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Ceasefire

Israel-Iran Ceasefire: नेतन्याहू ने ट्रम्प को बताया था Iran Attack Plan, अमेरिका के साथ और बिना दोनों ऑप्शन थे!

यरुशलम/तेहरान।Israel-Iran War को लेकर बुधवार को एक बड़ा खुलासा हुआ। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उन्होंने फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान पर हमले की पूरी रणनीति पहले ही बता दी थी। यरुशलम में कैबिनेट मीटिंग से पहले नेतन्याहू ने कहा— “मैंने ट्रम्प को दो प्लान दिए थे— एक अमेरिका के साथ और दूसरा अमेरिका के बिना। फैसला ट्रम्प पर छोड़ा कि वो साथ देंगे या नहीं।” वहीं, अमेरिका में नाटो समिट के दौरान ट्रम्प ने मीडिया से कहा कि ईरानी परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों की वजह से 12 दिन तक चली Israel-Iran जंग रुक गई। ट्रम्प ने दावा किया— “ईरान ने 12 दिन तक नर्क झेला। अब वो न्यूक्लियर वेपन बनाने का सपना छोड़ चुका है। अगर उसने फिर से चालाकी की, तो दोबारा हमला होगा।” अमेरिकी मीडिया की राय अलग हालांकि, CNN और New York Times जैसी अमेरिकी मीडिया संस्थाओं ने एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि— “अमेरिकी हमलों से ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह तबाह नहीं हुआ, बस कुछ महीनों के लिए धीमा पड़ा है।” ट्रम्प ने इस रिपोर्ट को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर “Fake News” करार दिया है। 12 दिन बाद इजराइल-ईरान सीजफायर, दोनों देशों ने ‘जीत’ का दावा किया मंगलवार को जंग के 12वें दिन आखिरकार सीजफायर की घोषणा हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने सुबह 3:30 बजे Truth Social पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। इसके बाद इजराइल और ईरान दोनों ने सीजफायर की पुष्टि करते हुए खुद को विजेता बताया। नेतन्याहू ने कहा: “हमने ईरान के खिलाफ ऐतिहासिक जीत हासिल की है जो पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी।” ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पलटवार करते हुए कहा— “हम परमाणु कार्यक्रम नहीं छोड़ेंगे। यह हमारी मेहनत और वैज्ञानिक बलिदानों का परिणाम है।” Israel-Iran युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन इससे जुड़े राजनयिक, सैन्य और परमाणु सवाल अब भी दुनिया को परेशान कर रहे हैं। जहां एक ओर इजराइल इसे ऐतिहासिक जीत मान रहा है, वहीं ईरान अपनी जिद्द पर अड़ा है। अगला कदम क्या होगा, यह आने वाला वक्त बताएगा।
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“Indian Astronaut Shubhanshu Shukla Reaches Space After 41 Years: Mission Ax-4 Makes History!”

Indian Astronaut Shubhanshu Shukla Reaches ISS After 41 Years: भारत की अंतरिक्ष में वापसी

25 जून, 2025 को इतिहास फिर से लिखा गया जब भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भरी। ये मिशन NASA और ISRO की साझा पहल का हिस्सा है, जिसे SpaceX और Axiom Space ने मिलकर अंजाम दिया। इस ऐतिहासिक मिशन की लॉन्चिंग भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे फ्लोरिडा स्थित Kennedy Space Center से हुई, जिसमें Falcon-9 रॉकेट और उससे जुड़े Dragon Capsule का इस्तेमाल किया गया। इस क्रू में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे, जिसमें शुभांशु अकेले भारतीय थे। “What a Ride!”: अंतरिक्ष से पहला संदेश स्पेस में पहुंचने के बाद शुभांशु शुक्ला ने कहा –“What a Ride! मेरे कंधे पर लगा तिरंगा बताता है कि मैं आप सभी के साथ हूं।”उनके इस मैसेज ने पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया। उनके माता-पिता आशा शुक्ला और शंभु दयाल शुक्ला इस अवसर पर भावुक हो उठे। मिशन का मकसद: रिसर्च, टेक्नोलॉजी और इंस्पिरेशन Ax-4 मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक रिसर्च, माइक्रोग्रैविटी में एक्सपेरिमेंट और नई टेक्नोलॉजी का परीक्षण करना है। इसके साथ-साथ: 6 बार टल चुका था मिशन तारीख रुकावट की वजह 29 मई ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट तैयार नहीं था 8 जून फाल्कन-9 रॉकेट तैयार नहीं था 10 जून खराब मौसम 11 जून ऑक्सीजन लीकेज 19 जून मौसम + क्रू की तबियत 22 जून ISS के सर्विस मॉड्यूल का मूल्यांकन Who is Shubhanshu Shukla? 41 साल बाद फिर एक भारतीय अंतरिक्ष में 1984 के बाद ये पहला मौका है जब कोई भारतीय एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष में गया है। शुभांशु शुक्ला से पहले विंग कमांडर राकेश शर्मा सोवियत मिशन Soyuz T-11 के जरिए अंतरिक्ष यात्रा कर चुके हैं। अब शुभांशु, भारत के पहले क्रू मिशन गगनयान की दिशा में अनुभव लेकर लौटेंगे, जो 2027 में लॉन्च किया जाना है। इस मिशन से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाइयां मिलने की उम्मीद है। गगनयात्री, कॉस्मोनॉट, ताइकोनॉट Shubhanshu Shukla की ये यात्रा सिर्फ एक मिशन नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की वैश्विक स्पेस रेस में मजबूती से वापसी है। ये सिर्फ एक कदम है, आगे चलकर गगनयान मिशन और प्राइवेट स्पेस सेक्टर में भारत की भूमिका और भी निर्णायक होने वाली है।
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Trump

