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America का Iran पर लगातार 9वीं रात हमला, तबरीज मिसाइल फील्ड में लगी आग

America ने लगातार नौवीं रात Iran पर हमला किया, जिसके बाद ईरान के तबरीज मिसाइल फील्ड में भीषण आग लगने की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, हमले के बाद इलाके में कई धमाके सुनाई दिए और दूर तक धुएं का गुबार देखा गया। ईरान ने इस हमले को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। वहीं, अमेरिका की ओर से कहा गया है कि कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में मौजूद सैन्य खतरों को कम करना था। इस बीच, इराक में तैनात एक अमेरिकी सैनिक की मौत की भी पुष्टि हुई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सैनिक की मौत एक सुरक्षा अभियान के दौरान हुई। घटना की जांच जारी है और अमेरिकी रक्षा विभाग ने मामले पर विस्तृत जानकारी देने की बात कही है। बढ़ रही आम लोगों की चिंता लगातार हो रहे हमलों के कारण पूरे क्षेत्र में डर और अनिश्चितता का माहौल है। तबरीज और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों ने रातभर धमाकों की आवाजें सुनने और घरों से बाहर निकलने में भय महसूस होने की बात कही। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में हैं। दुनिया की नजर पश्चिम एशिया पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। फिलहाल, क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते इस टकराव पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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21वें दिन बिगड़ी Sonam Wangchuk की तबीयत, पुलिस अस्पताल ले गई

21वें दिन बिगड़ी Sonam Wangchuk की तबीयत, पुलिस अस्पताल ले गई

लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Sonam Wangchuk का अनशन सोमवार को 21वें दिन में पहुंच गया। लगातार भूख हड़ताल के चलते उनकी तबीयत बिगड़ने पर पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। इस बीच उनके समर्थन में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की संस्थापक तीस्ता सीतलवाड़ (यदि मूल खबर में “दीपके” की जगह किसी अन्य व्यक्ति का नाम है, तो कृपया सही नाम अनुसार बदलें) ने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी। समर्थकों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सोनम वांगचुक के साथ अभद्र व्यवहार किया। उनका कहना है कि उन्हें गालियां दी गईं और जबरन घसीटते हुए अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई लोग वांगचुक के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं। सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख से जुड़े मुद्दों और पर्यावरण संरक्षण की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह शांतिपूर्ण और जनता के हित में हैं। वहीं, प्रशासन का कहना है कि उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था। इस घटना के बाद आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे और आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, सभी की नजर अब सरकार और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FIFA World Cup 2026: पहली बार चैंपियन टीम को मिलेंगे ₹5000 करोड़

FIFA World Cup 2026: पहली बार चैंपियन टीम को मिलेंगे ₹5000 करोड़

फुटबॉल के सबसे बड़े टूर्नामेंट FIFA World Cup 2026 में इस बार इतिहास बनने जा रहा है। पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली टीम को करीब 5000 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड इनामी राशि मिलेगी। इसके साथ ही विजेता खिलाड़ियों को सिर्फ गोल्ड मेडल ही नहीं, बल्कि विशेष चैंपियनशिप रिंग भी दी जाएगी। फीफा ने इस बार टूर्नामेंट के लिए कुल 83,866 करोड़ रुपये (लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की पुरस्कार राशि तय की है, जो अब तक की सबसे बड़ी प्राइज मनी होगी। पहली बार मिलेगा चैंपियनशिप रिंग का सम्मान अब तक वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम को ट्रॉफी और मेडल दिए जाते थे, लेकिन इस बार खिलाड़ियों को यादगार बनाने के लिए चैंपियनशिप रिंग भी दी जाएगी। यह परंपरा अमेरिका के बड़े खेल आयोजनों जैसे NBA और NFL में पहले से मौजूद है और अब फीफा भी इसे अपनाने जा रहा है। पहले से कई गुना बढ़ी इनामी राशि फीफा लगातार खिलाड़ियों और टीमों के लिए पुरस्कार राशि बढ़ा रहा है। 2026 वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड इनामी राशि रखी गई है, जिससे सभी भाग लेने वाली टीमों को भी पहले की तुलना में अधिक आर्थिक लाभ मिलेगा। 32 की जगह 48 टीमें खेल रही हैं इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन भी पहले से बड़ा है। पहली बार 48 टीमें टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं, जबकि इससे पहले 32 टीमें खेलती थीं। अधिक टीमों के शामिल होने से मुकाबले भी ज्यादा होंगे और पुरस्कार राशि भी बढ़ाई गई है। फाइनल मुकाबले पर दुनिया की नजर फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें अब फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं। जो भी टीम खिताब जीतेगी, वह सिर्फ विश्व चैंपियन ही नहीं बनेगी बल्कि इतिहास की सबसे बड़ी इनामी राशि हासिल करने वाली पहली फुटबॉल टीम भी कहलाएगी। फीफा का यह फैसला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को सम्मान देने के साथ-साथ फुटबॉल को और अधिक वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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'3 Idiots' विवाद पर आमिर खान का जवाब, सोनम वांगचुक बोले- 20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूं

