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स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर MP के इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन, भोपाल में सड़क पर बैठे

भोपाल:  मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी है। राजधानी भोपाल में डॉक्टरों का सबसे बड़ा प्रदर्शन कमला पार्क के पास चल रहा है, जहां बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर विरोध जता रहे हैं। इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। कई अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मांग पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। हमीदिया अस्पताल में 12 बजे तक OPD बंद भोपाल के हमीदिया अस्पताल में बुधवार को दोपहर 12 बजे तक ओपीडी सेवाएं बंद रहीं। इस दौरान सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों का इलाज किया। अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे किडनी और लिवर के मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। बताया गया कि हमीदिया अस्पताल में बुधवार को सिर्फ 2 ऑपरेशन हुए, जबकि सामान्य दिनों में यहां 40 से ज्यादा ऑपरेशन किए जाते हैं। इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के चलते अस्पताल की नियमित व्यवस्थाओं पर इसका असर पड़ा है। कमला पार्क के पास डॉक्टरों का प्रदर्शन भोपाल में कमला पार्क के पास बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन के कारण इलाके में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने रास्ते को वन-वे कर दिया है। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से बातचीत कर रहे हैं, ताकि आंदोलन के कारण आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। ‘मांग पूरी होने तक जारी रहेगा प्रदर्शन’ इंटर्न डॉक्टर सौरभ सोनी ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी को लेकर सरकार से लंबे समय से मांग की जा रही है। वहीं, डॉ. शालिनी खन्ना ने बताया कि तेज धूप और गर्मी के कारण प्रदर्शन के दौरान काफी परेशानी हो रही है। हालांकि, खाने-पीने की व्यवस्था को लेकर उन्हें कोई बड़ी दिक्कत नहीं है। उन्होंने बताया कि सीनियर डॉक्टरों, साथी डॉक्टरों और भोपाल के स्थानीय लोगों की ओर से भी प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के लिए खाना भेजा जा रहा है। फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन जारी है और सरकार के साथ बातचीत के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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इंदौर के साउथ तोड़ा में निगम की रिमूवल कार्रवाई के दौरान हंगामा, एडिशनल DCP को युवक ने दिया धक्का

इंदौर: शहर के साउथ तोड़ा इलाके में बुधवार को नगर निगम की रिमूवल कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हो गया। कार्रवाई का विरोध कर रही भीड़ को हटाने के दौरान पीछे मौजूद एक युवक ने एडिशनल DCP दिशेष अग्रवाल को धक्का दे दिया। धक्का लगने से उनका संतुलन बिगड़ गया और वे जमीन पर गिर पड़े। घटना के तुरंत बाद पुलिस जवानों ने युवक को पकड़ लिया। पुलिस ने मौके से कुल 6 लोगों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। 100 से ज्यादा निगमकर्मी और भारी पुलिस बल रहा तैनात नगर निगम की टीम बुधवार को साउथ तोड़ा में अवैध निर्माण हटाने पहुंची थी। कार्रवाई के लिए 100 से ज्यादा निगमकर्मी, 3 पोकलेन और 6 जेसीबी मशीनें मौके पर पहुंची थीं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 80 से ज्यादा पुलिस जवान और अधिकारी तैनात किए गए थे। निगम के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान 50 शेड और 6 मकानों के अवैध हिस्से हटाए गए। सामान बाहर निकालने को लेकर महिलाओं से हुआ विवाद कार्रवाई के दौरान कुछ महिलाएं पुलिसकर्मियों से अपना सामान बाहर निकालने को लेकर बहस करने लगीं। महिलाओं का कहना था कि नोटिस में उन्हें सुबह 9 बजे तक का समय दिया गया था। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ता गया और मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। इस दौरान कई लोग अपने मोबाइल फोन से कार्रवाई का वीडियो बनाने लगे। भीड़ को पीछे हटाने के दौरान DCP को धक्का स्थिति बिगड़ती देख एडिशनल DCP दिशेष अग्रवाल मौके पर पहुंचे और भीड़ को पीछे हटाने का प्रयास करने लगे। इसी दौरान उनके पीछे खड़े एक युवक ने उन्हें धक्का दे दिया। अचानक धक्का लगने से उनका संतुलन बिगड़ा और वे जमीन पर गिर गए। पुलिस ने तत्काल युवक को पकड़ लिया। उसके साथ मौजूद एक अन्य युवक समेत कुछ लोगों को भी पुलिस ने अभिरक्षा में लिया। 6 लोगों पर होगी कार्रवाई एडिशनल DCP दिशेष अग्रवाल ने बताया कि रिमूवल कार्रवाई के दौरान कुल 6 लोगों को अभिरक्षा में लिया गया है। सभी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के लिए 80 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। पहले जारी किए गए थे नोटिस नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, रिमूवल कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए थे। कार्रवाई के दौरान निगम की टीम ने टेप से नपती कर अवैध निर्माणों को चिन्हित किया और इसके बाद उन्हें हटाया। झोन-11 के झोनल अधिकारी गीतेश तिवारी के मुताबिक, साउथ तोड़ा में 50 शेड और कुछ मकानों के अवैध हिस्से हटाए गए हैं। क्षेत्र में आने वाले दिनों में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है। इसी के चलते यह कार्रवाई की गई।
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Instagram की दोस्ती पड़ी भारी: खंडवा बुलाकर महिला से दुष्कर्म का आरोप, 7 साल के बेटे से भी मारपीट; अमृतसर से आरोपी गिरफ्तार

