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WhatsApp voice chat

WhatsApp Voice Chat Feature: अब हर ग्रुप में बिना कॉल किए करें बातचीत, जानें पूरा तरीका

WhatsApp Voice Chat Feature: व्हाट्सऐप यूज़र्स के लिए एक और शानदार फीचर जुड़ चुका है, जिससे चैटिंग का अनुभव और भी बेहतर होने वाला है। कंपनी ने अपने Voice Chat Feature को अब सभी साइज के ग्रुप्स के लिए रोलआउट कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल बड़े ग्रुप्स तक सीमित थी, लेकिन अब चाहे ग्रुप छोटा हो या बड़ा, हर मेंबर इसका फायदा उठा सकता है। अब बिना कॉल किए करें बातचीत – Voice Chat का नया अंदाज़ इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि अब ग्रुप चैटिंग के दौरान कॉल मिलाने की ज़रूरत नहीं है। अगर ग्रुप में डिस्कशन करना हो, तो बस एक आसान जेस्चर से Voice Chat शुरू की जा सकती है। यूज़र्स को अब कॉल बटन दबाकर सबको एक-एक कर जोड़ने की टेंशन नहीं लेनी पड़ेगी। कैसे करें Voice Chat का इस्तेमाल? खास बात यह है कि इसमें किसी को कॉल करके रिंग नहीं किया जाएगा। यह एक तरह का Hangout Space जैसा है जहां ग्रुप के मेंबर्स अपनी मर्ज़ी से चैट को ज्वॉइन या छोड़ सकते हैं। प्राइवेसी का पूरा ध्यान WhatsApp का दावा है कि यह Voice Chat भी उसी तरह से End-to-End Encrypted है, जैसे कॉल्स और मैसेज होते हैं। यानी बातचीत पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और व्हाट्सऐप खुद भी आपकी बात नहीं सुन सकता। Android और iOS दोनों के लिए उपलब्ध यह नया अपडेट Android और iOS दोनों प्लेटफॉर्म्स पर यूज़र्स को मिलने लगा है। अगर आपने अभी तक अपडेट नहीं किया है, तो प्ले स्टोर या ऐप स्टोर पर जाकर WhatsApp को अपडेट करें और इस नए अनुभव का हिस्सा बनें। देश हरपल की राय WhatsApp का यह नया फीचर सोशल कनेक्टिविटी को और सहज बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह खासकर उन ग्रुप्स के लिए वरदान साबित होगा जहां बार-बार कॉल करने से असुविधा होती थी। अब हर चैट को एक मिनी-कॉन्फ्रेंस कॉल की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। WhatsApp का यह अपडेट न सिर्फ सुविधा बढ़ाता है बल्कि प्राइवेसी को भी बरकरार रखता है। यूज़र्स अब कहीं भी, कभी भी ग्रुप में सीमलेस वॉइस चैटिंग का मज़ा ले सकते हैं – वो भी बिना कॉल किए। अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और ऐसे ही लेटेस्ट टेक अपडेट्स के लिए जुड़े रहें देश हरपल के साथ।
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Mohammad Yunus resignation news

