, दिमाग पॉडकास्ट बना रहा होता है! प्लेटफॉर्म वही, लेकिन इस्तेमाल नया Spotify, YouTube — सब इनके पसंदीदा अड्डे हैं, लेकिन वीडियो नहीं, बोलने वाला कंटेंट ज़्यादा मायने रखता है। “पॉडकास्ट में हमारे फेवरेट क्रिकेटर भी उतने रियल लगते हैं, जितने गली के चायवाले अंकल!”— दर्शन एस. पॉडकास्ट का असली जादू क्या है? देश हरपल की राय:Gen Z को समझना हो तो उनके पॉडकास्ट सुनिए। ये युवा अब आवाज़ों के सहारे अपना आइडेंटीटी गढ़ रहा है। और शायद यही आने वाले भारत की सबसे सटीक गूंज है। “The Hindu” के लेख “Here’s why Gen Z finds comfort in podcasts” पर आधारित
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mobile voting in Bihar

Mobile e-Voting: बिहार में मोबाइल से होगा मतदान

Mobile e-Voting बिहार ने देश में पहली बार नगर निकाय चुनावों के लिए मोबाइल एप से वोटिंग की शुरुआत की है। जानिए कैसे काम करता है यह ब्लॉकचेन बेस्ड e-Voting सिस्टम और कौन-कौन कर सकता है इसका उपयोग। पटना | देश हरपल डेस्क:भारत के लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, बिहार पहला राज्य बन गया है, जहां नगर निकाय चुनावों में मोबाइल ऐप से ई-वोटिंग (e-Voting) को अनुमति दी गई है। इस डिजिटल वोटिंग प्रणाली की शुरुआत 28 जून 2025 को पटना, रोहतास और पूर्वी चंपारण जिलों की 6 नगर परिषदों में की गई है। यह प्रणाली विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, गर्भवती महिलाओं और प्रवासी वोटर्स के लिए राहत लेकर आई है, जो किसी कारणवश मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते। कैसे काम करता है यह Secure e-Voting सिस्टम? इस मोबाइल वोटिंग सिस्टम को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी (Blockchain Technology) और फेस रिकग्निशन (Face Recognition) जैसे अत्याधुनिक तकनीकों से सुरक्षित बनाया गया है। सुरक्षा के विशेष इंतजाम: कैसे करें ई-वोटिंग के लिए रजिस्ट्रेशन? ई-वोटिंग के लिए e-SECBHR मोबाइल ऐप डाउनलोड करें (फिलहाल यह केवल एंड्रॉयड पर उपलब्ध है): यह सुविधा किनके लिए है? क्या विधानसभा चुनावों में होगा इसका प्रयोग? राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने कहा कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसकी सफलता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा कि क्या इसे आगामी विधानसभा चुनावों में लागू किया जा सकता है। यह कदम न केवल लोकतंत्र को तकनीकी रूप से उन्नत बना रहा है, बल्कि उन लाखों लोगों को भी जोड़ने की दिशा में है जो पारंपरिक वोटिंग में भाग नहीं ले पाते। देश हरपल की राय: बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की यह पहल निश्चित ही डिजिटल इंडिया मिशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यदि यह प्रयोग सफल होता है तो भविष्य में पूरे देश में इस तकनीक को अपनाया जा सकता है। आपकी क्या राय है? क्या आप मोबाइल से वोट डालने के इस नए सिस्टम को अपनाएंगे?कमेंट कर बताएं, और यह खबर अपने दोस्तों से शेयर करें
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Dr. Sachin Chittawar

