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भारत की बड़ी रक्षा सफलता: Indonesia खरीदेगा ब्रह्मोस मिसाइल

भारत की बड़ी रक्षा सफलता: Indonesia खरीदेगा ब्रह्मोस मिसाइल

भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक का दुनिया में लगातार दबदबा बढ़ रहा है। अब Indonesia भी भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी में है। इतना ही नहीं, हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल की गई अस्त्र मिसाइल को लेकर भी दोनों देशों के बीच अहम बातचीत हुई है। इससे भारत और इंडोनेशिया के रक्षा संबंध और मजबूत होने की उम्मीद है। ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने की तैयारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया लंबे समय से ब्रह्मोस मिसाइल में रुचि दिखा रहा था। अब दोनों देशों के बीच इस सौदे को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है, जो समुद्र, जमीन और हवा—तीनों माध्यमों से दुश्मन पर सटीक हमला करने में सक्षम है। अस्त्र मिसाइल पर भी बनी सहमति ब्रह्मोस के अलावा भारत की अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर भी इंडोनेशिया ने रुचि दिखाई है। यह वही मिसाइल है, जिसका इस्तेमाल हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने किया था। इसकी सटीक मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रक्षा साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से रणनीतिक साझेदार हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। अगर यह रक्षा समझौता पूरा होता है, तो इससे दोनों देशों की सुरक्षा साझेदारी और मजबूत होगी। साथ ही भारत के रक्षा निर्यात को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। पीएम मोदी को मिला इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान भारत और इंडोनेशिया के मजबूत होते रिश्तों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास, सहयोग और मजबूत कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। भारत के लिए क्यों है यह डील खास? भारत की रक्षा तकनीक अब सिर्फ देश की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि दुनिया के कई देश भी उस पर भरोसा जता रहे हैं। इंडोनेशिया के साथ होने वाला यह संभावित समझौता भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए एक और बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump ने FIFA अध्यक्ष पर बनाया दबाव! अमेरिकी खिलाड़ी का रेड कार्ड हटवाया

Donald Trump ने FIFA अध्यक्ष पर बनाया दबाव! अमेरिकी खिलाड़ी का रेड कार्ड हटवाया

Fifa World Cup के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump पर आरोप है कि उन्होंने फीफा अध्यक्ष को फोन कर अमेरिकी फुटबॉल खिलाड़ी का रेड कार्ड रद्द करवाने का दबाव बनाया। हालांकि, इस पूरे विवाद के बावजूद अमेरिका की टीम बेल्जियम के खिलाफ मुकाबला हार गई और वर्ल्ड कप से बाहर हो गई। बताया जा रहा है कि मैच के दौरान अमेरिका के एक अहम खिलाड़ी को रेफरी ने रेड कार्ड दिखाकर मैदान से बाहर भेज दिया था। इस फैसले के बाद ट्रम्प काफी नाराज हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने सीधे फीफा अध्यक्ष से फोन पर बात की और रेड कार्ड हटाने की मांग की। कुछ समय बाद रेड कार्ड को लेकर फैसला बदला गया, जिससे विवाद और गहरा गया। खेल जगत में कई लोगों ने इसे खेल की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाला मामला बताया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। हालांकि, रेड कार्ड विवाद के बावजूद अमेरिकी टीम मैदान पर जीत हासिल नहीं कर सकी। बेल्जियम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अमेरिका को हराया और उसे टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। फुटबॉल विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े टूर्नामेंट में राजनीतिक या बाहरी हस्तक्षेप की खबरें खेल की साख को नुकसान पहुंचाती हैं। अब सभी की नजर फीफा पर है कि वह इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है। इस घटना ने एक बार फिर खेल और राजनीति के रिश्ते पर बहस छेड़ दी है। वहीं, अमेरिकी टीम के प्रशंसकों के लिए यह हार काफी निराशाजनक रही, क्योंकि विवाद के बाद भी टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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भारत में क्यों बैन हुई Diljit Dosanjh की 'सतलुज' फिल्म?