Trump Modi Phone Call:मोदी एक शानदार व्यक्ति

नई दिल्ली, देश हरपल। मोदी एक शानदार व्यक्ति हैं, मैंने उनसे कनाडा से लौटते समय अमेरिका आने का न्योता दिया था लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया। पाकिस्तान एक लोकतांत्रिक देश नहीं है इसलिए मैंने वहां के असली बॉस आसिम मुनीर से मुलाकात की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत हुई, जो करीब 35 मिनट तक चली। यह कॉल उस समय हुआ जब ट्रंप को कनाडा के G7 शिखर सम्मेलन से समय से पहले लौटना पड़ा और दोनों नेताओं की पहले से तय मुलाकात रद्द हो गई। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, जिसमें पाकिस्तान द्वारा संघर्षविराम (Ceasefire) की अपील का मुद्दा प्रमुख था। PM Modi-Trump Phone Call: Pakistan को Ceasefire की Request पर क्यों करना पड़ा मजबूर? बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप को साफ तौर पर बताया कि पाकिस्तान को भारत की सख्त सैन्य कार्यवाही और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते संघर्षविराम की अपील करनी पड़ी। यह कदम भारत की कूटनीतिक और सामरिक नीति की सफलता को दर्शाता है। “यह कोई सद्भावना का कदम नहीं, बल्कि भारत के दबाव में लिया गया निर्णय है,” – पीएम मोदी ने ट्रंप को बताया। G7 Summit में मुलाकात टली, लेकिन बातचीत हुई निर्णायक G7 शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं की भेंट तय थी, लेकिन ट्रंप को अचानक कार्यक्रम बदलना पड़ा। इसके बाद यह टेलीफोनिक बातचीत ही दोनों देशों के बीच रणनीतिक संवाद का माध्यम बनी। इस बातचीत में भारत-अमेरिका व्यापार, एशिया में सुरक्षा स्थिति, और आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने भविष्य में जल्द ही व्यक्तिगत मुलाकात की इच्छा भी जताई। डोनाल्ड जे. ट्रंप, ने आज मिडिया से बात करते हिये कहाँ कि”नरेंद्र मोदी एक अत्यंत प्रभावशाली और दूरदर्शी नेता हैं। जब मैं कनाडा से लौट रहा था, तब मैंने उन्हें अमेरिका आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था, किंतु उन्होंने अत्यंत विनम्रता के साथ उसे स्वीकार नहीं किया। जहां तक पाकिस्तान का प्रश्न है, वह एक पूर्णतः लोकतांत्रिक राष्ट्र नहीं है — और इसी कारण मैंने वहां की वास्तविक सत्ता के केंद्र, जनरल आसिम मुनीर से मुलाकात की, जो वहां के प्रमुख निर्णयों को नियंत्रित करते हैं।”
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Ola Zero Commission

Ola Zero Commission Model: ओला का बड़ा फैसला, अब ड्राइवर रख सकेंगे पूरी कमाई

Ola Zero Commission Model: ओला का क्रांतिकारी फैसला, ड्राइवरों को मिलेगा पूरा फायदा देशभर में लाखों लोग कैब, ऑटो और बाइक सर्विस के जरिए अपनी रोज़ी-रोटी कमाते हैं, लेकिन अक्सर यह शिकायत सामने आती रही है कि बड़ी राइड-हेलिंग कंपनियां ड्राइवरों से 20% से 30% तक कमीशन काट लेती हैं। ऐसे में भारत की प्रमुख कैब सर्विस कंपनी ओला (Ola) ने एक ऐतिहासिक और गेम-चेंजर फैसला लिया है। अब ओला अपने ड्राइवर पार्टनर्स से कोई कमीशन नहीं लेगी, यानी Zero Commission Model लागू कर दिया गया है। इसके तहत, ड्राइवर हर राइड से होने वाली पूरी कमाई अपने पास रख सकेंगे। Zero Commission कैसे करेगा काम? अब तक ओला और अन्य कंपनियां ड्राइवर से हर राइड पर कमीशन लेती थीं। इससे उनकी नेट इनकम कम हो जाती थी। लेकिन इस नए मॉडल में: 10 लाख से ज्यादा ड्राइवर होंगे लाभांवित ओला के एक प्रवक्ता ने बताया कि देशभर में 10 लाख से ज्यादा ड्राइवर इस नई स्कीम का लाभ उठाएंगे। इससे न सिर्फ उनकी इनकम बढ़ेगी, बल्कि उनमें काम के प्रति आत्मनिर्भरता और आत्म-सम्मान की भावना भी आएगी। राइडर की सुरक्षा बनी रहेगी प्राथमिकता कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ड्राइवरों को पूरी कमाई देने के साथ-साथ, यात्रियों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सेफ्टी फीचर्स, रियल टाइम ट्रैकिंग और कस्टमर सपोर्ट पहले की तरह ही उपलब्ध रहेंगे। इंडस्ट्री में मचा हलचल, प्रतिस्पर्धी कंपनियों पर बढ़ा दबाव ओला का यह फैसला न केवल ड्राइवरों के लिए खुशखबरी है, बल्कि Uber, Rapido जैसी अन्य कंपनियों के लिए भी एक बड़ा चैलेंज बनकर सामने आया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दूसरी कंपनियां भी इसी राह पर चलेंगी या नहीं
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FASTag