Bangladesh Political Crisis: अंतरिम PM Mohammad Yunus के इस्तीफे की अटकलें तेज

Bangladesh Political Crisis 2025: बांग्लादेश की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। अंतरिम सरकार के प्रधानमंत्री प्रोफेसर Mohammad Yunus के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। आधी रात को बीबीसी बांग्ला सेवा की एक रिपोर्ट ने इस खबर को हवा दी, जिसमें नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के प्रमुख Nahid Islam के हवाले से कहा गया कि यूनुस इस्तीफे पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। Nahid, जो कभी यूनुस के सलाहकार रह चुके हैं, ने मीडिया से बातचीत में कहा, “सर को लगता है कि राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे वह काम नहीं कर पा रहे हैं।” गौरतलब है कि Nahid ने इसी साल यूनुस से अलग होकर अपनी पार्टी NCP की स्थापना की थी। क्या है Mohammad Yunus resignation news की वजह? दरअसल, हाल के दिनों में यूनुस सरकार और देश की सैन्य व्यवस्था के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब यूनुस सरकार ने विदेश सचिव Mohammad Jashim Uddin को पद से हटा दिया — जबकि उन्हें महज 8 महीने पहले ही सितंबर 2024 में नियुक्त किया गया था। Jashim ने सरकार की उस योजना का विरोध किया था जिसमें Rohingya शरणार्थियों के लिए मानवीय कॉरिडोर बनाने की बात कही गई थी। यह योजना यूनुस और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Khalil-ur-Rahman द्वारा लाई गई थी, जिसका मकसद म्यांमार के रखाइन राज्य से भागकर आए रोहिंग्याओं को मानवीय सहायता देना था। सेना क्यों है विरोध में? यहीं से विवाद ने गंभीर मोड़ ले लिया। बांग्लादेश की सेना ने Myanmar से Bangladesh तक प्रस्तावित humanitarian corridor का कड़ा विरोध किया। सेना का कहना है कि इस कॉरिडोर से देश की sovereignty यानी राष्ट्रीय स्वायत्तता पर खतरा मंडरा रहा है और इसका कोई ठोस कूटनीतिक लाभ भी नहीं दिख रहा। सेना प्रमुख द्वारा हाल ही में की गई एक प्रेस ब्रीफिंग को यूनुस सरकार के लिए “Final Warning” के रूप में देखा गया, जिसने राजनीतिक संकट को और गहरा कर दिया। Yunus की छवि पर सवाल सरकार की कूटनीतिक अस्थिरता और सेना से खुला टकराव यूनुस की छवि को भी नुकसान पहुंचा रहा है। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर काफी public discourse शुरू हो चुका है। सत्ताधारी खेमे में भी दो फाड़ नजर आ रही है — एक पक्ष यूनुस के साथ है, तो दूसरा उनकी नीतियों को देश के लिए खतरा मानता है आगे क्या? Bangladesh Interim Government Crisis अब ऐसे मोड़ पर है, जहां से लौटना आसान नहीं लगता। अगर यूनुस इस्तीफा देते हैं, तो यह बांग्लादेश के इतिहास में एक और अस्थिर अध्याय होगा। वहीं, अगर वे दबाव में बिना इस्तीफा दिए कार्यकाल पूरा करते हैं, तो उन्हें सेना, राजनीतिक दलों और जनता — तीनों को साथ लेकर चलने की चुनौती होगी। Mohammad Yunus के इस्तीफे की खबरें सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि Bangladesh के राजनीतिक और कूटनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकती हैं। Rohingya शरणार्थियों को लेकर लिए गए फैसले, सेना से मतभेद और विदेश नीति की खामियों ने इस पूरे संकट को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस पर देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी रहेंगी।
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Operation Sindoor: Terrorists Beware, India Will Strike Back Hard – Dr. S. Jaishankar’s Bold Warning from Netherlands

Dr. S. Jaishankar :“अगर आतंकवादी पाकिस्तान में छिपे हैं, तो हम उन्हें वहीं मार गिराएंगे, जहां वे छुपे हैं।”

Operation Sindoor: Terrorists Beware, India Will Strike Back Hard – Dr. S. Jaishankar’s Bold Warning from Netherlands नीदरलैंड से आतंकवाद पर भारत का दो-टूक संदेश:विदेश मंत्री Dr. S. Jaishankar ने नीदरलैंड दौरे के दौरान आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति और “Operation Sindoor” को लेकर दुनिया को सीधा और स्पष्ट संदेश दिया है—अब अगर कोई भी आतंकी हमला भारत पर होता है, तो जवाब और भी ज़्यादा कड़ा होगा। डॉ. जयशंकर ने डच मीडिया चैनल NOS को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि, “अगर आतंकवादी पाकिस्तान में छिपे हैं, तो हम उन्हें वहीं मार गिराएंगे, जहां वे छुपे हैं।” उन्होंने बताया कि Operation Sindoor केवल गोलीबारी या सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है, बल्कि यह भारत की नई डिफेंस डिप्लोमेसी और स्पष्ट संदेश वाली नीति का हिस्सा है। अब दुश्मन की भाषा में जवाब देना ही भारत की रणनीति है। पहलगाम हमला: कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर सीधा वार डॉ. जयशंकर ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि उस दिन श्रद्धालुओं की आस्था के बारे में पूछकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया। इसके पीछे कश्मीर के पर्यटन उद्योग को चोट पहुंचाना भी एक मकसद था। उन्होंने कहा कि: “हम जानते हैं कि आतंकी कौन थे, उनके चेहरे हमारे पास थे। हम उनकी पहचान करने में पूरी तरह सक्षम थे।” विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि हमले को अंजाम देने वाले आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े ‘द रेसिस्टेंट फ्रंट’ के सदस्य थे। भारत ने ना केवल हमले की सटीक पहचान की बल्कि दुनिया को भी बताया कि अब चुप नहीं बैठेंगे। Operation Sindoor अभी खत्म नहीं हुआ विदेश मंत्री ने इस बात को दोहराया कि Operation Sindoor अभी भी जारी है। यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि एक स्ट्रेटेजिक और साइकोलॉजिकल ऑपरेशन है, जिसमें भारत यह दिखा रहा है कि अब आतंकियों को पनाह देने वालों को भी नहीं बख्शा जाएगा दुनियाभर को संदेश: नई भारत नीति भारत की यह नीति अब ‘डिफेंसिव’ नहीं, बल्कि ‘ऑफेंसिव’ और ‘डायरेक्ट’ है। विदेश मंत्री ने बताया कि अब भारत आतंक की जड़ पर हमला करेगा, भले ही वह सीमा पार क्यों न हो। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को एक बार फिर FATF और UN में घेरा जा रहा है। भारत का यह नया दृष्टिकोण न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है बल्कि विश्व राजनीति में भारत की स्थिति को और भी मजबूती देता है Operation Sindoor भारत की नई सुरक्षा नीति का प्रतिबिंब है, जो आतंक को केवल जवाब नहीं, बल्कि उखाड़ फेंकने का संकल्प लेकर चल रही है। जयशंकर के इस बयान से साफ है कि अब भारत का सब्र सीमित है और आस्था पर हमला करने वालों को करारा जवाब मिलेगा।
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Congress on Operation Sindoor, Salman Khurshid statement

