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सागर में पानी से भरे गड्ढे में डूबे दो सगे भाई, 8 और 3 साल के बच्चों की मौत

सागर। सागर के कैंट थाना क्षेत्र में गुरुवार शाम दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम भैंसा के पास पानी से भरे गड्ढे में गिरने से दो सगे भाइयों की मौतहो गई। हादसे के बाद आसपास के लोगों ने बच्चों को पानी से बाहर निकालने की कोशिश की और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची कैंट पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों में 8 और 3 साल के सगे भाई प्राथमिक जांच के अनुसार मृतकों की पहचान कार्तिक बंसल (8 वर्ष) और उसके छोटे भाई मक्कू बंसल (3 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों भगवानगंज स्थित रेलवे ब्रिज के पास रहने वाले भागीरथ बंसल के बेटे थे। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें मोर्चरी में रखवाया है। कैंट पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पैर फिसलने से पानी में गिरने की आशंका आसपास के लोगों के मुताबिक, दोनों भाई कुएं के पास बने गड्ढे के आसपास खेल रहे थे। इसी दौरान अचानक पैर फिसलने से दोनों पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बच्चों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस के पहुंचने के बाद दोनों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे के बाद परिवार में मातम दो मासूम भाइयों की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। घटना से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट थाना प्रभारी रोहित डोंगरे ने बताया कि पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत हुई है। मामला दर्ज कर घटना के कारणों की जांच की जा रही है।
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MP में 17 सितंबर से स्वामित्व अधिकार अभियान, 50 लाख से ज्यादा लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन अभियान शुरू किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस अभियान के तहत आबादी की भूमि पर काबिज पात्र लोगों को सरकार की ओर से नि:शुल्क रजिस्ट्री कराकर स्वामित्व अधिकार दिए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, इस अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही 17 सितंबर को शाम 7 बजे प्रदेशभर में एक साथ 58 लाख से अधिक दीपक जलाकर ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 41 हजार से ज्यादा गांवों में 68.47 लाख प्लॉट का सर्वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान बताया कि स्वामित्व अभियान के तहत प्रदेश के 41 हजार 568 गांवों में 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस अभियान में 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा गया है। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी में छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुने गए आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोकनगर और रायसेन जिलों के कलेक्टरों से योजना के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलेगा अभियान अधिकारियों के अनुसार स्वामित्व योजना का अभियान तीन चरणों में 17 सितंबर से 3 अक्टूबर तक चलाया जाएगा। योजना से संबंधित मोबाइल एप को यूजर फ्रेंडली बनाया गया है और पटवारियों की ट्रेनिंग भी कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए कि अभियान के लिए अगले दो दिनों में माइक्रो प्लानिंग पूरी कर ली जाए। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करेंगे। साथ ही जिला स्तर पर नोडल, जोनल और सेक्टर अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। हर दिन 30 से 40 रजिस्ट्री का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर हर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित करें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वामित्व योजना के तहत प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा जाए। कलेक्टरों को अभियान की बेहतर प्लानिंग और शेड्यूलिंग करने के साथ रोजाना की प्रगति रिपोर्ट तैयार कर जमा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी की भूमिका निभाएंगे। वहीं तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और अन्य अधिकारियों को पंजीयन अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। भोपाल से शुरू होगा एक महीने का सेवा संकल्प अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में एक महीने तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को भोपाल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगी। इस कार्यक्रम से सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। अभियान के तहत कुल 13 अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। 