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Breaking News :16 साल तक प्लंबर-ढाबा मालिक बनकर भारत में छिपा रहा पाकिस्तानी आतंकी

जम्मू-कश्मीर पुलिस को बड़ी सफलता—16 साल से भारत में छिपे LeT आतंकी की गिरफ्तारी। प्लंबर और ढाबा मालिक बनकर बना रखा था नेटवर्क, जानिए पूरा खुलासा। भारत की सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक ऐसे आतंकी को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 16 सालों से भारत में अलग-अलग पहचान बनाकर रह रहा था। कई रूप बदलकर छिपा रहा आतंकी जांच में सामने आया कि यह आतंकी—जिसे अबू हुरैरा उर्फ अब्दुल्ला के नाम से जाना जाता है—ने खुद को बचाने के लिए कई पेशे अपनाए: उसका मकसद था स्थानीय लोगों में घुल-मिलकर एक मजबूत नेटवर्क खड़ा करना। फर्जी पहचान से बनाया नेटवर्क जांच एजेंसियों के अनुसार: इस तरह वह वर्षों तक सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचता रहा। ढाबा चलाया, शेयर ट्रेडिंग भी सीखी चौंकाने वाली बात यह है कि: यानी आतंकी सिर्फ छिपा ही नहीं था, बल्कि आम नागरिक की तरह पूरी जिंदगी जी रहा था। कैसे हुआ खुलासा? यह पूरा मामला तब सामने आया जब श्रीनगर पुलिस ने एक इंटरस्टेट आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया। पूरे देश में फैला था नेटवर्क पूछताछ में खुलासा हुआ कि: क्या है इस गिरफ्तारी का मतलब? यह गिरफ्तारी कई बड़े सवाल खड़े करती है: यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा अलर्ट है। एक आतंकी का 16 साल तक सामान्य जिंदगी जीते रहना यह दिखाता है कि:👉 खतरा केवल सीमा पर नहीं, समाज के भीतर भी छिपा हो सकता है👉 और सतर्कता अब सिर्फ एजेंसियों नहीं, बल्कि आम लोगों की भी जिम्मेदारी है
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Pahalgam Attack Anniversary, Operation Sindoor, India vs Pakistan, Kashmir Terror Attack, India Defense Strategy

Breaking News | “पहली बरसी पर भारत का गरजता संदेश” – हर वार का हिसाब, PAK को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का आईना

नई दिल्ली/श्रीनगर: आज Pahalgam हमले की पहली बरसी है—एक साल पहले हुए उस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस मौके पर भारत ने न सिर्फ शहीदों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश भी दिया—“हर वार का हिसाब है… और जवाब भी तय है।” पहली बरसी: दर्द भी, संकल्प भी Pahalgam Attack की पहली बरसी पर घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और देशभर में शहीदों को याद किया जा रहा है। “ऑपरेशन सिंदूर” – एक सख्त संदेश इस बरसी के मौके पर “ऑपरेशन सिंदूर” का जिक्र भारत के बदले हुए रुख को साफ दिखाता है— /deshharpal/pahalgam-attack-first-anniversary-india-warning-operation-sindoorयह सीधे तौर पर पाकिस्तान को चेतावनी है कि“अब भारत सिर्फ सहने वाला नहीं, जवाब देने वाला देश है।” बदलती रणनीति: अब जवाब तुरंत पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को और आक्रामक किया है— “ऑपरेशन सिंदूर” इसी नई नीति का प्रतीक बनकर सामने आया है दुनिया के सामने PAK बेनकाब भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को घेर रहा है— इसका असर यह हुआ कि पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा है। बरसी पर हाई अलर्ट पहली बरसी को देखते हुए जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं— सरकार किसी भी खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। बड़ी बात (Big Takeaway) पहलगाम हमले की पहली बरसी पर भारत ने साफ कर दिया है— 👉 अब हर हमले का जवाब मिलेगा👉 आतंकवाद के खिलाफ नीति और भी सख्त होगी “ऑपरेशन सिंदूर” सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्किभारत की नई आक्रामक रणनीति का संकेत है।
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Love Jihad Debate: नासिक से भोपाल तक बढ़ते केस, सच्चाई क्या है?