खंडवा में Instagram के जरिए हुई दोस्ती के बाद एक शादीशुदा महिला को मिलने के लिए बुलाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोप में पुलिस ने फरार युवक को पंजाब के अमृतसर से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि महिला के विरोध करने पर आरोपी ने उसके 7 वर्षीय बेटे के साथ भी मारपीट की। आरोपी की पहचान अंकित पिता एरिक मसीह, निवासी पटियाला, पंजाब के रूप में हुई है। घटना 14 जुलाई की बताई गई है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की थी। साइबर सेल की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस होने के बाद पुलिस टीम ने अमृतसर में घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। Instagram पर हुई थी महिला से दोस्ती पुलिस के मुताबिक, आरोपी अंकित और महिला की पहचान Instagram के जरिए हुई थी। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे दोस्ती हो गई। आरोप है कि इसके बाद अंकित ने महिला को मिलने के लिए खंडवा बुलाया। महिला अपने करीब 7 वर्षीय बेटे के साथ खंडवा पहुंची। दोनों सिनेमा चौक स्थित ऐश्वर्य होटल पहुंचे, जहां आरोपी पहले से मौजूद था। होटल में दुष्कर्म का आरोप, विरोध करने पर मारपीट पुलिस के अनुसार, होटल में आरोपी ने महिला के साथ दुष्कर्म किया। महिला और उसके बेटे ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने दोनों के साथ मारपीट की। आरोप है कि आरोपी ने महिला के 7 वर्षीय बेटे के साथ भी मारपीट की। घटना के बाद आरोपी होटल से निकलकर फरार हो गया। महिला अपने बेटे के साथ कोतवाली थाने पहुंची और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। साइबर सेल की मदद से मिली आरोपी की लोकेशन घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और सोशल मीडिया से जुड़े सुराग जुटाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की मदद ली गई। जांच के दौरान आरोपी की लोकेशन पंजाब में मिली। इसके बाद पुलिस टीम पंजाब के लिए रवाना हुई और उसकी तलाश शुरू की। अमृतसर में घेराबंदी कर गिरफ्तार किया कोतवाली थाना प्रभारी प्रवीण आर्य के मुताबिक, सब इंस्पेक्टर मनोज दवे और पुलिस टीम ने साइबर सेल की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। आरोपी के अमृतसर में होने की जानकारी मिलने के बाद टीम ने वहां पहुंचकर घेराबंदी की और अंकित पिता एरिक मसीह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी का मेडिकल परीक्षण कराया गया। सोमवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सावधान रहने की अपील पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती और मुलाकात को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि Instagram, Facebook या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी व्यक्ति से बातचीत होने के बाद उसकी पहचान और पृष्ठभूमि की जानकारी किए बिना उस पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। किसी अनजान व्यक्ति के बुलाने पर दूसरे शहर जाने से पहले उसकी पहचान और अन्य जरूरी जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है। साथ ही सोशल मीडिया पर निजी जानकारी साझा करने से भी बचने की सलाह दी गई है।
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गुना में महिला की सूझबूझ से मोबाइल तक पहुंची पुलिस, सोशल मीडिया चैट से संदिग्ध की लोकेशन पता कर स्टेशन पर पकड़ा

