उज्जैन। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच उज्जैन का यह मंदिर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर प्रतिमा से जुड़े वीडियो और रील्स वायरल होने के बाद मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं। इनमें मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से आए श्रद्धालु भी शामिल हैं।
सती गेट के पास स्थित मंदिर के आसपास प्रशासन की कार्रवाई और प्रतिमा को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर प्रतिमा को हटाने के किसी भी प्रयास से इनकार किया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चमत्कार की कहानियां
प्रतिमा को हटाने की कोशिश नाकाम होने की चर्चाओं के बाद सोशल मीडिया पर खड़े हनुमानजी से जुड़ी कई तरह की चमत्कारिक कहानियां वायरल हो रही हैं। इन वीडियो और रील्स के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है।
प्रशासन की ओर से मंदिर के आसपास के क्षेत्र में निर्माण हटाने की कार्रवाई की गई है। वहीं, हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट के भीतर विराजमान है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर के आसपास बैरिकेडिंग की गई है और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
IIT इंदौर की टीम फिर करेगी जांच
प्रतिमा को हटाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच IIT इंदौर की टीम सोमवार को मंदिर पहुंची थी। टीम ने मौके पर पहुंचकर मंदिर और प्रतिमा से संबंधित स्थिति की जांच की।
अब IIT इंदौर की टीम गुरुवार को एक बार फिर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचकर जांच करेगी। इस जांच के बाद स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सोशल मीडिया से श्रद्धालुओं को मिली जानकारी
सती गेट के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में उन्होंने मंदिर में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं देखी। अब दर्शन के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े हो रहे हैं।
नासिक से पहुंचे अनिल ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर खड़े हनुमानजी की रील देखी थी। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आकर दर्शन करने का फैसला किया।
नागपुर से आए महेश टिचकुले ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर हनुमानजी से जुड़ी खबरें देख रहे थे। इसके बाद उन्होंने उज्जैन आने का निर्णय लिया।
वहीं, राजस्थान के अजमेर से आए सुशील खंडेलवाल महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि घर पर सोशल मीडिया रील देखने के दौरान उन्हें खड़े हनुमान मंदिर के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे यहां दर्शन करने पहुंचे।
प्रशासन ने कहा- प्रतिमा हटाने का कोई प्रयास नहीं हुआ
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच जिला प्रशासन ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया। प्रशासन ने कहा कि खड़े हनुमानजी की प्रतिमा का विषय उज्जैनवासियों और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है।
प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की भावनाओं, प्रतिमा की सुरक्षा तथा उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रेस नोट में कहा गया कि सोशल मीडिया पर यह भ्रामक खबर प्रसारित की जा रही है कि प्रशासन ने श्री खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को विस्थापित करने के कई प्रयास किए हैं।
जिला प्रशासन के मुताबिक, अब तक प्रतिमा को विस्थापित या हटाने के लिए मशीन अथवा मानवीय तरीके से कोई प्रयास नहीं किया गया है।
भक्तों ने प्रशासन के दावे पर उठाए सवाल
प्रशासन की सफाई के बाद कुछ श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े लोगों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतिमा को हटाने के प्रयास से संबंधित वीडियो उनके पास मौजूद हैं और अधिकारी चाहें तो उन्हें दिखाया जा सकता है।
मंदिर से जुड़े शैलू यादव ने कहा कि प्रशासन को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए हनुमानजी की प्रतिमा को यहीं रहने देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि प्रशासन प्रतिमा हटाने के किसी प्रयास से इनकार कर रहा है तो उनके पास इसके संबंध में वीडियो मौजूद हैं।
शैलू यादव के मुताबिक, नगर निगम अधिकारी हिमांशु तिवारी के सामने गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची थी। उन्होंने रात में कटर मशीन लाए जाने का भी दावा किया है। उनके अनुसार इन घटनाओं से जुड़े वीडियो उनके पास सुरक्षित हैं।
फिलहाल प्रतिमा को हटाने को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के दावों में अंतर है। IIT इंदौर की आगामी जांच और प्रशासन की कार्रवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


