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Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।
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Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk सरकार से समझौते के बाद खत्म हुई भूख हड़ताल, Written Assurance मिलने का दावा

पिछले 27 दिनों से जारी सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति के चलते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। अनशन खत्म होने के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधान के इस्तीफे की मांग इस समझौते का हिस्सा नहीं बनी है। यह घटनाक्रम पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार अपने वादों को तय समय में किस तरह लागू करती है। 27 दिनों तक चला आंदोलन, बातचीत से निकला समाधान सोनम वांगचुक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार 27 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस दौरान आंदोलन को देश के कई हिस्सों से समर्थन मिला। छात्रों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई चरणों में बातचीत हुई। शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, लेकिन लगातार संवाद के बाद दोनों पक्ष एक साझा सहमति तक पहुंचे। इसके बाद सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। किन मांगों पर बनी सहमति? अनशन खत्म करने के बाद मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन अहम मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन के दौरान उठाई गई प्रधान के इस्तीफे की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया और यह समझौते का हिस्सा नहीं है। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना था। नड्डा ने पिलाया जूस, खत्म हुआ 27 दिनों का अनशन समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा स्वयं पहुंचे और उन्होंने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आंदोलन से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। अनशन खत्म होने के साथ ही लंबे समय से जारी गतिरोध भी समाप्त हो गया। अब वादों को पूरा करने की चुनौती सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए अपना अनशन समाप्त किया है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है, उन पर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तय वादों को लागू नहीं किया गया, तो आगे की रणनीति पर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा। आंदोलन का संदेश करीब चार सप्ताह तक चला यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि कई सामाजिक और जनहित के मुद्दों को लेकर चल रही आवाज का प्रतीक बन गया। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने से फिलहाल विवाद का समाधान निकलता दिखाई दे रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब उन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Heavy Rain

Heavy Rain Alert: UP में बढ़ा Flood Risk, Gujarat के कई जिले पानी में डूबे; Bihar में IMD की बड़ी चेतावनी

देशभर में मानसून अब अपने सबसे सक्रिय दौर में पहुंच चुका है। लगातार हो रही बारिश (Heavy Rain) ने उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी भारत तक कई राज्यों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना समेत 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं, गुजरात के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं और बिहार के 19 जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश में बढ़ा बाढ़ का खतरा, गंगा-यमुना समेत 10 नदियों का जलस्तर बढ़ा उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा, राप्ती, सरयू और अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जिलों के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी की जा रही है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। Gujarat Flood: लगातार बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित गुजरात में मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कई सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। Bihar Weather: 19 जिलों में Heavy Rain Alert जारी बिहार में भी मानसून का असर लगातार देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जिला प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। IMD Weather Forecast: अगले 48 घंटे रहेंगे बेहद अहम मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले दो दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले से ही नदियां उफान पर हैं, वहां लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा। लोगों के लिए जरूरी सलाह बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने, जलभराव वाले रास्तों का उपयोग न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। जरूरत पड़ने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा राहत टीम से संपर्क करने की सलाह भी दी गई है। देश के कई हिस्सों में मानसून अभी और सक्रिय रहने वाला है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CJP

Government-CJP Talks Today: PM के वीडियो पर CJP का बड़ा दावा, बोले- दबाव में आया सरकार का रुख