भारत में क्यों बैन हुई Diljit Dosanjh की ‘सतलुज’ फिल्म?

पंजाबी सुपरस्टार Diljit Dosanjh एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह उनकी आने वाली फिल्म ‘सतलुज’ (Satluj) है। फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसे भारत में क्यों रिलीज नहीं किया जा रहा? क्या इसे सेंसर बोर्ड (CBFC) ने बैन कर दिया है? और क्या इसे OTT प्लेटफॉर्म से भी हटा दिया गया है? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या है। आखिर क्या है ‘सतलुज’ विवाद? ‘सतलुज’ एक ऐसी फिल्म बताई जा रही है, जिसकी कहानी भारत-पाकिस्तान सीमा और उससे जुड़े संवेदनशील मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है। इसी वजह से फिल्म रिलीज होने से पहले ही विवादों में आ गई। बताया जा रहा है कि फिल्म के कुछ दृश्यों और विषय को लेकर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद इसकी रिलीज पर सवाल खड़े होने लगे। CBFC से क्यों नहीं मिली मंजूरी? भारत में किसी भी फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की मंजूरी जरूरी होती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘सतलुज’ को लेकर सेंसर बोर्ड ने कुछ आपत्तियां दर्ज कीं। जब तक इन आपत्तियों का समाधान नहीं होता, तब तक फिल्म को थिएटर में रिलीज की अनुमति नहीं मिल सकती। इसी वजह से इसे भारत में रिलीज नहीं किया गया। क्या OTT प्लेटफॉर्म से भी हटा दी गई फिल्म? सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है। हालांकि, इस बारे में अभी तक किसी OTT प्लेटफॉर्म या फिल्म की टीम की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यानी फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि फिल्म को स्थायी रूप से OTT से हटा दिया गया है। दिलजीत दोसांझ या मेकर्स ने क्या कहा? अब तक दिलजीत दोसांझ या फिल्म के निर्माताओं की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर चल रही कई बातें केवल दावे हैं, जिनकी पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा? फिल्म से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर #Satluj और #DiljitDosanjh ट्रेंड करने लगे। कुछ लोग फिल्म की रिलीज का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों में सावधानी बरतनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FIFA World Cup 2026 : ब्राजील टूटा, नेमार ने फुटबॉल से लिया संन्यास

FIFA World Cup 2026 : ब्राजील टूटा, नेमार ने फुटबॉल से लिया संन्यास

FIFA World Cup 2026: फुटबॉल प्रेमियों के लिए रविवार का दिन कई बड़े उलटफेर लेकर आया। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील का वर्ल्ड कप जीतने का सपना टूट गया। नॉर्वे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्राजील को 2-1 से हराकर पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। इस हार के बाद ब्राजील के दिग्गज स्टार नेमार ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। उनके इस फैसले से दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल फैंस भावुक हो गए। नॉर्वे ने इतिहास रच दिया मैच की शुरुआत से ही नॉर्वे की टीम पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरी। टीम ने आक्रामक खेल दिखाते हुए ब्राजील की मजबूत रक्षा पंक्ति को लगातार चुनौती दी। नॉर्वे ने दो गोल दागकर बढ़त बनाई, जबकि ब्राजील केवल एक गोल ही कर सका। आखिरी सीटी बजते ही नॉर्वे के खिलाड़ी और समर्थक खुशी से झूम उठे। यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि टीम पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची है। ब्राजील का सपना टूटा, नेमार ने कहा अलविदा ब्राजील की हार के बाद सबसे बड़ा झटका तब लगा जब टीम के अनुभवी खिलाड़ी नेमार ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। नेमार ने अपने करियर में ब्राजील के लिए कई यादगार मुकाबले खेले और अनेक रिकॉर्ड बनाए। हालांकि उनका सबसे बड़ा सपना ब्राजील को एक और वर्ल्ड कप जिताना था, जो इस बार भी अधूरा रह गया। उनके संन्यास की खबर सामने आते ही सोशल मीडिया पर फैंस ने उन्हें धन्यवाद देते हुए उनके शानदार करियर को सलाम किया। इंग्लैंड ने भी दर्ज की शानदार जीत दिन के दूसरे मुकाबले में इंग्लैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3-2 से जीत हासिल की और क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया। इंग्लैंड की टीम ने पूरे मैच में संतुलित खेल दिखाया और अहम मौकों पर गोल कर मुकाबला अपने नाम किया। अब क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड और नॉर्वे आमने-सामने होंगे। दोनों टीमों के बीच होने वाला यह मुकाबला काफी रोमांचक माना जा रहा है। अब सभी की नजरें क्वार्टर फाइनल पर ब्राजील के बाहर होने और नेमार के संन्यास के बाद वर्ल्ड कप का रोमांच और बढ़ गया है। वहीं नॉर्वे इतिहास रचने के बाद पूरे आत्मविश्वास के साथ अगले मुकाबले की तैयारी में जुटा है। अब फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें क्वार्टर फाइनल पर टिकी हैं, जहां हर मैच खिताब की दौड़ को और दिलचस्प बनाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, 10 घंटे तक चलेगा 10 किमी लंबा जनाज़ा जुलूस

