आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGBreaking NewsSanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधनBREAKINGBreaking NewsJaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानीBREAKINGस्पोर्ट्सतमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहासBREAKINGBreaking NewsVaranasi में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट और मछली की shops , नगर निगम ने लिया बड़ा फैसलाBREAKINGBreaking NewsAmit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचलBREAKINGMore NewsTMC नेताओं पर बढ़ी कार्रवाई: कैलाश मिश्रा गिरफ्तार, पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा भी अरेस्टBREAKINGBreaking NewsIATA : एशिया-पैसिफिक में एविएशन बूम: 2044 तक 4.1 अरब यात्री, भारत निभा रहा अहम भूमिकाBREAKINGBreaking NewsD. K. Shivakumar का बयान: “मैं अपना धर्म और पहचान नहीं छोड़ सकता”, आस्था को लेकर दी सफाईBREAKINGBreaking NewsSanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधनBREAKINGBreaking NewsJaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानीBREAKINGस्पोर्ट्सतमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहासBREAKINGBreaking NewsVaranasi में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट और मछली की shops , नगर निगम ने लिया बड़ा फैसलाBREAKINGBreaking NewsAmit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचलBREAKINGMore NewsTMC नेताओं पर बढ़ी कार्रवाई: कैलाश मिश्रा गिरफ्तार, पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा भी अरेस्टBREAKINGBreaking NewsIATA : एशिया-पैसिफिक में एविएशन बूम: 2044 तक 4.1 अरब यात्री, भारत निभा रहा अहम भूमिकाBREAKINGBreaking NewsD. K. Shivakumar का बयान: “मैं अपना धर्म और पहचान नहीं छोड़ सकता”, आस्था को लेकर दी सफाई

NE

News Elementor

Latest Posts

Iraq

Middle East Crisis Iraq में Missile Attack Saudi Arabia में US Air Force के 5 Aircraft Hit

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में Iraq और Saudi Arabia से आई कई घटनाओं ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी दूतावास पर मिसाइल हमला, सऊदी अरब में अमेरिकी विमानों को नुकसान और इराक में सैन्य विमान दुर्घटना—इन तीनों घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। बगदाद में US Embassy पर मिसाइल हमला इराक की राजधानी बगदाद के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले ग्रीन ज़ोन में स्थित अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर मिसाइल दागी गई। बताया जा रहा है कि मिसाइल दूतावास परिसर के हेलीपैड के पास गिरी, जिससे वहां आग और धुआँ उठता दिखाई दिया। हमले के तुरंत बाद सुरक्षा बल सक्रिय हो गए और पूरे इलाके को सील कर दिया गया। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हमले में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दूतावास के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुँचा है। यह इलाका आमतौर पर बेहद सुरक्षित माना जाता है, इसलिए इस तरह का हमला सुरक्षा व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है। Saudi Arabia में 5 American Aircraft को नुकसान इसी बीच सऊदी अरब से भी एक बड़ी खबर सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार वहां एक एयर बेस पर हुए मिसाइल हमले में अमेरिकी वायुसेना के पांच रिफ्यूलिंग विमान क्षतिग्रस्त हो गए। ये विमान जमीन पर खड़े थे और हमले के दौरान उन्हें नुकसान पहुँचा। हालांकि अभी तक किसी अमेरिकी सैनिक के घायल या मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हमले क्षेत्र में चल रहे तनाव को और बढ़ा सकते हैं। Iraq में US Military Plane Crash तनाव के बीच इराक से एक और दुखद खबर सामने आई। एक अमेरिकी सैन्य विमान क्रैश हो गया, जिसमें छह अमेरिकी सैनिकों की मौत होने की जानकारी दी जा रही है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह दुर्घटना तकनीकी खराबी के कारण हुई। हालांकि कुछ स्थानीय और ईरान समर्थित समूहों ने दावा किया है कि विमान को मार गिराया गया था। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बढ़ती चिंता और अंतरराष्ट्रीय नजर लगातार हो रही इन घटनाओं ने पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता की आशंका बढ़ा दी है। अमेरिका ने अपने सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी है और क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी शुरू कर दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे हमले जारी रहते हैं तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल दुनिया भर की नजरें मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई हैं और सभी देश स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Crude Oil