Cockroach Party Protest को लेकर देश में सियासी हलचल तेज हो गई है। आंदोलन के बीच आज सरकार और CJP (Cockroach Justice Platform) के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बातचीत को गतिरोध खत्म करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, लेकिन बैठक से पहले ही CJP ने साफ कर दिया है कि केवल बातचीत से आंदोलन खत्म नहीं होगा। संगठन का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों पर ठोस फैसला होने और संबंधित प्रधान के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में आज की बैठक पर प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों की भी नजर बनी हुई है। CJP का दावा- बढ़ते दबाव के बाद बदला सरकार का रुख बैठक से पहले CJP ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा देर रात जारी किया गया वीडियो संदेश बढ़ते जनदबाव का परिणाम है। संगठन के नेताओं का कहना है कि यदि सरकार पहले ही प्रदर्शनकारियों की बात सुन लेती, तो हालात इतने तनावपूर्ण नहीं होते। CJP का आरोप है कि लंबे समय तक उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जब आंदोलन को देश के कई हिस्सों में समर्थन मिलने लगा है, तब सरकार बातचीत के लिए आगे आई है। PM के देर रात वीडियो पर उठे सवाल प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश को लेकर भी CJP ने सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि वीडियो ऐसे समय जारी किया गया, जब आंदोलन लगातार चर्चा में था और सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ रहा था। हालांकि सरकार की ओर से इस दावे की पुष्टि नहीं की गई है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश कर रही है और सभी पक्षों की बात गंभीरता से सुनी जाएगी। बातचीत होगी, लेकिन आंदोलन नहीं रुकेगा CJP ने स्पष्ट किया है कि वह सरकार के साथ बातचीत में शामिल होगा, लेकिन इससे आंदोलन समाप्त नहीं माना जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता तथा संबंधित प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी भी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। आज की बैठक से क्या निकल सकता है? सरकार और CJP के बीच होने वाली बैठक से किसी सकारात्मक समाधान की उम्मीद जरूर जताई जा रही है। यदि दोनों पक्ष कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमत होते हैं तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। हालांकि फिलहाल CJP अपने रुख में किसी तरह की नरमी के संकेत नहीं दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत सफल रहती है तो गतिरोध कम हो सकता है, लेकिन यदि कोई ठोस निर्णय नहीं निकलता, तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल स्थिति क्या है? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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जोजरी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान की जोजरी नदी में औद्योगिक प्रदूषण और जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से पर्यावरणीय नुकसान पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। प्रदूषित पानी से वन्यजीवों पर भी असर सुप्रीम कोर्ट में पेश हाई लेवल इको-सिस्टम ओवरसाइट कमेटी की रिपोर्ट में बताया गया कि जोधपुर के तनावड़ा स्थित एक तालाब का पानी गुलाबी हो गया है और वह मानव व पशुओं के उपयोग के लिए अनुपयुक्त है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि यह स्थिति बनी रही तो भूजल, कृषि भूमि, वन्यजीव और जनस्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कमेटी ने जोधपुर की मेलबा, धवा, झंवर और लूणी क्षेत्र में प्रदूषण के कारण चिंकारा, काला हिरण और नीलगाय जैसे वन्यजीवों की संख्या प्रभावित होने की बात भी कही है। वन क्षेत्र विकसित करने की सिफारिश कमेटी ने मेलबा और मोडाथली की कुछ भूमि वन विभाग को सौंपकर उसे वन और चारागाह के रूप में विकसित करने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण की बनेगी योजना कोर्ट ने सांगारिया स्थित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) में जमा औद्योगिक अपशिष्टयुक्त पानी के सुरक्षित उपचार और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तकनीकी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है। यह पूरी प्रक्रिया हाई लेवल कमेटी की निगरानी में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल बंद औद्योगिक इकाइयों को दोबारा शुरू करने के लिए नहीं किया जा सकेगा। बिना ट्रीटमेंट के अपशिष्ट छोड़ने पर भी मांगा जवाब अदालत ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल स्रोतों में छोड़ने वाले मामलों में गंभीर आपराधिक धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। इस संबंध में भी विस्तृत जवाब मांगा गया है। 2025 में लिया था स्वतः संज्ञान सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2025 को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। उस समय जोधपुर, पाली और बालोतरा क्षेत्र की नदियों में औद्योगिक कचरे और सीवरेज से बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई गई थी। कोर्ट ने माना था कि लंबे समय से प्रशासनिक लापरवाही के कारण करीब 20 लाख लोगों, पशुधन और पर्यावरण पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
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डाक-पार्सल कंटेनर से 3.83 क्विंटल डोडा-चूरा बरामद, 200 रुपए प्रति किलो के लालच में ड्राइवर बना तस्कर