17 सितंबर को जलेंगे 58 लाख से ज्यादा दीप सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम से होगी। 17 सितंबर की शाम 7 बजे प्रदेशभर में लाभार्थी परिवारों और चयनित ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थानों पर एक साथ 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों में ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के स्थानों को चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि ‘आशीर्वाद का दीपक’ कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारियों की जिलों में अनिवार्य उपस्थिति रहेगी। इसके साथ ही विभिन्न विभागों की हितग्राहीमूलक योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
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इंदौर में H1N1 संक्रमित महिला की मौत, कोविड-19 भी मिला था पॉजिटिव

इंदौर। इंदौर के एक निजी अस्पताल में H1N1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमित महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला शाजापुर की रहने वाली थी और करीब 10 दिन से इंदौर के अस्पताल में भर्ती थी। गुरुवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। महिला एक सरकारी डॉक्टर की पत्नी बताई गई है। नजदीकी लोगों के मुताबिक महिला को 28 अगस्त से बुखार, खांसी और सर्दी के लक्षण थे। 1 सितंबर को हुई H1N1 जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, जिसके बाद उसे बेहतर इलाज के लिए इंदौर लाया गया। वहीं, 2 सितंबर की रिपोर्ट में महिला के इन्फ्लुएंजा के साथ कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई। महिला शाजापुर के आदित्य नगर की रहने वाली बताई गई है। मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक भी पहुंची है। इससे पहले उज्जैन की महिला की हुई थी मौत इससे पहले उज्जैन के ऋषि नगर निवासी 60 वर्षीय सरोज नागर की भी करीब दो सप्ताह पहले इंदौर के कोकिलाबेन अस्पताल में स्वाइन फ्लू से मौत हुई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें इंदौर लाया गया था, जहां करीब 16 दिन तक इलाज चला। जांच में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई थी। इसे मध्य प्रदेश में इस सीजन में स्वाइन फ्लू से पहली मौत बताया गया था। वहीं, पिछले सप्ताह धार की एक स्वाइन फ्लू संक्रमित महिला को भी इलाज के लिए इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। क्या है स्वाइन फ्लू? स्वाइन फ्लू H1N1 वायरस से होने वाला इन्फ्लुएंजा संक्रमण है। यह मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। इसके लक्षण सामान्य फ्लू की तरह हो सकते हैं, जिनमें बुखार, खांसी और सर्दी जैसे लक्षण शामिल हैं। यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों और श्वसन कणों के संपर्क में आने से फैल सकता है। कैसे फैलता है H1N1 संक्रमण? H1N1 संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक श्वसन बूंदों और कणों के जरिए फैल सकता है। इसके अलावा संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। 2009 में H1N1 के व्यापक प्रसार के दौरान इसे लेकर काफी चिंता देखी गई थी। हालांकि, अच्छी तरह पकाए गए सूअर के मांस से H1N1 संक्रमण होने का जोखिम नहीं माना जाता, क्योंकि पर्याप्त तापमान पर खाना पकाने से वायरस नष्ट हो जाता है। लक्षण दिखने पर सावधानी जरूरी बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या फ्लू जैसे लक्षण होने पर विशेष रूप से गंभीर लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। संक्रमण की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच के आधार पर की जानी चाहिए। इंदौर में सामने आए इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग तक जानकारी पहुंचने से स्थानीय स्तर पर निगरानी और सतर्कता बढ़ने की संभावना है।
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सागर शराब कांड: नकली शराब से 28 मौतों की जानकारी, आरोपियों के अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर

सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ विकासखंड के गांवों में कथित तौर पर नकली और जहरीली शराब पीने से करीब 28 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। कई मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हालांकि, प्रशासन ने अब तक 15 मौतों की पुष्टि की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सागर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। आरोपियों के अवैध निर्माण पर कार्रवाई गुरुवार को भारी पुलिस बल के साथ प्रशासन की टीम बंडा के वार्ड क्रमांक 11 और 12 पहुंची। यहां शराब कांड से जुड़े आरोपी और करणी सेना के संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राजपूत उर्फ चंदू तथा आरोपी मनीष के अवैध निर्माण पर कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस, प्रशासन और बंडा नगर पालिका की संयुक्त टीम चंद्रभान सिंह राजपूत के बंडा स्थित घर पहुंची। मौके पर तीन जेसीबी और भारी पुलिस बल तैनात किया गया, जिसके बाद अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। 5 सितंबर से अस्पताल पहुंचने लगे थे मरीज जानकारी के मुताबिक, 5 सितंबर की शाम से बंडा सिविल अस्पताल में अचानक बड़ी संख्या में मरीज पहुंचने लगे थे। इलाज के दौरान कई मरीजों की हालत बिगड़ने लगी। मरीजों में शरीर में अकड़न, उल्टी और शरीर नीला पड़ने जैसी शिकायतें सामने आईं। कुछ मरीजों की आंखों की रोशनी कम होने की बात भी सामने आई। मामले पर संदेह होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद कलेक्टर प्रतिभा पाल और एसपी अनुराग सुजानिया स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ बंडा पहुंचे। गंभीर मरीजों को सागर जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) रेफर किया जाने लगा। इसी दौरान कुछ मरीजों की मौत हो गई। भर्ती मरीजों से उनकी तबीयत बिगड़ने का कारण पूछा गया तो कई मरीजों ने शराब पीने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने क्षेत्र में अवैध शराब के नेटवर्क की जांच शुरू की। 6 सितंबर तक 15 से ज्यादा मौतें 6 सितंबर की सुबह तक 9 मरीजों की मौत हो चुकी थी। शाम तक मृतकों की संख्या 15 से अधिक हो गई। इसके बाद पुलिस ने क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ अभियान तेज किया। कार्रवाई के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और अवैध शराब जब्त की गई। पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के बाद क्षेत्र में शराब की बिक्री पर रोक लगी और नए मरीजों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला भी कम हुआ। 7 सितंबर को मौतों का आंकड़ा 22 के पार 7 सितंबर तक मौतों का आंकड़ा 22 के पार पहुंच गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया और अवैध एवं जहरीली शराब जब्त की। 8 सितंबर से स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिला। इस दिन दो मौतें होने की जानकारी सामने आई। पुलिस और प्रशासन की टीमें गांव-गांव में गश्त करती रहीं। ग्रामीणों को शराब से दूर रहने की अपील करते हुए मुनादी भी कराई गई। 9 सितंबर को प्रशासन के अनुसार कोई नया मरीज सामने नहीं आया और किसी नई मौत की सूचना भी नहीं मिली। मामले में अब तक 16 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। पुलिस ने उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में अवैध शराब जब्त की है। कई लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला पुलिस ने शराब मामले में जुझार लोधी, दिनेश सिंह, सौरभ लोधी, गोविंद लोधी, मनोहर लोधी, लाइसेंसी यशवंत ठाकुर, मनीष लोधी, आशीष साहू, आकाश राय, रहीम खान, सत्यम, आशाराम, अरविंद, रोहित, माखन, अनिकेत गंधर्व, विशाल लोधी, मंगल रजक और राजा सिंह समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, विनायका थाने में राम सिंह लोधी निवासी पाटन, ततरवारा सरपंच चंदू उर्फ चंद्रभान पिता द्वारिका प्रसाद राजपूत निवासी ततरवारा, अरविंद पिता आशाराम यादव, भगवान सिंह पिता देवी सिंह लोधी, मानसिंह प्रताप बिहार अहिरवार, लाइसेंसी ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा, रोहित पिता उत्तम शिवहरे निवासी छतरपुर, राघवेंद्र पिता सोहन सिंह निवासी ततरवारा, धर्मेंद्र पिता भुजबल राजपूत निवासी ततरवारा और सोहन पिता उमराव सिंह राजपूत निवासी ततरवारा के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। प्रशासन की कार्रवाई के साथ अवैध शराब के स्रोत और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
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उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर में बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मूर्ति हटाने को लेकर दावों पर प्रशासन की सफाई

उज्जैन। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच उज्जैन का यह मंदिर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा से जुड़े वीडियो और रील्स वायरल होने के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए श्रद्धालु भी शामिल हैं। सती गेट के पास स्थित मंदिर के आसपास प्रशासन की कार्रवाई और प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर प्रतिमा को हटाने के किसी भी प्रयास से इनकार किया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चमत्कार की कहानियां प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम होने की चर्चाओं के बाद सोशल मीडिया पर खड़े हनुमानजी से जुड़ी कई तरह की चमत्कारिक कहानियां वायरल हो रही