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MP में बिल्डिंग परमिशन के नियम आसान: अब नहीं देनी होगी कई NOC, पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति (Building Permission) की प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब बिल्डिंग परमिशन के लिए विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) लाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। साथ ही पूरी भवन अनुज्ञा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और आवेदन के लिए केवल डिजिटल दस्तावेज ही मान्य होंगे। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा सभी नगरीय निकायों को जारी निर्देशों के अनुसार, इस व्यवस्था से नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे भवन अनुमति प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनेगी, जिससे प्रदेश में Ease of Doing Business को भी बढ़ावा मिलेगा। पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन नई व्यवस्था के तहत भवन अनुज्ञा के लिए आवेदन, भवन का नक्शा और अन्य आवश्यक दस्तावेज केवल ऑनलाइन जमा किए जाएंगे। किसी भी स्थिति में हार्ड कॉपी जमा करने की जरूरत नहीं होगी। यदि भूमि स्वामी स्वयं आवेदन करता है तो उसे ऑनलाइन शपथ-पत्र देना होगा। वहीं, अधिकृत कंसल्टेंट के माध्यम से आवेदन करने पर भूमि स्वामी के हस्ताक्षरित शपथ-पत्र की डिजिटल कॉपी अपलोड करनी होगी। इन मामलों में ही लगेगी NOC की जरूरत सरकार ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI), राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) और हेरिटेज क्षेत्रों से संबंधित NOC केवल उन्हीं मामलों में आवश्यक होगी, जहां ऑनलाइन GIS आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या प्रभावित क्षेत्र में पाया जाएगा। अन्य सभी मामलों में इन विभागों की अनापत्ति की जरूरत नहीं होगी। हाउसिंग सोसायटी, बिजली और नजूल विभाग से भी राहत नए निर्देशों के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, बिजली विभाग और नजूल विभाग से मांगी जाने वाली कई अनापत्ति प्रमाण-पत्रों की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में आवेदकों को स्वयं NOC लाने की जरूरत नहीं होगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सक्षम प्राधिकारी आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा और विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी सहमति या आपत्ति दर्ज करनी होगी। तय समय में जवाब नहीं मिलने पर आगे की प्रक्रिया जारी रखी जाएगी। पर्यावरण और फायर NOC के नियम भी हुए आसान नए निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति अब केवल निर्धारित क्षेत्रफल से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए ही आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी, जहां वास्तव में पेड़ों की कटाई प्रस्तावित होगी। अग्निशमन विभाग (Fire NOC) से संबंधित प्रक्रिया भी राष्ट्रीय भवन संहिता (National Building Code) के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जाएगी, जिससे भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया और अधिक सरल एवं पारदर्शी बनेगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास में आस्था का अद्भुत संगम, कलश स्थापना की बोली पहुंची 53 करोड़ रुपये

जैन संत मुनिश्री सुधासागर महाराज के चातुर्मास को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में गहरा उत्साह और आस्था देखने को मिली। चातुर्मास के शुभ अवसर पर आयोजित कलश स्थापना की बोली में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी श्रद्धा का अनूठा परिचय दिया। कलश स्थापना का लाभ प्राप्त करने के लिए आयोजित बोली ने नया इतिहास रच दिया। बोली की राशि बढ़ते-बढ़ते 53 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसे जैन समाज में गुरु भक्ति, समर्पण और धार्मिक आस्था का अभूतपूर्व उदाहरण माना जा रहा है। बोली के दौरान लगातार बढ़ती राशि ने आयोजन स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं को भी आश्चर्यचकित कर दिया। धार्मिक आयोजन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि यह केवल आर्थिक बोली नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की अटूट आस्था, गुरु के प्रति समर्पण और धर्म के प्रति विश्वास का प्रतीक है। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रवचन, पूजा-अर्चना, तप, स्वाध्याय तथा विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। जैन धर्म में चातुर्मास को सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्वों में से एक माना जाता है। इस अवधि में श्रद्धालु धर्म साधना, सेवा, तप और धार्मिक अनुष्ठानों में सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। मुनिश्री सुधासागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस वर्ष के चातुर्मास में भी देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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गुना के जंगल में तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिलने से सनसनी, शिकार कर अंगों की तस्करी की आशंका