Operation Sindoor: क्या घोर मोदी विरोधी कांग्रेसी भी राहुल गांधी की राजनीति से दूर हो रहे हैं ?

नई दिल्ली। देश के सफल सैन्य अभियान Operation Sindoor को लेकर अब राजनीतिक हलकों में दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहे हैं। विपक्ष में बैठी Congress पार्टी, जो अब तक इस ऑपरेशन को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर सवाल उठाती रही थी, अब उसके कई वरिष्ठ नेता इस मुद्दे पर सरकार और भारतीय सेना के समर्थन में आ गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह समर्थन उन चेहरों की ओर से आ रहा है जिन्हें कभी कट्टर मोदी विरोधी माना जाता था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री Salman Khurshid ने हाल ही में एक बयान में यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान से हुई बातचीत में किसी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं रही। पार्टी लाइन से अलग हुई आवाजें जहां एक ओर Rahul Gandhi और Mallikarjun Kharge की अगुवाई में कांग्रेस नेतृत्व इस अभियान पर सवाल उठाने में लगा रहा, वहीं पार्टी के अंदर से ही ऐसी आवाजें सामने आईं जो इस लाइन से पूरी तरह अलग थीं।Salman Khurshid ने विदेश सचिव Vikram Misri की ब्रीफिंग के बाद कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच जो कुछ भी हुआ, उसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, “जब मामला गंभीर हो गया था, तब भी इसे सुलझाने की पहल पाकिस्तान के DGMO (Director General of Military Operations) ने की थी। भारत ने स्पष्ट कर दिया था कि अगर पाकिस्तान गंभीर है, तो हम भी तैयार हैं।” Trump का दावा और कांग्रेस का विरोध कांग्रेस ने अपने पिछले बयानों में यह आरोप लगाया था कि इस ऑपरेशन में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तान के साथ बातचीत में मध्यस्थता की थी, जो कि भारत की स्थापित विदेश नीति के खिलाफ है। लेकिन खुद ट्रंप ने भी बाद में इस दावे से पीछे हटते हुए भारत के स्टैंड को स्वीकार किया था। देश की एकजुटता बनी सबसे बड़ी ताकत Operation Sindoor की सफलता का सबसे बड़ा आधार रहा राष्ट्रीय एकता। सभी राजनीतिक दलों ने सरकार के साथ खड़े होकर यह संदेश दिया कि जब बात देश की सुरक्षा की हो, तो सब एक हैं। हालांकि अब कांग्रेस के अंदर इस अभियान को लेकर जो वैचारिक मतभेद उभर रहे हैं, वह 2024 के बाद बदलते राजनीतिक माहौल की ओर इशारा करते हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि भारत की सख्त नीति, सेना की कार्रवाई और कूटनीति का ऐसा मेल है, जिस पर विपक्ष भी एकमत नहीं रह पा रहा है। कांग्रेस पार्टी के अंदर ही अब ऐसे नेता सामने आ रहे हैं जो बिना लाग-लपेट के कह रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने बिल्कुल सही किया। यदि आप इस प्रकार के विश्लेषण और ग्राउंड रिपोर्ट्स पढ़ना चाहते हैं, तो जुड़े रहें देश हरपल के साथ – जहां हर खबर है ‘हरपल’ की।
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Indore Sarafa Bazaar, CM Mohan Yadav Indore Visit,

CM Mohan Yadav Indore Visit: CM Mohan Yadav ने कैबिनेट के साथ उठाया इंदौर के स्वाद का लुत्फ