हैं। इन वीडियो और रील्स के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। प्रशासन की ओर से मंदिर के आसपास के क्षेत्र में निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई है। वहीं, हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट के भीतर विराजमान है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। IIT इंदौर की टीम फिर करेगी जांच प्रतिमा को हटाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच IIT इंदौर की टीम सोमवार को मंदिर पहुंची थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर मंदिर और प्रतिमा से संबंधित स्थिति की जांच की। अब IIT इंदौर की टीम गुरुवार को एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करेगी। इस जांच के बाद स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है। सोशल मीडिया से श्रद्धालुओं को मिली जानकारी सती गेट के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने मंदिर में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं देखी। अब दर्शन के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े हो रहे हैं। नासिक से पहुंचे अनिल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमानजी की रील देखी थी। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आकर दर्शन करने का फैसला किया। नागपुर से आए महेश टिचकुले ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आने का निर्णय लिया। वहीं, राजस्थान के अजमेर से आए सुशील खंडेलवाल महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि घर पर सोशल मीडिया रील देखने के दौरान उन्हें खड़े हनुमान मंदिर के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां दर्शन करने पहुंचे। प्रशासन ने कहा- प्रतिमा हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है। प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा तथा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रेस नोट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन ने श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने के लिए मशीन अथवा मानवीय तरीके से कोई प्रयास नहीं किया गया है। भक्तों ने प्रशासन के दावे पर उठाए सवाल प्रशासन की सफाई के बाद कुछ श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास से संबंधित वीडियो उनके पास मौजूद हैं और अधिकारी चाहें तो उन्हें दिखाया जा सकता है। मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए हनुमानजी की प्रतिमा को यहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रशासन प्रतिमा हटाने के किसी प्रयास से इनकार कर रहा है तो उनके पास इसके संबंध में वीडियो मौजूद हैं। शैलू यादव के मुताबिक, नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। उन्होंने रात में कटर मशीन लाए जाने का भी दावा किया है। उनके अनुसार इन घटनाओं से जुड़े वीडियो उनके पास सुरक्षित हैं। फिलहाल प्रतिमा को हटाने को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर है। IIT इंदौर की आगामी जांच और प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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ग्वालियर बंद बेअसर, यूजीसी नियमों के विरोध में संगठनों का प्रदर्शन

ग्वालियर। यूजीसी के नियमों को वापस लेने, जातिगत नीतियों की समीक्षा और विभिन्न सामाजिक मुद्दों को लेकर सर्व संगठन एवं परशुराम सेना की ओर से गुरुवार को ग्वालियर बंद का आह्वान किया गया था। हालांकि शहर में बंद का खास असर देखने को नहीं मिला और अधिकांश इलाकों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं। बंद के दौरान फूलबाग स्थित रानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के सामने मैदान में विभिन्न संगठनों के लोग एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए संबंधित नीतियों की समीक्षा और बदलाव की मांग उठाई। भिंड, मुरैना और दतिया से भी पहुंचे लोग आंदोलन में ग्वालियर के अलावा भिंड, मुरैना, दतिया समेत आसपास के जिलों से भी विभिन्न संगठनों के लोग शामिल होने पहुंचे। आयोजकों ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण और अनुशासित बनाए रखने की अपील की। आंदोलन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति पर लगातार नजर रखी गई। UGC नियम वापस लेने की मांग प्रदर्शनकारी संगठनों की प्रमुख मांग यूजीसी के हालिया दिशा-निर्देशों और नीतियों को वापस लेने की है। संगठनों का कहना है कि इन नियमों को लेकर छात्रों और युवाओं के बीच असंतोष है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, किसी भी नए नियम या नीति को लागू करने से पहले उससे प्रभावित होने वाले छात्रों और अन्य संबंधित पक्षों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। जातिगत नीतियों की