संपादकीय भारत में “लव जिहाद” बहस तेज—नासिक, भोपाल समेत कई शहरों में सामने आए मामलों का विश्लेषण। क्या कहते हैं कानून, आंकड़े और विशेषज्ञ? पढ़ें पूरा संपादकीय। भारत में पिछले कुछ वर्षों में “लव जिहाद” को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। नासिक, परतवाड़ा, अकोला और भोपाल जैसे शहरों से सामने आए मामलों ने इस मुद्दे को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सवाल यह है कि क्या ये घटनाएं अलग-अलग आपराधिक मामले हैं, या इसके पीछे कोई बड़ा पैटर्न है? क्या कहते हैं कानून और सरकार? सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि “लव जिहाद” शब्द भारतीय कानून में परिभाषित नहीं है। केंद्र सरकार ने संसद में कई बार स्पष्ट किया है कि इस नाम से कोई अलग अपराध श्रेणी नहीं है। हालांकि, कई राज्यों ने जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून बनाए हैं: इन कानूनों के लागू होने के बाद दर्ज मामलों में कुछ वृद्धि देखी गई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बढ़ती जागरूकता और रिपोर्टिंग का असर भी हो सकता है। आंकड़े क्या बताते हैं? यानी, आंकड़े मिश्रित तस्वीर दिखाते हैं—कुछ मामले वास्तविक अपराध के हैं, तो कुछ व्यक्तिगत विवाद या सहमति वाले रिश्तों के। हाईली एजुकेटेड लड़कियां क्यों बनती हैं टारगेट? यह सबसे बड़ा सवाल है। आम धारणा के विपरीत, शिक्षा हमेशा भावनात्मक निर्णयों को नहीं रोकती। विशेषज्ञों के अनुसार: ये सभी कारण किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं—चाहे वह कितना भी शिक्षित क्यों न हो। क्या हर इंटरफेथ शादी संदिग्ध है? बिल्कुल नहीं। भारत में हजारों अंतर-धार्मिक शादियां हर साल होती हैं, जिनमें से अधिकांश पूरी तरह सहमति और वैध प्रक्रिया के तहत होती हैं। समस्या तब शुरू होती है जब: यहीं पर कानून हस्तक्षेप करता है। क्या यह केवल एक समुदाय का मुद्दा है? इस तरह की घटनाओं को किसी एक धर्म से जोड़ना वास्तविकता को सरल बना देना होगा पर यह भी उतना ही बड़ा सच हैं की अधिकांश घटनाओ में मुस्लिम युवा इसमें संलिप्त पाये गए हैं । दुनिया भर में “रोमांस स्कैम”, “ऑनलाइन ग्रूमिंग” और “इमोशनल एक्सप्लॉइटेशन” के मामले बढ़ रहे हैं—और यह हर समाज में मौजूद समस्या है। समाज और संगठनों की भूमिका “लव जिहाद” की बहस भावनात्मक जरूर है, लेकिन इसका समाधान केवल भावनाओं से नहीं निकलेगा। जरूरत है: हर अंतर-धार्मिक रिश्ते को शक की नजर से देखना गलत है, लेकिन वास्तविक अपराधों को नजरअंदाज करना भी उतना ही खतरनाक हैl
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मोहन यादव

Breaking MP BJP Nari Aakrosh Rally भोपाल में महिला शक्ति का प्रदर्शन, कांग्रेस पर CM Mohan Yadav का तीखा हमला