Iran के पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, 10 घंटे तक चलेगा 10 किमी लंबा जनाज़ा जुलूस

Iran के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा सोमवार को राजधानी तेहरान से शुरू हुई। उनके अंतिम दर्शन के लिए देशभर से लाखों लोग सड़कों पर उमड़ पड़े। पूरे शहर में भावुक माहौल देखने को मिला, जहां लोग अपने नेता को आखिरी विदाई देने के लिए घंटों से इंतजार कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, अंतिम यात्रा करीब 10 किलोमीटर लंबी होगी और इसे पूरा होने में लगभग 10 घंटे का समय लगेगा। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और रास्ते भर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। लाखों लोगों ने दी अंतिम विदाई सुबह से ही तेहरान की प्रमुख सड़कों पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोग अपने हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक झंडे लेकर पहुंचे, जबकि कई लोगों की आंखें नम दिखाई दीं। लोग अपने नेता के सम्मान में नारे लगाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए। पूरे देश में शोक का माहौल ईरान में खामेनेई के निधन के बाद राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। सरकारी इमारतों पर झंडे आधे झुके हुए हैं और कई सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। देश-विदेश से कई नेताओं ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। खामेनेई ने लंबे समय तक ईरान के राजनीतिक और धार्मिक नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन को देश के लिए एक बड़े युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। दुनिया की नजर अंतिम यात्रा पर ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर की अंतिम यात्रा पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। लाखों लोगों की मौजूदगी यह दिखाती है कि देश में उनके प्रति लोगों का गहरा सम्मान और जुड़ाव था। अंतिम संस्कार से जुड़े सभी कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण भी किया जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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250 साल बाद खुलेगा America का Time Capsule : व्हेल की हड्डी से लेकर AI की भविष्यवाणी तक

250 साल बाद खुलेगा America का Time Capsule : व्हेल की हड्डी से लेकर AI की भविष्यवाणी तक