समीक्षा की मांग सर्व संगठन और परशुराम सेना की ओर से सरकारी योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था से जुड़ी जातिगत नीतियों की समीक्षा की मांग भी उठाई गई। संगठनों का कहना है कि सामाजिक संतुलन और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा नीतियों की समीक्षा आवश्यक है। इसके अलावा युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों से जुड़े कई अन्य सामाजिक मुद्दे भी प्रदर्शन के दौरान उठाए गए। सुरक्षा के बीच कई रूट डायवर्ट प्रदर्शन को देखते हुए फूलबाग और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया। शहर में यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई मार्गों पर रूट डायवर्जन किया गया। महाराज बाड़ा, बाड़ा बाजार, मुरार और हजीरा समेत शहर के प्रमुख इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ाई गई। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों के जरिए संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी रखी। हालांकि ग्वालियर बंद का व्यापक असर नहीं दिखा, लेकिन विभिन्न संगठनों के प्रदर्शन के चलते प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती।
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खंडवा-भोपाल हाईवे पर पेड़ से टकराई कार, कांग्रेस नेता के पोते की मौत

खंडवा। खंडवा-भोपाल हाईवे पर ग्राम पामाखेड़ी के पास गुरुवार सुबह तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। हादसे में कार सवार 34 वर्षीय फरहान खोकर की मौत हो गई, जबकि उनके दो दोस्त घायल हुए हैं। एक युवक के पैर और दूसरे के सिर में चोट आई है। मृतक की पहचान पूर्व नेता प्रतिपक्ष खंडवा नगर निगम एवं कांग्रेस नेता शौकत काका के पोते फरहान खोकर के रूप में हुई है। मवेशियों को बचाने में अनियंत्रित हुई कार जानकारी के अनुसार, कार के सामने अचानक मवेशी आ गए थे। उन्हें बचाने के प्रयास में चालक ने कार पर नियंत्रण खो दिया और वाहन सड़क किनारे पेड़ से जा टकराया। हादसे की सूचना मिलने के बाद नर्मदानगर पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेकर जांच शुरू की। नर्मदानगर थाना प्रभारी धीरेश धारवाल ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में कार के सामने अचानक मवेशियों के आने की बात सामने आई है। हादसे की जांच की जा रही है। सेकंड हैंड कारों की खरीदी-बिक्री का कारोबार फरहान खोकर सेकंड हैंड कारों की खरीदी-बिक्री का कारोबार करते थे। बताया गया कि उन्होंने ग्वालियर जाकर एक स्विफ्ट डिजायर कार खरीदी थी। कार को खंडवा लाने के लिए वे ट्रेन से ग्वालियर गए थे। इसके बाद बुधवार रात फरहान अपने दो दोस्तों के साथ कार से ग्वालियर से खंडवा के लिए रवाना हुए थे। खंडवा लौटते समय उनके दोस्त मुस्तकीम कार चला रहे थे, जबकि एक अन्य साथी भी कार में मौजूद था। फरहान कार की अगली सीट पर चालक के बगल में बैठे थे। सुबह खंडवा जिले की सीमा में हुआ हादसा तीनों दोस्त बुधवार रात कार लेकर ग्वालियर से निकले थे। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे वे खंडवा जिले की सीमा में दाखिल हुए। इसी दौरान जिले के पहले गांव पामाखेड़ी के पास कार हादसे का शिकार हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची 108 एंबुलेंस की मदद से घायलों को उपचार के लिए पुनासा सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं फरहान के शव को भी पुनासा अस्पताल में रखा गया। परिजन शव और घायलों को लेकर खंडवा पहुंचे हादसे की सूचना मिलने के बाद फरहान के परिजन पुनासा पहुंचे। इसके बाद वे शव और घायलों को लेकर खंडवा जिला अस्पताल पहुंचे। फरहान के शव का पोस्टमार्टम खंडवा जिला अस्पताल में किया जाएगा। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है।
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भोपाल में इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन खत्म, स्टाइपेंड 50% बढ़कर ₹21,500

भोपाल। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) के इंटर्न डॉक्टरों का तीन दिन से चल रहा आंदोलन बुधवार को सरकार से सहमति बनने के बाद खत्म हो गया। सरकार ने इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड 50 प्रतिशत बढ़ाकर ₹21,500 प्रतिमाह करने की मांग मान ली है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। मामले की जांच के लिए टीम गठित करने के साथ ही घायल छात्रों के इलाज की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। डिप्टी CM से बैठक के बाद बनी सहमति बुधवार को इंटर्न डॉक्टरों, जूडा (Junior Doctors Association) और एमटीए प्रतिनिधियों की डिप्टी CM एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ बैठक हुई। करीब एक घंटे तक चली चर्चा के बाद स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति बनी। सरकार की ओर से मांग स्वीकार किए जाने के बाद डॉक्टरों ने कमला पार्क के पास चल रहा प्रदर्शन समाप्त कर दिया। आंदोलन खत्म होने के बाद डॉक्टरों ने नारेबाजी करते हुए जीत का जश्न मनाया और काम पर लौटने का ऐलान किया। प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई की भी जांच आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को लेकर भी कार्रवाई की गई है। मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया गया है। इसके साथ ही पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए टीम गठित की गई है। प्रदर्शन के दौरान घायल हुए छात्रों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं। हमीदिया अस्पताल में मरीजों को हुई परेशानी इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर हमीदिया अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों पर पड़ा। सामान्य दिनों में अस्पताल की ओपीडी में करीब 3 हजार मरीज पहुंचते हैं, लेकिन बुधवार को सिर्फ 1,609 पर्चे बन सके। सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक मरीजों को देखने के बाद ओपीडी बंद हो गई। इसके बाद करीब 1,391 मरीज बिना डॉक्टर को दिखाए वापस लौट गए। आसपास के जिलों के अलावा इंदौर, सीधी और राजगढ़ से भी मरीज इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचे थे। कई मरीज पर्चा बनवाने के बाद डॉक्टर का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें परामर्श नहीं मिल सका। कुछ मरीज जांच के लिए भटकते रहे, जबकि कई निराश होकर वापस लौट गए। बस और ट्रेन से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा। 20 ऑपरेशन भी टाले गए हड़ताल का असर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर पर भी देखने को मिला। दोपहर 2 बजे तक 20 सर्जरी की गईं, जबकि 20 ऑपरेशन टाल दिए गए। सामान्य दिनों में भोपाल में करीब 40 ऑपरेशन किए जाते हैं। हालांकि, हड़ताल के बावजूद इमरजेंसी और ICU सेवाएं जारी रहीं। हमीदिया अस्पताल की लैब में भी सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या काफी कम रही। आंदोलन खत्म होने के बाद अब अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है।
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उज्जैन में खड़े हनुमान की प्रतिमा नहीं हिली, IIT इंदौर की टीम ने शुरू की जांच

उज्जैन: सिंहस्थ की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का ढांचा हटाया गया, लेकिन मंदिर में स्थापित हनुमान प्रतिमा को हटाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। जेसीबी और क्रेन की मदद से करीब 10 दिनों तक प्रयास किए गए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। लगातार कोशिशों के बाद अब प्रशासन ने विशेषज्ञों की मदद ली है। IIT इंदौर की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर विशेष उपकरणों से प्रतिमा और आसपास की जमीन की जांच की। टीम यह पता लगा रही है कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे या आसपास किस तरह की संरचना मौजूद है। IIT इंदौर की टीम ने करीब दो घंटे की जांच IIT इंदौर के विशेषज्ञों ने करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में जांच की। विशेष उपकरणों के जरिए प्रतिमा की गहराई और आसपास की जमीन की संरचना से जुड़ी जानकारी जुटाई गई है। अब विशेषज्ञ अपनी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपेंगे। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना संभव है या नहीं। नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के मुताबिक, मंदिर के पंडित के आग्रह पर IIT इंदौर की टीम को बुलाया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया और तारीख तय की जाएगी। सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम सिंहस्थ की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। सड़क की चौड़ाई करीब 15 मीटर किए जाने की योजना है। इसी दायरे में खड़े हनुमान मंदिर का हिस्सा आ रहा था। प्रतिमा हटाने के लिए नगर निगम की टीम कटर और अन्य मशीनों के साथ पहुंची थी। हालांकि, भक्तों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि मशीनों या ज्यादा ताकत के इस्तेमाल से प्रतिमा को नुकसान पहुंच सकता है। इसके बाद मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई। भक्तों ने निगम कमिश्नर को ज्ञापन देकर विशेषज्ञों से प्रतिमा की जांच कराने की मांग की थी। पुरातत्व विशेषज्ञ के मुताबिक 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, प्रतिमा करीब 1000 वर्ष पुरानी हो सकती है। उनका कहना है कि पुराने समय में बड़ी प्रतिमाओं को इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था और संभव है कि खड़े हनुमान की प्रतिमा भी इसी तकनीक से स्थापित की गई हो। उनके