FASTag Annual Pass निजी वाहनों के लिए ₹3,000 में सालभर टोल फ्री यात्रा, 15 अगस्त से लागू

नई दिल्ली | देश हरपल ब्यूरोदेशभर के लाखों निजी वाहन चालकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari ने एक ऐतिहासिक पहल की घोषणा करते हुए बताया कि ₹3,000 में FASTag आधारित वार्षिक पास की सुविधा 15 अगस्त 2025 से लागू की जा रही है। क्या है यह ₹3,000 वाला FASTag वार्षिक पास? इस पास के जरिए कोई भी निजी वाहन (Car, Jeep, Van आदि) देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बिना बार-बार टोल देने के अधिकतम 200 यात्राओं या एक साल तक (जो भी पहले हो) निर्बाध यात्रा कर सकेगा।यह सुविधा केवल गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए है, और इससे टोल प्लाजाओं पर लगने वाली भीड़ और प्रतीक्षा समय में भारी कमी आने की उम्मीद है। कैसे मिलेगा यह पास? नितिन गडकरी ने ‘X’ (पूर्व Twitter) पर जानकारी दी कि इस वार्षिक पास को Highway Travel App, NHAI और MoRTH की वेबसाइट पर एक अलग लिंक के माध्यम से सक्रिय (activate) किया जा सकेगा।जल्द ही रजिस्ट्रेशन और नवीनीकरण प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी भी जारी की जाएगी 60 KM दायरे की टोल समस्याओं पर सीधा समाधान यह नीति विशेष रूप से उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो रोजाना 60 किलोमीटर के दायरे में स्थित टोल प्लाजाओं से होकर यात्रा करते हैं।अब उन्हें हर बार टोल देने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि एक सिंगल ट्रांजैक्शन में सालभर के लिए सुविधा मिल जाएगी। क्या बदल जाएगा इस पॉलिसी से? नितिन गडकरी ने क्या कहा? “यह वार्षिक पास नीति, टोल प्लाजा पर भीड़ कम करने, विवादों को समाप्त करने और निजी वाहन चालकों के लिए एक तेज़ व सहज यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए लाई जा रही है।” — नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्र सरकार की यह पहल जहां आम नागरिकों की जेब पर असर कम करेगी, वहीं इससे डिजिटल टोल भुगतान और इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रैकिंग में भी सुधार होगा। FASTag सिस्टम के जरिए एक डिजिटली कनेक्टेड और ट्रांसपेरेंट टोल मैकेनिज्म की ओर भारत आगे बढ़ रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Raja Raghuvanshi

Raja Raghuvanshi Murder Mystery मेघालय के जंगलों से सामने आया राजा-सोनम का आखिरी वीडियो

इंदौर के चर्चित ट्रांसपोर्ट कारोबारी Raja Raghuvanshi की मौत के मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने परिवार और प्रशासन दोनों को हिला दिया है। यह वीडियो मेघालय के Double Decker Root Bridge का बताया जा रहा है, जिसमें राजा और सोनम एक साथ दिख रहे हैं। दावा है कि यह उनकी आखिरी रिकॉर्डिंग हो सकती है। वायरल वीडियो का सच क्या है? हरियाणा के सोनीपत निवासी फोटोग्राफर देवेंद्र सिंह (Dev Singh) ने अपने Facebook प्रोफाइल पर यह वीडियो शेयर किया है। उनका दावा है कि यह क्लिप उन्होंने 23 मई 2025 को सुबह 9:45 बजे रिकॉर्ड की थी। वीडियो में सोनम को वही सफेद शर्ट पहने देखा जा सकता है, जो बाद में राजा के पास मिली थी। देव ने लिखा: “मुझे लगता है कि ये उस कपल की आखिरी रिकॉर्डिंग है। जब भी राजा को वीडियो में देखता हूं, बहुत बुरा लगता है। वो सामान्य दिख रहा था।” तेरहवीं में उमड़ा दर्द, भाई ने उठाए कई सवाल इंदौर में Raja Raghuvanshi की तेरहवीं पर सिर्फ परिवार और करीबी रिश्तेदार ही शामिल हुए। कार्यक्रम में राजा की पसंद का भोजन – गुलाब जामुन, मंचूरियन, नूडल्स और दाल-चावल आदि परोसे गए। इस दौरान सोनम का भाई गोविंद भी मौजूद रहा। राजा के भाई सचिन रघुवंशी ने कहा: “हमारे मन में बस एक ही सवाल है – सोनम ने ऐसा क्यों किया? आखिर क्या वजह थी कि शादी के चंद दिनों बाद ही उसे यह कदम उठाना पड़ा?” Narco Test की मांग, दो लड़कों पर शक सचिन ने बताया कि गाजीपुर से उजाला यादव नाम की युवती ने उन्हें फोन किया था। उजाला का दावा है कि उसने सोनम को बस में देखा था, जहां दो लड़के उसे छोड़ने आए थे। सोनम ने उस दौरान राजा की रील देखने पर उसे टोका भी था। “अगर सोनम सब कुछ कबूल लेती तो बात वहीं खत्म हो जाती, लेकिन अब हमें Narco Test की जरूरत है।” वीडियो में दिखे तीन और संदिग्ध फोटोग्राफर देव सिंह ने एक और बड़ा खुलासा किया: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ahmedabad

Ahmedabad Plane Crash हादसे से पहले एक तस्वीर और ज्योतिषीय चेतावनी ने बढ़ाया रहस्य

