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कूनो में प्रोजेक्ट चीता की बड़ी उपलब्धि, भारत में जन्मी मादा चीता ने दिए 4 शावकों को जन्म

प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के एक दिन बाद, 18 सितंबर को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से अच्छी खबर सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार शावकों को जन्म दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह चीता संरक्षण की दिशा में भारत की बढ़ती सफलता और संकल्प का प्रतीक है। मंत्री ने इस अवसर को ‘चार साल, चार नए जीवन’ बताया। नए शावकों के जन्म के बाद कूनो में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 54 हो गई है, जिनमें 37 चीते भारत में जन्मे हैं। कूनो में बढ़ेगी चीतों की संख्या मादा चीता KGP12 का भारत में जन्म लेना और अब कूनो में शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए विशेष महत्व रखता है। इससे भारत में जन्मे चीतों के प्राकृतिक प्रजनन की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने और उनकी संख्या बढ़ाने के प्रयासों के बीच चार नए शावकों का जन्म वन्यजीव प्रेमियों के लिए भी बड़ी खबर है। पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की टीम और प्रोजेक्ट चीता से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। इस संबंध में सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने भी जानकारी साझा की है। चार महीने पहले इसी मादा चीता के शावकों की हुई थी मौत 12 मई 2026 को इसी मादा चीता KGP12 के चार शावकों की कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मौत हो गई थी। इन शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को हुआ था और वे लगभग एक महीने के थे। वन विभाग के अनुसार, टीम ने शावकों को 11 मई की शाम आखिरी बार जीवित देखा था। अगले दिन उनके शव आंशिक रूप से खाए हुए मिले थे। विभाग ने किसी जंगली जानवर के हमले या शिकार की आशंका जताई थी। हालांकि, मादा चीता पूरी तरह सुरक्षित थी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताई खुशी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चार नए शावकों के जन्म पर खुशी जताई। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश और प्रोजेक्ट चीता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान की टीम और चीता संरक्षण अभियान से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी। वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चार साल पहले शुरू हुआ प्रोजेक्ट चीता लगातार आगे बढ़ रहा है। वन्यजीव, पर्यावरण और मध्य प्रदेश की प्रमुख खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।
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मोहन भागवत ने उज्जैन में युवा धर्म संसद को किया संबोधित, बोले- धर्म पूजा नहीं, जीवन का अनुशासन है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद को संबोधित किया। उन्होंने धर्म, पर्यावरण, युवाओं के आचरण और भारत के पड़ोसी देश के रवैये सहित कई विषयों पर विचार रखे। भागवत ने युवाओं से धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित न रखने और इसे अपने दैनिक जीवन व आचरण में उतारने की अपील की। उन्होंने कहा कि धर्म केवल रिलिजन नहीं, बल्कि जीवन जीने का अनुशासन है। किसी इच्छा की पूर्ति, भय, लालच या जान बचाने के लिए भी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए। सुख-दुख और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन धर्म स्थायी रहता है। कर्मकांड धर्म का हिस्सा, लेकिन पूरा धर्म नहीं मोहन भागवत ने कहा कि धर्म को लेकर भ्रम का एक कारण अपनी भाषा और धर्म के वास्तविक अर्थ को भूल जाना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कुश्ती सीखने के लिए अखाड़े में दंड-बैठक जरूरी होती है, उसी तरह धर्म के कर्मकांड और अनुशासन उसके अभ्यास का हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मकांड धर्म का एक अंग है, लेकिन पूरा धर्म नहीं है। कचरा न करना और ट्रैफिक नियमों का पालन भी धर्म भागवत ने कहा कि धर्म केवल पूजा और धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। खाना खाने के बाद कचरा न करना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना भी धर्म का