बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission of India) द्वारा शुरू की गई Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह प्रक्रिया भेदभावपूर्ण है और इससे लाखों गरीब और वंचित मतदाताओं का नाम सूची से हट सकता है।
Supreme Court Hearing में क्या हुआ?
10 जुलाई 2025 को Supreme Court ने इस मामले की सुनवाई की और कहा:
- चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया जारी रख सकता है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ।
- Aadhaar Card, Voter ID और Ration Card को पहचान पत्र के रूप में स्वीकार करने का निर्देश।
- नागरिकता की जांच का अधिकार गृह मंत्रालय का है, चुनाव आयोग का नहीं।
- अदालत ने पूछा, “चुनाव से कुछ महीने पहले यह प्रक्रिया शुरू करने का क्या तर्क है?“
Supreme Court की अगली सुनवाई और जरूरी निर्देश
- चुनाव आयोग को 21 जुलाई तक कोर्ट में जवाब देना होगा।
- अगली सुनवाई 28 जुलाई 2025 को होगी।
- तब तक आयोग मतदाता सूची का ड्राफ्ट संस्करण जारी नहीं करेगा।
विपक्ष की आपत्ति क्या है?
- कांग्रेस, RJD, TMC और अन्य दलों ने इस प्रक्रिया को जनता को डराने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश बताया है।
- ADR, PUCL जैसे संगठनों ने कहा कि दस्तावेज़ नहीं होने की स्थिति में लाखों लोग वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
चुनाव आयोग (ECI) का पक्ष:
- आयोग ने Article 326 का हवाला देते हुए कहा कि वोटर लिस्ट अपडेट करना उसका संवैधानिक कर्तव्य है।
- आयोग ने दावा किया कि यह एक नियमित प्रक्रिया है और इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।
- आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना गया।
राजनीतिक प्रतिक्रिया:
- विपक्ष ने इस प्रक्रिया को “छुपा हुआ NRC” बताया।
- BJP ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष कोर्ट को गुमराह कर रहा है और ये केवल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा रहा है।
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