‘3 Idiots’ विवाद पर आमिर खान का जवाब, सोनम वांगचुक बोले- 20 जुलाई तक जिंदा रहना चाहता हूं

फिल्म ‘3 Idiots’ को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अभिनेता आमिर खान ने साफ कहा है कि यह फिल्म सामाजिक मुद्दों पर आधारित थी, लेकिन इसे सोनम वांगचुक की बायोपिक या उनकी कहानी कहना सही नहीं है। आमिर खान के इस बयान के बाद लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान अभी लद्दाख और वहां के लोगों के अधिकारों की लड़ाई पर है। 20 जुलाई को संसद मार्च करेंगे वांगचुक सोनम वांगचुक ने बताया कि वे 20 जुलाई को ‘कॉकरोच पार्टी’ के नाम से संसद मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों का ध्यान लद्दाख के मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। इस दौरान उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “मैं बस इतना चाहता हूं कि 20 जुलाई तक जिंदा रहूं, ताकि संसद तक अपनी बात पहुंचा सकूं।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। क्या है ‘3 इडियट्स’ और वांगचुक का विवाद? जब साल 2009 में ‘3 इडियट्स’ रिलीज हुई थी, तब कई लोगों ने फिल्म के मुख्य किरदार रैंचो की तुलना सोनम वांगचुक से की थी। हालांकि फिल्म के निर्माता और कलाकार हमेशा कहते रहे हैं कि फिल्म कई वास्तविक घटनाओं और पात्रों से प्रेरित थी, किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं। अब एक बार फिर आमिर खान के बयान के बाद यह पुराना विवाद चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस आमिर खान और सोनम वांगचुक के बयानों के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग आमिर खान के बयान का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग मानते हैं कि फिल्म के किरदार और सोनम वांगचुक के जीवन में कई समानताएं हैं। अब सभी की नजर 20 जुलाई को होने वाले संसद मार्च पर है, जहां सोनम वांगचुक अपने आंदोलन और लद्दाख के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America का चाबहार पोर्ट पर बड़ा हमला, कंट्रोल टावर बनाया निशाना

America का चाबहार पोर्ट पर बड़ा हमला, कंट्रोल टावर बनाया निशाना

America ने Iran के रणनीतिक महत्व वाले चाबहार पोर्ट पर बड़ा हमला किया है। इस हमले में पोर्ट के कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। वहीं, अमेरिका ने लगातार छठी रात भी ईरान के कई ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हमले के बाद चाबहार पोर्ट के आसपास धुआं उठता दिखाई दिया। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इस हमले में कितनी जनहानि हुई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट? चाबहार पोर्ट भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत ने इस बंदरगाह के विकास में बड़ा निवेश किया है। इसी रास्ते भारत, अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक व्यापार बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में इस पोर्ट पर हुआ हमला भारत की व्यापारिक और रणनीतिक योजनाओं के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। लगातार छठी रात एयरस्ट्राइक अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर लगातार छठी रात हवाई हमले किए। बताया जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को लेकर दुनिया के कई देश चिंता जता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक व्यापार, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