Russia-US Oil Policy 30 दिन की छूट से बाजार में हलचल, Iran ने Crude Oil Price पर दी बड़ी Warning

ग्लोबल ऑयल मार्केट में बढ़ी हलचल दुनिया के ऊर्जा बाजार में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। इसी बीच United States ने बड़ा फैसला लेते हुए कई देशों को Russia से कच्चा तेल (Crude Oil) खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे दी है। माना जा रहा है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए उठाया गया है। रूस पर लगे प्रतिबंध और नई राहत रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, जिनका असर तेल व्यापार पर भी पड़ा। कई देशों और कंपनियों के लिए पहले से किए गए सौदों को पूरा करना मुश्किल हो रहा था। इसी स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने सीमित समय के लिए राहत देते हुए 30 दिन की अनुमति दी है, ताकि पुराने समझौते पूरे किए जा सकें। 30 दिन की छूट का क्या मतलब है इस फैसले के बाद जिन देशों या कंपनियों के रूस के साथ पहले से तेल सौदे तय हैं, वे उन्हें 30 दिनों के भीतर पूरा कर सकते हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई अचानक कम होने का खतरा कम हो सकता है और कीमतों पर दबाव भी कुछ हद तक नियंत्रित रह सकता है। ईरान की चेतावनी ने बढ़ाई चिंता इसी बीच Iran ने तेल बाजार को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। ईरान का कहना है कि अगर वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और कम हुई या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा, तो Crude Oil की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसा हुआ तो कई देशों की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। आम लोगों पर क्या होगा असर तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीमित नहीं रहता। पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा के खर्चों पर भी असर पड़ता है। इसलिए तेल बाजार में होने वाला हर बड़ा फैसला आम लोगों की जेब से भी जुड़ा होता है। आगे क्या हो सकता है ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ हफ्ते तेल बाजार के लिए अहम रहेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि 30 दिन की यह राहत वैश्विक बाजार को कितनी स्थिरता दे पाती है और कच्चे तेल की कीमतें आगे किस दिशा में जाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran vs US Aircraft Carrier पर हमले का दावा, Iraq में US Military Plane Crash ने बढ़ाया तनाव

मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में सामने आई दो बड़ी घटनाओं—अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पर कथित मिसाइल हमले और इराक में अमेरिकी सैन्य विमान दुर्घटना—ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इन खबरों ने वैश्विक सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। Aircraft Carrier पर Missile Attack का दावा ईरान (Iran) की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा और उसे ऑपरेशन क्षेत्र से हटाकर वापस भेजा जा रहा है। हालांकि अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि USS Abraham Lincoln सुरक्षित है और अपने निर्धारित मिशन पर काम कर रहा है। अभी तक किसी स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसी या विश्वसनीय सैन्य स्रोत ने जहाज को भारी नुकसान होने की पुष्टि नहीं की है। Iraq में US Military Plane Crash इसी बीच इराक से भी एक अहम खबर सामने आई है। यहां अमेरिकी एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग मिलिट्री विमान क्रैश हो गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह विमान क्षेत्र में चल रहे सैन्य ऑपरेशन से जुड़ा हुआ था। दुर्घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि विमान तकनीकी खराबी के कारण गिरा या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। अमेरिकी सेना ने अभी तक दुर्घटना के कारणों पर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। Middle East में बढ़ता सैन्य तनाव इन घटनाओं के बीच मध्य-पूर्व का माहौल पहले से ज्यादा संवेदनशील हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। साथ ही, इसका प्रभाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि Middle East दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। अभी क्या है सच्चाई? फिलहाल स्थिति “दावा बनाम इनकार” की बनी हुई है। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में इन घटनाओं को लेकर कौन-सी नई जानकारी सामने आती है और Middle East की यह तनावपूर्ण स्थिति किस दिशा में जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Tariff

Global Trade Tension अमेरिका की नई Investigation में India समेत 16 देश, Tariff का खतरा