राजस्थान में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डाक-पार्सल ले जा रहे एक कंटेनर से 3 क्विंटल 83 किलो डोडा-चूरा बरामद किया है। पुलिस ने कंटेनर चालक को गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में सामने आया कि आरोपी अतिरिक्त कमाई के लालच में पिछले कई महीनों से मादक पदार्थों की तस्करी कर रहा था। पुलिस को देखकर भागा, पीछा कर दबोचा आईजीपी विकास कुमार के अनुसार ANTF को सूचना मिली थी कि उदयपुर से भीलवाड़ा जा रहे एक डाक-पार्सल कंटेनर में मादक पदार्थ छिपाकर ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर नाकाबंदी की गई। पुलिस ने कंटेनर को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक वाहन लेकर भाग निकला। पीछा कर सदर थाना क्षेत्र में कंटेनर को रोक लिया गया। तलाशी के दौरान कंटेनर से 3.83 क्विंटल डोडा-चूरा बरामद हुआ। इसके बाद कंटेनर जब्त कर चालक लाल शंकर (29) को गिरफ्तार कर लिया गया। मजदूरी से ड्राइवर और फिर तस्कर बना गिरफ्तार आरोपी डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसने तीसरी कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी। पहले मजदूरी की, फिर ट्रकों में खलासी का काम किया और बाद में ड्राइविंग सीखकर कंटेनर चालक बन गया। दिल्ली की एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में नौकरी के दौरान उसकी पहचान मादक पदार्थ तस्करों से हुई। पुलिस के मुताबिक, पिछले 7-8 महीनों से वह अहमदाबाद, दिल्ली और अन्य राज्यों के बीच कंटेनर चलाते हुए तस्करी के नेटवर्क का हिस्सा बन गया। प्रति किलो 200 रुपए के लालच में करता था तस्करी जांच में सामने आया कि एक तस्कर ने आरोपी को कंटेनर में डोडा-चूरा छिपाकर तय स्थान तक पहुंचाने के बदले प्रति किलो 200 रुपए अतिरिक्त देने का लालच दिया था। शुरुआत में उसने छोटी खेप पहुंचाई, लेकिन भरोसा बनने के बाद बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ भी उसी के जरिए भेजे जाने लगे। डाक-पार्सल कंटेनर इसलिए चुना पुलिस का कहना है कि तस्करों ने डाक-पार्सल और कूरियर कंटेनरों का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि ऐसे वाहनों पर सामान्यतः कम संदेह किया जाता है। पार्सलों के बीच डोडा-चूरा छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाया जाता था। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं, मादक पदार्थ कहां से लोड किया गया था, इसे कहां पहुंचाया जाना था और कंटेनर मालिक की क्या भूमिका रही।
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भारत ने पहले टी-20 में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराया, वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास

हरारे में खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। पहले बल्लेबाजी करते हुए जिम्बाब्वे की टीम 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 125 रन ही बना सकी। टीम के लिए वेस्ली मधेवेरे ने सर्वाधिक 39 रन बनाए, जबकि तदिवानाशे मरुमानी ने नाबाद 27 रनों की उपयोगी पारी खेली। भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा। मयंक यादव ने पारी की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर शानदार शुरुआत दिलाई और कुल 2 विकेट लिए। प्रिंस यादव ने भी 2 विकेट झटके, जबकि शिवम दुबे और रवि बिश्नोई को 1-1 सफलता मिली। वेस्ली मधेवेरे रन आउट हुए। 126 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने 13.2 ओवर में 3 विकेट खोकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। वैभव सूर्यवंशी ने बनाया विश्व रिकॉर्ड भारत की जीत के सबसे बड़े नायक 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी रहे। उन्होंने सिर्फ 15 साल 118 दिन की उम्र में टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट में अर्धशतक जड़कर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। इसके साथ ही वह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले बल्लेबाज बन गए। उन्होंने जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 16 साल 56 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहली जीत यह जीत कप्तान श्रेयस अय्यर के लिए भी खास रही। उनकी कप्तानी में भारत की यह पहली टी-20 अंतरराष्ट्रीय जीत है। इससे पहले टीम को आयरलैंड के खिलाफ 2-0 और इंग्लैंड के खिलाफ 4-0 से सीरीज हार का सामना करना पड़ा था। Read More:deshharpal.com
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पेपर लीक के विरोध में राहुल गांधी का गांधी स्मृति तक मार्च, विपक्षी दलों के नेता भी हुए शामिल

पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गुरुवार शाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अपने आवास से गांधी स्मृति तक पैदल मार्च निकाला। इस मार्च में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार गुट), तृणमूल कांग्रेस (TMC), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), वाम दल, समाजवादी पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के सांसद भी शामिल हुए। मार्च से पहले राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी सांसदों की बैठक हुई। इसके बाद सभी नेता गांधी स्मृति के लिए रवाना हुए। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और बसें लगाकर रास्ता रोका। हालांकि, करीब 10 मिनट बाद प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई। मार्च के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण जिन छात्रों ने अपनी जान गंवाई, उन्हें याद करने के लिए यह मार्च निकाला गया है। उन्होंने कहा कि जब छात्र सड़कों पर अपने भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तो विपक्ष का भी उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार संवेदनशीलता नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों की आवाज संसद से लेकर सड़क तक उठाता रहेगा। गौरतलब है कि इससे पहले 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च किया था और वहां करीब दो घंटे तक धरना दिया था। गांधी स्मृति का ऐतिहासिक महत्व गांधी स्मृति, जिसे पहले बिड़ला हाउस के नाम से जाना जाता था, महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ा ऐतिहासिक स्थल है। गांधी जी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन यहीं बिताए थे। 30 जनवरी 1948 को इसी परिसर में प्रार्थना सभा के लिए जाते समय उनकी हत्या कर दी गई थी। आज भी यहां उनके अंतिम कदमों के निशान और वह स्थान सुरक्षित है, जहां उन्हें गोली मारी गई थी। Read More:deshharpal.com
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Jitendra Singh