मुताबिक, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर की हो सकती है। परमार वंश और राजा भोज के समय इस तरह के पत्थरों पर कलाकृतियां बनाने की परंपरा रही है। लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण प्रतिमा की मूल बनावट और भाव-भंगिमा भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती। प्रतिमा नहीं हिली तो भक्तों ने माना भगवान का संकेत प्रतिमा को हटाने की कोशिशों के बावजूद उसके नहीं हिलने की खबर सोशल मीडिया तक पहुंच गई। इसके बाद स्थानीय श्रद्धालुओं, पुजारियों और हिंदू संगठनों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई। कई भक्त इसे भगवान का संकेत और चमत्कार मान रहे हैं। प्रतिमा को हटाने के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया। श्रद्धालुओं के बीच खड़े हनुमान को ‘डॉक्टर हनुमान’ और मंदिर को ‘उज्जैन का एम्स’ कहे जाने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां बच्चों और बीमार लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं। बच्चों के इलाज से जुड़ी है धार्मिक मान्यता मंदिर के पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक, यहां लंबे समय से छोटे बच्चों को झाड़नी देने और ताबीज बांधने की परंपरा है। उनका दावा है कि इससे कई बच्चों को फायदा मिला है। उन्होंने एक बच्चे का उदाहरण देते हुए बताया कि उसका लिवर ट्रांसप्लांट होना था। परिवार बच्चे को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हर बार उसकी तबीयत बिगड़ जाती थी। इसके बाद परिवार मंदिर आया और बच्चे को भगवान का ताबीज बांधा गया। पुजारी के मुताबिक, इसके बाद बच्चे को एयर एंबुलेंस से दिल्ली ले जाया गया, जहां उसका लिवर ट्रांसप्लांट हुआ। यह पुजारी द्वारा बताई गई घटना और धार्मिक मान्यता है, इसे चिकित्सकीय रूप से मंदिर की प्रक्रिया का परिणाम प्रमाणित नहीं किया गया है। मुस्लिम परिवार भी मन्नत लेकर पहुंचते हैं स्थानीय भक्त शिवेंद्र तिवारी के मुताबिक, मंदिर में मुस्लिम समाज के परिवार भी मन्नत मांगने आते हैं। उनके अनुसार संतान प्राप्ति या बीमारी जैसी समस्याओं को लेकर भी लोग यहां पहुंचते हैं। फिलहाल प्रशासन ने प्रतिमा को हटाने का फैसला विशेषज्ञ रिपोर्ट आने तक रोक दिया है। अब IIT इंदौर की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित किया जा सकता है या नहीं।
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इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का बड़ा दावा, 24 घंटे में 50 हजार से ज्यादा रजिस्ट्रेशन

इंदौर। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने बड़ा दावा किया है। पार्टी के मुताबिक, कार्यक्रम के लिए महज 24 घंटे में 50 हजार से अधिक युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। कांग्रेस का दावा है कि अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा पंजीयन हो चुके हैं। रजिस्ट्रेशन के इस आंकड़े को लेकर बुधवार शाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर के परदेशीपुरा चौराहे पर जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जताई। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा भी मौजूद रहे। परदेशीपुरा चौराहे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने युवाओं के बढ़ते रजिस्ट्रेशन को लेकर उत्साह जताया। पार्टी नेताओं ने इसे राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में युवाओं और विद्यार्थियों का रजिस्ट्रेशन सरकार के प्रति उनके असंतोष को दर्शाता है। पार्टी ने दावा किया कि युवाओं की इस भागीदारी से प्रदेश की भाजपा सरकार में भी हलचल बढ़ी है। छात्रों और युवाओं के मुद्दे उठाने का दावा शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस लगातार छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। उनके मुताबिक, लोकसभा सत्र के दौरान राहुल गांधी ने विद्यार्थियों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया था। चौकसे ने कहा कि इससे छात्रों में यह उम्मीद बनी है कि राहुल गांधी के माध्यम से उनकी समस्याएं भी सामने आएंगी और उनके समाधान की दिशा में आवाज उठेगी। सरकार के रवैये से छात्रों में नाराजगी का दावा चिंटू चौकसे ने भाजपा की दिल्ली और भोपाल सरकार के रवैये को लेकर छात्रों में नाराजगी होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विद्यार्थियों की समस्याओं और उनकी चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने का काम करेगी। कांग्रेस के मुताबिक, राहुल गांधी के प्रस्तावित इंदौर कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, कार्यक्रम में वास्तविक उपस्थिति और भागीदारी की तस्वीर आयोजन के दिन ही स्पष्ट होगी।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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