अमेरिका ने भारत सहित दुनिया के 16 बड़े व्यापारिक साझेदार देशों के खिलाफ एक नई Trade Investigation शुरू कर दी है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि कुछ देशों की व्यापार नीतियों से अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो रहा है। अगर जांच में आरोप सही पाए गए, तो इन देशों से आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ (Import Tax) लगाया जा सकता है। यह कदम वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें भारत जैसे तेजी से उभरते निर्यातक देश भी शामिल हैं। क्या है पूरा मामला अमेरिका ने यह जांच Trade Act 1974 के Section 301 के तहत शुरू की है। यह वही कानून है जिसके जरिए अमेरिका पहले भी कई देशों पर टैरिफ लगा चुका है। इस कानून के तहत अगर अमेरिका को लगता है कि कोई देश अनुचित व्यापार नीतियां अपना रहा है—जैसे भारी सरकारी सब्सिडी देकर सस्ते सामान का निर्यात—तो वह उस देश के उत्पादों पर अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि कुछ देशों में अत्यधिक उत्पादन (Overcapacity) और सरकारी सहायता के कारण वैश्विक बाजार में सस्ते उत्पाद आ रहे हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है। किन देशों को जांच में शामिल किया गया इस जांच में कुल 16 देशों और क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें प्रमुख हैं: इन देशों को अमेरिका के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार माना जाता है, इसलिए इस जांच का असर वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है। अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए कड़े व्यापारिक कदम उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ पुराने टैरिफ नियमों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों के जरिए संभावित टैरिफ लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। भारत के लिए क्या मायने भारत के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजारों में से एक है। अगर भविष्य में टैरिफ लगाए जाते हैं, तो भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। खासकर स्टील, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अभी यह सिर्फ जांच का शुरुआती चरण है और अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है। आगे क्या होगा अमेरिकी एजेंसियां अब इन देशों की व्यापार नीतियों और औद्योगिक सब्सिडी की जांच करेंगी। इसके बाद एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अगर जांच में अनुचित व्यापार के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो अमेरिका इन देशों के उत्पादों पर नए टैरिफ लागू कर सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर इस जांच पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर केवल अमेरिका और भारत ही नहीं बल्कि पूरे वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran-US Tension फारस की खाड़ी में टैंकर पर हमला, भारतीय नाविक की मौत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran और United States के बीच टकराव का असर अब समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में Persian Gulf में एक अमेरिकी-संबंधित तेल टैंकर पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। Persian Gulf में हमले से बढ़ा तनाव रिपोर्टों के अनुसार, फारस की खाड़ी के पास एक तेल टैंकर को निशाना बनाया गया, जो अमेरिकी हितों से जुड़ा बताया जा रहा है। हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा और उस पर सवार एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय हुई है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। जहाजरानी कंपनियां और कई देश इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यहां से रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य सामान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचता है। क्यों महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz Strait of Hormuz दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में तेल इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और व्यापार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर घटना पर पूरी दुनिया की नजर रहती है। भारत के जहाजों को मिली राहत तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई। कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। सूत्रों के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar और ईरानी नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। इससे भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता कुछ हद तक कम हुई है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजर सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री इलाकों में कई भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। ऐसे में सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत के दूतावास और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां भी जहाज कंपनियों के साथ संपर्क में हैं, ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक बाजारों में कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Middle East War Iran में 8000 घरों पर हमला, 140 अमेरिकी सैनिक घायल, Israel में भी बमबारी