US Federal Reserve में बढ़ा भारतीयों का प्रभाव

दुनिया की सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंकिंग संस्थाओं में शामिल अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) में भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। भारत के पूर्व रिजर्व बैंक (RBI) गवर्नर डॉ. रघुराम राजन समेत तीन भारतीय विशेषज्ञों को फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण सलाहकार समितियों में शामिल किया गया है। इसे भारत के लिए गर्व की बात माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने अपने विभिन्न आर्थिक और वित्तीय सलाहकार समूहों के लिए नए सदस्यों की घोषणा की है। इनमें भारतीय मूल के जाने-माने अर्थशास्त्रियों को भी जगह मिली है। इन विशेषज्ञों का काम अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और भविष्य की आर्थिक नीतियों पर महत्वपूर्ण सुझाव देना होगा। डॉ. रघुराम राजन, जो भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रह चुके हैं और वर्तमान में वैश्विक स्तर पर एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री माने जाते हैं, को एक अहम सलाहकार समिति में शामिल किया गया है। उनके साथ दो अन्य भारतीय मूल के अर्थशास्त्रियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थशास्त्रियों की बढ़ती भागीदारी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रतिभा और आर्थिक विशेषज्ञता को लगातार सम्मान मिल रहा है। भारतीय पेशेवर आज दुनिया के बड़े वित्तीय संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और नीति निर्माण से जुड़े संगठनों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि, यह नियुक्ति फेडरल रिजर्व के निर्णय लेने वाले बोर्ड की सदस्यता नहीं है, बल्कि सलाहकार समितियों का हिस्सा है। फिर भी इन समितियों की सिफारिशें आर्थिक नीतियों और वित्तीय फैसलों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। ऐसे समय में भारतीय विशेषज्ञों की यह बढ़ती भागीदारी दोनों देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है। भारतीय मूल के विशेषज्ञों को मिली यह जिम्मेदारी न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भारत की वैश्विक पहचान और आर्थिक विशेषज्ञता की बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रतीक मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च, अब टिकट बुक करना होगा और भी आसान

IRCTC की नई टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च, अब टिकट बुक करना होगा और भी आसान

भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग सेवा IRCTC ने अपनी नई और आधुनिक टिकट बुकिंग वेबसाइट लॉन्च कर दी है। नए प्लेटफॉर्म का उद्देश्य टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान, तेज और सुविधाजनक बनाना है। नई वेबसाइट में कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं, जिनकी मदद से यात्रियों का समय बचेगा और टिकट बुकिंग का अनुभव बेहतर होगा। खास बात यह है कि अब टिकट बुक करते समय बार-बार कैप्चा (Captcha) भरने की जरूरत नहीं होगी, जिससे बुकिंग प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। सभी क्लास की सीटें एक ही स्क्रीन पर दिखेंगी नई वेबसाइट का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब किसी ट्रेन की सभी क्लास—जैसे Sleeper, 3AC, 2AC, First AC और Chair Car—की उपलब्ध सीटें एक ही स्क्रीन पर दिखाई देंगी। पहले अलग-अलग क्लास देखने के लिए बार-बार विकल्प बदलना पड़ता था, जिससे समय अधिक लगता था। अब यात्री आसानी से सभी विकल्पों की तुलना कर सकेंगे और अपनी सुविधा के अनुसार टिकट चुन सकेंगे। फास्टर चेकआउट से मिनटों में बुक होगी टिकट नई वेबसाइट में Faster Checkout फीचर भी जोड़ा गया है। इससे टिकट बुक करते समय यात्रियों को बार-बार जानकारी भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भुगतान की प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा तेज होगी, जिससे खासकर Tatkal टिकट बुकिंग के दौरान काफी मदद मिलेगी। कैप्चा की झंझट से मिलेगी राहत टिकट बुकिंग के दौरान कैप्चा भरने में अक्सर यात्रियों का समय बर्बाद हो जाता था। नई वेबसाइट में इस प्रक्रिया को काफी हद तक आसान बनाया गया है। इससे टिकट जल्दी बुक होगी और उपयोगकर्ताओं का अनुभव भी बेहतर होगा। मोबाइल और लैपटॉप दोनों पर आसान अनुभव IRCTC की नई वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर सभी डिवाइस पर आसानी से चले। वेबसाइट का नया इंटरफेस पहले की तुलना में अधिक साफ, तेज और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है, जिससे नए उपयोगकर्ताओं को भी टिकट बुक करने में परेशानी नहीं होगी। यात्रियों को होगा सीधा फायदा नई वेबसाइट के जरिए यात्रियों को कम समय में टिकट बुक करने, सभी क्लास की उपलब्ध सीटें एक साथ देखने और तेज भुगतान जैसी सुविधाएं मिलेंगी। इससे खासकर त्योहारों, छुट्टियों और तत्काल (Tatkal) टिकट बुकिंग के दौरान होने वाली परेशानी काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। भारतीय रेलवे का यह नया कदम डिजिटल सेवाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यात्रियों को उम्मीद है कि नई वेबसाइट से टिकट बुकिंग पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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America ने फिर किया Iran पर हवाई हमला