हादसा या संयोग? एयर इंडिया Ahmedabad AI171 फ्लाइट क्रैश से पहले छपा विज्ञापन और ज्योतिषी की भविष्यवाणी बना सोशल मीडिया पर मिस्ट्री पॉइंट 12 जून 2025 को एयर इंडिया की Ahmedabad से लंदन (गैटविक) जाने वाली फ्लाइट AI171, टेक-ऑफ के कुछ मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह विमान बोइंग 787 ड्रीमलाइनर था, जिसमें 242 लोग सवार थे। दुखद रूप से, इस हादसे में सिर्फ एक यात्री ही जीवित बच पाया — जिसे “चमत्कारी उत्तरजीवी” कहा जा रहा है। Ahmedabad घटना ने पूरे देश को गहरे शोक और सदमे में डाल दिया है, लेकिन इसके साथ ही एक रहस्यमयी संयोग ने सबका ध्यान खींचा है — जिसने इस क्रैश को सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक रहस्य और चेतावनी में बदल दिया। KidZania का विज्ञापन या भविष्य की झलक? गुजरात के लोकप्रिय दैनिक अखबार मिड-डे के उसी दिन, यानी 12 जून के संस्करण के पहले पन्ने पर छपा एक विज्ञापन अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह विज्ञापन बच्चों के मनोरंजन व लर्निंग हब KidZania से जुड़ा था, जिसमें एक Air India विमान की तस्वीर दिखाई गई थी — जो एक मिनिएचर शहर की इमारत से उड़ता हुआ प्रतीत हो रहा था। ज्योतिषी गौरव पुरोहित की भविष्यवाणी फिर चर्चा में इस बीच ज्योतिषाचार्य गौरव पुरोहित का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने इस तरह की संभावित वायु मार्ग दुर्घटना को लेकर पहले ही चेतावनी दी थी। गौरव जी पिछले 5 वर्षों से राजनीति, युद्ध, सामाजिक घटनाओं पर ज्योतिषीय विश्लेषण करते आ रहे हैं। उनका दावा है: क्या यह महज संयोग था या चेतावनी? जहां विज्ञान इस दुर्घटना की तकनीकी जांच में जुटा है, वहीं आमजन अब यह सवाल पूछ रहे हैं – क्या यह सब ‘कॉस्मिक अलर्ट’ था? भारत में कई लोग इस दुर्घटना और विज्ञापन के मेल को “दिव्य संयोग” मान रहे हैं, और सोशल मीडिया पर #AI171Coincidence ट्रेंड कर रहा है। 242 में से एक उत्तरजीवी: उम्मीद की एक किरण फिलहाल सभी की निगाहें उस एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति पर हैं, जो शायद दुनिया को इस हादसे की सच्ची कहानी सुना सके।सरकारी जांच एजेंसियां, DGCA और एयर इंडिया हादसे की जाँच में जुटी हैं, और ब्लैक बॉक्स रिकवर भी हो चुका है। जहां एक ओर यह हादसा तकनीकी खामियों की संभावनाओं के साथ जांच के घेरे में है, वहीं लोगों के मन में इसके रहस्यमयी पहलू भी सवाल खड़े कर रहे हैं। क्या यह सिर्फ संयोग था, या कोई आभास, कोई ज्योतिषीय चेतावनी? देश एक गहरे शोक में डूबा है, लेकिन यह घटना विज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के बीच एक नई बहस भी छेड़ गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर! यदि आप इस विषय पर अपनी राय देना चाहते हैं, तो कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।
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Kerala school rivalry news in Hindi

Kerala school rivalry news: 50 साल पुरानी रंजिश में दो बुजुर्गों ने पूर्व सहपाठी पर किया हमला

केरल के कासरगोड में 50 साल पुराना स्कूल विवाद बना हिंसा का कारण Kerala school rivalry news – केरल के कासरगोड जिले के मलोम कस्बे से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां स्कूल टाइम की 50 साल पुरानी रंजिश ने दो बुजुर्गों को हिंसा के रास्ते पर धकेल दिया। बालाल ग्राम पंचायत स्थित नटक्कल्लू एडेड स्कूल में साथ पढ़ने वाले तीन पूर्व सहपाठी—वी.जे. बाबू (62), मालोथु बालकृष्णन, और मैथ्यू वलियप्लक्कल—के बीच वर्षों पुराना विवाद फिर से उभर आया। होटल के बाहर हुआ हमला, टूटा दोस्ती का दिखावा घटना सोमवार को जनग्राम होटल के बाहर हुई, जब तीनों की आकस्मिक मुलाकात हो गई। बातचीत के दौरान पुरानी रंजिश फिर से भड़क उठी। रिपोर्ट के मुताबिक, बालकृष्णन ने बाबू को पकड़ लिया और मैथ्यू ने एक बड़ा पत्थर उठाकर बाबू के चेहरे और शरीर पर हमला कर दिया। इस हमले में बाबू के दो दांत टूट गए और उन्हें गंभीर हालत में परियारम स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज, कन्नूर में भर्ती कराया गया। गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज, हो सकती है जेल वेल्लरिकुंड पुलिस थाने के निरीक्षक टी.के. मुकुंदन के अनुसार, अगर मेडिकल रिपोर्ट में यह साबित हुआ कि बाबू के दांत हमले के कारण टूटे हैं, तो यह अपराध गैर-जमानती हो जाएगा। हमले के आरोप में बालकृष्णन और मैथ्यू पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया गया है: ₹1.5 लाख में सुलह की पेशकश, शराब की भी संभावना पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, घायल वी.जे. बाबू ने इस मामले को कोर्ट से बाहर सुलझाने की इच्छा जताई है, लेकिन बदले में ₹1.5 लाख की मांग की है। साथ ही उन्होंने यह भी बयान दिया कि हमले के समय हमलावरों द्वारा शराब का सेवन किया गया हो सकता है। 50 साल पुरानी दुश्मनी का मनोवैज्ञानिक पहलू Kerala school rivalry news- विशेषज्ञों के अनुसार, स्कूल में हुए छोटे-छोटे बुलींग या टकराव का असर लंबे समय तक मानसिक रूप से बना रह सकता है, खासकर अगर उसे सुलझाया न जाए। यह घटना बताती है कि बचपन की घटनाएं, अगर मन में बैठ जाएं, तो बुजुर्ग अवस्था में भी हिंसा का रूप ले सकती हैं।
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Ice Hockey Surprise

