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Abhishek Sharma

Abhishek Sharma Record: Batting में नहीं चला जादू, लेकिन Bowling से Team India के स्टार ने किया कमाल

भारत और जिम्बाब्वे के बीच खेले गए T20 मुकाबले में टीम इंडिया के युवा स्टार Abhishek Sharma ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ विस्फोटक बल्लेबाज ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर टीम के लिए शानदार ऑलराउंडर भी बन सकते हैं। इस मैच में भले ही अभिषेक शर्मा का बल्ला ज्यादा कमाल नहीं दिखा पाया, लेकिन गेंद से उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि उनका नाम रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो गया। Batting में खामोशी, Bowling में दिखा अभिषेक का जलवा मैच में अभिषेक शर्मा से फैंस को एक बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह बल्लेबाजी में ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके। हालांकि इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाली और अपनी शानदार स्पिन गेंदों से जिम्बाब्वे के बल्लेबाजों को परेशान कर दिया। Abhishek Sharma ने अपनी गेंदबाजी से अहम विकेट हासिल किए और भारतीय टीम को मुकाबले में मजबूत स्थिति में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनका यह प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि वह आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए एक उपयोगी ऑलराउंड विकल्प बन सकते हैं। Abhishek Sharma ने बनाया खास T20I Record जिम्बाब्वे के खिलाफ गेंद से शानदार प्रदर्शन करते हुए अभिषेक शर्मा ने एक खास उपलब्धि हासिल की। वह T20 इंटरनेशनल क्रिकेट में भारतीय ओपनर बल्लेबाजों में बेहतरीन गेंदबाजी प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए। यह रिकॉर्ड इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर ओपनिंग बल्लेबाजों से गेंदबाजी में बड़ी भूमिका की उम्मीद नहीं की जाती, लेकिन अभिषेक ने अपनी प्रतिभा और मेहनत से खुद को अलग साबित किया। India की जीत में Abhishek बने अहम कड़ी मुकाबले में भारतीय टीम ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में शानदार प्रदर्शन किया। जहां बल्लेबाजों ने स्कोरबोर्ड पर बड़ा लक्ष्य खड़ा किया, वहीं गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे की टीम पर लगातार दबाव बनाए रखा। अभिषेक शर्मा के अलावा टीम इंडिया के अन्य खिलाड़ियों ने भी बेहतरीन योगदान दिया। बल्लेबाजों ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए और गेंदबाजों ने सही समय पर विकेट लेकर जिम्बाब्वे की वापसी की उम्मीदों को खत्म कर दिया। युवा खिलाड़ी के तौर पर बढ़ी Abhishek Sharma की अहमियत पिछले कुछ समय में अभिषेक शर्मा ने अपनी बल्लेबाजी से क्रिकेट फैंस का ध्यान खींचा है। उनकी लंबे छक्के लगाने की क्षमता और आक्रामक अंदाज उन्हें T20 क्रिकेट के लिए खास बनाता है। अब गेंद से शानदार प्रदर्शन करने के बाद उनकी उपयोगिता टीम के लिए और बढ़ गई है। एक ऐसा खिलाड़ी जो बल्लेबाजी के साथ-साथ गेंदबाजी में भी योगदान दे सकता है, किसी भी टीम के लिए बड़ा हथियार साबित होता है। Team India को मिला भरोसेमंद All-Round Option Abhishek Sharma का यह प्रदर्शन उनके करियर के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने दिखा दिया कि वह सिर्फ एक बल्लेबाज नहीं बल्कि मैच की परिस्थितियों के हिसाब से खुद को बदलने की क्षमता रखते हैं। IND vs ZIM मुकाबले में उनका यह ऑलराउंड प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। बल्ले से शांत रहने के बावजूद गेंद से इतिहास रचकर अभिषेक ने साबित कर दिया कि बड़े खिलाड़ी वही होते हैं जो मुश्किल समय में टीम के काम आएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Commonwealth Games 2026

India First Medal in Commonwealth Games 2026: झंडू कुमार का कमाल, Boxing में जादुमणि की जीत