हिस्सा है। उन्होंने युवाओं से अपनी उपासना-पद्धति, परंपरा और गुरु का सम्मान करने के साथ-साथ दूसरों की उपासना-पद्धतियों का भी सम्मान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी को कन्वर्ट नहीं करना और सभी की आस्थाओं का सम्मान करना भी धर्म का हिस्सा है। पाकिस्तान का नाम लिए बिना पड़ोसी देश पर टिप्पणी संघ प्रमुख ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना पश्चिम दिशा के पड़ोसी देश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक पड़ोसी देश बिना कारण विवाद करता है और बार-बार भारत को परेशानी देता है। उनके अनुसार, भारत ने कई बार उसे सबक सिखाया, लेकिन इसके बावजूद भारत ने दूसरे देशों के साथ व्यवहार में अपनी मानवीय दृष्टि नहीं छोड़ी। भागवत ने कहा कि भारत में अलग-अलग विचारधाराओं की सरकारें रही हैं, लेकिन देश ने दुनिया के संघर्षों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर भारत ने उन लोगों की भी मदद की, जिन्होंने पहले भारत को नुकसान पहुंचाया था। युवाओं के धर्म पर विचार करने से जताई खुशी मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें खुशी है कि युवा धर्म के बारे में विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आजकल धर्म को कई लोग बुढ़ापे या रिटायरमेंट से जोड़कर देखते हैं, जबकि गीता और रामायण जैसे ग्रंथों का अध्ययन जीवन के हर चरण में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति के अस्तित्व की शुरुआत से अंत तक बना रहता है। व्यक्ति उसे माने या न माने, धर्म जीवन में मौजूद रहता है। अहंकार से पैदा होती है गलतफहमी भागवत ने युवाओं को अहंकार से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति यह मानने लगता है कि हर चीज उसके नियंत्रण में है और सब कुछ उसकी इच्छा के अनुसार होना चाहिए, तो गलतफहमी पैदा होती है। उन्होंने युवाओं से धर्म के सिद्धांतों को समझने और उन्हें अपने व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। युवा धर्म संसद में 1,700 छात्र-छात्राएं शामिल उज्जैन के गीता भवन में 17 से 19 सितंबर तक सेवाज्ञ संस्थानम् की ओर से युवा धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में देशभर से करीब 1,700 युवा छात्र-छात्राएं शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा लगभग 300 विद्वान, शिक्षक, शोधकर्ता और धर्माचार्य भी कार्यक्रम का हिस्सा बन रहे हैं। आयोजन सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर एवं संरक्षक आचार्य मिथिलेशनन्दिनीशरण महाराज के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम के बाद यह युवा धर्म संसद का छठा संस्करण है। अगले वर्ष इसका आयोजन द्वारका में किया जाएगा। AI और सूचना-विचार संघर्ष पर भी होगा संवाद कार्यक्रम में धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा पर व्याख्यान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सूचना-विचार संघर्ष पर संवाद तथा देशभर से चयनित युवाओं के विशेष उद्बोधन सत्र आयोजित किए जाएंगे। व्याख्यान सत्र में अवधेशानंद गिरि जी महाराज, मनोज मुंतशिर, प्रो. श्रीनिवास बरखेड़ी, स्मृति अनंतलक्ष्मी और जे. नंद कुमार सहित कई वक्ता युवाओं का मार्गदर्शन करेंगे। सह-मीडिया प्रमुख बादल सिंह के अनुसार, इस बार कार्यक्रम में 25 राज्यों से युवा शामिल हो रहे हैं। इससे पहले आयोजित पांच संस्करणों में करीब 7,100 प्रतिभागी हिस्सा ले चुके हैं।
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Viksit Bharat

Viksit Bharat 2027: मध्यप्रदेश के युवाओं में दिखा उत्साह, 3.86 लाख ने कराया Online Registration

विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर मध्यप्रदेश में Viksit Bharat Young Leaders Dialogue 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में मंत्री विश्वास सारंग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कार्यक्रम की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में देश के युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में युवाओं की ऊर्जा, सोच और नए विचारों को देश के विकास से जोड़ने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। युवाओं को अपनी बात रखने और नए आइडिया सामने रखने के लिए अलग-अलग मंच उपलब्ध कराए जा रहे हैं। MP में 3.86 लाख से ज्यादा युवाओं