Ice Hockey India! भारतीय महिला आइस हॉकी टीम ने रचा इतिहास, IIHF एशिया कप 2025 में जीता ब्रॉन्ज़ मेडल

India women’s ice hockey team, IIHF Asia Cup 2025, Ice Hockey India भारत की बेटियों का ‘हिम’कालीन कारनामा, इतिहास में दर्ज हुई जीत UAE के अल ऐन शहर में, जहाँ रेत और गर्मी की पहचान है, वहीं बर्फ़ पर तैरते भारतीय जज़्बे ने इतिहास रच दिया। भारत की महिला आइस हॉकी टीम ने IIHF Asia and Oceania Championship 2025 में पहला अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतकर वो कर दिखाया, जो आज से कुछ साल पहले सपना भी नहीं लगता था। संघर्ष से सम्मान तक – ब्रॉन्ज़ मेडल का कारवां टीम इंडिया ने फिलीपींस, UAE, ईरान, मलेशिया और किर्गिस्तान जैसी टीमों को टक्कर दी और दमदार खेल दिखाते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया। यह केवल एक जीत नहीं, बल्कि हिम्मत, जुनून और भरोसे की मिसाल है। Ice Hockey और India? हां, अब यह संभव है! भारत में जहां क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी की बात होती है, वहां Ice Hockey का नाम तक कम सुना जाता है। लेकिन लेह और लद्दाख की बेटियों ने एक नई शुरुआत की है। इन्हीं लड़कियों ने अपने संसाधन खुद बनाए, सोशल मीडिया से फंड जुटाया, और बर्फ़ की दुनिया में भारत का झंडा बुलंद किया। खिलाड़ियों की प्रेरणादायक बातें “हमने सिर्फ़ मैच नहीं खेला, हमने रास्ता बनाया।“ टीम की कप्तान डोलकर लोंगदेन ने यह शब्द बोले तो पूरे देश को उनके संघर्ष की झलक मिली। इन लड़कियों ने सिर्फ विरोधी टीमों को नहीं, बल्कि सिस्टम की चुप्पी, समाज की उम्मीदों और सुविधाओं की कमी को भी हराया। भारत सरकार और खेल मंत्रालय को अब क्या करना चाहिए? यह जीत सिर्फ़ एक ट्रॉफी नहीं है, बल्कि नीति-निर्माताओं को एक संदेश है कि भारत की बेटियाँ कुछ भी कर सकती हैं — बस उन्हें सही समर्थन चाहिए। उम्मीद है कि अब सरकार इस खेल को राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कैटेगरी में लाने पर विचार करेगी। देश हरपल उन्हें सलाम करता है!
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RCB Celebration Stampede

RCB Celebration Stampede: आरसीबी ने पुलिस की अनुमति के बिना की विक्ट्री परेड

बेंगलुरु, 5 जून | देश हरपल आईपीएल 2025 (IPL 2025) में RCB की जीत का जश्न बुधवार को बेंगलुरु के M. Chinnaswamy Stadium में एक भयावह हादसे में बदल गया, जब भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई और 30 से अधिक घायल हो गए। कर्नाटक हाई कोर्ट ने लिया Suo Motu Cognizance गुरुवार को कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस दर्दनाक हादसे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब तलब किया। कोर्ट की पीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति सीएम जोशी शामिल थे। सरकार बनाम डिप्टी CM का आंकड़ा राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी ने कोर्ट को बताया कि स्टेडियम और उसके आसपास 1000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, जिसमें Commissioner, DCP और ACP जैसे अधिकारी शामिल थे।वहीं, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने बुधवार को दावा किया था कि 5000 पुलिसकर्मी ड्यूटी पर मौजूद थे। “हम कोई प्रतिकूल रुख नहीं अपना रहे हैं। अदालत जो भी निर्देश देगी, हम उसे मानेंगे।” – महाधिवक्ता शशिकिरण शेट्टी क्या फेल हुई Crowd Management? आरसीबी ने पुलिस की अनुमति के बिना विक्ट्री परेड के बारे में एक सोशल मीडिया पोस्ट किया था और एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में फ्री एंट्री पास की घोषणा की थी. सूत्रों की मानें तो इसी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद स्टेडियम के बाहर भीड़ बढ़ गई और बाद में भगदड़ हो गयी सरकार ने यह भी बताया कि स्टेडियम के बाहर Water Tankers, Ambulance और Command Control Vehicles भी लगाए गए थे। लेकिन जब 2.5 लाख से ज्यादा लोग पहुंच गए, तो हालात बेकाबू हो गए। स्टेडियम की क्षमता मात्र 35,000 है, और आमतौर पर सिर्फ 30,000 टिकट बिकते हैं। कई लोग यह सोचकर पहुंचे थे कि शायद स्टेडियम में Free Entry है, जिससे भीड़ और बेकाबू हो गई। हाई कोर्ट का बड़ा सवाल कोर्ट ने स्पष्ट किया कि: “जश्न मनाने के इरादे से त्रासदी हुई है। हम यह जानना चाहते हैं कि क्या यह रोकी जा सकती थी, और भविष्य में इससे बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएं।“ इस मामले में कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन (KCA) और RCB मैनेजमेंट को भी नोटिस दिया जाएगा Celebration or Negligence? इस हादसे ने एक बार फिर से बड़ी आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी और पारदर्शिता का भी है। अब देखना यह है कि कोर्ट की सख्ती के बाद क्या कर्नाटक सरकार और क्रिकेट प्रशासन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाते हैं या नहीं।
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PNB