Jitendra Singh on Student Protest: सरकार ने खोले बातचीत के दरवाजे, लेकिन Students अपनी मांगों पर कायम

छात्र आंदोलन को लेकर राजधानी में हलचल लगातार बनी हुई है। केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने बातचीत का रास्ता खुला रखने का संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि छात्र जिस जगह चाहेंगे, सरकार वहां बातचीत करने के लिए तैयार है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों पर अब भी मजबूती से कायम हैं और ठोस आश्वासन की मांग कर रहे हैं। सरकार ने बातचीत का दिया भरोसा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने छात्रों के मुद्दों को लेकर कहा कि सरकार संवाद के लिए तैयार है। उनका कहना है कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। सरकार की कोशिश है कि छात्रों की चिंताओं को समझकर उचित रास्ता निकाला जाए और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाए। मंत्री के इस बयान के बाद बातचीत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन अभी तक प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से आंदोलन खत्म करने का कोई संकेत नहीं मिला है। Students Protest: अपनी मांगों पर कायम प्रदर्शनकारी दूसरी ओर छात्र संगठनों का कहना है कि केवल बातचीत का प्रस्ताव काफी नहीं है। छात्रों की मांग है कि उनकी समस्याओं पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए और जरूरी कदम उठाए जाएं। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार से अपनी मांगों को गंभीरता से लेने की अपील कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी टकराव के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और बेहतर व्यवस्था की मांग को लेकर है। इसी वजह से वे अपनी मांगें पूरी होने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कह रहे हैं। आंदोलन को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल छात्र प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है। वहीं सरकार की ओर से लगातार यही संदेश दिया जा रहा है कि छात्रों की समस्याओं पर चर्चा के लिए दरवाजे खुले हैं। अब बातचीत पर टिकी सभी की नजरें फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत कब शुरू होती है और क्या इससे कोई सहमति बन पाएगी। एक तरफ सरकार संवाद के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ेगा। फिलहाल छात्र प्रदर्शन और सरकार के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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पेपर लीक

Bihar to Haryana Protest: पेपर लीक मुद्दे पर बड़ा आंदोलन, कटिहार में बवाल और Gurugram में Congress का शक्ति प्रदर्शन

देश में पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बिहार के कटिहार से लेकर हरियाणा के गुरुग्राम तक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से निष्पक्ष परीक्षा और सख्त कार्रवाई की मांग की। कटिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच विवाद बढ़ने के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। वहीं गुरुग्राम में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी। देशभर में चल रहे इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटिहार में छात्रों का प्रदर्शन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज बिहार के कटिहार में पेपर लीक मामले को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, दोषियों पर कार्रवाई और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों की ओर से ईंट-पत्थर चलने की भी खबर सामने आई। छात्रों का कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं मेहनत करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हैं। उनका मानना है कि एक परीक्षा में गड़बड़ी का असर युवाओं के करियर और भविष्य पर पड़ता है। बिहार में छात्रों का आंदोलन हुआ तेज पेपर लीक के मुद्दे को लेकर बिहार के कई इलाकों में छात्र संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मुख्य मांग है कि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए और पेपर लीक में शामिल लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो। युवाओं का कहना है कि बार-बार परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण उनका समय और मेहनत दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी समाधान निकालने की अपील की है। Gurugram में Congress का प्रदर्शन, पुलिस से हुई बहस हरियाणा के गुरुग्राम में भी पेपर लीक और युवाओं के मुद्दों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जब कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की तो दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर युवाओं की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। वहीं प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने को अपनी प्राथमिकता बताया। Paper Leak Issue बना युवाओं का बड़ा मुद्दा पेपर लीक का मामला अब देशभर में युवाओं के बीच बड़ा मुद्दा बन चुका है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र लगातार मांग कर रहे हैं कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत सिस्टम तैयार किया जाए। युवाओं का कहना है कि परीक्षा केवल एक टेस्ट नहीं बल्कि उनके सपनों और करियर से जुड़ी होती है। इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी पर तुरंत और सख्त कार्रवाई जरूरी है। सरकार के सामने बड़ी चुनौती पेपर लीक को लेकर बढ़ते विरोध के बीच सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवाओं का भरोसा वापस जीतना है। परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने, सुरक्षा बढ़ाने और दोषियों पर कार्रवाई करने जैसे कदमों से ही छात्रों का विश्वास कायम किया जा सकता है। फिलहाल देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन जारी हैं और युवाओं की नजर सरकार के अगले कदमों पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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