भारत में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले इस अंतरराष्ट्रीय संगठन को लेकर कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सवाल उठाया कि आखिर BRICS की बैठकों से भारत को अब तक क्या ठोस फायदा मिला है। इसके जवाब में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS के महत्व को समझाते हुए कहा कि इसका फायदा केवल पैसों या व्यापार के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता।
चिदंबरम का सवाल सीधा था—अगर भारत लगातार BRICS, SCO, G20 और QUAD जैसे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों का हिस्सा है, तो इनसे देश को वास्तविक और ठोस लाभ क्या मिल रहा है? वहीं थरूर ने BRICS को भारत की Global Diplomatic Strategy का अहम हिस्सा बताया।
चिदंबरम ने उठाया BRICS पर सवाल
पी. चिदंबरम ने BRICS की उपयोगिता को लेकर सवाल करते हुए कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की सफलता को उसके नतीजों के आधार पर परखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, पिछले कुछ BRICS सम्मेलनों से भारत को ऐसा कोई बड़ा ठोस परिणाम नजर नहीं आया, जिसे सीधे देश के फायदे से जोड़ा जा सके।
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई। सवाल यह भी उठने लगा कि क्या बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी और बैठकों के अलावा BRICS भारत के लिए वास्तव में कितना उपयोगी है।
हालांकि, चिदंबरम ने यह भी माना कि BRICS के शुरुआती दौर में भारत को कुछ महत्वपूर्ण फायदे मिले थे।
थरूर ने बताया- BRICS का फायदा सिर्फ पैसे से नहीं
चिदंबरम की टिप्पणी पर शशि थरूर ने अलग नजरिया सामने रखा। उन्होंने BRICS के महत्व को केवल किसी एक व्यापारिक समझौते या तत्काल आर्थिक लाभ से जोड़कर देखने से इनकार किया।
थरूर के मुताबिक, BRICS भारत को दुनिया के कई महत्वपूर्ण देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत करने का अवसर देता है। खासकर Global South के देशों के बीच भारत अपनी आवाज और भूमिका को मजबूत कर सकता है।
उनका तर्क है कि जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देश किसी एक मंच पर साथ आते हैं और भारत उस मंच की अध्यक्षता या मेजबानी करता है, तो इससे देश की Diplomatic Reach बढ़ती है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS?
BRICS अब केवल कुछ देशों का आर्थिक समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद इसमें कई बड़े विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हुई हैं। ऐसे में भारत के लिए यह मंच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से अहम हो गया है।
भारत इस मंच के जरिए विकासशील देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश करता रहा है। खासकर Global South के देशों के लिए वित्तीय व्यवस्था, विकास और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Digital Payment और CBDC पर भी नजर
BRICS के जरिए भारत आर्थिक सहयोग को नए क्षेत्रों तक ले जाने की कोशिश कर रहा है। इनमें Cross-Border Payments और डिजिटल करेंसी से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं।
भारत BRICS देशों के बीच डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की दिशा में काम करने की कोशिश कर रहा है। अगर भविष्य में अलग-अलग देशों की Central Bank Digital Currency (CBDC) प्रणालियों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी बनती है, तो सीमा पार भुगतान में समय और लागत दोनों कम हो सकते हैं।
हालांकि, इस दिशा में कई तकनीकी और राजनीतिक चुनौतियां भी हैं। इसलिए इसका फायदा तुरंत दिखाई देने के बजाय आने वाले वर्षों में सामने आ सकता है।
Trade और Investment में भी मिल सकता है फायदा
BRICS भारत के लिए व्यापार और निवेश के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। समूह में शामिल देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंध लगातार बढ़े हैं।
ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं बनी हुई हैं। अगर BRICS के भीतर व्यापारिक प्रक्रियाएं आसान होती हैं और भुगतान व्यवस्था मजबूत होती है, तो भारतीय कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
यही वजह है कि BRICS का असर सिर्फ किसी एक Summit के फैसले से नहीं, बल्कि लंबे समय में होने वाले आर्थिक सहयोग से समझना ज्यादा सही होगा।
BJP ने चिदंबरम के सवाल पर साधा निशाना
चिदंबरम के बयान को लेकर BJP ने कांग्रेस पर निशाना साधा। BJP नेताओं का कहना है कि BRICS की बढ़ती भूमिका को केवल तत्काल आर्थिक लाभ के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
पार्टी की ओर से भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और BRICS में देश की सक्रिय भागीदारी का हवाला दिया गया। BJP ने यह भी तर्क दिया कि भारत का कई बड़े देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत करना अपने आप में एक रणनीतिक उपलब्धि है।
असली सवाल- ठोस फायदा कब दिखेगा?
BRICS को लेकर चिदंबरम और थरूर के विचारों में अंतर एक बड़ी बहस को सामने लाता है। सवाल यह नहीं है कि BRICS महत्वपूर्ण है या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि इसकी सदस्यता और नेतृत्व से भारत को जमीन पर कितना फायदा मिलता है।
थरूर BRICS के कूटनीतिक महत्व और भारत की वैश्विक भूमिका को इसकी बड़ी उपलब्धि मानते हैं। वहीं चिदंबरम ठोस और मापे जा सकने वाले परिणामों पर जोर दे रहे हैं।
अब नजर BRICS Summit 2026 पर है। अगर सम्मेलन में व्यापार, डिजिटल पेमेंट, निवेश और Global South से जुड़े मुद्दों पर ठोस फैसले होते हैं, तो भारत के लिए BRICS की उपयोगिता और मजबूत होकर सामने आ सकती है। फिलहाल बहस जारी है कि BRICS भारत के लिए सिर्फ एक बड़ा diplomatic platform है या आने वाले समय में यह देश के लिए बड़े आर्थिक फायदे का रास्ता भी खोलेगा।
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