Free Diabetes & Hormone Check-up Camp : डायबिटीज और हार्मोन जांच अब बिना खर्च के

डायबिटीज और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं के लिए मुफ्त जांच व परामर्श शिविरसागर। मधुमेह और हार्मोन से जुड़ी समस्याओं के निदान और परामर्श हेतु डॉ. सचिन चित्तावार के “360 डिग्री डायबिटीज केयर” द्वारा आगामी रविवार, 29 जून 2025 को एक निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर सागर जिले के तिली क्षेत्र में स्थित सागर मेडिकल एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स (तिली अस्पताल के सामने, रूद्राक्ष पेट्रोल पंप के पास) पर प्रातः 8 बजे से 2 बजे तक आयोजित होगा। शिविर में आने वाले मरीजों को मुफ्त ब्लड शुगर टेस्ट, थायरॉइड एवं हार्मोन जाँच के साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श भी उपलब्ध कराया जाएगा। “सेहत की मिठास, जीवन का एहसास” के संदेश के साथ चल रही यह पहल “शुगर एक्सप्रेस” के अंतर्गत आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य मधुमेह और हार्मोन संबंधी रोगों को लेकर आमजन में जागरूकता बढ़ाना और समय रहते उचित उपचार प्रदान करना है। डॉ. चित्तावार का मानना है कि समय पर सही जानकारी और जांच से इन रोगों को नियंत्रित किया जा सकता है। सीमित स्थानों के कारण आयोजक समय पर पधारने का आग्रह कर रहे हैं।
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Share Market Today: निवेशकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, Sensex-Nifty में बढ़त

भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में गुरुवार को कारोबार के दौरान सकारात्मक माहौल देखने को मिला। Sensex करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 50 अंकों की तेजी दर्ज की गई। बाजार में इस तेजी के पीछे IT और Media सेक्टर के शेयरों में हुई मजबूत खरीदारी को अहम वजह माना जा रहा है। सुबह से ही बाजार में निवेशकों का रुख थोड़ा उत्साहित नजर आया। लंबे समय से उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार कर रहे निवेशकों को आज IT कंपनियों और मीडिया स्टॉक्स में बेहतर अवसर दिखाई दिए, जिसके चलते इन सेक्टर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी। IT Stocks में तेजी, टेक सेक्टर को मिला सपोर्ट आज के कारोबार में IT Stocks में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में मांग बढ़ने और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से आने वाले समय में इस क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। IT शेयरों में आई मजबूती ने बाजार के सेंटीमेंट को भी सकारात्मक बनाया। Media Stocks में भी दिखी बढ़त IT के साथ-साथ Media Stocks में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। मीडिया कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के कारण सेक्टर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद की। Global Market Signals पर निवेशकों की नजर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल संकेतों की अहम भूमिका बनी हुई है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर-रुपये की चाल पर निवेशक लगातार नजर बनाए हुए हैं। आगे कैसी रह सकती है Market की चाल? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बचते हुए मजबूत कंपनियों और अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल Sensex और Nifty में आई तेजी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Petrol

Diesel ATF Export Duty Hike: सरकार का बड़ा फैसला, Petrol Export Duty में कटौती

देश में Petrol की सप्लाई को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ा दी है, जबकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना और बाजार में फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखना है। Diesel और ATF Export Duty में बढ़ोतरी क्यों? सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है। डीजल देश के परिवहन क्षेत्र, उद्योगों और कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है, जबकि ATF विमानन सेक्टर की जरूरतों को पूरा करता है। सरकार चाहती है कि तेल कंपनियां पहले घरेलू बाजार की मांग को पूरा करें, ताकि देश में ईंधन की कमी जैसी स्थिति पैदा न हो। बढ़ी हुई एक्सपोर्ट ड्यूटी से कंपनियों के लिए विदेशों में इन उत्पादों की बिक्री पहले की तुलना में महंगी हो सकती है। Petrol Export Duty हुई कम, क्या बदलेगा? जहां डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है। सरकार का यह फैसला पेट्रोलियम सेक्टर में संतुलन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू जरूरतों को देखते हुए सरकार समय-समय पर एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव करती रहती है। Fuel Supply को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी भारत अपनी जरूरतों के लिए कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर आयात करता है और उसे रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार करता है। ऐसे में घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी व्यवस्था के जरिए सरकार घरेलू खपत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बनाना चाहती है। आम लोगों पर पड़ेगा क्या असर? इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की संभावना कम है। एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मुख्य प्रभाव तेल कंपनियों और निर्यातकों पर पड़ेगा। हालांकि, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी बाजार की स्थिति और रुपये की मजबूती के आधार पर ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। 16 July से लागू हुई नई दरें सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था 16 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है। अब तेल कंपनियों को नई एक्सपोर्ट ड्यूटी के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की Energy Security को मजबूत करने और घरेलू बाजार में फ्यूल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IMD

IMD Weather UP-Bihar के 18 जिलों में Heavy Rain Alert, Assam-Arunachal में बाढ़ का संकट