ने कराया Registration मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश की भागीदारी काफी अधिक रही है। इस साल भी युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश में अब तक 3 लाख 86 हजार से ज्यादा युवाओं ने Online Registration कराया है। अधिकारियों और आयोजकों को उम्मीद है कि यह आंकड़ा आगे बढ़कर करीब 6 लाख तक पहुंच सकता है। युवाओं की भागीदारी अलग-अलग चरणों में सुनिश्चित की जाएगी। चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण तक पहुंचने वाले युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। Tribal Leadership से Inclusive Development तक फोकस मध्यप्रदेश के लिए इस बार कुछ खास विषय तय किए गए हैं। इनमें Tribal Leadership, Natural Resources और Inclusive Development प्रमुख हैं। इसके अलावा युवा Youth Parliament, Cultural Activities और Innovate for Bharat जैसी श्रेणियों में भी हिस्सा ले सकेंगे। कार्यक्रम का मकसद केवल युवाओं को जोड़ना नहीं, बल्कि उनकी सोच और नए प्रयोगों को देश के विकास से जोड़ना है। युवाओं के Ideas को मिलेगा बड़ा Platform विश्वास सारंग ने कहा कि युवा हमेशा से बदलाव और नई सोच के प्रतीक रहे हैं। उनके भीतर कई ऐसे विचार होते हैं, जिन्हें सही मंच मिलने पर बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान युवाओं के विचारों और सुझावों को PPT और अन्य माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को अपनी सोच सीधे देश के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखने का मौका मिलेगा। Technology को बताया महत्वपूर्ण मंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य में Technology की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में तकनीक के साथ युवाओं की रचनात्मक सोच और नेतृत्व क्षमता देश को नई दिशा देने में मदद कर सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे बढ़-चढ़कर इस कार्यक्रम में हिस्सा लें और अपने आसपास की समस्याओं के समाधान से जुड़े नए विचार सामने लाएं। Swami Vivekananda Jayanti पर होगा समापन Viksit Bharat Young Leaders Dialogue का अंतिम कार्यक्रम Swami Vivekananda Jayanti के अवसर पर दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। अंतिम चरण में चयनित युवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मध्यप्रदेश का युवा इस अभियान में लगातार सक्रिय भागीदारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के अधिक से अधिक युवा इस अवसर का हिस्सा बनें और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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MP High Court का फैसला: नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग वाली PIL खारिज, उत्तराधिकारी आने तक पद पर रहेंगे मौजूदा राज्यपाल

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में नए राज्यपाल की नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हो जाती और वे पदभार ग्रहण नहीं कर लेते, तब तक मौजूदा राज्यपाल अपने पद पर बने रह सकते हैं। यह फैसला जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनाया। याचिका जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एमए खान ने दायर की थी। राज्यपाल का कार्यकाल पूरा होने का दिया गया तर्क याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि मौजूदा राज्यपाल का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में उन्हें पद से हटाकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता की जनहित याचिका दायर करने की पात्रता और सामाजिक साख से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने ‘मध्य प्रदेश हाईकोर्ट नियम, 2008’ के तहत जनहित याचिका दायर करने के लिए जरूरी अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि और जनहितकारी मंशा (Bona fides) का पर्याप्त खुलासा नहीं किया। संविधान के अनुच्छेद 156(3) का हवाला मामले की संवैधानिक व्याख्या करते हुए कोर्ट ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 156(3) का उल्लेख किया। कोर्ट के अनुसार, राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष होता है, लेकिन प्रावधान में यह स्पष्ट किया गया है कि नए उत्तराधिकारी के पदभार संभालने तक मौजूदा राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में राज्यपाल का पद खाली रहने से किसी तरह का संवैधानिक संकट या शून्य पैदा न हो। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी जिक्र हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 1969 के कृष्णा बल्लभ सहाय बनाम जांच आयोग मामले का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत राज्यपाल का पद रिक्त नहीं छोड़ा जा सकता। कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नए राज्यपाल के आने तक पद पर बने रहना वैध है। इन संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी तर्कों के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका को विचार योग्य नहीं माना और उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान राज्य के संवैधानिक प्रमुख का पद खाली न रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करता है।
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राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को पुलिस की मंजूरी, सुरक्षा के लिए 31 शर्तें लागू; 1500 स्वयंसेवक और 40 CCTV की व्यवस्था अनिवार्य

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 19 सितंबर को इंदौर में होने वाले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को पुलिस ने अनुमति दे दी है। हालांकि, कार्यक्रम के आयोजकों के सामने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर 31 कड़ी शर्तें रखी गई हैं। पुलिस ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में हुई हत्या और उसकी जांच के लिए गठित जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सुरक्षा संबंधी निर्देश जारी किए हैं। पुलिस ने कांग्रेस शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे को शर्तों की सूची सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के दौरान सभी नियमों का पालन अनिवार्य होगा। भीड़ प्रबंधन, मंच की सुरक्षा, प्रवेश-निकास, पार्किंग, तलाशी, चिकित्सा और आपातकालीन निकासी की जिम्मेदारी आयोजकों को सौंपी गई है। 1500 स्वयंसेवक होंगे तैनात, 500 महिला स्वयंसेवक अनिवार्य पुलिस के निर्देशों के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल को अधिकतम 2 हजार लोगों की क्षमता वाले सेक्टरों में बांटना होगा। प्रत्येक सेक्टर में प्रभारी और पर्याप्त गैंगवे की व्यवस्था करनी होगी। आयोजकों को अपेक्षित भीड़ का पुरुष-महिला संख्या के आधार पर शपथ-पत्र देना होगा। कार्यक्रम में कम से कम 1500 स्वयंसेवक तैनात करने होंगे, जिनमें 500 महिला स्वयंसेवक शामिल होंगी। 6 प्रवेश और 8 निकास द्वार, 40 CCTV से निगरानी कार्यक्रम स्थल पर कम से कम 6 प्रवेश और 8 निकास द्वार बनाने होंगे। प्रत्येक द्वार की चौड़ाई न्यूनतम 6 मीटर रखनी होगी। सुरक्षा जांच के लिए 20 DFMD और 30 से 40 HHMD लगाए जाएंगे। पूरे परिसर में कम से कम 40 नाइट-विजन CCTV कैमरे लगाने होंगे। इनकी रिकॉर्डिंग 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। मंच के सामने 30 फीट तक खाली रहेगा क्षेत्र मंच के सामने 25 से 30 फीट का D-एरिया खाली रखना होगा। इस क्षेत्र में केवल सुरक्षाकर्मियों को रहने की अनुमति होगी और डबल बैरिकेडिंग की जाएगी। मंच तक पहुंचने के लिए नियंत्रित रास्ता और पीछे अलग निकास की व्यवस्था करनी होगी। मंच से 30 मीटर के भीतर एंबुलेंस उपलब्ध रखना अनिवार्य होगा। पार्किंग से लेकर पंडाल तक आयोजकों की जिम्मेदारी पुलिस ने पंडाल को अग्निरोधी सामग्री से तैयार करने और संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाण-पत्र लेने के निर्देश दिए हैं। आपातकालीन कॉरिडोर पूरी तरह खाली रखना होगा। पार्किंग के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाएंगे। मुख्य मार्गों और रहवासी गलियों में पार्किंग पर रोक रहेगी। दूरस्थ पार्किंग स्थलों से कार्यक्रम स्थल तक शटल सेवा की व्यवस्था आयोजकों को करनी होगी। हर 500 लोगों पर एक जल-बिंदु, 250 लोगों पर मोबाइल शौचालय कार्यक्रम स्थल पर दो डॉक्टर, चार पैरामेडिक और चार एंबुलेंस तैनात करनी होंगी। इनमें एक ALS एंबुलेंस शामिल होगी। नजदीकी अस्पताल के साथ आपातकालीन बेड के लिए समन्वय करना होगा। पुलिस के निर्देशों के अनुसार, हर 500 लोगों पर एक जल-बिंदु और हर 250 लोगों पर एक मोबाइल शौचालय की व्यवस्था करनी