समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan ने एक भावुक खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि जब उन्हें सीतापुर जेल से हरदोई जेल में शिफ्ट किया जा रहा था, तब उन्हें लगा कि शायद उनका एनकाउंटर हो जाएगा।
आजम खान ने कहा, “उस वक्त मैंने अपने बेटे अब्दुल्ला को गले लगाया और कहा कि अगर जिंदगी रही तो फिर मिलेंगे, वरना ऊपर मिलना होगा।”
उन्होंने बताया कि जेल बदलने की खबर सुनकर उन्हें डर था कि कहीं यह आखिरी सफर न बन जाए।
आजम खान ने अपने बयान में जेल में बिताए दिनों को “कठिन और सच्चाई से भरे” पल बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने सबकुछ धैर्य और ईमानदारी से झेला, क्योंकि उन्हें यकीन था कि सच्चाई की जीत जरूर होगी।
लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब आजम खान सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन उनके बयान एक बार फिर सियासत में हलचल मचा रहे हैं।
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