गुना में मोबाइल चोरी के एक मामले में महिला की सूझबूझ और सोशल मीडिया का इस्तेमाल चर्चा में है। 29 जुलाई को बाजार में महिला का एंड्राइड मोबाइल गायब हो गया था। बाद में परिवार को जानकारी मिली कि मोबाइल किसी दूसरे व्यक्ति के पास है। इसके बाद पुलिस जांच का इंतजार करने के बजाय परिवार ने अपने स्तर पर मोबाइल और संदिग्ध व्यक्ति का पता लगाने की कोशिश शुरू की। मोबाइल मालिक की बहन ने सोशल मीडिया पर एक संदिग्ध युवक की पहचान कर उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी। युवक ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। बातचीत के दौरान महिला को युवक के आने-जाने की जानकारी मिलती रही। इसी चैटिंग से परिवार को पता चला कि युवक इंदौर से बदरवास तहसील के गिन्दौरा गांव जाने वाला है। इसके बाद परिवार ने उसे गुना रेलवे स्टेशन पर पकड़ने की योजना बनाई। 29 जुलाई को बाजार से गायब हुआ था मोबाइल जानकारी के मुताबिक, 29 जुलाई को महिला बाजार गई थी। इसी दौरान उसका एंड्राइड मोबाइल गायब हो गया। काफी तलाश के बाद भी फोन नहीं मिला। परिवार को आशंका थी कि मोबाइल किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ लग गया है। परिजनों ने मोबाइल से जुड़ी जानकारी जुटानी शुरू की। बताया जा रहा है कि फोन में मौजूद कुछ तस्वीरें और नंबर हटा दिए गए थे, लेकिन उसमें लगी सिम नहीं बदली गई थी। इसी वजह से परिवार को संदिग्ध व्यक्ति तक पहुंचने में मदद मिली। बहन ने भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट, फिर शुरू हुई चैटिंग मोबाइल मालिक की बहन ने सोशल मीडिया पर संदिग्ध युवक की पहचान की और उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी। युवक ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद महिला ने उससे सामान्य बातचीत शुरू की। बातचीत के दौरान उसने युवक के आने-जाने की जानकारी जुटाई। इसी दौरान पता चला कि वह इंदौर से बदरवास तहसील के गिन्दौरा गांव जाने वाला है। गुना स्टेशन पर महिला ने युवक को पहचान लिया सोमवार 24 अगस्त को दोपहर करीब 1:30 बजे युवक गुना रेलवे स्टेशन पहुंचा। परिवार को उसके आने की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी, इसलिए महिला अपने परिजनों के साथ स्टेशन पर मौजूद थी। युवक के स्टेशन पहुंचते ही महिला ने उसे पहचान लिया। उसके पास वही मोबाइल दिखाई देने पर महिला ने उसे पकड़ लिया। इस दौरान स्टेशन पर लोगों की भीड़ भी जमा हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है। रक्षाबंधन के चलते युवक को छोड़ने की अपील बताया जा रहा है कि रक्षाबंधन के चलते एक महिला ने मोबाइल के साथ पकड़े गए युवक को छोड़ने की अपील की। हालांकि, मामले में मोबाइल चोरी और युवक की भूमिका को लेकर पुलिस जांच कर रही है। पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि बाजार में गायब हुआ मोबाइल युवक तक कैसे पहुंचा और उसने उसे अपने पास क्यों रखा। सोशल मीडिया पर हुई बातचीत और स्टेशन पर पकड़े जाने की पूरी घटना भी जांच का हिस्सा बन सकती है। इस मामले में मोबाइल में सिम का मौजूद रहना, सोशल मीडिया चैटिंग और युवक के गुना आने की जानकारी मिलना अहम कड़ियां मानी जा रही हैं। पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
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भोपाल

भोपाल बना आंदोलन का केंद्र: Teacher Recruitment में पद बढ़ाने को लेकर Neelam Park में डटे अभ्यर्थी

मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों का इंतजार अब आंदोलन में बदल गया है। शिक्षक भर्ती में पद बढ़ाने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भोपाल के नीलम पार्क में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। उम्मीदवारों का कहना है कि मौजूदा भर्ती में पदों की संख्या उनकी अपेक्षा के मुकाबले कम है, इसलिए सरकार को रिक्त पदों को ध्यान में रखते हुए भर्ती का दायरा बढ़ाना चाहिए। अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांग को लेकर लगातार आवाज उठाएंगे। नीलम पार्क में चल रहे इस प्रदर्शन के कारण एक बार फिर भोपाल का यह स्थान युवाओं के आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया है। पद बढ़ाने की मांग पर अड़े शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के लिए बड़ी संख्या में युवा तैयारी करते हैं। कई अभ्यर्थी वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। ऐसे में सीमित पद होने से बड़ी संख्या में योग्य उम्मीदवारों के लिए सरकारी नौकरी का अवसर कम हो जाता है। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार उपलब्ध Teacher Vacancies का आकलन करे और उसी के आधार पर भर्ती में पद बढ़ाए। उनका कहना है कि इससे योग्य युवाओं को नौकरी का बेहतर मौका मिलेगा और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में भी मदद मिलेगी। Neelam Park में जारी है अनिश्चितकालीन धरना भोपाल का नीलम पार्क पहले भी विभिन्न कर्मचारी और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े आंदोलनों का गवाह रहा है। अब शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों के धरने के बाद यहां फिर प्रदर्शन का माहौल है। धरने में शामिल उम्मीदवार अपनी मांगों को लेकर सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी, बल्कि पद बढ़ाने को लेकर ठोस फैसला लिया जाना चाहिए। युवाओं का सवाल- जब पद खाली हैं तो भर्ती क्यों नहीं बढ़ाई जाए? अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं तो भर्ती में ज्यादा पद शामिल क्यों नहीं किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों का तर्क है कि शिक्षकों की कमी का असर सीधे स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ता है। उनका कहना है कि एक ओर युवा रोजगार की तलाश में हैं और दूसरी ओर सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की जरूरत बनी हुई है। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में उपलब्ध रिक्तियों को शामिल करने से दोनों समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। सरकार के रुख पर टिकी नजर फिलहाल शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने अनिश्चितकालीन धरना जारी रखने का फैसला किया है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग की ओर से आंदोलन को लेकर क्या कदम उठाया जाता है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उनकी मांग पर जल्द सुनवाई होगी और MP Teacher Recruitment में पद बढ़ाने को लेकर सरकार सकारात्मक निर्णय लेगी। वहीं, अगर बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। भोपाल के नीलम पार्क में जारी यह धरना सिर्फ भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की उम्मीदों से जुड़ा है जो शिक्षक बनने के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार उनकी मांग पर कब तक फैसला लेती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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इंदौर में 12वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मोबाइल चैट की जांच में जुटी पुलिस

इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में 12वीं कक्षा के एक छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना छोटा बांगड़दा के सुविधा नगर की है। मृतक की पहचान यशपाल (17), पिता बलीराम के रूप में हुई है। वह मूल रूप से विदिशा जिले का रहने वाला था और इंदौर में अपनी बड़ी बहन और जीजा के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, यशपाल एक कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता किसान हैं। परिवार में दो बहनें और एक भाई हैं। उसकी बड़ी बहन और जीजा भी इंदौर में उसके साथ रहते थे। जीजा फाइनेंस का काम करते हैं। घटना के वक्त घर में अकेला था छात्र पुलिस के अनुसार, घटना के समय यशपाल घर में अकेला था। बाद में परिजनों ने उसे फंदे पर लटका देखा और तत्काल पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही एरोड्रम पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मोबाइल और चैट की जांच कर रही पुलिस पुलिस ने घटनास्थल से यशपाल का मोबाइल फोन जब्त किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह मोबाइल पर किसी से चैटिंग करता था। अब पुलिस उसके कॉल डिटेल, चैट और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्र ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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गुना में किसान सम्मान निधि का झांसा देकर 4.85 लाख का फर्जी KCC लोन, भाई-बहन से जालसाजी