PNB में करोड़ों की Fake Currency का खेल! Saharanpur में CCTV ने बढ़ाया शक, 3 Officers पर Action

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट से जुड़ा मामला सामने आने के बाद बैंकिंग सिस्टम में हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान करोड़ों रुपये के संदिग्ध नकली नोट मिलने की जानकारी सामने आई है। शुरुआती रिपोर्टों में रकम को लेकर अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं, जबकि विस्तृत जांच में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। पुलिस ने भी जांच तेज कर दी है। वहीं, RBI की जांच के बाद इस पूरे मामले में कई और तथ्य सामने आने की उम्मीद है। कैसे सामने आया करोड़ों के नकली नोटों का मामला? मामले की शुरुआत उस समय हुई जब RBI को भेजी गई नकदी में करीब ₹4.36 लाख की कमी सामने आई। इतनी बड़ी गड़बड़ी के बाद बैंक में करेंसी चेस्ट का रिकॉर्ड खंगाला गया और विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच आगे बढ़ी तो बैंक के अंदर रखी नकदी में बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट मिलने की जानकारी सामने आई। इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई। असली Cash की जगह Fake Notes रखने का शक प्रारंभिक जांच में आशंका है कि करेंसी चेस्ट में मौजूद असली नोटों को निकालकर उनकी जगह नकली नोट रखे गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि असली रकम कब निकाली गई और नकली नोट बैंक के Cash Vault तक कैसे पहुंचे। बैंक के Cash Movement Records, लॉगबुक, ऑडिट रिपोर्ट और कर्मचारियों की ड्यूटी से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। CCTV फुटेज में दिखी संदिग्ध गतिविधि इस पूरे मामले में बैंक का CCTV Footage जांच का अहम हिस्सा बन गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में करेंसी चेस्ट के आसपास एक हाउसकीपिंग कर्मचारी की गतिविधियां दिखाई दी हैं। जांच अधिकारी अब CCTV फुटेज को बैंक के एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड और कैश रिकॉर्ड से मिलाकर देख रहे हैं। इससे यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि करेंसी चेस्ट तक किस-किस कर्मचारी की पहुंच थी। 3 PNB Officers Suspended मामले में बैंक के तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें करेंसी चेस्ट और कैश से जुड़े अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। बैंक ने तीन अधिकारियों को Suspended कर दिया है। हालांकि, निलंबन का मतलब दोष साबित होना नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। SIT के हाथ में जांच, RBI भी कर रहा पड़ताल मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT (Special Investigation Team) गठित की है। टीम बैंक के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और नकदी के लेन-देन की पूरी कड़ी को खंगाल रही है। दूसरी ओर, RBI से जुड़ी जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोटों का स्रोत क्या था और वे बैंक की करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे। ₹17 करोड़ या ₹7.40 करोड़? रकम को लेकर क्यों है Confusion इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा नकली नोटों की रकम को लेकर है। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में ₹17 करोड़ तक की रकम का उल्लेख किया गया, जबकि बाद की विस्तृत रिपोर्टों में करीब ₹7.40 करोड़ की नकली करेंसी मिलने की बात कही गई है। चूंकि जांच और नोटों की गिनती का काम जारी है, इसलिए अंतिम आंकड़ा आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। बैंकिंग सिस्टम की Security पर उठे सवाल सहारनपुर के PNB मामले ने बैंक की करेंसी चेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध नोट बैंक के सुरक्षित Cash Vault तक कैसे पहुंचे? नियमित जांच और ऑडिट के दौरान इनकी पहचान क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच एजेंसियां तलाश रही हैं। आने वाले दिनों में CCTV फुटेज, बैंक रिकॉर्ड और अधिकारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल जांच जारी है और नकली नोटों की वास्तविक मात्रा, असली रकम के नुकसान और इस मामले में शामिल लोगों को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SCO Summit