इंदौर (देश हरपल):CM Mohan Yadav Indore Visit- मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध इंदौर का सर्राफा बाजार केवल गहनों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां की रातों में जगमगाने वाली स्ट्रीट फूड गलियों के लिए भी देशभर में जाना जाता है। इसी स्वाद और संस्कार को करीब से महसूस करने पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी कैबिनेट टीम के साथ। मुख्यमंत्री का इंदौर दौरा प्रशासनिक था, लेकिन सर्राफा बाजार की ओर उनका रुख इस दौरे को खास बना गया। जैसे ही उन्होंने बाजार में प्रवेश किया, वहां की रात्रिकालीन चहल-पहल, तेज मसालों की खुशबू, और लोकप्रिय व्यंजन जैसे गराडू, जोशी डही बड़े, भुट्टे का किस, मालपुए, और रबड़ी का स्वाद सभी मंत्रियों ने बड़े चाव से लिया। सीएम मोहन यादव ने कहा, “इंदौर केवल सफाई के लिए ही नहीं, अपने विशिष्ट स्वाद और अतिथ्य परंपरा के लिए भी राष्ट्रीय पहचान रखता है। यहां आकर हर बार कुछ नया अनुभव होता है।” इस अवसर पर शहरवासियों और व्यापारियों ने भी मुख्यमंत्री और मंत्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने सेल्फी और बातचीत का अवसर भी पाया। सर्राफा के दुकानदारों ने बताया कि इससे न सिर्फ बाजार को बढ़ावा मिलता है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में स्थानीय खानपान संस्कृति को नई पहचान भी मिलती है। इंदौर की यह यात्रा न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है , बल्कि Madhya Pradesh Cabinet के लिए इंदौर टूरिज्म, स्ट्रीट फूड कल्चर, और जनता से जुड़ाव की दिशा में एक सकारात्मक संकेत भी बनकर उभरी।
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Operation Sindoor, Rahul Gandhi vs BJP, S Jaishankar Statement,

Operation Sindoor Controversy: राहुल बोले अपराध था पाकिस्तान को बताना, BJP बोली- कितने पाकिस्तानी जेट गिराए, ये क्यों नहीं पूछा?

नई दिल्ली | देश हरपलOperation Sindoor को लेकर एक बार फिर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा है कि राहुल गांधी “पाकिस्तान की भाषा” बोल रहे हैं। BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल को यह सवाल उठाना चाहिए था कि हमने कितने पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराए। लेकिन वे सिर्फ यही पूछते रह गए कि हमने कितने विमान खोए। क्या राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतने सफल ऑपरेशन के लिए एक बार भी बधाई दी?” क्या है राहुल गांधी का आरोप? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक पुराने बयान को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले भारत ने पाकिस्तान को इसकी सूचना दी, जो कि एक “अपराध” था। राहुल ने सवाल उठाया, “हमले से पहले पाकिस्तान को बताने का निर्णय किसने लिया? इससे हमें क्या नुकसान हुआ? वायुसेना ने कितने विमान गंवाए?” राहुल का कहना है कि जयशंकर ने खुद सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की है, और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। BJP का तीखा पलटवार भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर दो टूक शब्दों में कहा, “राहुल को पाकिस्तान और उसके हितैषियों की लाइन पर चलते देखना कोई आश्चर्य नहीं है। वे बार-बार हमारे नुकसान पूछते हैं लेकिन यह नहीं पूछते कि हमने कितने पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया और वहां खड़े विमानों को तबाह किया।” बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने ना सिर्फ प्रधानमंत्री की आलोचना की, बल्कि हमारी सेना के मनोबल को भी चोट पहुंचाई। अमित मालवीय ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, “क्या अब राहुल गांधी को निशान-ए-पाकिस्तान मिलने वाला है?” विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्या कहा था? दिल्ली में होंडुरास दूतावास के उद्घाटन के दौरान जयशंकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, “हमारे लक्ष्य आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था, जो हमने किया। शुरुआत में ही पाकिस्तान को यह बताया गया था कि हमला उनकी सेना पर नहीं, बल्कि आतंकवाद पर है। अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो हम इसे संघर्ष नहीं मानेंगे।” राजनीतिक विश्लेषण राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हो रही यह बयानबाज़ी सिर्फ सरकार और विपक्ष की रणनीतिक सोच को दर्शाती है।जहां सरकार इसे एक रणनीतिक विजय बता रही है, वहीं विपक्ष सवाल उठाकर इसे जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है। ऑपरेशन सिंदूर अब सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया है, यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राहुल गांधी के आरोप और भाजपा का तीखा जवाब इस बात को साफ करते हैं कि 2025 की राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा भी अब एक चुनावी मुद्दा बन सकती है।
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Dr. Yatri Controversy: YouTuber Navankur Dhankhar in Spotlight after Jyoti Malhotra's Arrest

YouTuber Jyoti Malhotra Pakistan Case-ज्योति की गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में यूट्यूबर ‘यात्री डॉक्टर