होगी। खराब मौसम में प्रशासन लेगा अंतिम फैसला बारिश या अन्य आपात स्थिति से निपटने के लिए सेक्टरवार निकासी योजना तैयार करनी होगी। कार्यक्रम से एक दिन पहले D-1 पर मॉक ड्रिल भी कराई जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम या किसी अन्य आपात स्थिति में कार्यक्रम को रोकने, सीमित करने या स्थगित करने का अंतिम निर्णय पुलिस और जिला प्रशासन का होगा। कार्यक्रम से एक दिन पहले शाम 6 बजे के बाद स्थल होगा सील आयोजकों को कार्यक्रम से एक दिन पहले शाम 6 बजे तक निर्माण, सजावट, बिजली और ध्वनि से जुड़े सभी कार्य पूरे करने होंगे। इसके बाद बम डिस्पोजल टीम (BDD) और श्वान दल द्वारा एंटी-सबोटाज जांच की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद कार्यक्रम स्थल और मंच को सील कर दिया जाएगा। पुलिस की अनुमति के बिना किसी व्यक्ति, वाहन या सामग्री को परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
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मंदसौर में मकान विवाद में युवक की हत्या का खुलासा, पत्नी और देवर गिरफ्तार; साला फरार

मंदसौर में 32 वर्षीय इस्माइल उर्फ भूरा की हत्या के मामले में पुलिस ने दो दिन बाद खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, इस्माइल की पत्नी मुस्कान ने अपने भाई शाकिर और देवर ईशाक के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। पहले इस्माइल के सिर पर डंडे से हमला किया गया और फिर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद मुस्कान और शाकिर शव को बाइक पर बीच में बैठाकर करीब दो किलोमीटर दूर झाड़ियों में फेंक आए। मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुस्कान का भाई शाकिर फरार है। 30 लाख रुपये के मकान को लेकर था विवाद पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के पीछे करीब 30 लाख रुपये कीमत के मकान को बेचने और पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद था। पुलिस के मुताबिक, ईशाक मकान बेचकर दोनों भाइयों के अलग-अलग रहने की योजना बना रहा था, जबकि इस्माइल इसके विरोध में था। इसी मुद्दे को लेकर परिवार में पहले से विवाद चल रहा था। मायके में विवाद के बाद खेत में किया हमला पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन इस्माइल शराब के नशे में फतेहगढ़ स्थित अपनी पत्नी मुस्कान के मायके पहुंचा था। वहां उसकी पत्नी और उसके भाई शाकिर से विवाद हुआ, जिसके बाद शाकिर ने उसके साथ मारपीट की। इसके बाद इस्माइल बस से चौपाल सागर के सामने स्थित शराब की दुकान के पास पहुंचा। मुस्कान ने इसकी जानकारी ईशाक को दी। ईशाक उसे ढूंढते हुए वहां पहुंचा, जबकि कुछ समय बाद मुस्कान और शाकिर भी वहां आ गए। पुलिस के मुताबिक, तीनों को देखकर इस्माइल खेतों की ओर भागा। खेत में शाकिर ने उसके सिर पर डंडे से वार किया। उसके गिरने के बाद ईशाक ने पैर और मुस्कान ने हाथ पकड़े, जबकि शाकिर ने दुपट्टे से उसका गला दबा दिया। बाइक पर शव ले जाकर झाड़ियों में फेंका पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद ईशाक वहां से चला गया। इसके बाद मुस्कान और शाकिर ने शव को बाइक पर बीच में बैठाया और खिलचीपुरा-नालछा माता मंदिर रोड की ओर ले गए। रास्ते में शव का पैर जमीन से टकराने लगा। इसके बाद दोनों ने शव को सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक दिया। पुलिस को आशंका है कि आरोपियों ने घटना को शराब के नशे में हुए हादसे जैसा दिखाने की कोशिश की। इसके बाद ईशाक ने पुलिस को सूचना दी कि उसका भाई खिलचीपुरा से नालछा माता मंदिर रोड पर बेहोश पड़ा है। खुद फरियादी बनकर पुलिस को गुमराह करने का आरोप 15 सितंबर को ईशाक की सूचना पर डायल-112 की मदद से इस्माइल को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। हत्या की आशंका सामने आने के बाद अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने घटनास्थल, तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ के दौरान ईशाक की भूमिका सामने आई। पुलिस के मुताबिक, उसने खुद फरियादी बनकर मामले को हादसा बताने की कोशिश की थी। CCTV फुटेज में बाइक पर शव ले जाते दिखे जांच के दौरान घटना के बाद का CCTV फुटेज भी सामने आया। पुलिस के अनुसार, फुटेज में मुस्कान अपने भाई शाकिर के साथ काले रंग की बिना नंबर वाली स्प्लेंडर बाइक पर दिखाई दे रही है। बाइक शाकिर चला