नगर सवंदाता l भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को बीजेपी ने “जन आक्रोश महिला रैली” का बड़ा आयोजन किया, जो अब राजनीतिक रूप से काफी चर्चा में है। यह रैली महिला आरक्षण बिल पास न होने के विरोध में आयोजित की गई, जिसमें हजारों की संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। यह विशाल रैली एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर रोशनपुरा चौराहे तक निकाली गई। पूरे मार्ग में बीजेपी महिला कार्यकर्ताओं और नेताओं का जोश देखने लायक रहा। हाथों में तख्तियां, नारेबाजी और संगठित मार्च के जरिए महिलाओं ने अपनी नाराजगी जताई। रैली के समापन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) ने मंच से कांग्रेस और प्रियंका गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि: “महिलाओं के हक की बात करने वाली कांग्रेस ने ही संसद में महिला आरक्षण बिल का विरोध किया, जिससे उनका असली चेहरा सामने आ गया है।” समापन के दौरान सीएम ने काले गुब्बारे छोड़कर विरोध दर्ज कराया, जो इस रैली का प्रतीकात्मक हाईलाइट बना। महिला आरक्षण बिल पर अपडेट हाल ही में संसद में पेश 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इस बिल में: वोटिंग का आंकड़ा: यही वजह रही कि बीजेपी ने इसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसकी कड़ी भोपाल की यह रैली बनी। कौन-कौन रहा मौजूद? इस रैली में बीजेपी के कई बड़े चेहरे शामिल हुए, जिनमें: यह रैली सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि आगामी चुनावों से पहले महिला वोट बैंक को साधने की रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। बीजेपी इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है।
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BJP strategy women reservation

Editorial: ‘Win-Win Politics’ या सोची-समझी रणनीति? महिला आरक्षण बिल पर सियासी शतरंज

संपादकीय निखिल सिद्धभट्टी (प्रधान संपादक ) 17 अप्रैल की दोपहर, जब Narendra Modi ने सोशल मीडिया पर अपील की—“महिलाओं को उनका हक दीजिए”—तो यह सिर्फ एक भावनात्मक संदेश नहीं था, बल्कि एक बड़े राजनीतिक मूव का संकेत भी था। कुछ ही घंटों बाद लोकसभा में जो हुआ, उसने साफ कर दिया कि यह सिर्फ विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सियासी रणनीति का हाई-वोल्टेज खेल था। सरकार का बिल पास नहीं हुआ—लेकिन क्या वाकई यह हार थी? या फिर यह एक ऐसी चाल थी जिसमें दोनों रास्तों पर फायदा ही फायदा था? सरकार की चाल: हार में भी जीत का रास्ता Bharatiya Janata Party और NDA के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं था—यह बात किसी से छुपी नहीं थी। फिर भी बिल लाया गया, जोर-शोर से अपीलें हुईं, और अंततः वोटिंग में यह गिर गया। यहीं से “Win-Win Strategy” की शुरुआत होती है: यानी परिणाम चाहे जो भी हो, नैरेटिव सरकार के पक्ष में सेट था। विपक्ष की स्थिति: मुद्दा सही, मैसेज कमजोर Indian National Congress समेत विपक्ष ने बिल का विरोध पूरी रणनीति के साथ किया—परिसीमन, जनगणना और OBC प्रतिनिधित्व जैसे गंभीर मुद्दे उठाए।Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi ने साफ कहा कि यह “महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक पुनर्संरचना” है। लेकिन समस्या यहां थी: राजनीति में अक्सर भावनाएं, लॉजिक पर भारी पड़ती हैं। यही वह जगह है जहां विपक्ष, खासकर कांग्रेस, नैरेटिव की लड़ाई में पीछे दिखी। क्या विपक्ष ‘जाल’ में फंस गया? सरकार की रणनीति को देखें तो यह साफ लगता है कि: अगर विपक्ष समर्थन करता → सरकार को सीधा क्रेडिटअगर विरोध करता → “महिला विरोधी” टैग यानी यह एक क्लासिक राजनीतिक ट्रैप था—और विपक्ष इसमें उलझता नजर आया। अब सवाल उठता हैं कि इसका राजनीतिक असरआगे क्या होगा ? तो इस पूरे घटनाक्रम के तीन बड़े असर हो सकते हैं: यह पूरा मामला सिर्फ एक विधेयक के पास या फेल होने का नहीं था। यह उस धारणा (Perception) की लड़ाई थी, जिसमें Narendra Modi की सरकार एक कदम आगे नजर आई। राजनीति में कई बार असली जीत संसद के भीतर नहीं, बल्कि जनता के दिमाग में होती है।और इस बार—बिल गिरने के बावजूद—सरकार ने वही हासिल करने की कोशिश की है।
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Astrology Update: वैशाख अमावस्या पर शनि का नक्षत्र परिवर्तन, इन 4 राशियों के लिए खुलेंगे किस्मत के दरवाजे