America ने फिर किया Iran पर हवाई हमला

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइलें दाग दीं। इस घटनाक्रम के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, ईरान की ओर से दागी गई कुछ मिसाइलें जॉर्डन के हवाई क्षेत्र की तरफ भी बढ़ीं। जॉर्डन की सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आठ मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से किसी बड़े नुकसान को टाल दिया गया। अमेरिका का कहना है कि उसके हवाई हमले ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने और क्षेत्र में अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए गए। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी है। बहरीन और कुवैत में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कई जगहों पर लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक होने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकालने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दुनिया की नजरें इस संकट पर बनी हुई हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के अगले कदम से क्षेत्र की स्थिति और स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rao Inderjit Singh के कार्यक्रम से Rewari विधायक की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय

Rao Inderjit Singh के कार्यक्रम से Rewari विधायक की गैरहाजिरी बनी चर्चा का विषय

केंद्रीय मंत्री Rao Inderjit Singh के एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में Rewari के विधायक की गैरहाजिरी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। स्थानीय लोगों और राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी बड़े नेता के सार्वजनिक कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक की अनुपस्थिति केवल एक सामान्य घटना नहीं मानी जाती। ऐसे मौके पर जनता की नजरें भी नेताओं की एकजुटता और संगठनात्मक अनुशासन पर टिकी रहती हैं। इसी वजह से राव इंद्रजीत सिंह के मंच से विधायक की गैरमौजूदगी को लेकर यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या पार्टी के भीतर समन्वय पहले जैसा मजबूत नहीं रहा या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। हालांकि विधायक की गैरहाजिरी को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की घटनाएं विपक्ष को सवाल उठाने का मौका देती हैं, वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि विधायक की गैरहाजिरी के पीछे वास्तविक कारण क्या था और पार्टी नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है। आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सीजफायर के बीच America का Iran पर बड़ा हमला, 80 से ज्यादा ठिकाने बने निशाना

सीजफायर के बीच America का Iran पर बड़ा हमला, 80 से ज्यादा ठिकाने बने निशाना

America और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सीजफायर लागू होने के बावजूद अमेरिका ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इस हमले के बाद पूरे पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों के बाद ईरान ने भी तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी तक हमलों में हुए नुकसान और हताहतों के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। लेकिन इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर के दौरान इस तरह की सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं। इससे न केवल मध्य पूर्व बल्कि दुनिया के कई देशों की सुरक्षा और तेल बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील कर रहा है। यदि यह तनाव आगे बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह तनाव शांत होगा या फिर क्षेत्र में बड़ा सैन्य संघर्ष देखने को मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Election 2027: हरमीत पठानमाजरा और चेतन जौड़ामाजरा ने AAP से दिया इस्तीफा