मध्य-पूर्व में चल रहा Iran–Israel War अब और गंभीर होता जा रहा है। इस संघर्ष में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक युद्ध का असर अब सैनिकों के साथ-साथ आम लोगों की ज़िंदगी पर भी गहराई से दिखाई देने लगा है। 140 अमेरिकी सैनिक घायल, 7 की मौत अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार अब तक इस संघर्ष में करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। इनमें कुछ सैनिकों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार 7 अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है। घायल सैनिकों का इलाज सैन्य अस्पतालों में चल रहा है और कई सैनिक उपचार के बाद फिर से अपनी ड्यूटी पर लौट चुके हैं। यह घटना दिखाती है कि युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता, बल्कि इसके असर हजारों परिवारों तक पहुंचते हैं। ईरान में भारी तबाही, 8000 घरों पर हमले इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर ईरान के कई शहरों में देखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक अब तक लगभग 8000 घरों और इमारतों पर हमले हुए हैं। इन हमलों के कारण कई इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। बिजली, पानी और संचार सेवाओं पर भी इसका असर पड़ा है। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ युद्ध की खबर नहीं, बल्कि उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी की कठिन सच्चाई बन चुकी है। Israel में भी मिसाइल और ड्रोन हमले दूसरी ओर Israel भी इस संघर्ष से अछूता नहीं रहा है। ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण देश के कई हिस्सों में बमबारी की घटनाएं सामने आई हैं। इजराइल ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया है ताकि अधिकतर मिसाइलों को हवा में ही नष्ट किया जा सके। फिर भी कुछ हमलों से नुकसान हुआ है और कई शहरों में लोगों को बंकरों में शरण लेनी पड़ी। कैसे बढ़ा Iran–Israel Conflict विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तनाव तब और बढ़ गया जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कुछ सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन के जरिए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच हमले और जवाबी हमलों का सिलसिला जारी है। दुनिया भर में बढ़ी चिंता इस संघर्ष को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। कई देशों और संगठनों ने शांति वार्ता और युद्धविराम की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran में बड़ा सत्ता बदलाव मोजतबा खामेनेई बने सुप्रीम लीडर, अमेरिका से बढ़ा टकराव

मध्य-पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव सामने आया है। Iran के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे Ali Khamenei के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर चुना गया है। इस फैसले के साथ ही अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है, खासकर Iran और United States के बीच तनाव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। कैसे चुने गए नए सुप्रीम लीडर Iran में सुप्रीम लीडर का चयन देश की शक्तिशाली धार्मिक संस्था Assembly of Experts करती है। इसी संस्था ने अली खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया। यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि ईरान की इस सर्वोच्च धार्मिक-राजनीतिक सत्ता में पहली बार नेतृत्व लगभग “पारिवारिक उत्तराधिकार” की तरह पिता से बेटे को गया है। कुछ विशेषज्ञ इसे ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। “Epstein गैंग हमारा भविष्य तय नहीं करेगी” ईरान (Iran) के धार्मिक और राजनीतिक नेतृत्व ने पश्चिमी देशों के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश का भविष्य किसी बाहरी ताकत से तय नहीं होगा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “Epstein गैंग” या पश्चिमी ताकतें ईरान के नेतृत्व को तय नहीं कर सकतीं। इस बयान को सीधे तौर पर पश्चिमी प्रभाव और बाहरी दबाव को खारिज करने के रूप में देखा जा रहा है। ट्रम्प का बयान अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ईरान को नया सुप्रीम लीडर चुनने से पहले अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका की मंजूरी के बिना चुना गया नेतृत्व क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है। क्यों अहम है सुप्रीम लीडर का पद Iran में सुप्रीम लीडर देश का सबसे शक्तिशाली पद होता है। यह पद राष्ट्रपति से भी ऊपर माना जाता है। सुप्रीम लीडर के पास सेना, न्यायपालिका, सुरक्षा एजेंसियों और विदेश नीति पर अंतिम निर्णय का अधिकार होता है। इस वजह से मोजतबा खामेनेई का सत्ता में आना सिर्फ ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। आगे क्या असर पड़ सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि: ईरान में नेतृत्व परिवर्तन के इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और आने वाले समय में इसके दूरगामी असर देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
Iran

Iran President का बयान पड़ोसी देशों से माफी लेकिन National Security के लिए सरेंडर नहीं

मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हाल ही में अपने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए साफ कहा कि Iran शांति चाहता है, लेकिन किसी भी दबाव में आकर सरेंडर (Surrender) नहीं करेगा। पड़ोसी देशों से क्यों मांगी माफी हाल के दिनों में क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन से जुड़े कुछ सैन्य घटनाक्रम सामने आए, जिससे खाड़ी के कई देशों में चिंता बढ़ गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान का इरादा अपने पड़ोसी देशों को नुकसान पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अगर हाल की घटनाओं से किसी भी पड़ोसी देश को परेशानी हुई है, तो ईरान इसके लिए खेद व्यक्त करता है। उनका कहना था कि पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना ईरान की प्राथमिकता है। “Iran सरेंडर नहीं करेगा” – राष्ट्रपति का सख्त बयान माफी के साथ-साथ राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि देश अपनी संप्रभुता और सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें ईरान पर दबाव बनाकर उसे झुकाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन ऐसा कभी संभव नहीं होगा। उनके शब्दों में, जो लोग ईरान के आत्मसमर्पण का सपना देख रहे हैं, वे इस सपने को कभी सच होते नहीं देख पाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय राजनीति और सैन्य गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पड़ोसियों से रिश्ते सुधारने की कोशिश विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह बयान दो संदेश देता है।पहला, वह अपने पड़ोसी देशों को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि उसका लक्ष्य क्षेत्र में तनाव बढ़ाना नहीं है। दूसरा, वह यह भी दिखाना चाहता है कि बाहरी दबाव के बावजूद ईरान अपनी नीतियों पर कायम रहेगा। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि मध्य-पूर्व में स्थिरता तभी संभव है जब सभी देश एक-दूसरे की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान करें। Middle East में बढ़ता तनाव पिछले कुछ समय से मध्य-पूर्व में सुरक्षा और राजनीति से जुड़े मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में ईरान की ओर से आया यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ ईरान ने पड़ोसी देशों से माफी मांगकर कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी तरफ उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान के मामले में वह पीछे हटने वाला नहीं है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
इजराइल

Middle East War इजराइल ने Tehran में किए ताबड़तोड़ हमले, Mehrabad Airport बना निशाना

मध्य-पूर्व (Middle East) में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। ताजा घटनाक्रम में इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान में कई अहम ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक (Airstrike) किए हैं। इन हमलों के दौरान तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट (Mehrabad Airport) के आसपास जोरदार धमाकों और आग लगने की खबर सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात अचानक कई तेज विस्फोटों की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद आसमान में धुएं के बड़े गुबार उठते दिखाई दिए। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एयरपोर्ट परिसर के पास खड़े कुछ विमानों में आग लग गई और सुरक्षा बलों ने तुरंत इलाके को घेर लिया। सैन्य ठिकानों को बनाया गया निशाना इजराइली सेना का कहना है कि यह हमला किसी नागरिक ढांचे को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि ईरान के सैन्य नेटवर्क को कमजोर करने के लिए किया गया है। सेना के मुताबिक इन हमलों में मिसाइल लॉन्चर, हथियार निर्माण से जुड़े प्रतिष्ठान और सैन्य कमांड सेंटर को टारगेट किया गया। इजराइल का दावा है कि इन ठिकानों से उसके खिलाफ हमलों की योजना बनाई जा रही थी, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई जरूरी थी। अमेरिका का सख्त रुख इसी बीच अमेरिका की ओर से भी कड़े संकेत मिले हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि अगर हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो ईरान के मिसाइल सिस्टम और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर और बड़े ऑपरेशन किए जा सकते हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले समय में ईरान की मिसाइल फैक्ट्रियों और लॉन्च साइट्स पर व्यापक कार्रवाई संभव है। ईरान ने भी किया जवाबी हमला दूसरी ओर ईरान ने भी इजराइल के खिलाफ मिसाइल हमले किए हैं। इस जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच सीधा सैन्य टकराव और ज्यादा तेज हो गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो यह संघर्ष पूरे मध्य-पूर्व में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। दुनिया की बढ़ी चिंता इस बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चिंतित है। संयुक्त राष्ट्र और कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और हालात को नियंत्रण में रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल तेहरान और आसपास के इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
America