Commonwealth Games 2026 में भारत का पदकों का इंतजार खत्म हो गया है। भारतीय पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार (Jhandu Kumar) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को पहला Bronze Medal दिलाया। उन्होंने पुरुषों की पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं, बॉक्सिंग रिंग से भी अच्छी खबर आई, जहां भारतीय मुक्केबाज जादुमणि सिंह (Jadumani Singh) ने अपना पहला मुकाबला जीतकर अगले दौर में जगह बना ली। 190 Kg वजन उठाकर रचा इतिहास झंडू कुमार ने प्रतियोगिता के दौरान अपने दमदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया और कांस्य पदक अपने नाम किया। यह केवल उनके करियर की बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि Commonwealth Games 2026 में भारत का पहला मेडल भी है। इस सफलता के साथ भारतीय दल का मनोबल भी काफी बढ़ गया है। संघर्ष से सफलता तक का सफर झंडू कुमार की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। बिहार के रहने वाले झंडू ने आर्थिक तंगी के बीच अपना सपना जिंदा रखा। परिवार की मदद के लिए उन्होंने कभी सब्जियां बेचीं तो कभी ई-रिक्शा चलाया। कठिन हालात के बावजूद उन्होंने खेल से दूरी नहीं बनाई। लगातार मेहनत और मजबूत इरादों का नतीजा आज पूरी दुनिया के सामने है। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी प्रतिभा को नहीं रोक सकती। यही वजह है कि उनकी जीत को सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष और हौसले की जीत भी माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई झंडू कुमार की ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनका प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने झंडू के संघर्ष और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता लाखों युवाओं को अपने सपनों के लिए मेहनत करने की प्रेरणा देगी। Boxing में भी भारत की मजबूत शुरुआत पैरा पावरलिफ्टिंग के बाद भारतीय बॉक्सिंग टीम ने भी शानदार शुरुआत की। मुक्केबाज जादुमणि सिंह ने अपने पहले मुकाबले में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और प्री-क्वार्टर फाइनल में प्रवेश कर लिया। उनकी जीत से भारत की पदक उम्मीदें और मजबूत हुई हैं। अब इन खेलों पर रहेगी नजर भारत की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही है। आने वाले दिनों में कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, एथलेटिक्स और बॉक्सिंग जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से कई और पदकों की उम्मीद की जा रही है। यदि शुरुआती प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो भारत इस बार भी पदक तालिका में मजबूत स्थिति बना सकता है। Commonwealth Games 2026 का पहला पदक जीतकर झंडू कुमार ने न केवल इतिहास रचा, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है। वहीं, जादुमणि सिंह की जीत ने भारतीय खेल प्रेमियों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स: पैरा पावरलिफ्टिंग में भारत पदक से चूका, स्विमिंग और बॉक्सिंग में बढ़ीं उम्मीदें

ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग के पहले मेडल इवेंट में निराशा हाथ लगी। पुरुष लाइटवेट वर्ग में अशोक कुमार मलिक पदक से मामूली अंतर से चूकते हुए चौथे स्थान पर रहे, जबकि परमजीत कुमार छठे स्थान पर रहे। हालांकि स्विमिंग, जिम्नास्टिक्स और बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने पदकों की उम्मीदें बरकरार रखी हैं। पैरा पावरलिफ्टिंग में अशोक चौथे स्थान पर पुरुष लाइटवेट फाइनल में नौ बार के राष्ट्रीय चैंपियन अशोक कुमार मलिक ने पहली कोशिश में 195 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। दूसरी कोशिश में उन्होंने 200 किलोग्राम की अपनी व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) लिफ्ट पूरी कर 143.8 अंक हासिल किए। तीसरे प्रयास में 205 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहने के कारण वह चौथे स्थान पर रहे और पदक से चूक गए। वहीं परमजीत कुमार ने पहले प्रयास में 176 किलोग्राम वजन उठाकर 135.6 अंक अर्जित किए। इसके बाद 179 किलोग्राम वजन उठाने के दोनों प्रयास असफल रहे और वह छठे स्थान पर रहे। अब महिला लाइटवेट वर्ग में जसप्रीत कौर और सुमन देवी, जबकि महिला हेवीवेट में कस्तूरी राजामणि तथा पुरुष हेवीवेट में झंडू कुमार और सुधीर भारत की ओर से पदक की चुनौती पेश करेंगे। स्विमिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने बनाई फाइनल और सेमीफाइनल में जगह भारत के लिए अच्छी खबर स्विमिंग से आई। इस स्पर्धा में कुल आठ प्रतिभागी होने के कारण दोनों भारतीय तैराक फाइनल में पहुंच गए हैं। वहीं स्टार तैराक श्रीहरि नटराज ने पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक हीट में 25.52 सेकेंड का समय निकालते हुए अपनी हीट में पांचवां और कुल मिलाकर 14वां स्थान हासिल किया। इसके साथ उन्होंने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया। जिम्नास्टिक्स में भारत मजबूत स्थिति में आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स की पुरुष टीम ऑलराउंड स्पर्धा में दो उपकरणों के बाद भारत सब-डिवीजन-2 में सिंगापुर के बाद दूसरे स्थान पर चल रहा है। भारतीय टीम में तपन मोहंती, स्वाथिश केपी, तपेश्वरनाथ दास और योगेश्वर सिंह शामिल हैं। बॉक्सिंग में आज से भारत का अभियान बॉक्सिंग में भारत की ओर से जदुमणि सिंह पुरुष 55 किलोग्राम वर्ग के राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्कॉटलैंड के आरोन कुलेन का सामना करेंगे। वहीं ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन को महिला 75 किलोग्राम वर्ग में बाय मिला है, जिससे वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गई हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार दोनों सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को भी कांस्य पदक दिया जाता है। ऐसे में लवलीना का कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित हो गया है। जूडो में भारत को झटका भारत की जूडो खिलाड़ी तूलिका मान को पिछले 12 महीनों में तीन बार वेयरअबाउट्स नियम के उल्लंघन के कारण NADA ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके चलते उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया है। इससे पहले पुरुष 73 किलोग्राम वर्ग के अरुण कुमार भी प्रतियोगिता से बाहर हो चुके हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स, भारतीय खिलाड़ियों और खेल जगत की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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सचिन ने कहा- पेपर लीक पर नाराजगी जायज:शुभमन गिल ने शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट का समर्थन किया; कैफ बोले- छात्रों पर लाठीचार्ज गलत