पंजाब की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के दो मौजूदा विधायकों ने इस्तीफा देकर अपनी राह अलग कर ली। सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा और समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने 1 नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया। दोनों नेताओं के इस फैसले ने पंजाब में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू कर दी हैं। दिलचस्प बात यह है कि AAP ने 31 अक्टूबर को ही पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इसके अगले ही दिन दो विधायकों के इस्तीफे की खबर सामने आ गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी के भीतर टिकट और संगठन में बदलाव को लेकर नाराजगी बढ़ रही है? AAP की Candidate List के बाद क्यों बढ़ी हलचल? आम आदमी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 31 अक्टूबर को जारी पहली उम्मीदवार सूची में 40 नाम शामिल किए गए। मुख्यमंत्री भगवंत मान को धूरी विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, कई मौजूदा विधायकों को भी दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस सूची में हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौड़ामाजरा का नाम नहीं था। इतना ही नहीं, पार्टी ने उनके विधानसभा क्षेत्रों में नए हलका इंचार्ज भी नियुक्त कर दिए थे। सनौर में रंजोध हदाना और समाना में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को जिम्मेदारी दी गई। इन फैसलों के बाद दोनों विधायकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे थे। Harmeet Singh Pathanmajra ने Kejriwal को भेजा इस्तीफा सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को भेजा। पठानमाजरा और पंजाब सरकार के बीच पिछले काफी समय से मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। सितंबर 2025 में पंजाब में आई बाढ़ के दौरान उन्होंने राहत और बचाव कार्यों को लेकर सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तनाव की चर्चा होने लगी थी। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले ने भी उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। सितंबर 2025 में एक महिला की शिकायत पर उनके खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। पठानमाजरा ने इन कार्रवाइयों को राजनीतिक प्रताड़ना बताते हुए आरोप लगाए थे। Chetan Singh Jouramajra ने भी छोड़ी पार्टी समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा ने भी AAP से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी। जौड़ामाजरा भगवंत मान सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, लेकिन बाद में मंत्रिमंडल में फेरबदल के दौरान उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद समाना विधानसभा क्षेत्र में उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। पार्टी ने हाल ही में पूर्व अकाली नेता सुरजीत सिंह रखड़ा को समाना का हलका इंचार्ज बनाया था। इसे भी जौड़ामाजरा की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है। इस्तीफे के बाद जौड़ामाजरा ने कहा कि अब उनका पार्टी में मन नहीं लग रहा है। उन्होंने पंजाब के मौजूदा हालात को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। क्या BJP में शामिल होंगे दोनों विधायक? दोनों विधायकों के AAP छोड़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि दोनों नेता भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अभी तक BJP या दोनों विधायकों की ओर से पार्टी में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Punjab Election 2027 से पहले AAP के सामने चुनौती पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। AAP की पहली उम्मीदवार सूची के तुरंत बाद दो मौजूदा विधायकों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक नई चुनौती बन गया है। दोनों विधायक पटियाला जिले की सनौर और समाना सीटों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन सीटों पर उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय राजनीतिक समीकरण आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेंगे। अब देखना होगा कि AAP इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में किसे जिम्मेदारी देती है और क्या दोनों पूर्व विधायक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होते हैं। फिलहाल पंजाब की राजनीति में 2027 चुनाव से पहले ही सियासी उठापटक शुरू हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
IND vs NZ

IND vs NZ 5th T20: न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हराया, Team India ने 3-2 से जीती सीरीज

भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच पांच मैचों की T20 सीरीज का आखिरी मुकाबला रोमांचक रहा। हैमिल्टन के Seddon Park में खेले गए इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 191 रन बनाए थे, लेकिन Tim Seifert की शानदार पारी के सामने भारतीय गेंदबाज बेबस नजर आए। न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में ही लक्ष्य हासिल कर लिया। हालांकि, इस हार से सीरीज का नतीजा नहीं बदला। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बनाई थी। न्यूजीलैंड ने आखिरी दो मैच जीतकर वापसी जरूर की, लेकिन सीरीज भारत ने 3-2 से अपने नाम कर ली। ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने संभाली भारतीय पारी टॉस जीतकर न्यूजीलैंड ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। अभिषेक शर्मा सिर्फ 1 रन और संजू सैमसन 4 रन बनाकर आउट हो गए। शुरुआती झटकों के बाद टीम को एक बड़ी साझेदारी की जरूरत थी। ऐसे समय में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर ने मोर्चा संभाला। दोनों ने तेजी से रन बनाते हुए न्यूजीलैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाया। ईशान किशन ने 32 गेंदों में 61 रन की शानदार पारी खेली, जबकि श्रेयस अय्यर ने सिर्फ 23 गेंदों में 50 रन बना दिए। दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 93 रन की साझेदारी हुई। इस साझेदारी ने भारत को मैच में वापसी दिलाई। इसके बाद नमन धीर ने 33 रन और नीतीश कुमार रेड्डी ने 22 रन बनाकर टीम का स्कोर 191 तक पहुंचाया। न्यूजीलैंड की तरफ से Adam Milne ने सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। Nathan Smith और Blair Tickner को 2-2 सफलताएं मिलीं। Tim Seifert के 93 रन ने पलट दिया Match 192 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी न्यूजीलैंड की शुरुआत जरूर थोड़ी लड़खड़ाई। फिन एलन सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन इसके बाद Tim Seifert ने भारतीय गेंदबाजों को कोई राहत नहीं दी। Seifert ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों में 93 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके और 6 छक्के शामिल रहे। वह शतक से महज 7 रन दूर रह गए, लेकिन तब तक न्यूजीलैंड जीत के काफी करीब पहुंच चुका था। उनका साथ Daryl Mitchell ने दिया। Mitchell ने 16 गेंदों में 29 रन बनाए। इसके बाद Glenn Phillips ने भी अपना दम दिखाया। उन्होंने 37 गेंदों में नाबाद 61 रन की पारी खेली। इन दोनों बल्लेबाजों की मदद से न्यूजीलैंड ने 18 ओवर में 3 विकेट खोकर 195 रन बना लिए और मुकाबला 7 विकेट से जीत लिया। भारतीय गेंदबाजों की नहीं चली, बल्लेबाजों की मेहनत गई बेकार भारत के लिए इस मुकाबले में सबसे बड़ी चुनौती न्यूजीलैंड की तेज रन गति रही। 191 रन बनाने के बाद टीम इंडिया को उम्मीद थी कि गेंदबाज मैच पर पकड़ बनाएंगे, लेकिन Tim Seifert और Glenn Phillips ने भारतीय गेंदबाजी को संभलने का मौका नहीं दिया। फिन एलन का विकेट जल्दी मिलने के बावजूद भारत लगातार विकेट नहीं निकाल सका। नतीजा यह रहा कि न्यूजीलैंड ने लक्ष्य को दो ओवर बाकी रहते हासिल कर लिया। 3-0 से आगे था भारत, फिर न्यूजीलैंड ने की वापसी इस T20 सीरीज की शुरुआत भारत के लिए काफी अच्छी रही थी। टीम इंडिया ने शुरुआती तीन मुकाबले जीतकर 3-0 की बढ़त बना ली थी। ऐसा लग रहा था कि भारत सीरीज में क्लीन स्वीप कर सकता है। लेकिन चौथे मुकाबले में न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी की। टीम ने बड़ा स्कोर खड़ा किया और भारत को 87 रन से हराया। इसके बाद पांचवें T20 में भी न्यूजीलैंड ने जीत दर्ज कर दी। लगातार दो जीत के बावजूद न्यूजीलैंड सीरीज अपने नाम नहीं कर सका। भारत ने शुरुआती बढ़त के दम पर पांच मैचों की सीरीज 3-2 से जीत ली। IND vs NZ 5th T20: मैच का पूरा Scorecard भारत – 191/8 (20 ओवर) न्यूजीलैंड – 195/3 (18 ओवर) मैच का नतीजा: न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज की। सीरीज का नतीजा: भारत ने 3-2 से सीरीज जीती। सीरीज जीतकर भी आखिरी दो मैच हारा भारत टीम इंडिया के लिए यह सीरीज दो अलग-अलग तस्वीरें लेकर आई। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन आखिरी दो मैचों में न्यूजीलैंड ने अपनी रणनीति और बल्लेबाजी से मुकाबले का रुख बदल दिया। आखिरी मैच में ईशान किशन और श्रेयस अय्यर की फिफ्टी के बावजूद भारत जीत हासिल नहीं कर पाया। वहीं Tim Seifert और Glenn Phillips की पारियों ने न्यूजीलैंड को शानदार जीत दिलाई। भारत के लिए राहत की बात यही रही कि शुरुआती तीन जीत के कारण T20 सीरीज की ट्रॉफी टीम इंडिया के पास ही रही। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Politics: INDIA Bloc की Rally के जवाब में BJP का मार्च, JP Nadda ने राहुल गांधी को घेरा