रहा था। बीच में इस्माइल का शव बैठा था, जबकि मुस्कान पीछे से उसे पकड़े हुए थी। दो आरोपी गिरफ्तार, शाकिर की तलाश जारी पुलिस ने मामले में निम्न आरोपियों को गिरफ्तार किया है: वहीं, शाकिर पिता बब्बू खां मेव, निवासी नई फतेहगढ़, फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस अधिकारियों ने दी जानकारी एडिशनल एसपी टीएस बघेल ने बताया कि इस्माइल का शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। जांच में मुस्कान, शाकिर और ईशाक की भूमिका सामने आई। थाना प्रभारी कुलदीप सिंह राठौर के अनुसार, करीब 30 लाख रुपये कीमत के मकान को बेचने को लेकर दोनों भाइयों के बीच विवाद चल रहा था। पुलिस का कहना है कि इसी विवाद के चलते हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। अपराध और मध्य प्रदेश की स्थानीय खबरों के लिए Desh Har Pal वेबसाइट पढ़ते रहें।
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ग्वालियर में पैसों के विवाद में दो युवकों को गोली मारी, एक की हालत गंभीर

ग्वालियर: हजीरा थाना क्षेत्र के आरामिल इलाके में बुधवार रात करीब 11:30 बजे पैसों के लेन-देन को लेकर हुए विवाद में दो युवकों को गोली मार दी गई। एक युवक के पेट में गोली लगी है, जबकि दूसरे के पैर में गोली लगी है। पेट में गोली लगने वाले युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, हमलावर तीन बदमाश काले रंग की बोलेरो से मौके पर पहुंचे थे। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पैसों के लेन-देन को लेकर चल रहा था विवाद पुलिस के मुताबिक, कांच मिल निवासी धीरज तोमर, अजय तोमर और लल्ला गुर्जर का अन्नू तोमर और सादिक खान से पैसों के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। बुधवार रात तीनों आरोपी आरामिल इलाके में पहुंचे। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने के बाद अचानक गोलियां चलने लगीं, जिसमें अजय और सादिक खान घायल हो गए। घर के बाहर खड़े युवक के पेट में लगी गोली घायल अजय ने बताया कि वह अपने घर के बाहर खड़ा था। विवाद की जानकारी मिलने पर वह मौके की ओर पहुंचा ही था कि गोली चल गई। एक गोली उसके पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। वहीं, सादिक खान के पैर में भी गोली लगी। आसपास मौजूद लोगों ने पुलिस को घटना की सूचना दी। इसके बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। CCTV फुटेज के आधार पर जांच में जुटी पुलिस हजीरा थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि घायलों की शिकायत और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस के अनुसार, फुटेज में धीरज तोमर, अजय तोमर और लल्ला गुर्जर की मौजूदगी सामने आई है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपियों की तलाश में पुलिस की दबिश पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दबिश देना शुरू कर दिया है। शहर में नाकाबंदी कर वाहनों की जांच भी की जा रही है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर गोलीबारी की पूरी घटना की जांच कर रही है।
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आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन को हाईकोर्ट से झटका, अतिरिक्त खनन मामले में याचिका खारिज

जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका बुधवार को खारिज कर दी। मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों में वर्ष 2004 से 2017 के बीच कथित अतिरिक्त खनन से जुड़ा है। कंपनी ने कलेक्टर जबलपुर की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस, जांच समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि मामला अभी कारण बताओ नोटिस के स्तर पर है और कंपनी की अंतिम देयता अभी तय नहीं हुई है। दो खदानों के लिए करोड़ों रुपए की वसूली प्रस्तावित राज्य सरकार की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर कलेक्टर ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। हाईकोर्ट के आदेश में उल्लेखित जानकारी के अनुसार: मामले में अतिरिक्त खनन से संबंधित देयता और वसूली की प्रक्रिया को लेकर कंपनी ने न्यायालय का रुख किया था। हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम देयता अभी तय नहीं हुई न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि प्रकरण अभी कारण बताओ नोटिस के चरण