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Government vs Court : धार्मिक परंपरा पर बहस, किसका है अंतिम अधिकार?

Government vs Court : धार्मिक परंपरा पर बहस, किसका है अंतिम अधिकार?

देश में एक बार फिर धर्म और कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। Government vs Court के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि धार्मिक परंपराओं को अंधविश्वास माना जाए या नहीं, और इसका फैसला कौन करेगा। सरकार का कहना है कि किसी भी धार्मिक परंपरा को अंधविश्वास बताना कोर्ट का काम नहीं है। सरकार के मुताबिक, इस तरह के फैसले लेना विधायिका (Legislature) का अधिकार है, क्योंकि वही जनता द्वारा चुनी गई संस्था है।सरकार ने यह भी कहा कि कोर्ट इस मामले में एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए उसे सीमित दायरे में ही रहकर काम करना चाहिए। वहीं, कोर्ट ने साफ कहा कि उसे किसी भी मामले की समीक्षा (Review) करने का पूरा अधिकार है। अगर किसी परंपरा से लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह संविधान के आधार पर हर मुद्दे को देखने के लिए स्वतंत्र है। इस बहस का असर सीधे आम लोगों की आस्था और अधिकारों पर पड़ सकता है। एक तरफ लोग अपनी धार्मिक परंपराओं को बचाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ यह भी जरूरी है कि किसी भी परंपरा के नाम पर किसी के अधिकारों का हनन न हो। यह मुद्दा सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि देश में संविधान, आस्था और कानून के बीच संतुलन कैसे बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC का आरोप- चुनाव आयोग ने 5 मिनट में बाहर निकाला

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया है कि जब उनके नेता चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर Election Commission of India (EC) के पास पहुंचे, तो उन्हें सिर्फ 5 मिनट के भीतर ही बाहर कर दिया गया। TMC नेताओं का कहना है कि वे SIR (Special Intensive Revision) को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने गए थे। उनका आरोप है कि आयोग ने उनकी बात ठीक से सुनी भी नहीं और उन्हें जल्दबाजी में बाहर जाने को कह दिया। इस घटना के बाद TMC ने चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अगर उनकी बात ही नहीं सुनी जाएगी, तो निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव होंगे। वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है, लेकिन साफ कहा है कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह “भयमुक्त और निष्पक्ष” होंगे। आयोग का कहना है कि वह हर मतदाता को सुरक्षित माहौल देने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजनीतिक माहौल को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस बार चुनाव वास्तव में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America-Iran के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर, 40 दिन बाद थमी जंग

America-Iran के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर, 40 दिन बाद थमी जंग

करीब 40 दिनों से जारी अमेरिका और Iran के बीच तनाव और हमलों के बाद आखिरकार दोनों देशों ने 2 हफ्तों के लिए सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति जताई है। इस फैसले से दुनिया भर में राहत की उम्मीद जगी है, क्योंकि इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir की अपील के बाद लिया गया। उनके मुताबिक, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाई। पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हमले और जवाबी कार्रवाई होती रही, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए थे। आम लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया था। ऐसे में यह सीजफायर लोगों के लिए राहत भरी खबर है। हालांकि, यह युद्धविराम सिर्फ 2 हफ्तों के लिए है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान अगर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ती है, तो स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह अस्थायी सीजफायर लंबे समय तक शांति में बदल पाएगा या फिर तनाव दोबारा बढ़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jammu Kashmir में 2 पाकिस्तानी आतंकवादी गिरफ्तार, 16 साल से फरार था एक

Jammu Kashmir में 2 पाकिस्तानी आतंकवादी गिरफ्तार, 16 साल से फरार था एक

Jammu Kashmir में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। यहां 2 पाकिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक आतंकवादी पिछले 16 साल से फरार चल रहा था, जिसे पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। जानकारी के मुताबिक, ये दोनों आतंकवादी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से घाटी में सक्रिय थे। सुरक्षा बलों ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए इन्हें दबोच लिया। सिर्फ इतना ही नहीं, इस ऑपरेशन के दौरान आतंकियों की मदद करने वाले 3 स्थानीय सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये लोग आतंकियों को छिपने की जगह, खाना और अन्य जरूरी मदद उपलब्ध कराते थे। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से इलाके में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। साथ ही आने वाले समय में और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों ने भी राहत की सांस ली है, क्योंकि ऐसे आतंकियों की मौजूदगी हमेशा आम नागरिकों के लिए खतरा बनी रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Assam Police का कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा, बयान को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

Assam Police का कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर छापा, बयान को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

Assam Police ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा के घर छापेमारी की है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, पवन खेड़ा ने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन पासपोर्ट हैं। इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। पुलिस की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि यह सब राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सच को दबाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा की ओर से कहा गया है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी बेबुनियाद आरोप लगाने की छूट नहीं दी जा सकती। इस पूरे मामले ने आम लोगों के बीच भी चर्चा बढ़ा दी है। कई लोग इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई मान रहे हैं, तो कुछ इसे कानून का सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और सच्चाई क्या सामने आती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sabarimala विवाद: सरकार ने Supreme Court से कहा- धार्मिक मामलों में न हो दखल

