Breaking: 47 साल बाद अमेरिका-ईरान रिश्तों में बड़ी बर्फ पिघली, ट्रम्प बोले- ‘तेल को फिर बहने दो’ दुनिया की सबसे तनावपूर्ण दुश्मनियों में से एक माने जाने वाले अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने कई महीनों तक चली कठिन और गोपनीय बातचीत के बाद एक प्रारंभिक शांति समझौते (MoU) को अंतिम रूप देने पर सहमति जता दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। ट्रम्प ने अपने संदेश में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को फिर बहने दो।” 19 जून को जेनेवा में हो सकते हैं हस्ताक्षर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधि 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि यह बैठक होती है तो यह करीब 47 वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संपर्क माना जाएगा। ईरान ने रखीं तीन अहम शर्तें ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम समझौते से पहले अमेरिका को तीन प्रमुख कदम उठाने होंगे— ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि आगामी 60 दिनों की बातचीत इन्हीं शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। 24 अरब डॉलर की संपत्तियां जारी होने की चर्चा ईरानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका 24 अरब डॉलर तक की ईरानी जमी हुई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से जारी कर सकता है। इनमें से लगभग 12 अरब डॉलर शुरुआती दौर में उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस दावे की अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। परमाणु कार्यक्रम बना रहेगा सबसे बड़ा मुद्दा विशेषज्ञों का मानना है कि असली परीक्षा अब शुरू होगी। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास लगातार बढ़ा था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पिछली रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का स्तर 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जिसे पश्चिमी देश चिंता का विषय मानते हैं। आगामी 60 दिनों की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे। इजराइल की चुप्पी बढ़ा रही अटकलें अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइल ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइल समझौते की कुछ शर्तों को लेकर असहज है क्योंकि उसे वार्ता प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। ईरान में भी उठ रहे विरोध के स्वर समझौते की खबर सामने आने के बाद ईरान के कट्टरपंथी समूहों और कुछ रूढ़िवादी नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह समझौता ईरान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। हालांकि राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि देशहित में काम करने वालों को गद्दार कहना उचित नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत यदि समझौता सफल रहता है तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। फिलहाल दुनिया की नजरें 19 जून को जेनेवा में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जहां यह ऐतिहासिक समझौता औपचारिक रूप ले सकता है।