Dr. Yatri Controversy: YouTuber Navankur Dhankhar in Spotlight after Jyoti Malhotra’s Arrest हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद एक और यूट्यूबर सुर्खियों में है। इस बार यूट्यूबर नवांकुर धनखड़, जो ‘डॉक्टर यात्री’ के नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं, विवादों में घिर गए हैं। पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई ज्योति मल्होत्रा के सोशल मीडिया अकाउंट पर नवांकुर के साथ एक सेल्फी पोस्ट की गई थी। सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरों पर है कि नवांकुर भी पाकिस्तान दूतावास के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले साल मार्च में आयोजित पाकिस्तानी दूतावास की नेशनल डे पार्टी में डॉक्टर यात्री भी नजर आए थे। नवांकुर का सफाई बयान Navankur Dhankhar ने एक वीडियो जारी कर सफाई देते हुए कहा, ‘मैं फिलहाल आयरलैंड में हूं। सुबह उठा तो सोशल मीडिया पर ज्योति की गिरफ्तारी की खबर देखी। लोग कह रहे हैं कि डॉक्टर यात्री भी पाकिस्तान गया था। जैसे ही मैं भारत लौटूंगा और पासपोर्ट स्कैन होगा, पुलिस को पता चल जाएगा। अगर मैंने भारत की सुरक्षा का उल्लंघन किया है या मेरे खिलाफ कोई सबूत मिला है, तो मुझे एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लें।’ डॉक्टर यात्री: ट्रैवल से फेमस होने तक नवांकुर धनखड़ ने MBBS की डिग्री हासिल की लेकिन डॉक्टरी में मन न लगने के कारण उन्होंने ट्रैवल ब्लॉगिंग शुरू कर दी। 30 सितंबर 2017 को उन्होंने ‘डॉक्टर यात्री’ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया और अपनी ट्रैवल जर्नी शेयर करते हुए फेमस हो गए। अब तक नवांकुर 95 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है। विवाद और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया ज्योति की गिरफ्तारी के बाद नवांकुर पर भी जासूसी के आरोप लगने लगे। सोशल मीडिया पर लोग उनकी यात्रा और पाकिस्तान कनेक्शन पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, नवांकुर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे निर्दोष हैं और जांच के लिए तैयार हैं। नवांकुर की यात्रा और निजी जिंदगी नवांकुर ने हाल ही में बहादुरगढ़ की युवती से शादी की है। शादी का वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उनके यूट्यूब चैनल पर साढ़े 17 लाख सब्सक्राइबर्स और इंस्टाग्राम पर 6 लाख फॉलोअर्स हैं।
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COVID-19 Surge

COVID-19 Surge: एशिया में फिर बढ़े कोरोना केस, हांगकांग-सिंगापुर में हालात चिंताजनक

19 मई 2025, देश हरपल डेस्क COVID-19 एक बार फिर एशिया में अपने पैर पसार रहा है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे विकसित शहरों में संक्रमण के मामलों में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है। हांगकांग में 10 हफ्तों में 30 गुना वृद्धि हांगकांग में मार्च 2025 से COVID-19 मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 10 हफ्तों में संक्रमण के मामलों में 30 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। Sewage surveillance और आउटपेशेंट क्लीनिकों में COVID-19 के मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सिंगापुर में भी संक्रमण में उछाल सिंगापुर में मई के पहले सप्ताह में COVID-19 के मामलों में 28% की वृद्धि हुई है, और अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में भी 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। नया वैरिएंट और लक्षणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, Omicron JN.1 वैरिएंट इस नए उछाल के पीछे हो सकता है। इस वैरिएंट के कारण मरीजों में खांसी, गले में खराश, मतली, उल्टी, ब्रेन फॉग और आंखों में जलन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। भारत में स्थिति और सतर्कता भारत में भी कुछ शहरों में COVID-19 के मामलों में हल्की वृद्धि देखी जा रही है। मुंबई में डॉक्टरों ने हाल ही में कुछ नए मामलों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकांश मामले हल्के हैं और गंभीर चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। बचाव के उपाय और सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सावधानी बरतकर हम इस नए उछाल से बच सकते हैं। निष्कर्ष COVID-19 का यह नया उछाल हमें याद दिलाता है कि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में मामलों की वृद्धि हमें सतर्क रहने की आवश्यकता का संकेत देती है। भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन हमें सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।
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Yuvika Chaudhary's Spiritual Revelation