वैशाख अमावस्या के आसपास शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026 होने जा रहा है। जानें इसका असर किन राशियों पर पड़ेगा, किनकी किस्मत चमकेगी और क्या कहता है ज्योतिष। वैशाख अमावस्या के खास संयोग के बीच 2026 में शनि देव एक महत्वपूर्ण नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 17 अप्रैल के आसपास शनि उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिसका प्रभाव पूरे एक महीने तक रहेगा। ज्योतिष में शनि को कर्मफलदाता माना जाता है, इसलिए उनकी चाल में बदलाव सीधे तौर पर व्यक्ति के करियर, धन और जीवन की दिशा को प्रभावित करता है। क्या है शनि नक्षत्र परिवर्तन और क्यों है खास? वैदिक ज्योतिष के अनुसार शनि लगभग हर 3-4 महीने में नक्षत्र बदलते हैं, लेकिन हर बदलाव का प्रभाव अलग होता है। वैशाख अमावस्या का संयोग क्यों बना खास? वैशाख अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों और पुण्य कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे समय पर शनि का नक्षत्र बदलना एक कर्म और भाग्य दोनों को प्रभावित करने वाला योग माना जा रहा है। इन 4 राशियों की चमक सकती है किस्मत वृषभ (Taurus) मिथुन (Gemini) मकर (Capricorn) मीन (Pisces) किन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? शनि के इस परिवर्तन का असर मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में दिख सकता है— शनि का संकेत – मेहनत का मिलेगा फल ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब शनि अपनी स्थिति बदलते हैं तो— जो लोग मेहनत कर रहे होते हैं, उन्हें धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं। यानी यह समय “कर्म आधारित सफलता” का संकेत देता है। क्या रखें सावधानी? हालांकि कुछ राशियों के लिए यह समय अच्छा है, लेकिन— वैशाख अमावस्या के आसपास होने वाला शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026 केवल एक ज्योतिषीय घटना नहीं, बल्कि जीवन के कई पहलुओं में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। खासकर वृषभ, मिथुन, मकर और मीन राशि वालों के लिए यह समय नए अवसर और राहत लेकर आ सकता है।
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Modi

Historic Bill: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर पीएम मोदी का बड़ा बयान – South vs North, परिसीमन और क्रेडिट पर साफ संदेश