दिल्ली में 1 नवंबर को सियासी हलचल तेज रही। एक तरफ राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA Bloc के 19 विपक्षी दलों ने रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली की, तो दूसरी तरफ भाजपा ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर विरोध मार्च निकालकर कांग्रेस को घेरा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी राजनीति में उन लोगों को भूल गई, जिन्होंने 1984 की हिंसा में अपनी जान गंवाई थी। दिल्ली में हुए इन दोनों प्रदर्शनों के केंद्र में अलग-अलग मुद्दे रहे। विपक्ष ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला, जबकि भाजपा ने कांग्रेस को 1984 की हिंसा की याद दिलाते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आवाज उठाई। INDIA Bloc की Rally में राहुल गांधी समेत 19 दलों के नेता शामिल रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और INDIA Bloc के कई अन्य नेता शामिल हुए। रैली का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। इससे पात्र मतदाताओं के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों के साथ किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। BJP का जवाबी मार्च, सिख समुदाय और पीड़ित परिवारों ने लिया हिस्सा विपक्ष की रैली के बीच भाजपा ने भी दिल्ली में अपना विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने पश्चिमी दिल्ली में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा और मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित कई नेता शामिल हुए। मार्च में सिख समुदाय के लोगों और 1984 की हिंसा से प्रभावित परिवारों ने भी हिस्सा लिया। भाजपा ने इस प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस से 1984 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस ने इस संवेदनशील तारीख पर बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित करके सिख समुदाय की भावनाओं का ध्यान नहीं रखा। JP Nadda का राहुल गांधी पर हमला, बोले- अपनी राजनीति में शहीदों को भूले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने विपक्ष की रैली को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर का दिन देश के इतिहास में बेहद दुखद है। 1984 में इसी दौरान सिख समुदाय के लोगों को हिंसा का सामना करना पड़ा था। नड्डा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें 1984 की हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों और उनके परिवारों की पीड़ा याद नहीं रही। उन्होंने कहा कि देश उन घटनाओं को नहीं भूला है और सिख समुदाय के जख्म आज भी लोगों को याद हैं। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। राहुल गांधी ने BJP के कारोबार वाले आरोप पर दिया जवाब भाजपा ने विपक्ष की रैली को लेकर यह भी कहा कि इससे दिल्ली के बाजारों और छोटे कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। दिवाली से पहले बाजारों में भीड़ और ट्रैफिक की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई गई। इस पर राहुल गांधी ने भाजपा के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि रैली में शामिल होने वाले लोगों से दिल्ली में खरीदारी करने की अपील की गई थी, ताकि स्थानीय व्यापारियों को फायदा मिले। राहुल गांधी ने कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि व्यापारियों का कारोबार प्रभावित होने के लिए कौन जिम्मेदार है। खड़गे ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। खड़गे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ियां हुई हैं और कई लोगों के नाम हटाए गए हैं। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला बता रहा है। हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग की ओर से मतदाता सूची के पुनरीक्षण को निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने भी उठाए सवाल विपक्ष की रैली में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटने के मुद्दे को उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल किए। वहीं, बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में वोट चोरी के आरोपों को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता शशि थरूर समेत अन्य विपक्षी नेताओं ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी पर क्यों बढ़ा विवाद? 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा भड़क गई थी। 1 से 3 नवंबर के बीच दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई परिवारों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा। इस घटना को देश के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में गिना जाता है। हिंसा के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और जवाबदेही का मुद्दा आज भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। भाजपा ने इसी घटना की बरसी को लेकर कांग्रेस की रैली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कांग्रेस और INDIA Bloc का कहना है कि उनकी रैली चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए थी। Delhi Politics: एक दिन में दो प्रदर्शन, BJP और विपक्ष आमने-सामने दिल्ली में 1 नवंबर को हुए दोनों प्रदर्शनों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रामलीला मैदान में विपक्ष ने चुनाव आयोग...
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INDIA Bloc का बड़ा प्रदर्शन: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 19 पार्टियां एकजुट, खड़गे ने दी चेतावनी

दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर को विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक बड़ी रैली की। INDIA Bloc के बैनर तले हुई इस रैली में 19 विपक्षी पार्टियों के नेता एक मंच पर नजर आए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। रैली का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला बयान ममता बनर्जी का रहा। उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल में हारी नहीं, बल्कि उसे हराया गया। वहीं, मल्लिकार्जुन खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है। ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव को लेकर क्या कहा? रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती गई। ममता ने कहा कि बंगाल में उनकी पार्टी को हराया गया है। उन्होंने मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक का वोट महत्वपूर्ण है और किसी भी पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं है। खड़गे ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। राहुल गांधी, प्रियंका और अखिलेश यादव समेत 19 पार्टियों की मौजूदगी दिल्ली की इस रैली में INDIA Bloc के कई प्रमुख नेता शामिल हुए। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, फारूक अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी और सुप्रिया सुले समेत कई नेताओं ने मंच साझा किया। सभी नेताओं ने अपने-अपने संबोधन में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी दोहराई। SIR विवाद क्या है, जिस पर आमने-सामने हैं विपक्ष और चुनाव आयोग? इस पूरी राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में Special Intensive Revision (SIR) है। यह चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चाहता है कि नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को सही और अपडेट रखने के लिए समय-समय पर समीक्षा जरूरी है। इस प्रक्रिया में डुप्लीकेट और अपात्र नामों की पहचान की जाती है। पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में शामिल कराने का अवसर भी दिया जाता है। BJP ने भी निकाला मार्च, दिल्ली में बढ़ी राजनीतिक हलचल INDIA Bloc की रैली के बीच BJP ने भी 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों के समर्थन में मार्च निकाला। इसको लेकर दोनों राजनीतिक पक्षों के बीच बयानबाजी भी देखने को मिली। दिल्ली में एक ही दिन दोनों पक्षों के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। रैली और मार्च के आसपास पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। आगे क्या होगा? चुनाव आयोग पर विपक्ष का दबाव जारी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA Bloc की यह रैली चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे विवाद में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा आगे भी उठाते रहेंगे। अब देखना होगा कि विपक्ष की इन मांगों पर चुनाव आयोग क्या रुख अपनाता है और आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव की दिशा क्या रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Iran Attack: नेतन्याहू से बात के बाद ट्रम्प का बड़ा बयान, 4 नवंबर को ईरान पर हमले की आशंका