Middle East Tension Iran Conflict के बीच America से खफा हुए कई Gulf Nations

मध्य-पूर्व (Middle East) में एक बार फिर तनाव तेज़ होता दिखाई दे रहा है। America और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को असहज स्थिति में डाल दिया है। हाल के घटनाक्रमों के बाद सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, बहरीन और ओमान जैसे देशों ने क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है। इन देशों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो उसका सबसे बड़ा असर खाड़ी क्षेत्र पर ही पड़ेगा। America-Iran Tension: क्या है पूरा मामला हाल ही में America और Israel ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े स्थानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इन हमलों को लेकर अमेरिका का कहना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया। हालांकि ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा की और चेतावनी दी कि यदि उस पर हमला जारी रहा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। इसके बाद पूरे क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों को लेकर अलर्ट बढ़ा दिया गया है। इस स्थिति ने मध्य-पूर्व में पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर दिया है। Gulf Countries क्यों हुए अमेरिका से नाराज़ खाड़ी देशों की नाराज़गी की वजह काफी स्पष्ट है। इन देशों में कई जगहों पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो ये ठिकाने सीधे निशाने पर आ सकते हैं। इससे इन देशों की सुरक्षा और स्थिरता दोनों पर खतरा बढ़ जाता है। साथ ही खाड़ी देश दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हैं। किसी भी सैन्य संघर्ष का असर सीधे तेल उत्पादन और सप्लाई पर पड़ सकता है। यही वजह है कि इन देशों की कोशिश हमेशा यही रहती है कि क्षेत्र में शांति बनी रहे। Oil Market और Global Economy पर असर मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अगर खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ता है तो तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। खासकर भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में तेल आयात करते हैं, उन्हें इसका सीधा असर झेलना पड़ सकता है। War के बीच Diplomacy का नया Twist तनाव के बीच एक दिलचस्प मोड़ भी सामने आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका अब ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर बातचीत की संभावना भी खुली रखना चाहता है। यानी एक तरफ सैन्य दबाव और दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत की कोशिश—यह दोहरी रणनीति कई देशों के लिए हैरान करने वाली है। खाड़ी देशों को डर है कि अगर हालात बिगड़े तो सबसे पहले असर उनके क्षेत्र पर ही दिखाई देगा। Middle East में आगे क्या हो सकता है विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति कई दिशाओं में जा सकती है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो पूरा क्षेत्र एक बड़े संकट की ओर बढ़ सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें America और Iran के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। खाड़ी देशों की सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि हालात युद्ध की ओर न जाएं और बातचीत के जरिए समाधान निकले। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 13 14 15 16 17 45

Editor's Picks

Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

Sanjay Jha का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी और केजरीवाल ने कमजोर किया इंडिया गठबंधन

जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Jha ने इंडिया गठबंधन को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एकजुट कर एक मजबूत मंच बनाने की कोशिश की थी, लेकिन सहयोगी दलों के बीच एकजुटता और साझा सोच की कमी के कारण गठबंधन कमजोर पड़ गया। एक इंटरव्यू के दौरान संजय झा से पूछा गया कि वर्ष 2023 में इंडिया गठबंधन की पहली बैठक पटना में नीतीश कुमार के आवास पर हुई थी, फिर जेडीयू उससे अलग क्यों हो गई। इस पर उन्होंने कहा कि गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के लिए सभी दलों का एक दिशा में काम करना जरूरी था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। संजय झा ने आरोप लगाते हुए कहा कि “दो लोगों ने इंडिया अलायंस को खत्म कर दिया। उनका नाम ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल है।” उनके अनुसार चुनाव के दौरान गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट रणनीति का अभाव दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी गठबंधन में शामिल दलों के बीच साझा लक्ष्य और समन्वय नहीं होता, तो उसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ता है। यही वजह रही कि विपक्षी एकता की कोशिशें अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकीं। संजय झा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि उनके इस आरोप पर इंडिया गठबंधन के अन्य दलों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद, लोगों को हो सकती है परेशानी

