बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत गरमाती जा रही है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह (Rajiv Ranjan Singh), जिन पर चुनाव आयोग (Election Commission) के निर्देश पर FIR दर्ज की गई है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें ललन सिंह अपने कार्यकर्ताओं से कहते नजर आए —
“कुछ नेताओं को वोटिंग वाले दिन घर से निकलने मत देना, अगर ज्यादा बोले तो ले जाकर बैठा दो, वोटिंग के बाद घर लाकर सुला दो।”
इस बयान के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से शिकायत की कि यह बयान मतदाताओं और विपक्षी नेताओं को डराने-धमकाने की कोशिश है।
Election Commission की कार्रवाई
शिकायत मिलते ही चुनाव आयोग ने Patna जिला प्रशासन को जांच के आदेश दिए। जांच के बाद बयान सही पाया गया, जिसके बाद Representation of the People Act, 1951 और Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) के तहत ललन सिंह पर FIR दर्ज कराई गई।
विवाद कहां शुरू हुआ?
यह बयान मोकामा (Mokama) क्षेत्र में एक चुनावी सभा के दौरान दिया गया था। यह सीट लंबे समय से चर्चाओं में रहती है और इस बार यहां जेडीयू बनाम आरजेडी (JDU vs RJD) की सीधी टक्कर है।
विपक्ष का पलटवार
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा –
“जब जनता का भरोसा खत्म हो जाए, तो सत्ता के नेता डर फैलाने लगते हैं। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
कांग्रेस और अन्य दलों ने भी इस बयान को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया है।
जेडीयू की सफाई
जेडीयू प्रवक्ता ने बयान का बचाव करते हुए कहा कि ललन सिंह के शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उनका मकसद अनुशासन की बात करना था, न कि किसी को धमकाने का।
EC की चेतावनी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि आचार संहिता का उल्लंघन किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगा। वरिष्ठ मंत्री हों या कार्यकर्ता — कानून सब पर बराबर लागू होगा।
राजनीतिक असर
यह विवाद जेडीयू के लिए चुनावी रणनीति पर असर डाल सकता है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना रहा है और सोशल मीडिया पर #LalanSinghControversy और #BiharElection2025 ट्रेंड कर रहे हैं।
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