मध्य प्रदेश के गुना जिले में एक तेंदुए का क्षत-विक्षत शव मिलने से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शव की हालत देखकर शिकार कर उसके अंगों की तस्करी किए जाने की आशंका जताई जा रही है। मामला गुना उत्तर वन परिक्षेत्र की भदौरा सब रेंज के आगरा-हंसली जंगल का है। गुरुवार को जंगल में पहुंचे ग्रामीणों ने तेंदुए का शव पड़ा देखा और इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। वन अधिकारियों के अनुसार, तेंदुए का शव बेहद क्षत-विक्षत अवस्था में मिला। उसके चारों पैर और सिर गायब थे, जबकि केवल धड़ मौके पर पड़ा मिला। धड़ की खाल भी नहीं थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों का पता लगाया जाएगा। प्रारंभिक तौर पर आशंका जताई जा रही है कि तेंदुए का शिकार उसके नाखून, दांत और अन्य अंगों की तस्करी के उद्देश्य से किया गया है। घटना के बाद क्षेत्र में वन्यजीव तस्करों की सक्रियता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं बल्कि सुनियोजित शिकार का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने वन विभाग की गश्त व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए मांग की है कि यह पता लगाया जाए कि घटना के समय बीट गार्ड और गश्ती दल कहां मौजूद थे तथा तेंदुए के शव को इस हालत में किसने पहुंचाया। मामले की जानकारी मिलने पर गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने वन विभाग को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों की तलाश की जा रही है। गौरतलब है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत तेंदुए का शिकार एक गंभीर गैर-जमानती अपराध है। दोषी पाए जाने पर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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इंदौर वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं से मारपीट का वीडियो वायरल, प्रशासन ने आश्रम सील करने की शुरू की कार्रवाई

इंदौर के एक वृद्धाश्रम में रह रही बुजुर्ग महिलाओं के साथ मारपीट का एक वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो में करीब 14 वर्षीय एक किशोर डंडे से बुजुर्ग महिलाओं की पिटाई करता दिखाई दे रहा है। घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की बताई जा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका को थाने बुलाकर पूछताछ की। पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई के तहत उन्हें समझाइश देकर छोड़ दिया है। वहीं वीडियो वायरल होने के बाद पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन भी हरकत में आ गया। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार की टीम ने वृद्धाश्रम पहुंचकर निरीक्षण किया। प्रशासन ने बताया कि आश्रम में रह रहे 30 बुजुर्गों में से जो स्वस्थ हैं, उन्हें गांधी नगर स्थित निराश्रित आश्रम और गणेश वृद्धाश्रम में स्थानांतरित किया जा रहा है। वहीं जिन बुजुर्गों की तबीयत खराब है, उन्हें बेहतर इलाज के लिए सरकारी अस्पताल भेजा जाएगा। प्रशासन ने वृद्धाश्रम को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें deshharpal.com
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भोपाल में किसानों काप्रदर्शनदूसरे दिन भी जारी, CM हाउस कूच की तैयारी; स्कूलों की छुट्टी, कई रास्ते बंद

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग खरीदी, ई-टोकन सिस्टम और अन्य मांगों को लेकर किसानों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी है। बड़ी संख्या में किसान प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं और मुख्यमंत्री आवास (CM हाउस) की ओर कूच की तैयारी कर रहे हैं। आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। कई रास्तों पर बैरिकेडिंग, लोगों को हो रही परेशानी किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद कर दिए हैं। इसका असर होशंगाबाद रोड और आसपास के क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है, जहां लोगों को लंबा जाम और यातायात की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्कूलों में छुट्टी घोषित स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड पर स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों और अभिभावकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रदर्शन स्थल पर डटे किसान प्रदर्शन स्थल पर किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। रातभर धरने पर बैठे कई किसान जहां जगह मिली, वहीं आराम करते नजर आए। वहीं कुछ किसान दोपहर के भोजन के लिए दाल-बाटी बनाते दिखाई दिए। इससे आंदोलन स्थल पर एकजुटता और सामूहिक सहयोग का माहौल देखने को मिला। नेताओं को दिया साथ बैठकर भोजन का निमंत्रण प्रदर्शन कर रहे किसानों ने विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक नेताओं से धरना स्थल पर पहुंचकर उनके साथ भोजन करने और उनकी समस्याएं सुनने की अपील की है। आंदोलन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। कई महिलाएं पोस्टरों पर नारे लिखकर किसानों की मांगों का समर्थन कर रही हैं।
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सागर में हत्या के प्रयास का आरोपी गिरफ्तार, पुरानी रंजिश में किया था चाकू से हमला

