ढाका में 5 अगस्त 2024 को शुरू हुआ Student Movement आज अपनी पहली वर्षगांठ मना रहा है। सरकारी नौकरी में कोटा सिस्टम के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़े Political Uprising में बदल गया। पुलिस, सेना और रैपिड एक्शन बटालियन के साथ झड़पों में हजारों लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए।
Sheikh Hasina का इस्तीफा और देश से पलायन
15 साल तक सत्ता में रहीं प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को जबरदस्त जनविरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें पद छोड़कर भारत भागना पड़ा। उनकी पार्टी Awami League पर प्रतिबंध लगा दिया गया और उन पर मानवाधिकार उल्लंघन और भ्रष्टाचार के कई मुकदमे चल रहे हैं।
Mohammad Yunus की Interim Government
हसीना के जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता और ग्रामीण बैंक के संस्थापक Mohammad Yunus को अंतरिम सरकार का प्रमुख सलाहकार (Chief Advisor) बनाया गया। उनका मिशन था – लोकतांत्रिक सुधार और निष्पक्ष चुनाव।
- 11 Reform Commissions का गठन किया गया।
- July Declaration Roadmap और चुनावी सुधार तैयार हुए।
- लेकिन Political Deadlock और सेना के साथ बढ़ते तनाव के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है।
Minority Hindus पर हमले और Communal Violence
हसीना के जाने के बाद देश में Hindu, Buddhist और Christian अल्पसंख्यकों पर बड़े पैमाने पर हमले हुए।
- 2,000+ घटनाएं,
- 23 मौतें और 9 बलात्कार,
- मंदिरों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया।
हालांकि छात्र संगठनों ने सुरक्षा की अपील की, लेकिन सरकार Law and Order बहाल करने में नाकाम रही।
Political Instability और Protest
एक साल बाद भी General Elections की तारीख तय नहीं हुई।
- छात्र संगठन National Citizen Party (NCP) ने जुलाई 2025 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए।
- पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़पों में 4 लोगों की मौत हुई और कई शहरों में Curfew लगाया गया।
- प्रतिबंधित अवामी लीग और उग्रपंथी गुटों की सक्रियता से Religious Polarization और बढ़ रहा है।
Press Freedom और Human Rights पर खतरा
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक अगस्त 2024 से अब तक 640 पत्रकारों पर कार्रवाई हुई।
- मीडिया पर सेंसरशिप बढ़ी।
- महिला और नागरिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आंदोलन में उनकी अहम भूमिका के बावजूद उन्हें राजनीतिक निर्णयों में Representation नहीं दिया गया।
भविष्य की चुनौतियां
- Democratic Elections अभी अनिश्चित हैं।
- Yunus सरकार पहले सुधार चाहती है, जबकि विपक्ष जल्द चुनाव की मांग कर रहा है।
- अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने बांग्लादेश में Religious Freedom, Political Stability और Human Rights पर चिंता जताई है।
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