Sabarimala विवाद: सरकार ने Supreme Court से कहा- धार्मिक मामलों में न हो दखल

केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। इस मामले में सरकार ने Supreme Court में अपनी बात रखते हुए कहा है कि अदालत को धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सरकार का कहना है कि सबरीमाला मंदिर की परंपराएं सदियों पुरानी हैं और इनका अपना एक धार्मिक महत्व है। यदि इन परंपराओं में बदलाव किया जाता है, तो इससे श्रद्धालुओं की आस्था पर असर पड़ सकता है। खासतौर पर महिलाओं की एंट्री को लेकर सरकार ने कहा कि यह फैसला मंदिर की मूल परंपरा को बदल सकता है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि हर धर्म और मंदिर की अपनी अलग परंपराएं होती हैं, जिन्हें बनाए रखना जरूरी है। ऐसे मामलों में अदालत को सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। वहीं, इस मुद्दे पर देशभर में अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ लोग महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने के पक्ष में हैं, तो कुछ लोग इसे परंपरा के खिलाफ मानते हैं। अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है, जो तय करेगा कि परंपरा और समान अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran Crisis Update: ‘आज की रात भारी’—Trump के बड़े Attack की आशंका, Middle East में बढ़ा तनाव

Trump का बड़ा बयान: “ईरान को एक रात में खत्म कर सकते हैं”

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर अपने तीखे बयानों से माहौल गरमा दिया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो Iran को सिर्फ एक रात में खत्म किया जा सकता है। ट्रम्प के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पहले से ही मध्य पूर्व में हालात नाजुक बने हुए हैं, ऐसे में इस तरह के बयान लोगों की चिंता और बढ़ा रहे हैं। इसी बीच, एक और विवाद सामने आया है। एक घायल पायलट से जुड़ी संवेदनशील जानकारी मीडिया में लीक हो गई है। इस पर ट्रम्प ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जो भी पत्रकार इस खबर को लीक करने के पीछे है, उसे ढूंढकर जेल भेजा जाएगा। ट्रम्प ने साफ कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया। इस पूरे मामले ने मीडिया की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आम लोग भी यह जानना चाहते हैं कि आखिर सच्चाई क्या है और इस विवाद का आगे क्या असर होगा। Deshharpal.com पर और अपडेट के लिए जुड़े रहें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRAN में पावर प्लांट्स की सुरक्षा के लिए जनता का घेरा, हमलों के बीच नया प्लान

IRAN में पावर प्लांट्स की सुरक्षा के लिए जनता का घेरा, हमलों के बीच नया प्लान

IRAN में लगातार बढ़ते हमलों के खतरे के बीच अब आम लोग भी देश की सुरक्षा में आगे आ रहे हैं। सरकार ने पावर प्लांट्स को सुरक्षित रखने के लिए एक खास योजना बनाई है, जिसके तहत इन अहम ठिकानों के चारों ओर लोगों का घेरा बनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि दुश्मनों के संभावित हमलों से बिजली उत्पादन केंद्रों को बचाया जा सके। इन पावर प्लांट्स पर हमला होने से पूरे देश में बिजली संकट पैदा हो सकता है, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ेगा। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलने के लिए दी गई मोहलत आज खत्म हो रही है। इस डेडलाइन के खत्म होने से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। हालात को देखते हुए ईरान सरकार सतर्क है और हर जरूरी कदम उठा रही है। आम नागरिकों का इस तरह आगे आना यह दिखाता है कि देश के लोग भी इस मुश्किल समय में सरकार के साथ खड़े हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold-Silver फिर महंगे: आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ, इस साल सोना ₹15 हजार तक चढ़ा

Gold-Silver फिर महंगे: आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ, इस साल सोना ₹15 हजार तक चढ़ा

देश में एक बार फिर Gold-Silver की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला है। मंगलवार को सोना ₹1,283 महंगा होकर ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत भी ₹3,215 बढ़कर ₹2.31 लाख प्रति किलो हो गई है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में जहां लोग सोना खरीदने की योजना बनाते हैं, वहीं अब बढ़ती कीमतें उनके बजट को बिगाड़ रही हैं। अगर पूरे साल की बात करें, तो 2026 में अब तक सोने की कीमत करीब ₹15,000 तक बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव जैसे कारणों से सोने-चांदी के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। बाजार में सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग पर पड़ रहा है। जो लोग निवेश या जरूरत के लिए सोना खरीदते हैं, उनके लिए यह समय मुश्किल भरा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो सोने-चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IPL 2026: Kolkata Knight Riders vs Punjab Kings – कोलकाता के लिए जीत जरूरी, पंजाब का शानदार फॉर्म

IPL 2026: Kolkata Knight Riders vs Punjab Kings – कोलकाता के लिए जीत जरूरी, पंजाब का शानदार फॉर्म

IPL 2026 में आज का मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। Kolkata Knight Riders (KKR) और Punjab Kings (PBKS) आमने-सामने होंगे, लेकिन दोनों टीमों की शुरुआत बिल्कुल अलग रही है। कोलकाता की टीम ने अब तक खेले दोनों शुरुआती मैच गंवा दिए हैं। टीम बैटिंग और बॉलिंग दोनों में संघर्ष करती नजर आई है। ऐसे में आज का मैच KKR के लिए ‘करो या मरो’ जैसा हो सकता है। वहीं पंजाब की टीम शानदार लय में है। PBKS ने अपने शुरुआती मुकाबलों में मजबूत टीमों Chennai Super Kings और Gujarat Titans को हराकर अपना दम दिखाया है। टीम का आत्मविश्वास इस समय काफी ऊंचा है। मैच में क्या रहेगा खास? नजर किन खिलाड़ियों पर? यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि दोनों टीमों के आत्मविश्वास की परीक्षा भी है। जहां KKR वापसी करना चाहेगी, वहीं PBKS जीत का सिलसिला जारी रखना चाहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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