Yuvika Chaudhary: सेवा भाव से समाज को समर्पित करने की सोच

नई दिल्ली: टेलीविजन एक्ट्रेस युविका चौधरी हाल ही में पारस छाबड़ा के पॉडकास्ट ‘आबरा का डाबरा’ में नजर आईं। इस शो में युविका ने अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं पर भी खुलकर बात की। बातचीत के दौरान पारस छाबड़ा ने युविका की कुंडली का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी कुंडली में संत बनने का योग है। इस पर युविका ने कहा कि बहुत जल्द तो नहीं, लेकिन भविष्य में समाज सेवा के लिए खुद को समर्पित करने का विचार है। पारस ने इस पर मजाक में कहा कि जब युविका की बच्ची बड़ी हो जाएगी, तब वो सेवा का काम करेंगी। युविका ने हां में जवाब देते हुए कहा कि सांसारिक जीवन भी बहुत जरूरी है, क्योंकि यह आपको बहुत कुछ सिखाता है। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद जिंदगी को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला है। रिश्तों और माता-पिता की अहमियत अब और भी ज्यादा महसूस होती है। युविका ने आगे कहा कि बदलाव और संघर्ष जिंदगी के जरूरी हिस्से हैं। उन्होंने कहा, “बिना दर्द के आप बेहतर नहीं हो सकते।” पारस ने भी युविका के सेवा भाव को सराहते हुए कहा कि उन्होंने अभी तक शादी नहीं की, ताकि सेवा के लिए समय निकाल सकें। युविका चौधरी के इस खुलासे के बाद फैंस में उनकी सोच को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी बातों को खूब सराहा जा रहा है।
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Jyoti Malhotra arrest, Pakistan espionage case, Haryana YouTuber spy, Travel vlogger arrested, Social media espionage India, Jyoti Malhotra Pakistan trip, Desi-Indo-Joe YouTube channel, @travelwithjo1 Instagram, National security breach India, ISI honey trap cases

ट्रैवल व्लॉगर से जासूस तक: ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी से सोशल मीडिया में हड़कंप

Breaking: Travel Vlogger Jyoti Malhotra Arrested for Alleged Espionage for Pakistan हरियाणा के हिसार की रहने वाली ट्रैवल व्लॉगर और यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ज्योति, जो ‘Desi-Indo-Joe’ नामक यूट्यूब चैनल और @travelwithjo1 इंस्टाग्राम हैंडल से मशहूर थीं, पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों को संवेदनशील जानकारी साझा की। सोशल मीडिया की आड़ में जासूसी ज्योति ने 2023 में पाकिस्तान की यात्रा की थी, जिसके दौरान वह पाकिस्तान उच्चायोग के एक कर्मचारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में आईं। उनके बीच घनिष्ठ संबंध विकसित हुए, और आरोप है कि इसी दौरान ज्योति ने संवेदनशील जानकारी साझा की। राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा ज्योति की गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठते सवालों को फिर से उजागर किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी तो कोई शामिल नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता हाल के वर्षों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय नागरिकों को हनी ट्रैप में फंसाने के कई मामले सामने आए हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां अब सोशल मीडिया पर अधिक सतर्कता बरत रही हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। निष्कर्ष ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग करके राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है। यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है कि वे सोशल मीडिया पर होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और समय रहते कार्रवाई करें।
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Share Market Today: निवेशकों के चेहरे पर लौटी मुस्कान, Sensex-Nifty में बढ़त

भारतीय शेयर बाजार (Share Market) में गुरुवार को कारोबार के दौरान सकारात्मक माहौल देखने को मिला। Sensex करीब 200 अंकों की बढ़त के साथ 77,400 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 50 अंकों की तेजी दर्ज की गई। बाजार में इस तेजी के पीछे IT और Media सेक्टर के शेयरों में हुई मजबूत खरीदारी को अहम वजह माना जा रहा है। सुबह से ही बाजार में निवेशकों का रुख थोड़ा उत्साहित नजर आया। लंबे समय से उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार कर रहे निवेशकों को आज IT कंपनियों और मीडिया स्टॉक्स में बेहतर अवसर दिखाई दिए, जिसके चलते इन सेक्टर के शेयरों में खरीदारी बढ़ी। IT Stocks में तेजी, टेक सेक्टर को मिला सपोर्ट आज के कारोबार में IT Stocks में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में मांग बढ़ने और कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से आने वाले समय में इस क्षेत्र को फायदा मिल सकता है। IT शेयरों में आई मजबूती ने बाजार के सेंटीमेंट को भी सकारात्मक बनाया। Media Stocks में भी दिखी बढ़त IT के साथ-साथ Media Stocks में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी। मीडिया कंपनियों के शेयरों में खरीदारी के कारण सेक्टर इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली। बाजार में सेक्टर आधारित खरीदारी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद की। Global Market Signals पर निवेशकों की नजर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में ग्लोबल संकेतों की अहम भूमिका बनी हुई है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियां, कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर-रुपये की चाल पर निवेशक लगातार नजर बनाए हुए हैं। आगे कैसी रह सकती है Market की चाल? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को बाजार में जल्दबाजी से बचते हुए मजबूत कंपनियों और अच्छे फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल Sensex और Nifty में आई तेजी से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। हालांकि, बाजार की आगे की दिशा घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Petrol