सागर जिले के गढ़ाकोटा थाना क्षेत्र में हत्या के प्रयास के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कई दिनों से फरार चल रहे आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू भी बरामद कर लिया गया है। पूछताछ के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुरानी रंजिश बनी हमले की वजह पुलिस के मुताबिक, विवेकानंद वार्ड निवासी 35 वर्षीय हल्ले पिता मुन्नालाल पटेल ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि पुरानी रंजिश के चलते भरत पटेल ने जान से मारने की नीयत से उनके पेट में चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में हल्ले गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। फरार आरोपी की तलाश में जुटी थी पुलिस घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए गढ़ाकोटा थाना पुलिस ने विशेष टीम बनाई और संभावित ठिकानों पर लगातार तलाश शुरू की। आरोपी तक पहुंचने के लिए मुखबिर तंत्र की भी मदद ली गई। मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी मंगलवार को पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अपने गांव के पास मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल दबिश दी और भरत पिता नन्हेभाई पटेल (25), निवासी ग्राम मढ़िया खुर्द को गिरफ्तार कर लिया। निशानदेही पर बरामद हुआ चाकू गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में आरोपी ने वारदात में इस्तेमाल किए गए चाकू के बारे में जानकारी दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने चाकू बरामद कर जब्त कर लिया, जिसे मामले में अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। कोर्ट ने भेजा जेल गढ़ाकोटा थाना प्रभारी गौरव सिंह तिवारी ने बताया कि हत्या के प्रयास के मामले में फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
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मध्यप्रदेश में बिजली बिल फिर हुआ महंगा, 2 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं पर बढ़ा सरचार्ज का बोझ

मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। बिजली कंपनियों ने फ्यूल कॉस्ट एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (FCPPA) सरचार्ज बढ़ा दिया है। इसके बाद अब प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को हर महीने पहले से ज्यादा बिजली बिल चुकाना होगा। बिजली कंपनियों का कहना है कि ईंधन और बिजली खरीद की बढ़ती लागत के कारण यह फैसला लिया गया है। इसका असर जल्द जारी होने वाले बिजली बिलों में दिखाई देगा। यदि किसी उपभोक्ता की मासिक खपत 200 से 300 यूनिट है, तो उसे करीब 35 से 87 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है। FCPPA सरचार्ज 1.11% से बढ़कर 3.77% हुआ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के अनुसार, FCPPA सरचार्ज को 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी पिछले महीने की तुलना में उपभोक्ताओं पर 2.66 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज लगाया जाएगा। यह सरचार्ज बिजली बिल के एनर्जी चार्ज पर लागू होगा। कंपनी ने जारी आदेश में बताया कि जुलाई 2026 के लिए यह सरचार्ज 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है। यह निर्णय टैरिफ रेगुलेशन-2021 और उसके संशोधित प्रावधानों के तहत लिया गया है। सरचार्ज से जुड़ी पूरी जानकारी कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई है। कम बारिश से बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। जलाशयों में पानी कम होने से कई ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय 6 से 8 घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। जबलपुर और आसपास के कई जिलों से भी रुक-रुक कर बिजली जाने की शिकायतें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलविद्युत परियोजनाओं में उत्पादन घटने के कारण बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन गया है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं को झेलना पड़ रहा है। एक साल में 37% बढ़ी बिजली की मांग बिजली कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 27 जुलाई 2025 को अधिकतम बिजली मांग 10,024 मेगावाट थी, जो 27 जुलाई 2026 को बढ़कर 13,757 मेगावाट पहुंच गई। यानी सिर्फ एक साल में बिजली की मांग में करीब 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 15 जिलों में कम बारिश का असर ऊर्जा विभाग के मुताबिक, पूर्वी मध्यप्रदेश के करीब 15 जिलों में सामान्य से लगभग 18 प्रतिशत कम बारिश हुई है। शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, उमरिया, कटनी, मंडला, बालाघाट और सिवनी जैसे जिलों में कम बारिश के कारण बरगी, बाणसागर, इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर जैसी जलविद्युत परियोजनाओं में पानी की आवक घटी है। इससे बिजली उत्पादन सीमित करना पड़ रहा है और पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
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इंदौर नगर निगम 103.42 करोड़ फर्जी बिल घोटाला: ED ने 32 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में पेश की चार्जशीट