में है। कलेक्टर ने कंपनी की अंतिम देयता निर्धारित नहीं की है। कोर्ट के अनुसार, इस स्तर पर हाईकोर्ट के असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं बनता। कंपनी को अपनी आपत्तियां कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। जांच रिपोर्ट में ₹443 करोड़ से अधिक की राशि का उल्लेख हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जांच समिति की रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में संबंधित कंपनियों से ₹4,43,04,86,890 यानी करीब ₹443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपए और उसके अनुसार GST की राशि जमा कराने को उचित बताया गया था। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच समिति की रिपोर्ट अपने आप में अंतिम रिकवरी आदेश नहीं है। यह रिपोर्ट कलेक्टर के लिए बाध्यकारी भी नहीं है। कलेक्टर को कंपनी की आपत्तियों, जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र और कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा। कलेक्टर को चार महीने में कार्रवाई पूरी करने के निर्देश हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को निर्देश दिए कि वह कंपनी की आपत्तियों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए नियमानुसार निर्णय लें। कोर्ट ने कार्यवाही शीघ्र पूरी करने की अपेक्षा जताई और कहा कि प्रमाणित आदेश प्राप्त होने के बाद यथासंभव चार महीने के भीतर अंतिम निर्णय लिया जाए। कंपनी ने जांच समिति और नोटिस को दी थी चुनौती याचिकाकर्ता कंपनी ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) के तहत जारी कारण बताओ नोटिस को चुनौती दी थी। कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि: हाईकोर्ट ने इन दलीलों के आधार पर इस स्तर पर हस्तक्षेप करने से इनकार किया और कंपनी को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए कहा। शिकायतकर्ता ने पारदर्शी जांच की मांग की मामले के मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में ₹443 करोड़ से अधिक की राशि और उस पर GST का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि अब पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच होनी चाहिए और कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने फिलहाल कंपनी की वास्तविक देयता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। संबंधित पक्षों को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। संजय पाठक से जुड़ी कंपनी का मामला आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन को भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी माइनिंग कंपनी के रूप में बताया जा रहा है। कंपनी ने अतिरिक्त खनन से संबंधित वसूली नोटिस को कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की आगे की कार्यवाही जबलपुर कलेक्टर के समक्ष होगी। कलेक्टर को सभी आपत्तियों और रिकॉर्ड पर विचार कर कानून के अनुसार निर्णय लेना है। नोट: मामले में वसूली की अलग-अलग राशियों का उल्लेख हुआ है। अंतिम देयता और वसूली की राशि कलेक्टर के अंतिम, कारणयुक्त आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
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इंदौर के सांवेर में बड़ा हादसा: जर्जर मकान तोड़ते समय दूसरे घर की दीवार गिरी, 4 महिलाओं की मौत; 5 घायल

इंदौर/सांवेर। इंदौर के पास सांवेर में बुधवार शाम करीब 4 बजे जर्जर मकान तोड़ने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। पास के दूसरे मकान की पुरानी दीवार अचानक ढह गई, जिसके मलबे में दबने से चार महिलाओं की मौत हो गई। सभी मृतक महिलाओं के मजदूर होने की जानकारी सामने आई है। हादसे में पांच लोग घायल हुए हैं। मृतकों की पहचान चंदा बाई, सीमा बाई, सुशीला बाई और रीना बाई के रूप में हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और नगर परिषद की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। जर्जर मकान तोड़ते समय ढही दूसरे घर की दीवार हादसा सांवेर के टशन चौराहे के पास हुआ। यहां एक जर्जर मकान को तोड़ने का काम चल रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, संबंधित इमारत ‘नेताजी’ के नाम से जानी जाती है। मकान तोड़ने के दौरान पास स्थित दूसरे मकान की पुरानी और जर्जर दीवार अचानक गिर गई। दीवार के