Bihar Voter List Controversy
Bihar Election 2025 से पहले Bihar Voter List Controversy ने सियासी हलचल मचा दी है। Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले की आज (22 अगस्त 2025) सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया था कि हटाए गए सभी मतदाताओं की District-wise और Booth-wise सूची सार्वजनिक की जाए। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे Aadhaar, Voter ID Card और अन्य 11 वैध दस्तावेजों के आधार पर फिर से दावा कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की कार्रवाई
चुनाव आयोग ने 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 65 Lakh Deleted Voters List जारी कर दी। यह सूची ऑनलाइन और स्थानीय कार्यालयों (जैसे BLO और पंचायत स्तर पर) उपलब्ध कराई गई है, ताकि लोग आसानी से अपना नाम चेक कर सकें।
आज की सुनवाई में क्या हुआ?
आज की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि पूरी प्रक्रिया Voter-Friendly और Transparent होनी चाहिए। साथ ही कोर्ट ने Political Parties की निष्क्रियता पर सवाल उठाए और कहा कि राजनीतिक दलों को भी जनता की मदद के लिए आगे आना चाहिए, ताकि किसी नागरिक का Right to Vote प्रभावित न हो।
पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ विवाद?
24 जून 2025 को चुनाव आयोग ने बिहार में Special Intensive Revision की शुरुआत की थी। आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना था। लेकिन इसके बाद अचानक 65 लाख नाम हटाए जाने पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका आरोप है कि यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
आगे क्या होगा?
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है। चुनाव आयोग ने भरोसा दिलाया है कि Final Voter List 30 सितंबर 2025 तक प्रकाशित कर दी जाएगी। इस बीच जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे आसानी से दस्तावेज जमा कर अपने नाम फिर से जुड़वा सकते हैं।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