इंदौर। इंदौर नगर निगम के 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 32 आरोपियों के खिलाफ विशेष PMLA कोर्ट में 20 हजार से अधिक पन्नों का अभियोजन शिकायत पत्र (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल किया है। आरोपियों में ठेकेदार, नगर निगम के अधिकारी, लोकल फंड ऑडिट, रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के अधिकारी और कुछ निजी व्यक्ति शामिल हैं। फर्जी दस्तावेजों से सरकारी खजाने को 103.42 करोड़ का नुकसान ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी वर्क ऑर्डर, जाली बिल, फर्जी मापन पुस्तिकाओं (MB), झूठे पूर्णता प्रमाणपत्र और छेड़छाड़ की गई नोटशीट के जरिए 103.42 करोड़ रुपये की सरकारी राशि का गबन किया गया। जांच के अनुसार कई ऐसे कार्यों का भी भुगतान कर दिया गया, जो कभी हुए ही नहीं या पहले ही पूरे हो चुके थे। 59.18 करोड़ की संपत्ति अटैच और फ्रीज ईडी अब तक इस मामले में 59.18 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच, जब्त या फ्रीज कर चुकी है। एजेंसी ने पीएमएलए के तहत दो अस्थायी कुर्की आदेश जारी कर 37.14 करोड़ रुपये मूल्य की 52 अचल संपत्तियां अटैच की हैं। इनमें मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित व्यावसायिक भवन, मकान, भूखंड और कृषि भूमि शामिल हैं। 20 ठिकानों पर छापेमारी, मिले अहम सबूत ईडी ने 5 और 6 अगस्त 2024 को इंदौर सहित 20 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान करीब 22.04 करोड़ रुपये की नकदी, बैंक खातों की राशि, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), डीमैट होल्डिंग्स और म्यूचुअल फंड फ्रीज या जब्त किए गए। साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी बरामद हुए। नकद निकालकर खरीदी गई संपत्तियां जांच में सामने आया कि घोटाले से निकाली गई राशि पहले नकद निकाली गई, फिर अलग-अलग लाभार्थियों में बांटी गई। इसके बाद फर्जी व्यावसायिक लेनदेन के जरिए धन को अन्य संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया और चल-अचल संपत्तियां खरीदकर अपराध से अर्जित रकम को वैध दिखाने की कोशिश की गई। मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपी गिरफ्तार ईडी ने इस मामले के कथित मास्टरमाइंड अभय सिंह राठौर सहित मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को पीएमएलए की धारा-19 के तहत गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि तीनों ने घोटाले की साजिश रची और मनी लॉन्ड्रिंग में अहम भूमिका निभाई। कोर्ट ने जारी किए समन ईडी ने विशेष पीएमएलए कोर्ट से अटैच, जब्त और फ्रीज की गई संपत्तियों को जब्त (Confiscate) करने की मांग भी की है। अदालत ने सभी 32 आरोपियों को नोटिस/समन जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी है। देश और दुनिया की ताजा, निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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इंदौर जिला न्यायालय में फर्जी वकील पकड़ा गया, आठवीं पास युवक वकीलों की ड्रेस पहनकर घूम रहा था