गुना जिले की चांचौड़ा तहसील के ग्राम तेलीगांव से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव के ही एक युवक ने बैंक दलाल के साथ मिलकर बुजुर्ग भाई-बहन को किसान सम्मान निधि के 2-2 हजार रुपए दिलाने का झांसा दिया और उनके नाम पर करीब 4.85 लाख रुपए का KCC लोन स्वीकृत कराकर रकम निकाल ली। पीड़ित गंगाराम अहिरवार और उनकी बहन भमरी बाई, निवासी तेलीगांव, ने शनिवार को पुलिस को शिकायत देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। सम्मान निधि का झांसा देकर करवाए दस्तखत शिकायत में पीड़ितों ने बताया कि उनकी जमीनों के दस्तावेजों के आधार पर आरआरबी बैंक की बीनागंज शाखा से दो अलग-अलग KCC लोन स्वीकृत कराए गए। इनमें करीब 1.32 लाख और 3.53 लाख रुपए, यानी कुल 4.85 लाख रुपए की राशि शामिल है। पीड़ितों का आरोप है कि दशरथ सिंह अहिरवार ने उन्हें किसान सम्मान निधि की राशि दिलाने की बात कही और इसी बहाने बैंक से जुड़े कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान करवा लिए। बाद में आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर KCC लोन कराया गया और लोन की राशि खुद निकाल ली गई। बैंक पहुंचने पर सामने आई लाखों की देनदारी पीड़ित परिवार को मामले की जानकारी तब हुई, जब वे बैंक पहुंचे। वहां उन्हें अपने नाम पर लाखों रुपए के KCC लोन की जानकारी मिली। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। परिवार का आरोप है कि उन्हें लोन लेने की जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने किसी तरह की इतनी बड़ी रकम के लिए सहमति दी थी। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने का वीडियो भी सामने आया मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें आरोपी द्वारा कथित तौर पर पीड़ित से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाते और उसे समझाते हुए दिखाई देने की बात कही जा रही है। पीड़ित परिवार के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले कलेक्टर कार्यालय में भी शिकायत की थी। अब उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। फर्जी लोन से मुक्ति और कार्रवाई की मांग पीड़ित भाई-बहन ने पुलिस से आरोपी और मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने नाम पर हुए कथित फर्जी KCC लोन की राशि की जिम्मेदारी से मुक्त कराने की मांग की है। फिलहाल पुलिस शिकायत और सामने आए दस्तावेजों व वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लोन स्वीकृति और राशि निकासी की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
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खंडवा में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए 21 लाख का टेंडर, 5 सितंबर तक आवेदन

खंडवा शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं के बीच नगर निगम ने एक बार फिर नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू करने की तैयारी की है। निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 21 लाख रुपए का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी के साथ उनका इम्यूनाइजेशन यानी टीकाकरण भी किया जाएगा। यह काम Animal Birth Control Program के तहत कराया जाएगा और टेंडर की अवधि एक साल रखी गई है। 5 सितंबर तक जमा होंगे आवेदन नगर निगम की ओर से शनिवार को जारी निविदा विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक संस्थान और एजेंसियां 5 सितंबर 2026 शाम 5:30 बजे तक ऑनलाइन टेंडर जमा कर सकेंगी। निविदाएं 7 सितंबर सुबह 10:30 बजे खोली जाएंगी। टेंडर के लिए धरोहर राशि 21 हजार रुपए और निविदा प्रपत्र शुल्क 5 हजार रुपए निर्धारित किया गया है। नसबंदी के साथ कुत्तों का टीकाकरण भी नगर निगम के इस अभियान का उद्देश्य केवल आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करना नहीं है। अभियान के दौरान पकड़े जाने वाले कुत्तों की नसबंदी के साथ उनका टीकाकरण भी किया जाएगा। Animal Birth Control Program के तहत नसबंदी और इम्यूनाइजेशन का उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के साथ डॉग बाइट और अन्य संबंधित जोखिमों को कम करना है। पिछले अभियान को लेकर उठ चुके हैं सवाल खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान को लेकर हाल ही में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। जनसुनवाई के दौरान नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने नसबंदी अभियान पर खर्च और शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर विरोध जताया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक के कुत्ते की वेशभूषा में पहुंचने का मामला भी चर्चा में रहा था। इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। कलेक्टर ऋषव गुप्ता और निगम कमिश्नर प्रियंका राजावत को भी मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी। चार साल में खर्च हो चुके हैं 98 लाख रुपए जानकारी के मुताबिक, खंडवा में पिछले चार साल के दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी पर करीब 98 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट को लेकर सवाल बने हुए हैं। अब 21 लाख रुपए के नए टेंडर से नगर निगम को उम्मीद है कि नसबंदी और टीकाकरण अभियान को दोबारा गति मिलेगी। वहीं शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नए अभियान से आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की समस्या पर कितना असर पड़ता है।
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सीहोर के अस्पताल में घड़ी के अंदर मिला संदिग्ध कैमरा, महिला स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप; मंत्री को सौंपा ज्ञापन

सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड मिलने से हड़कंप मच गया। घटना 13 अगस्त की बताई जा रही है। अस्पताल में काम करने वाली महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने इसे निजता और कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला स्वास्थ्यकर्मियों और नर्सिंग स्टाफ ने सीहोर से गुजर रहे राजस्व मंत्री एवं इछावर विधायक करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर उन्हें ज्ञापन सौंपा। घड़ी के अंदर मिला कैमरा और मेमोरी कार्ड अस्पताल कर्मचारियों के मुताबिक, एक कमरे में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड मिला। अस्पताल में बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्यकर्मी काम करती हैं। ऐसे में किसी उपकरण का इस तरह लगाया जाना कर्मचारियों की निजता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि कैमरा किसने, कब और किस उद्देश्य से लगाया था। इसके साथ ही अस्पताल के अन्य कमरों और स्थानों की भी जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं और भी ऐसे उपकरण तो नहीं लगाए गए। मंत्री का काफिला रोककर सौंपा ज्ञापन मामले को लेकर नाराज महिला स्वास्थ्यकर्मी और नर्सिंग स्टाफ ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर अपनी शिकायत रखी। कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। मंत्री ने कर्मचारियों की बात सुनी और मामले में जांच व आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। कार्रवाई में देरी का लगाया आरोप महिला कर्मचारियों का आरोप है कि संदिग्ध कैमरा मिलने के बाद भी विभागीय स्तर पर मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी वजह से उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधि के सामने अपनी शिकायत रखने के लिए आगे आना पड़ा। कर्मचारियों ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि निष्पक्ष जांच हो और कैमरा लगाने वाले व्यक्ति की पहचान के साथ पूरे मामले की सच्चाई सामने आए। कर्मचारियों के अनुसार, मिला हुआ संदिग्ध उपकरण संबंधित अधिकारियों को सुरक्षित सौंप दिया गया है। BMO बोले- नियमों के तहत कार्रवाई जारी बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के BMO डॉ. नवीन मेहर ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत निष्पक्ष कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घड़ी में मिला उपकरण वास्तव में कैमरा था, उसे किसने लगाया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
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इंदौर में PM आवास योजना के फ्लैटों पर निगम की बड़ी कार्रवाई, 15 आवासीय इकाइयां सील

इंदौर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अमलतास परिसर में आवंटित आवासीय इकाइयों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नगर निगम ने कार्रवाई की है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर शुक्रवार को जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 15 आवासीय इकाइयों को सील किया गया। वहीं, फ्लैटों में नियमों के विपरीत संचालित दुकानों का सामान भी जब्त किया गया। कहीं मवेशी पाले जा रहे थे, कहीं दुकानें मिलीं निरीक्षण के दौरान टीम को कई आवासीय इकाइयों में नियमों के विपरीत गतिविधियां मिलीं। कुछ फ्लैटों में मवेशी पाले जा रहे थे, जबकि कुछ हितग्राहियों ने अपने आवास किराये पर देकर वहां दूसरी गतिविधियां संचालित कर रखी थीं। कई आवासीय इकाइयों में रहने के बजाय दुकानें संचालित होती मिलीं। निगम ने इन मामलों को आवास आवंटन की शर्तों का उल्लंघन माना और कार्रवाई की। 20 हजार जमा कर बाकी 1.80 लाख नहीं चुकाए जांच के दौरान कुछ हितग्राहियों के आवास आवंटन से जुड़ी राशि भी बकाया मिली। बताया गया कि कुछ हितग्राहियों ने शुरुआती 20 हजार रुपए जमा किए थे, लेकिन शेष 1.80 लाख रुपए की राशि अब तक जमा नहीं की। निगम ने ऐसे हितग्राहियों को बकाया राशि जमा करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। राशि जमा नहीं की तो आवंटन होगा निरस्त नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में बकाया राशि जमा नहीं करने पर आवास खाली कराया जाएगा और आवंटन निरस्त किया जा सकता है। इसके बाद आवास किसी अन्य पात्र हितग्राही को आवंटित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। मुनादी के जरिए बकायादार हितग्राहियों को भी चेतावनी दी गई है कि समय पर राशि जमा नहीं करने पर पहले जमा की गई राशि राजसात करने के साथ आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम रही मौजूद कार्रवाई के दौरान तेजाजी नगर थाना प्रभारी, क्षेत्रीय तहसीलदार, कार्यपालन यंत्री मितेश सिंगोड, सीएलटीसी संतोषी गुप्ता सहित नगर निगम की रिमूवल टीम और पुलिस बल मौजूद रहा। निगम अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित मकानों का उपयोग तय नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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