पीएम नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर बोलते हुए South vs North बहस, परिसीमन और राजनीतिक क्रेडिट पर बड़ा बयान दिया। जानें उनके भाषण की पूरी बड़ी बातें। नई दिल्ली लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ महिला आरक्षण पर बात की, बल्कि South vs North बहस, परिसीमन (Delimitation) और राजनीतिक क्रेडिट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी स्पष्ट और मजबूत रुख रखा। उन्होंने कहा कि यह बिल देश की दिशा और दशा दोनों तय करेगा, इसलिए इसे राजनीति के चश्मे से नहीं देखना चाहिए। South vs North पर बड़ा बयान – “किसी के साथ अन्याय नहीं होगा” पीएम मोदी ने सबसे अहम आशंका पर सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा— चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो या पश्चिम,छोटे राज्य हों या बड़े — किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में किसी क्षेत्र को नुकसान नहीं होगा और संतुलन पूरी तरह बनाए रखा जाएगा। परिसीमन (Delimitation) पर साफ आश्वासन परिसीमन को लेकर चल रही चिंताओं पर पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा— यानी उन्होंने साफ संकेत दिया कि महिला आरक्षण के नाम पर सीटों के बंटवारे में कोई राजनीतिक या क्षेत्रीय खेल नहीं होगा। “क्रेडिट नहीं चाहिए” – पीएम मोदी का बड़ा संदेश पीएम मोदी ने विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा— “हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, देश के लिए सही निर्णय चाहिए।” उन्होंने इसे राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन देने की अपील की। “राजनीति का रंग न दें” प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बिल 25–30 साल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। अगर तब हो जाता तो आज तक इसे और बेहतर बनाया जा सकता था। उन्होंने साफ कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक लाभ-हानि का नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का है। महिलाओं की बढ़ती ताकत का जिक्र पीएम मोदी ने जमीनी स्तर पर महिलाओं की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा— उन्होंने कहा कि यही “ग्रासरूट पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस” अब राष्ट्रीय राजनीति को भी बदल रही है। विरोध करने वालों को महिलाओं ने नहीं किया माफ प्रधानमंत्री ने कहा कि जो लोग पहले महिला आरक्षण के खिलाफ थे, उन्हें महिलाओं ने चुनावों में जवाब दिया है। हालांकि 2024 में सर्वसम्मति से बिल पास होने के कारण यह विवाद का मुद्दा नहीं बना। “विकसित भारत में महिलाओं की बराबरी जरूरी” पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, ब ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर पीएम मोदी का भाषण सिर्फ एक बिल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें South vs North संतुलन, परिसीमन की पारदर्शिता और राजनीति से ऊपर उठने का संदेश साफ दिखाई दिया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ऐतिहासिक फैसला आने वाले समय में भारतीय राजनीति और महिला नेतृत्व को किस तरह नई दिशा देता है।
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AMIT SHAH

संसद में अमित शाह का सपा पर तीखा वार—“अगर चाहें तो सारी सीटें मुस्लिमों को दे दें”

लोकसभा में बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह चाहें तो अपनी सारी सीटें मुस्लिमों को दे दें। जानिए पूरा राजनीतिक संदर्भ और विवाद।लोकसभा में चल रही बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समाजवादी पार्टी (SP) पर निशाना साधते हुए तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर सपा को मुस्लिमों के लिए इतनी चिंता है, तो “वे अपनी सभी सीटें मुस्लिमों को दे सकते हैं”—लेकिन संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। यह पूरा विवाद धर्म आधारित आरक्षण (Religion-based reservation) और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर हुआ।
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Breaking News: बदायूं के मदरसे में कार्यक्रम के दौरान ‘हनुमान जी’ को बताया गया ‘भ्रष्ट अधिकारी’—मामला गरमाया

उत्तर प्रदेश के बदायूं में मदरसे के एक कार्यक्रम में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला सामने आया है। ‘हनुमान जी’ को ‘भ्रष्ट अधिकारी’ कहने पर विवाद बढ़ा, जांच शुरू। उत्तर प्रदेश के बदायूं से एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक मदरसे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान मंच से ‘हनुमान जी’ को ‘भ्रष्ट अधिकारी’ कहकर संबोधित किया गया, जिसके बाद यह मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। वीडियो वायरल, बढ़ा विवाद घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश बढ़ गया। कई संगठनों और स्थानीय लोगों ने इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई और कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन हरकत में मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने संज्ञान लिया है। पुलिस द्वारा वीडियो की जांच की जा रही है और कार्यक्रम में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। सामाजिक माहौल पर असर इस घटना ने क्षेत्र में धार्मिक संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है। प्रशासन शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है और लोगों से अफवाहों से बचने को कहा गया है। धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर इस तरह की टिप्पणियां समाज में तनाव पैदा कर सकती हैं। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
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AIIMS Bhopal, Dr Tanya Sharma, World Congress of Nephrology 2026, Membranous Nephropathy Research, ICMR Research India, Kidney Disease Study, Japan Conference News

Global Recognition: AIIMS Bhopal की डॉ. तान्या शर्मा ने Japan में बढ़ाया भारत का मान