पेपर लीक और देशभर में हो रहे छात्र आंदोलन पर कई खिलाड़ियों ने प्रतिक्रिया दी है। सचिन तेंदुलकर, शुभमन गिल, इरफान पठान, मोहम्मद कैफ, शिखर धवन और अभिनव बिंद्रा ने एजुकेशन में मेरिट, ईमानदारी और छात्रों के भविष्य पर जोर दिया। सचिन ने छात्रों की नाराजगी को जायज बताया है। भारतीय कप्तान गिल ने कहा कि हमें छात्रों के हित को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। वहीं कैफ ने कहा है कि छात्रों पर लाठी चार्ज नहीं होना चाहिए। सचिन बोले- मेहनत का सम्मान हो, मेरिट जीते सचिन तेंदुलकर ने कहा कि उनके पिता ने बचपन में सिखाया था, ‘असफल होना ठीक है, लेकिन चीटिंग नहीं।’ उन्होंने कहा कि ‘अगर छात्रों को लगे कि उनकी मेहनत का फल नहीं मिला, तो उनका निराश होना स्वाभाविक है। समाज को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जहां मेहनत का सम्मान हो, ईमानदारी को बढ़ावा मिले और मेरिट की जीत हो।’
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IND vs ZIM: वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा सचिन का रिकॉर्ड, पहले टी-20 में भारत की जीत के 5 बड़े मोमेंट्स

भारत ने हरारे में खेले गए पहले टी-20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। 126 रन के लक्ष्य को भारतीय टीम ने 13.2 ओवर में सिर्फ तीन विकेट खोकर हासिल कर लिया। मैच के दौरान कई ऐसे पल देखने को मिले, जिन्होंने मुकाबले को खास बना दिया। सबसे ज्यादा चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की रही, जिन्होंने रिकॉर्डतोड़ अर्धशतक जड़कर इतिहास रच दिया। मैच के 5 बड़े मोमेंट्स 1. वैभव सूर्यवंशी ने तोड़ा सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्डवैभव सूर्यवंशी ने 15 साल 118 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाकर फुल मेंबर देशों के बीच इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में फिफ्टी लगाने वाले खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल 213 दिन की उम्र में अर्धशतक लगाया था। इसके साथ ही वैभव ने नेपाल के कुशल मल्ला का ओवरऑल इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। 2. टी-20 इंटरनेशनल में सबसे कम उम्र में फिफ्टीवैभव सूर्यवंशी अब टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बन गए हैं। उन्होंने जिब्राल्टर के लुई ब्रूस का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 16 साल 56 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। 3. मां के नाम किया अर्धशतकफिफ्टी पूरी करने के बाद वैभव ने अपने जश्न से सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने हवा में ‘A’ का साइन बनाकर अपनी मां आरती सूर्यवंशी को यह उपलब्धि समर्पित की। 4. मयंक यादव ने फिर पहली गेंद पर लिया विकेटतेज गेंदबाज मयंक यादव ने जिम्बाब्वे की पारी की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट कर भारत को शानदार शुरुआत दिलाई। यह उनके टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर में दूसरी बार था, जब उन्होंने पारी की पहली गेंद पर विकेट हासिल किया। इस मामले में भुवनेश्वर कुमार तीन बार ऐसा कर भारत के शीर्ष गेंदबाज हैं। 5. भारत ने 40 गेंद पहले हासिल किया लक्ष्यभारतीय टीम ने 126 रन का लक्ष्य 40 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। 120 से अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए यह भारत का चौथा सबसे तेज सफल रनचेज रहा। अशोक शर्मा का टी-20 डेब्यू राजस्थान के तेज गेंदबाज अशोक शर्मा ने इस मुकाबले से भारत के लिए टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। आईपीएल 2026 में गुजरात टाइटंस की ओर से खेलते हुए उन्होंने 6 मैचों में 6 विकेट लिए थे। जिम्बाब्वे में टी-20 डेब्यू करने वाले वह 23वें भारतीय खिलाड़ी बने। Read More:deshharpal.com
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China Open 2026: 4 मैच प्वाइंट गंवाकर फाइनल में हारीं PV Sindhu, खिताब जीतने का सपना टूटा