देश में मानसून इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दूसरी तरफ असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। UP-Bihar में Heavy Rain का Alert मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। Assam Flood: 99 गांव पानी में डूबे असम में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के 99 गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। Arunachal Pradesh में 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें बंद होने से गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। MP के 35 जिलों में बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता जहां देश के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी IMD ने भारी बारिश वाले राज्यों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। एक ही मानसून, लेकिन अलग-अलग तस्वीर इस बार मानसून ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर दिखाया है। पूर्वोत्तर, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मौसम का यह असंतुलन सिर्फ आम जनजीवन ही नहीं, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की चाल कैसी रहती है, इस पर लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन, राहत एजेंसियां और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपदा से समय रहते निपटा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rohingya

Bay of Bengal Boat Accident: Rohingya शरणार्थियों से भरी दो नावें डूबीं, UN ने जताई गहरी चिंता

Rohingya Boat Tragedy ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर दिया है। सुरक्षित जीवन की तलाश में समुद्र का रास्ता चुनने वाले सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दो अलग-अलग नाव हादसों में 500 से अधिक लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। अगर यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री मानवीय त्रासदियों में गिना जाएगा। समुद्र में गायब हुईं दो नावें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से रवाना हुई थीं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाव समुद्र में निकलने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास खराब मौसम के बीच पलट गई। शुरुआती आकलन में दोनों हादसों में 500 से ज्यादा लोगों के डूबने की आशंका जताई गई है। राहत एजेंसियां अभी भी लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आखिर क्यों समुद्र का खतरनाक रास्ता चुन रहे हैं रोहिंग्या? रोहिंग्या समुदाय कई वर्षों से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से जुड़े संकट का सामना कर रहा है। 2017 में बड़े पैमाने पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे, जहां वे आज भी शरणार्थी शिविरों में सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति, रोजगार की कमी, घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लोगों को मानव तस्करों के भरोसे समुद्री रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही है। यह सफर जितना लंबा होता है, उतना ही जानलेवा भी साबित होता है। मानसून बना सबसे बड़ा खतरा बंगाल की खाड़ी में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और लगातार खराब मौसम छोटी नावों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद तस्कर ओवरलोडेड नावों में लोगों को समुद्र के रास्ते भेजते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। UN ने जताई गंभीर चिंता संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए क्षेत्र के देशों से अपील की है कि समुद्र में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज किए जाएं। साथ ही मानव तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुरक्षित एवं कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। UN का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में ऐसे हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। Rohingya Crisis पर फिर उठे बड़े सवाल यह हादसा केवल दो नावों के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि उस मानवीय संकट की तस्वीर है जो वर्षों से दुनिया के सामने मौजूद है। जब तक म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित माहौल, नागरिक अधिकार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र के रास्ते पलायन करने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल राहत एजेंसियां मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि करने में जुटी हैं। वहीं इस त्रासदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोहिंग्या संकट का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकिंग संस्थाओं में शामिल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) में भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत के पूर्व रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर डॉ. रघुराम राजन समेत तीन भारतीय विशेषज्ञों को फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण सलाहकार समितियों में शामिल किया गया है। इसे भारत के लिए गर्व की बात माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने अपने विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सलाहकार समूहों के लिए नए सदस्यों की घोषणा की है। इनमें भारतीय मूल के जाने-माने अर्थशास्त्रियों को भी जगह मिली है। इन विशेषज्ञों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और भविष्य की आर्थिक नीतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव देना होगा। डॉ. रघुराम राजन, जो भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री माने जाते हैं, को एक अहम सलाहकार समिति में शामिल किया गया है। उनके साथ दो अन्य भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थशास्त्रियों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा और आर्थिक विशेषज्ञता को लगातार सम्मान मिल रहा है। भारतीय पेशेवर आज दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माण से जुड़े संगठनों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, यह नियुक्ति फेडरल रिजर्व के निर्णय लेने वाले बोर्ड की सदस्यता नहीं है, बल्कि सलाहकार समितियों का हिस्सा है। फिर भी इन समितियों की सिफारिशें आर्थिक नीतियों और वित्तीय फैसलों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय विशेषज्ञों की यह बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है। भारतीय मूल के विशेषज्ञों को मिली यह जिम्मेदारी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और आर्थिक विशेषज्ञता की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रतीक मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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