AIIMS Bhopal की डॉ. तान्या शर्मा ने World Congress of Nephrology 2026 (Japan) में मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी पर ICMR फंडेड रिसर्च प्रस्तुत कर भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया। भोपाल से ग्लोबल मंच तक: AIIMS की डॉक्टर ने दिखाई रिसर्च की ताकत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के लिए गर्व का क्षण है। एम्स भोपाल (AIIMS Bhopal) की डॉक्टर डॉ. तान्या शर्मा ने जापान के योकोहामा में आयोजित World Congress of Nephrology 2026 में अपने शोध कार्य को प्रस्तुत कर देश का नाम रोशन किया है। यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन किडनी से जुड़ी बीमारियों पर रिसर्च और नई खोजों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, जहां चयनित वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को ही अपने कार्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। International Society से मिला Travel Grant डॉ. तान्या शर्मा को इस बड़े मंच पर अपने शोध को प्रस्तुत करने के लिए International Society of Nephrology (ISN) की ओर से ट्रैवल ग्रांट भी प्रदान किया गया। यह ग्रांट उन चुनिंदा शोधकर्ताओं को दिया जाता है, जिनका काम वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। किस विषय पर था शोध? डॉ. शर्मा का यह शोध मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी (Membranous Nephropathy) नामक गंभीर किडनी रोग पर आधारित है। यह शोध ICMR (Indian Council of Medical Research) द्वारा वित्तपोषित है। उनके अध्ययन में इस बीमारी से जुड़े नए एंटीजन (Antigens) की पहचान पर विशेष काम किया गया है। 👉 इस खोज से भविष्य में: भारत के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि आज के समय में किडनी से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में भारतीय वैज्ञानिकों का इस स्तर पर रिसर्च प्रस्तुत करना न केवल मेडिकल फील्ड में नई दिशा देता है, बल्कि भारत की रिसर्च क्षमता को भी वैश्विक मंच पर मजबूत करता है। AIIMS Bhopal की यह उपलब्धि सिर्फ एक संस्थान की नहीं, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश और देश के लिए गर्व का विषय है। डॉ. तान्या शर्मा जैसे युवा शोधकर्ता भारत को मेडिकल रिसर्च में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।
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Editor's Picks

अक्षर पटेल का ऑलराउंड शो, शुभमन गिल की कप्तानी पारी; भारत ने इंग्लैंड को 6 विकेट से हराकर पहला वनडे जीता

बर्मिंघम। ऑलराउंडर अक्षर पटेल के शानदार प्रदर्शन और कप्तान शुभमन गिल की बेहतरीन बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने इंग्लैंड को पहले वनडे मुकाबले में 6 विकेट से हराकर सीरीज में विजयी शुरुआत की। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए मैच में भारत ने 259 रन के लक्ष्य को 45.2 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 262 रन बनाकर हासिल कर लिया। अक्षर पटेल ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि वॉशिंगटन सुंदर ने भी नाबाद 52 रन की महत्वपूर्ण पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। कप्तान शुभमन गिल ने 80 रन बनाए, लेकिन मैच के दौरान क्रैम्प्स की समस्या के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा। शुरुआती झटकों के बाद गिल ने संभाली पारी लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। रोहित शर्मा 11 रन और विराट कोहली 5 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान शुभमन गिल और श्रेयस अय्यर ने तीसरे विकेट के लिए 101 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम की पारी को संभाला। श्रेयस 35 रन बनाकर रनआउट हुए, जबकि केएल राहुल बोल्ड होकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभालते हुए पांचवें विकेट के लिए 102 रन की अविजित साझेदारी की और भारत को शानदार जीत दिलाई। जो रूट और लियाम डॉसन ने इंग्लैंड को संभाला इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की टीम ने 47.5 ओवर में 258 रन बनाए। इंग्लैंड की शुरुआत मजबूत रही और टीम ने 61 रन तक कोई विकेट नहीं गंवाया, लेकिन इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने जोरदार वापसी करते हुए महज 19 रन के भीतर 5 विकेट झटक दिए। मध्यक्रम में जो रूट ने 76 रन और लियाम डॉसन ने 68 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 121 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। अक्षर पटेल ने गेंद और बल्ले दोनों से निभाई अहम भूमिका भारतीय गेंदबाजों में अक्षर पटेल सबसे सफल रहे। उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट अपने नाम किए। वहीं प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार ने 2-2 विकेट हासिल किए। जसप्रीत बुमराह और शिवम दुबे को एक-एक सफलता मिली। गेंद और बल्ले दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अक्षर पटेल ने टीम इंडिया की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई और भारत ने सीरीज की शानदार शुरुआत की। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।

रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

CBSE की थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, सरकार और बोर्ड से 10 दिन में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि “कोई भी भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता।” हालांकि, नीति को लागू करने में सामने आ रही व्यावहारिक चुनौतियों को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार, CBSE और संबंधित पक्षों से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को होगी। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई है। इसके तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा पढ़नी होगी। इससे कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषाओं में बदलाव करना पड़ सकता है। क्या है विवाद? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CBSE ने पर्याप्त तैयारी के बिना नई भाषा नीति लागू कर दी है। उनके मुताबिक कई स्कूलों में संबंधित भाषाओं के शिक्षक, पाठ्यपुस्तकें और आवश्यक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे छात्रों और शिक्षकों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी से जुड़े अहम सवाल और जवाब 1. मामला क्या है? सुप्रीम कोर्ट में CBSE के उस नियम को चुनौती दी गई है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। इनमें कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। हालांकि, CBSE ने 6 जून को संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया था कि इस वर्ष कक्षा 10 के छात्रों को तीसरी भाषा (R3) की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। 2. नए नियम में क्या बदलाव हुआ है? पहले कई छात्र अंग्रेजी के साथ एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच या जर्मन) पढ़ते थे। नए नियम के अनुसार अब तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुनी जा सकेगी। 3. याचिका किसने दायर की? यह याचिका छात्र यशिका भंडारी, अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी की ओर से दायर की गई है। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर, मुकुल रोहतगी और गोपाल शंकरनारायणन ने पैरवी की। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। 4. याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है? याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नई व्यवस्था अचानक लागू कर दी गई। कई भारतीय भाषाओं की किताबें उपलब्ध नहीं हैं और अधिकांश स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक भी नहीं हैं। ऐसे में छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 5. किताबों को लेकर क्या दलील दी गई? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि 22 भारतीय भाषाओं में से फिलहाल केवल तीन भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध हैं। ऐसे में बाकी भाषाओं की पढ़ाई शुरू करना व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। 6. शिक्षकों की कमी पर क्या कहा गया? याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि नई भारतीय भाषाएं पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता होगी, लेकिन इतने कम समय में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण संभव नहीं है। 7. क्या विदेशी भाषाएं बंद हो जाएंगी? नहीं। छात्र फ्रेंच, जर्मन, जापानी जैसी विदेशी भाषाएं पढ़ सकते हैं, लेकिन इसके साथ उन्हें दो भारतीय भाषाएं भी पढ़नी होंगी। विदेशी भाषा तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में होगी। 8. क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी? नहीं। CBSE ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड एग्जाम नहीं होगा, ताकि छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव न बढ़े। 9. अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार, CBSE और NCERT अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद 29 जुलाई को अदालत इस मामले में आगे की सुनवाई करेगी। नई शिक्षा नीति 2020 क्या है? भारत सरकार ने 29 जुलाई 2020 को नई शिक्षा नीति (NEP 2020) को मंजूरी दी थी। यह 34 वर्षों बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में किया गया सबसे बड़ा बदलाव माना जाता है। इससे पहले शिक्षा नीति 1986 में लागू हुई थी, जिसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकसित करना है। केंद्र सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से 2030 तक लागू करने का लक्ष्य रखा है। चूंकि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है, इसलिए इसे लागू करने में केंद्र और राज्य सरकारों दोनों की भूमिका होती है। देश, शिक्षा और करियर से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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