Diesel ATF Export Duty Hike: सरकार का बड़ा फैसला, Petrol Export Duty में कटौती

देश में Petrol की सप्लाई को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी बढ़ा दी है, जबकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कटौती की गई है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी दरें 16 जुलाई से लागू हो गई हैं। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में ईंधन की मांग लगातार बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस फैसले का उद्देश्य घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना और बाजार में फ्यूल की उपलब्धता बनाए रखना है। Diesel और ATF Export Duty में बढ़ोतरी क्यों? सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है। डीजल देश के परिवहन क्षेत्र, उद्योगों और कृषि गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण ईंधन है, जबकि ATF विमानन सेक्टर की जरूरतों को पूरा करता है। सरकार चाहती है कि तेल कंपनियां पहले घरेलू बाजार की मांग को पूरा करें, ताकि देश में ईंधन की कमी जैसी स्थिति पैदा न हो। बढ़ी हुई एक्सपोर्ट ड्यूटी से कंपनियों के लिए विदेशों में इन उत्पादों की बिक्री पहले की तुलना में महंगी हो सकती है। Petrol Export Duty हुई कम, क्या बदलेगा? जहां डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ाया गया है, वहीं पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाई गई है। सरकार का यह फैसला पेट्रोलियम सेक्टर में संतुलन बनाए रखने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों की मांग, अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू जरूरतों को देखते हुए सरकार समय-समय पर एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव करती रहती है। Fuel Supply को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी भारत अपनी जरूरतों के लिए कच्चे तेल का बड़े पैमाने पर आयात करता है और उसे रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार करता है। ऐसे में घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना सरकार की बड़ी प्राथमिकता है। नई एक्सपोर्ट ड्यूटी व्यवस्था के जरिए सरकार घरेलू खपत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बनाना चाहती है। आम लोगों पर पड़ेगा क्या असर? इस फैसले का सीधा असर फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की संभावना कम है। एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का मुख्य प्रभाव तेल कंपनियों और निर्यातकों पर पड़ेगा। हालांकि, आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी बाजार की स्थिति और रुपये की मजबूती के आधार पर ईंधन कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है। 16 July से लागू हुई नई दरें सरकार द्वारा जारी नई व्यवस्था 16 जुलाई से प्रभावी हो चुकी है। अब तेल कंपनियों को नई एक्सपोर्ट ड्यूटी के अनुसार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत की Energy Security को मजबूत करने और घरेलू बाजार में फ्यूल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IMD

IMD Weather UP-Bihar के 18 जिलों में Heavy Rain Alert, Assam-Arunachal में बाढ़ का संकट

देश में मानसून इस समय दो बिल्कुल अलग तस्वीरें दिखा रहा है। एक ओर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं मध्य प्रदेश के कई जिले अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। दूसरी तरफ असम और अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। UP-Bihar में Heavy Rain का Alert मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार के 18 जिलों में अगले 24 से 48 घंटे के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। कई इलाकों में तेज हवाएं चलने और आकाशीय बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। Assam Flood: 99 गांव पानी में डूबे असम में लगातार हो रही बारिश ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। राज्य के 99 गांव जलमग्न हो चुके हैं और हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जबकि खेतों में खड़ी फसलें भी डूब गई हैं। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, पीने का पानी तथा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। Arunachal Pradesh में 1 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित अरुणाचल प्रदेश में भी लगातार बारिश और भूस्खलन ने हालात मुश्किल बना दिए हैं। कई नदियां उफान पर हैं और कई सड़कें बंद होने से गांवों का संपर्क टूट गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख लोग इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन राहत सामग्री पहुंचाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रहा है। MP के 35 जिलों में बारिश की कमी, किसानों की बढ़ी चिंता जहां देश के कई हिस्से बाढ़ से जूझ रहे हैं, वहीं मध्य प्रदेश के 35 जिलों में अब भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई है। कम वर्षा के कारण खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है और जलाशयों का जलस्तर भी सामान्य से नीचे बना हुआ है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कुछ जिलों में बारिश की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी IMD ने भारी बारिश वाले राज्यों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचने, बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न जाने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है। ऐसे में जिन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट है, वहां लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी। एक ही मानसून, लेकिन अलग-अलग तस्वीर इस बार मानसून ने देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग असर दिखाया है। पूर्वोत्तर, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोग बाढ़ और भारी बारिश से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य प्रदेश के कई किसान आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। मौसम का यह असंतुलन सिर्फ आम जनजीवन ही नहीं, बल्कि खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल रहा है। आने वाले दिनों में मानसून की चाल कैसी रहती है, इस पर लाखों लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन, राहत एजेंसियां और मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी आपदा से समय रहते निपटा जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rohingya