America अपनी आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर एक ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास की बड़ी धरोहर बनेगा। देश में एक विशाल टाइम कैप्सूल जमीन के नीचे दफन किया जाएगा, जिसे अब नहीं बल्कि 250 साल बाद खोला जाएगा। इस टाइम कैप्सूल का उद्देश्य सिर्फ पुरानी चीजों को संभालकर रखना नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को यह बताना है कि आज का अमेरिका कैसा था, लोग कैसे सोचते थे और दुनिया किस दिशा में आगे बढ़ रही थी। क्या है टाइम कैप्सूल? टाइम कैप्सूल एक खास तरह का सुरक्षित कंटेनर होता है, जिसमें किसी समय की महत्वपूर्ण वस्तुएं, दस्तावेज, तस्वीरें और संदेश रखे जाते हैं। इसे जमीन के नीचे या किसी सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है ताकि कई साल या सदियों बाद लोग उसे खोलकर उस दौर की झलक देख सकें। 408 किलो वजन का होगा टाइम कैप्सूल बताया जा रहा है कि यह टाइम कैप्सूल करीब 408 किलोग्राम वजन का होगा। इसे इस तरह तैयार किया जा रहा है कि अंदर रखी चीजें अगले 250 वर्षों तक सुरक्षित रह सकें। क्या-क्या रखा जाएगा इसमें? इस खास टाइम कैप्सूल में ऐसी कई वस्तुएं रखी जाएंगी, जो आज के समय और अमेरिकी इतिहास की पहचान मानी जाती हैं। इनमें शामिल हैं— इन सभी चीजों का मकसद भविष्य की पीढ़ियों को यह समझाना है कि 21वीं सदी में इंसान किस तरह की दुनिया में रह रहा था। आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? समय के साथ समाज, तकनीक और जीवनशैली तेजी से बदलती है। ऐसे में आने वाली पीढ़ियां यह जान सकें कि उनके पूर्वज कैसे रहते थे, क्या सोचते थे और किन चुनौतियों का सामना कर रहे थे, इसी सोच के साथ टाइम कैप्सूल तैयार किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब यह कैप्सूल 250 साल बाद खुलेगा, तब यह सिर्फ कुछ वस्तुओं का संग्रह नहीं होगा, बल्कि उस समय के लोगों के लिए इतिहास की एक जीवंत झलक होगा। भविष्य के लिए एक खास संदेश आज की दुनिया में AI, अंतरिक्ष तकनीक और नई खोजें तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे समय में अमेरिका का यह टाइम कैप्सूल आने वाले लोगों के लिए एक संदेश भी होगा कि वर्ष 2026 में दुनिया किन उम्मीदों, उपलब्धियों और चुनौतियों के साथ आगे बढ़ रही थी। यह अनोखी पहल इतिहास को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि 250 साल बाद भी लोगों को आज के दौर से सीधे जोड़ने का काम करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir चढ़ावा चोरी विवाद: फ्लाइट में गोपाल राव को देखकर भड़के यात्री

Ram Mandir चढ़ावा चोरी विवाद: फ्लाइट में गोपाल राव को देखकर भड़के यात्री

Ram Mandir में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव को एक फ्लाइट में देखकर कुछ यात्रियों ने विरोध जताया। यात्रियों ने उनके सामने “चढ़ावा चोर” के नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर ट्रस्ट ने 6 जुलाई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक का एजेंडा भी जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि बैठक में मंदिर के प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। फ्लाइट में हुआ विरोध जानकारी के अनुसार, गोपाल राव जैसे ही फ्लाइट में अपनी सीट पर पहुंचे, कुछ यात्रियों ने उन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते विरोध बढ़ गया और लोगों ने “चढ़ावा चोर” के नारे लगाने शुरू कर दिए। हालांकि इस दौरान किसी तरह की हाथापाई या हिंसा की सूचना नहीं है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराने को गलत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग मामले में जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे के कथित गबन को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है। आरोपों के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है। हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से आरोपों को लेकर अपनी सफाई भी दी गई है और जांच की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 6 जुलाई को होगी ट्रस्ट की अहम बैठक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 6 जुलाई को होने वाली बैठक का एजेंडा जारी कर दिया है। इस बैठक में मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और विकास कार्यों के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विवाद के बीच होने वाली इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस फ्लाइट का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मान लेना उचित नहीं है। फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजर आगामी ट्रस्ट बैठक और जांच की प्रगति पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बीच सड़क e-rickshaw रोकने वाले चीनी ऐप्स पर केंद्र का बड़ा एक्शन