SCO Summit में Pakistan की Edited Photo पर बवाल, PM Modi और Iran President गायब

SCO Summit से जुड़ी एक तस्वीर ने भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से चल रही तल्खी को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के आधिकारिक X अकाउंट से शेयर की गई एक तस्वीर को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तस्वीर के एडिटेड वर्जन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके साथ खड़े ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन नजर नहीं आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर तस्वीर सामने आने के बाद यूजर्स ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक अकाउंट पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। खास बात यह है कि जिस कार्यक्रम की तस्वीर साझा की गई, उसमें भारत और ईरान दोनों के शीर्ष नेता मौजूद थे। Original Photo और Edited Version को लेकर सवाल SCO Summit की ग्रुप फोटो में संगठन के कई सदस्य देशों के नेता एक साथ नजर आए थे। इसी तस्वीर का एक अलग वर्जन पाकिस्तान PMO के X हैंडल से पोस्ट किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तस्वीर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिखाई नहीं देते। इसके बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि क्या तस्वीर को जानबूझकर एडिट किया गया था। हालांकि, तस्वीर को लेकर पाकिस्तान सरकार की ओर से ऐसी कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है कि पोस्ट में मूल तस्वीर के बजाय बदला हुआ फ्रेम क्यों इस्तेमाल किया गया। PM Modi और Pezeshkian की मुलाकात भी रही अहम SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ मुलाकात भी हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, व्यापार और क्षेत्रीय हालात पर बातचीत हुई। भारत और ईरान के रिश्ते लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक महत्व रखते हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक Summit के दौरान महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में शामिल रही। यही वजह है कि ग्रुप फोटो से दोनों नेताओं के गायब होने वाली तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। Pakistan PM की भी ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात इस मामले का एक और दिलचस्प पहलू सामने आया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी SCO Summit के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे में सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी मिले थे, तो ग्रुप फोटो के साझा किए गए वर्जन में उनका नजर नहीं आना आखिर क्यों हुआ। India-Pakistan Relations के बीच बढ़ी चर्चा भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में SCO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से सामने आने वाली छोटी-सी तस्वीर भी राजनीतिक और कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने Summit में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और सामूहिक कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए। ऐसे माहौल में पाकिस्तान के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से सामने आई कथित Edited Photo ने राजनीतिक बहस को और हवा दे दी। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उठाए सवाल तस्वीर पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने Original Group Photo और पाकिस्तान PMO द्वारा साझा तस्वीर की तुलना करते हुए सवाल पूछे। हालांकि, यह भी जरूरी है कि तस्वीर के पीछे की मंशा को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष न निकाला जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तस्वीर में बदलाव क्यों किया गया था। SCO Summit ने फिर खींचा दुनिया का ध्यान SCO Summit में भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, ईरान समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल हुए। बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा हुई। एक तरफ Summit में भारत का आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश सुर्खियों में रहा, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी की ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात ने भारत-ईरान संबंधों को लेकर ध्यान खींचा। अब पाकिस्तान PMO की कथित Edited Photo इस पूरे घटनाक्रम में एक नया विवाद बनकर सामने आई है। सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोगों की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान सरकार इस तस्वीर को लेकर कोई आधिकारिक सफाई देती है या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Jantar Mantar FIR Case: प्रदर्शनकारियों को SC से राहत, CJP ने Delhi March टाला

जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च भी वापस ले लिया। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह अब इस मार्च का आयोजन नहीं करेगा। यह पूरा मामला जुलाई में हुए जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान दर्ज FIR को वापस लेना आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। बाद में इसी मुद्दे को लेकर CJP ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रदर्शनकारियों को राहत सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों की ओर से प्रदर्शन से जुड़ी FIR वापस लेने को लेकर आवेदन किया गया था। सुनवाई के दौरान इन मामलों को खत्म करने का रास्ता निकाला गया। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन से संबंधित करीब 13 FIR को आगे नहीं बढ़ाने की बात सामने आई। कुछ ऐसे लोगों के मामले अलग रखे गए हैं, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले होने की जानकारी दी गई थी। इस फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। लंबे समय से FIR वापसी की मांग कर रहे संगठन के लिए इसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। 5 सितंबर का Delhi March क्यों किया गया था? CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया था। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक होना था। संगठन का आरोप था कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेने के दौरान सरकार की ओर से किए गए कुछ आश्वासनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने खास तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और आंदोलन से जुड़े अन्य मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग की थी। संगठन ने कहा था कि अगर वादे पूरे नहीं हुए तो वह फिर से सड़कों पर उतरेगा। पहले SC ने मार्च पर रोक लगाने से किया था इनकार इस मामले में घटनाक्रम तेजी से बदला। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने CJP के 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा था कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन के दौरान अनिवार्य रूप से अप्रिय स्थिति पैदा होगी। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी प्रशासन पर छोड़ी गई थी। लेकिन इसके अगले ही दिन मामला अलग दिशा में चला गया। 1 सितंबर की सुनवाई के दौरान केंद्र के आश्वासन और कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने खुद 5 सितंबर के मार्च को वापस लेने की घोषणा कर दी। CJP ने क्यों बदला फैसला? सुप्रीम कोर्ट में CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि केंद्र सरकार के सकारात्मक आश्वासन और अदालत के आदेश को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है। यानी जिस मुद्दे को लेकर दोबारा सड़क पर उतरने की तैयारी थी, उसमें कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल टकराव की स्थिति टल गई है। CJI ने भी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के सकारात्मक रवैये और बातचीत के महत्व पर जोर दिया। अदालत की टिप्पणी का संदेश साफ था कि खुले मन से बातचीत हो तो विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Bhopal

Sealing Action पर Bhopal में बवाल: व्यापारियों और पुलिस में भिड़ंत, शंख-डमरू बजाकर प्रदर्शन