Bay of Bengal Boat Accident: Rohingya शरणार्थियों से भरी दो नावें डूबीं, UN ने जताई गहरी चिंता

Rohingya Boat Tragedy ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर दिया है। सुरक्षित जीवन की तलाश में समुद्र का रास्ता चुनने वाले सैकड़ों रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया। संयुक्त राष्ट्र (UN) की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में दो अलग-अलग नाव हादसों में 500 से अधिक लोगों के डूबने या लापता होने की आशंका है। अगर यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी समुद्री मानवीय त्रासदियों में गिना जाएगा। समुद्र में गायब हुईं दो नावें संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के रखाइन राज्य और बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शरणार्थी शिविरों से रवाना हुई थीं। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग समेत बड़ी संख्या में रोहिंग्या शरणार्थी सवार थे, जो बेहतर भविष्य की उम्मीद में मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर जा रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक नाव समुद्र में निकलने के कुछ समय बाद ही लापता हो गई, जबकि दूसरी नाव 8 जुलाई के आसपास खराब मौसम के बीच पलट गई। शुरुआती आकलन में दोनों हादसों में 500 से ज्यादा लोगों के डूबने की आशंका जताई गई है। राहत एजेंसियां अभी भी लापता लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। आखिर क्यों समुद्र का खतरनाक रास्ता चुन रहे हैं रोहिंग्या? रोहिंग्या समुदाय कई वर्षों से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और नागरिकता से जुड़े संकट का सामना कर रहा है। 2017 में बड़े पैमाने पर हुई सैन्य कार्रवाई के बाद लाखों लोग जान बचाकर बांग्लादेश पहुंचे, जहां वे आज भी शरणार्थी शिविरों में सीमित संसाधनों के बीच जीवन गुजार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खराब होती आर्थिक स्थिति, रोजगार की कमी, घटती अंतरराष्ट्रीय सहायता और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद लोगों को मानव तस्करों के भरोसे समुद्री रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रही है। यह सफर जितना लंबा होता है, उतना ही जानलेवा भी साबित होता है। मानसून बना सबसे बड़ा खतरा बंगाल की खाड़ी में इस समय मानसून का मौसम चल रहा है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और लगातार खराब मौसम छोटी नावों के लिए बेहद खतरनाक साबित होते हैं। इसके बावजूद तस्कर ओवरलोडेड नावों में लोगों को समुद्र के रास्ते भेजते हैं, जिससे ऐसे हादसों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। UN ने जताई गंभीर चिंता संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए क्षेत्र के देशों से अपील की है कि समुद्र में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान तेज किए जाएं। साथ ही मानव तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सुरक्षित एवं कानूनी रास्ते उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। UN का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में ऐसे हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। Rohingya Crisis पर फिर उठे बड़े सवाल यह हादसा केवल दो नावों के डूबने की घटना नहीं है, बल्कि उस मानवीय संकट की तस्वीर है जो वर्षों से दुनिया के सामने मौजूद है। जब तक म्यांमार में रोहिंग्या समुदाय के लिए सुरक्षित माहौल, नागरिक अधिकार और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र के रास्ते पलायन करने को मजबूर रहेंगे। फिलहाल राहत एजेंसियां मृतकों और लापता लोगों की वास्तविक संख्या की पुष्टि करने में जुटी हैं। वहीं इस त्रासदी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रोहिंग्या संकट का स्थायी समाधान आखिर कब निकलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकिंग संस्थाओं में शामिल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) में भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत के पूर्व रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर डॉ. रघुराम राजन समेत तीन भारतीय विशेषज्ञों को फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण सलाहकार समितियों में शामिल किया गया है। इसे भारत के लिए गर्व की बात माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने अपने विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सलाहकार समूहों के लिए नए सदस्यों की घोषणा की है। इनमें भारतीय मूल के जाने-माने अर्थशास्त्रियों को भी जगह मिली है। इन विशेषज्ञों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और भविष्य की आर्थिक नीतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव देना होगा। डॉ. रघुराम राजन, जो भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री माने जाते हैं, को एक अहम सलाहकार समिति में शामिल किया गया है। उनके साथ दो अन्य भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थशास्त्रियों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा और आर्थिक विशेषज्ञता को लगातार सम्मान मिल रहा है। भारतीय पेशेवर आज दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माण से जुड़े संगठनों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, यह नियुक्ति फेडरल रिजर्व के निर्णय लेने वाले बोर्ड की सदस्यता नहीं है, बल्कि सलाहकार समितियों का हिस्सा है। फिर भी इन समितियों की सिफारिशें आर्थिक नीतियों और वित्तीय फैसलों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय विशेषज्ञों की यह बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है। भारतीय मूल के विशेषज्ञों को मिली यह जिम्मेदारी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और आर्थिक विशेषज्ञता की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रतीक मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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