बीच सड़क e-rickshaw रोकने वाले चीनी ऐप्स पर केंद्र का बड़ा एक्शन

यात्रियों की सुरक्षा और सड़क व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने उन चीनी मोबाइल ऐप्स के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है, जिनकी वजह से e-rickshaw बीच सड़क में अचानक रुक जाते थे। सरकार ने ऐसे ऐप्स को गूगल प्ले स्टोर से हटाने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, कई ई-रिक्शा चालकों ने अपने वाहनों में ऐसे चीनी ऐप्स का इस्तेमाल किया था जो वाहन के कंट्रोल सिस्टम से जुड़े होते हैं। इन ऐप्स के जरिए ई-रिक्शा को कहीं से भी रोका या नियंत्रित किया जा सकता था। कई बार तकनीकी गड़बड़ी के कारण ई-रिक्शा चलते-चलते बीच सड़क पर रुक जाते थे, जिससे यात्रियों को परेशानी होती थी और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता था। सरकार का कहना है कि इस तरह के ऐप्स न केवल सड़क सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि देश की साइबर सुरक्षा और डेटा सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय हैं। इसी वजह से संबंधित एजेंसियों को ऐसे ऐप्स की पहचान कर उन्हें प्ले स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-रिक्शा जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों में केवल अधिकृत और सुरक्षित सॉफ्टवेयर का ही उपयोग होना चाहिए। किसी भी अनधिकृत ऐप के कारण वाहन की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिससे चालक और यात्रियों दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती है। केंद्र सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-रिक्शा को अधिक सुरक्षित बनाना और यात्रियों को बिना किसी तकनीकी बाधा के बेहतर सफर उपलब्ध कराना है। आने वाले समय में ऐसे ऐप्स के इस्तेमाल पर और सख्ती किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jammu Kashmir के गांदरबल में CRPF की गाड़ी पलटी, सोनमर्ग सुरंग के पास हादसे में 6 जवान घायल

Jammu Kashmir के गांदरबल में CRPF की गाड़ी पलटी, सोनमर्ग सुरंग के पास हादसे में 6 जवान घायल

Jammu Kashmir के गांदरबल जिले में शुक्रवार को एक सड़क हादसे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के छह जवान घायल हो गए। यह हादसा सोनमर्ग सुरंग (Z-Morh Tunnel) के पास उस समय हुआ, जब जवानों को लेकर जा रही CRPF की गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायल जवानों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सभी जवानों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। अभी तक हादसे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि पहाड़ी इलाके की कठिन सड़कें या वाहन के अनियंत्रित होने के कारण यह दुर्घटना हुई हो सकती है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। गौरतलब है कि सोनमर्ग सुरंग और उसके आसपास का इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां सुरक्षा बलों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में इस हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल घायल जवानों का इलाज जारी है और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India-Japan ने Pakistan को दो टूक संदेश: सीमा पार आतंकवाद अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं

India-Japan ने Pakistan को दो टूक संदेश: सीमा पार आतंकवाद अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं

India और Japan ने एक बार फिर आतंकवाद के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है और इस मामले में कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। भारत और जापान के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों को मिलने वाली आर्थिक मदद और सुरक्षित ठिकानों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी देशों को आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करना होगा। भारत ने दोहराया कि आतंकवाद केवल किसी एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा है। ऐसे में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क और उनके समर्थकों पर सख्त कार्रवाई होना बेहद जरूरी है। बैठक में दोनों देशों ने रक्षा, सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, आर्थिक साझेदारी और नई तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। भारत और जापान ने भविष्य में अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान का यह संयुक्त बयान पाकिस्तान के लिए एक मजबूत कूटनीतिक संदेश है। इससे साफ संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को लगातार समर्थन मिल रहा है। भारत लंबे समय से सीमा पार से होने वाली आतंकवादी गतिविधियों का मुद्दा वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है। ऐसे में जापान जैसे प्रमुख सहयोगी देश का खुला समर्थन भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को और मजबूती देता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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