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर जिला न्यायालय परिसर में सोमवार को एक फर्जी वकील पकड़ा गया। युवक वकीलों की वेशभूषा पहनकर कोर्ट परिसर में घूम रहा था। संदेह होने पर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उससे पूछताछ की, जिसमें खुलासा हुआ कि वह न तो वकील है और न ही कानून का छात्र। उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल आठवीं पास निकली। दस्तावेज मांगने पर खुली पोल बार एसोसिएशन के अनुसार, सोमवार को कार्यकारिणी सदस्य न्यायालय परिसर का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान कोर्ट रूम नंबर 45 के बाहर एक युवक वकीलों की ड्रेस में दिखाई दिया। पूछताछ में उसने अपना नाम धर्मेंद्र पिता रमेश राठौर बताया और कहा कि वह एक अधिवक्ता के कार्यालय से जुड़ा हुआ है। जब उससे एलएलबी की डिग्री और बार काउंसिल से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सका। बाद में उसने स्वीकार किया कि उसने कानून की पढ़ाई नहीं की है और वह केवल आठवीं कक्षा तक शिक्षित है। सोशल मीडिया प्रोफाइल से भी मिले सबूत बार एसोसिएशन ने युवक की फेसबुक और इंस्टाग्राम प्रोफाइल की भी जांच की। जांच में वह कई तस्वीरों में वकीलों की वेशभूषा में नजर आया। इसके बाद इंदौर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पाल और सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने आरोपी को एमजी रोड थाना पुलिस के हवाले कर दिया और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए लिखित शिकायत दर्ज कराई। फर्जी वकीलों के खिलाफ विशेष अभियान एमजी रोड थाना पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बार एसोसिएशन के सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने कहा कि जिला न्यायालय परिसर में फर्जी वकीलों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले भी एक महिला को फर्जी वकील के रूप में पकड़ा गया था, जिसके खिलाफ भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। उस मामले की जांच अभी जारी है। देश और दुनिया की ताजा, निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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ग्वालियर: साइबर ठगी के पैसों से खरीदा 50 ग्राम का सोने का सिक्का, ज्वेलर्स का बैंक खाता हुआ फ्रीज

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर अपराधियों द्वारा ठगी की रकम को वैध बनाने का एक नया तरीका सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक युवक ने सराफा बाजार स्थित ‘गहना जेम्स एंड ज्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड’ से 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदा और उसका भुगतान कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त रकम के जरिए ऑनलाइन किया। बाद में इस लेनदेन के चलते ज्वेलर्स का बैंक खाता भी फ्रीज कर दिया गया। ऑनलाइन ट्रांसफर से किया लाखों रुपये का भुगतान पुलिस के मुताबिक, झांसी रोड स्थित माधव नगर निवासी सराफा कारोबारी अजय मंगल का लश्कर सराफा बाजार में ज्वेलरी शोरूम है। बताया गया कि 4 अप्रैल 2026 को अभिषेक परिहार नाम का युवक शोरूम पहुंचा और 50 ग्राम का सोने का सिक्का खरीदने का सौदा किया। उसने अग्रिम भुगतान के रूप में 1 लाख रुपये NEFT और 10 हजार रुपये IMPS के माध्यम से जमा कराए। अगले दिन, 5 अप्रैल, वह दोबारा शोरूम पहुंचा और 5 लाख रुपये, 1.41 लाख रुपये ऑनलाइन बैंक ट्रांसफर तथा 52,900 रुपये नकद देकर पूरा भुगतान किया। इसके बाद कारोबारी ने जीएसटी का बिल जारी कर सोने का सिक्का उसे सौंप दिया। 20 दिन बाद बैंक खाता हुआ फ्रीज करीब 20 दिन बाद, 24 अप्रैल को ज्वेलर्स का बैंक खाता अचानक होल्ड कर दिया गया। बैंक ने ई-मेल के माध्यम से बताया कि खाते में आई 5.10 लाख रुपये की राशि को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के निर्देश पर फ्रीज किया गया है। इसके बाद 4 जून को बेंगलुरु साइबर क्राइम पुलिस का नोटिस मिला। नोटिस में बताया गया कि सोने के सिक्के के भुगतान में इस्तेमाल किए गए 5.10 लाख रुपये, बेंगलुरु के एक कारोबारी से हुई 14 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का हिस्सा थे। पुलिस के अनुसार, ठगों ने कथित रूप से ठगी की रकम सीधे ज्वेलर्स के खाते में ट्रांसफर कर सोने का सिक्का खरीद लिया। पुलिस ने दर्ज किया मामला मामले की जानकारी मिलने के बाद अजय मंगल ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान खरीदारी के समय जमा कराए गए आधार कार्ड से पता चला कि आरोपी अभिषेक परिहार बहोड़ापुर थाना क्षेत्र के घोसीपुरा का निवासी है। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले सीएसपी लश्कर किरण अहिरवार ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपी की तलाश जारी है। उन्होंने कहा कि शोरूम का सीसीटीवी बैकअप केवल 15 से 20 दिन तक सुरक्षित रहता है, इसलिए घटना के फुटेज उपलब्ध नहीं हो सके। हालांकि आधार कार्ड के विवरण और साइबर ट्रेल के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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