मलबे में कई लोग दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। चार महिलाओं की मौत, 5 लोग घायल हादसे में चार महिलाओं की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर उपचार के लिए इंदौर रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद मृतकों और घायलों के परिजन सिविल अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में भी लोगों की भीड़ जमा हो गई। एक महीने पहले गिरा था मकान का छज्जा स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस मकान को तोड़ा जा रहा था, उसका छज्जा करीब एक महीने पहले गिर गया था। इसके बाद लोगों ने नगर परिषद को इसकी जानकारी दी थी। बताया जा रहा है कि मकान खाली करने के संबंध में मकान मालिक को नोटिस भी जारी किया गया था। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद पर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना के समय मकान मालिक के ठेकेदार के साथ मौके पर मौजूद होने की बात भी सामने आई है। मकान मालिक के नाम को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। मामले में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। शाम सवा छह बजे तक जारी रहा रेस्क्यू हादसे के बाद पुलिस और नगर परिषद की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। जेसीबी की मदद से मलबा हटाया गया और दबे लोगों की तलाश की गई। शाम सवा छह बजे तक घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम जारी था। पुलिस ने मौके पर जमा लोगों को हटाकर राहत कार्य के लिए रास्ता साफ कराया। हादसे के कारणों और मकान की जर्जर स्थिति को लेकर संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच की जा रही है।
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NSUI ने ABVP कार्यालय पहुंचकर राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का दिया न्योता

भोपाल: भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को भोपाल स्थित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यालय पहुंचकर पदाधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रममें शामिल होने के लिए आमंत्रण दिया। यह कार्यक्रम 19 सितंबर को इंदौर में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है। इसमें मध्यप्रदेश के छात्र-छात्राओं और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद और चर्चा की जाएगी। छात्र संगठनों के बीच संवाद पर जोर NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि छात्र और युवा वर्ग से जुड़े मुद्दे किसी एक संगठन या विचारधारा तक सीमित नहीं हैं। ये प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों के बीच संवाद और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा लोकतांत्रिक छात्र राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षा, रोजगार और छात्र अधिकारों पर होगी चर्चा रवि परमार के अनुसार, ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं की आवाज को प्रमुखता से सामने लाना है। कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति, विश्वविद्यालयों में सुविधाओं, छात्र अधिकारों और युवाओं से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद के माध्यम से छात्र-युवा वर्ग की समस्याओं और अपेक्षाओं को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। ABVP पदाधिकारियों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने ABVP पदाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपने संगठन के छात्र प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के साथ कार्यक्रम में शामिल हों। उन्होंने कहा कि छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सभी संगठन अपनी बात रखें, ताकि विद्यार्थियों से संबंधित विषयों पर व्यापक चर्चा हो सके। तोमर के मुताबिक, अलग-अलग छात्र संगठनों के विचार सामने आने से छात्रों की वास्तविक समस्याओं को समझने और उन पर संवाद आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। ये पदाधिकारी रहे मौजूद इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष अमित हाटिया, आर्यन मंडलोई, लकी चौबे, धीरज वर्मा और टीआईटी कॉलेज अध्यक्ष हर्ष पटेल सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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