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के बीच अमेरिकी Trump ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत के बाद ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के एक-दो ठिकानों पर कार्रवाई अभी बाकी है। इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका 4 नवंबर को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी सरकार ने किसी नए हमले की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। दूसरी तरफ ईरान भी लगातार चेतावनी दे रहा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बंद होने वाला है या फिर कोई नया समझौता हो सकता है? Trump-Netanyahu Talk: फोन पर क्या हुई बातचीत? रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। बताया जा रहा है कि ट्रम्प ने इससे पहले व्हाइट हाउस में वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी। इस बैठक में ईरान को लेकर आगे की रणनीति और संभावित सैन्य विकल्पों पर चर्चा हुई। ट्रम्प बोले- ईरान के 1-2 ठिकाने अभी बाकी नेतन्याहू से बातचीत के बाद ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि ईरान के एक या दो ठिकानों पर अभी कार्रवाई की जानी बाकी है। इस दौरान उन्होंने पिकैक्स माउंटेन (Pickaxe Mountain) का भी जिक्र किया। पिकैक्स माउंटेन को ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा एक संभावित भूमिगत ठिकाना माना जाता है। पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि यहां परमाणु गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हो सकती हैं। ट्रम्प के बयान के बाद एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई कर सकता है। 4 नवंबर को Iran पर Attack की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले को लेकर 4 नवंबर की तारीख चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों को संभावित सैन्य कार्रवाई और उसके बाद पैदा होने वाली स्थिति के लिए सतर्क रहने को कहा है। रिपोर्ट्स में 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद कार्रवाई की संभावना जताई गई है। इसी वजह से 4 नवंबर की तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि अभी तक ट्रम्प प्रशासन ने हमले की तारीख या समय की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है। ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी अमेरिका की ओर से संभावित हमले की खबरों के बीच ईरान ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया गया तो उसका जवाब दिया जाएगा। ईरान के अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि किसी नए सैन्य टकराव की स्थिति में क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे खाड़ी देशों में भी चिंता बढ़ गई है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को लेकर उसकी चिंताओं का समाधान करे, जबकि तेहरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों पर जोर दे रहा है। Qatar के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ हमले की चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बातचीत के रास्ते भी खुले हुए हैं। कतर दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है। अमेरिका ऐसा समझौता चाहता है, जिससे उसके सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान निकल सके। ईरान की ओर से भी बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी सहमति बनना बाकी है। Strait of Hormuz पर भी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद अहम है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या आवाजाही में रुकावट आने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल आयात और ऊर्जा कीमतों में बदलाव का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर शुरू होगी जंग? फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ट्रम्प के अगले कदम पर है। नेतन्याहू से बातचीत, ईरान के ठिकानों को लेकर दिया गया बयान और 4 नवंबर को संभावित हमले की रिपोर्ट ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ अमेरिका सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ कतर के जरिए कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि किसी हमले की स्थिति में वह जवाब देगा। अब देखना होगा कि अमेरिका बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकालता है या फिर मध्य पूर्व में एक बार फिर सैन्य टकराव की स्थिति बनती है। फिलहाल 4 नवंबर को हमले की संभावना मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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