Jaipur। राजस्थान की राजधानी जयपुर में प्रशासन ने एहतियात के तौर पर शहर के कई इलाकों में 24 घंटे के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करने का आदेश जारी किया है। यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए लिया गया है। इंटरनेट बंद होने का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ सकता है जो अपने रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भर हैं। छात्रों की पढ़ाई, ऑनलाइन भुगतान, व्यापारिक गतिविधियां और डिजिटल सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम लोगों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी को ही सही मानें। स्थानीय लोगों का मानना है कि इंटरनेट बंद होने से असुविधा जरूर होगी, लेकिन यदि इससे शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहती है तो सभी को प्रशासन का सहयोग करना चाहिए। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्णय लिए जाएंगे।
तमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहास

तमीम इकबाल बने Bangladesh क्रिकेट बोर्ड के नए अध्यक्ष, 37 साल की उम्र में रचा इतिहास

Bangladesh क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) का नया अध्यक्ष चुना गया है। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उनकी स्थिति और मजबूत हो गई है। इससे पहले वह बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने अप्रैल में BCB के निदेशक मंडल को भंग कर दिया था। इसके बाद तमीम इकबाल को अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बाद में जांच समिति की सिफारिशों और प्रशासनिक बदलावों के आधार पर बोर्ड में नई व्यवस्था लागू की गई। यह फैसला पिछले वर्ष अक्टूबर में हुए चुनावों को लेकर लगे आरोपों की जांच के बाद गठित पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया। समिति ने क्रिकेट प्रशासन में पारदर्शिता और सुधार के लिए कई सुझाव दिए थे। 37 वर्षीय तमीम इकबाल अब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष बन गए हैं। क्रिकेट के मैदान पर अपनी शानदार बल्लेबाजी और नेतृत्व क्षमता के लिए पहचान बनाने वाले तमीम से अब क्रिकेट प्रशंसकों को बोर्ड प्रशासन में भी सकारात्मक बदलावों की उम्मीद है। बांग्लादेश क्रिकेट के लिए यह एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है। क्रिकेट प्रेमियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि तमीम इकबाल अपने अनुभव का उपयोग कर देश के क्रिकेट को किस नई दिशा में ले जाते हैं।
Varanasi में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट और मछली की shops , नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला

Varanasi में शहर के बाहर शिफ्ट होंगी मीट और मछली की shops , नगर निगम ने लिया बड़ा फैसला

Varanasi। धर्मनगरी काशी में मीट, मांस और मछली की shops को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। वाराणसी नगर निगम की बैठक में तय किया गया है कि शहर के भीतर संचालित होने वाली सभी मीट, मांस और मछली की दुकानों को शहर की सीमा के बाहर स्थानांतरित किया जाएगा। नगर निगम के इस फैसले के बाद अब शहर के अंदर कच्चा मीट और मछली की बिक्री नहीं होगी। प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा दुकानों को रामनगर, सूजाबाद, गनेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर जैसे बाहरी क्षेत्रों में शिफ्ट किया जाएगा। इस मुद्दे को सबसे पहले नगर निगम सदन में पार्षद गुलशन अली ने उठाया था। उन्होंने पिछले वर्ष मांग की थी कि मीट और मछली की दुकानों को शहर के बाहर स्थानांतरित किया जाए। उनका कहना था कि सावन माह के दौरान मीट की दुकानें लंबे समय तक बंद रहती हैं, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नगर निगम का मानना है कि इस फैसले से शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में मदद मिलेगी, वहीं व्यापारियों के लिए भी व्यवस्थित तरीके से कारोबार करने का विकल्प उपलब्ध होगा।
Amit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचल

Amit Shah से मिले कैप्टन अमरिंदर सिंह, कांग्रेस में वापसी की चर्चाओं के बीच बढ़ी सियासी हलचल

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता Amarinder Singh ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री Amit Shah से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही थी कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जल्द ही दोबारा Indian National Congress में वापसी कर सकते हैं। हालांकि, अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद अब इन अटकलों को लेकर नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। दिल्ली में अहम मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई इस मुलाकात को पंजाब की आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पंजाब की राजनीति पर नजर कैप्टन अमरिंदर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस का बड़ा चेहरा रहे हैं। बाद में उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का साथ लिया था। अब उनकी संभावित राजनीतिक दिशा को लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.