Bhopal में Sealing Action को लेकर व्यापारियों का गुस्सा सड़क पर दिखाई दिया। कार्रवाई के विरोध में जुटे कारोबारियों और पुलिस के बीच मंगलवार को धक्का-मुक्की हो गई। कुछ व्यापारियों ने बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके दौरान कुछ कारोबारी गिर गए। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। Sealing के खिलाफ व्यापारियों का प्रदर्शन भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारी बड़ी संख्या में एकजुट हुए। कारोबारियों का कहना है कि कार्रवाई से उनके कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे प्रशासन और सरकार के सामने अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर व्यापारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। इसी बीच कुछ कारोबारी बैरिकेड्स हटाकर आगे बढ़ गए। पुलिस और व्यापारियों के बीच इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बैरिकेड्स के पास हुई धक्का-मुक्की प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब व्यापारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स को हटाने की कोशिश की। आगे बढ़ने की कोशिश में कुछ कारोबारी गिर गए। पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की और प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, कुछ देर बाद स्थिति को संभाल लिया गया। इस घटनाक्रम के बाद मौके पर मौजूद व्यापारियों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर नाराजगी और बढ़ती दिखाई दी। थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार से लगाई गुहार व्यापारियों के विरोध का एक अलग अंदाज भी देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने थाली, शंख और डमरू बजाकर सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए विरोध जताया। व्यापारियों का कहना था कि उनकी समस्याओं को सुना जाए और सीलिंग कार्रवाई को लेकर सरकार उनकी मांगों पर विचार करे। प्रदर्शनकारियों ने अपने विरोध के जरिए सरकार और प्रशासन तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की। उनका कहना है कि वे टकराव नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान चाहते हैं। व्यापारियों की मांग पर अब नजर भोपाल में Sealing Action को लेकर हुए इस प्रदर्शन ने प्रशासन और कारोबारियों के बीच चल रहे विवाद को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार और प्रशासन व्यापारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल प्रदर्शन के दौरान पुलिस और व्यापारियों के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद मामला चर्चा में है। व्यापारियों का विरोध यह संकेत दे रहा है कि सीलिंग कार्रवाई का मुद्दा अभी शांत होने वाला नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rahul Gandhi

Bus में नाबालिग से कथित गैंगरेप, 47 KM तक चलता रहा सफर; Rahul Gandhi ने पूछा- Checking क्यों नहीं?

दिल्ली-NCR में चलती स्लीपर बस के अंदर नाबालिग छात्रा के साथ कथित गैंगरेप का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बस करीब 47 किलोमीटर तक चलती रही, लेकिन रास्ते में किसी चेकपोस्ट पर उसकी जांच नहीं हुई। मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार किया गया है। घटना सामने आने के बाद कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब बस इतने लंबे रूट से होकर गुजरी तो पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? बारिश और अंधेरे के बीच बस में बैठी छात्रा रिपोर्टों के मुताबिक, नाबालिग छात्रा बारिश और अंधेरे के बीच रास्ता भटककर ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके में पहुंची थी। वह नोएडा में अपने रिश्तेदार के पास जाने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान एक स्लीपर बस वहां पहुंची। आरोप है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने छात्रा को मदद का भरोसा देकर बस में बैठाया। इसके बाद बस दिल्ली की तरफ बढ़ गई। पुलिस के अनुसार, परी चौक से कश्मीरी गेट तक का सफर करीब 47 किलोमीटर का था। इसी सफर के दौरान छात्रा के साथ कथित अपराध हुआ। एक दिन पहले भी आरोपियों पर गंभीर आरोप जांच में यह बात भी सामने आई है कि घटना से एक दिन पहले भी ड्राइवर और कंडक्टर पर छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का आरोप है। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़कर जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बस और उससे जुड़े अन्य सबूतों को कब्जे में लिया है। CCTV फुटेज समेत दूसरे डिजिटल और फॉरेंसिक सबूतों की भी जांच की जा रही है। Driver और Conductor गिरफ्तार पुलिस ने मामले में बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बस किस रास्ते से गुजरी और रास्ते में किन-किन जगहों पर रुकी। बस की जांच भी की जा रही है ताकि घटना से जुड़े जरूरी सबूत जुटाए जा सकें। Bus में पर्दे, CCTV को लेकर भी सवाल स्लीपर बसों में यात्रियों की Privacy के लिए पर्दे लगाए जाते हैं, लेकिन इसी व्यवस्था ने सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्टों में बस में CCTV की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि लंबी दूरी तक चलने वाली स्लीपर बसों में यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त Monitoring क्यों नहीं होती? Rahul Gandhi ने Police Checking पर उठाए सवाल मामले पर राहुल गांधी ने सरकार और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक नाबालिग के साथ बस के अंदर इतनी गंभीर घटना हुई और वाहन करीब 47 किलोमीटर तक चलता रहा। उन्होंने सवाल किया कि रास्ते में मौजूद पुलिस व्यवस्था को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली। उन्होंने बसों की Checking और Monitoring को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने इस घटना का संदर्भ देते हुए Nirbhaya Case की याद भी दिलाई और कहा कि वर्षों बाद भी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वही सवाल सामने आना चिंताजनक है। 47 KM का सफर और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल इस घटना ने दिल्ली-NCR की Public Transport Safety पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। आखिर सड़कों पर चलने वाली बसों की Monitoring किस तरह होती है? क्या संदिग्ध बसों की नियमित Checking होती है? क्या हर स्लीपर बस में CCTV और Emergency Support की पर्याप्त व्यवस्था है? ये सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल रोजाना हजारों लोग करते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की तस्वीर साफ होगी। यह मामला सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि Public Transport में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सिस्टम की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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