China Open 2026: 4 मैच प्वाइंट गंवाकर फाइनल में हारीं PV Sindhu, खिताब जीतने का सपना टूटा

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी PV Sindhu चाइना ओपन 2026 का खिताब जीतने से सिर्फ एक कदम दूर थीं, लेकिन किस्मत ने आखिरी समय पर उनका साथ नहीं दिया। फाइनल मुकाबले में सिंधु के पास जीत के चार मैच प्वाइंट थे, लेकिन वह उन्हें भुना नहीं सकीं और आखिरकार मुकाबला हार गईं। यह हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं थी, बल्कि करोड़ों भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदों को भी झटका देने वाली रही। पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली सिंधु ने फाइनल में भी दमदार खेल दिखाया, लेकिन निर्णायक क्षणों में विपक्षी खिलाड़ी ने शानदार वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। मैच के दौरान सिंधु ने कई बेहतरीन रैलियां खेलीं और लंबे समय तक मुकाबले पर अपनी पकड़ बनाए रखी। ऐसा लग रहा था कि ट्रॉफी अब भारत आने वाली है, लेकिन चार मैच प्वाइंट गंवाने के बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। हालांकि, हार के बावजूद सिंधु का प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में शानदार रहा। उन्होंने लगातार बेहतरीन खेल दिखाकर फाइनल तक का सफर तय किया और यह साबित किया कि वह आज भी दुनिया की सबसे मजबूत बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल हैं। इस हार से सिंधु और उनके प्रशंसक जरूर निराश होंगे, लेकिन खेल में जीत और हार दोनों का हिस्सा होती हैं। भारतीय फैंस को उम्मीद है कि पीवी सिंधु जल्द ही इस हार से उबरकर आने वाले टूर्नामेंट में और भी मजबूत वापसी करेंगी। चाइना ओपन 2026 का यह फाइनल लंबे समय तक याद रखा जाएगा, क्योंकि जीत सिंधु के बेहद करीब थी, लेकिन आखिर में किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। भारतीय खेल प्रेमियों को अब उनकी अगली बड़ी जीत का इंतजार रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Commonwealth Games 2026

Commonwealth Games 2026: Opening Ceremony से पहले Indian Boxing Team को झटका

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) की शुरुआत से पहले भारतीय बॉक्सिंग टीम को एक ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिसने खिलाड़ियों की तैयारियों पर असर डाल दिया। बेलफास्ट (आयरलैंड) से स्कॉटलैंड के ग्लासगो रवाना हुई टीम का जरूरी सामान एयरपोर्ट पर ही छूट गया। इसमें खिलाड़ियों की ट्रेनिंग किट, बॉक्सिंग गियर और ओपनिंग सेरेमनी (Opening Ceremony) के लिए निर्धारित आधिकारिक ड्रेस भी शामिल हैं। मुकाबलों से ठीक पहले हुई इस घटना ने खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सामान जल्द से जल्द खिलाड़ियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कैसे हुआ पूरा मामला? भारतीय बॉक्सिंग टीम पिछले कुछ दिनों से बेलफास्ट में विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले रही थी। कैंप खत्म होने के बाद टीम ग्लासगो पहुंची, लेकिन एयरपोर्ट पर सामान का इंतजार करते-करते खिलाड़ियों को पता चला कि उनके कई बैग विमान में लोड ही नहीं किए गए थे। बताया जा रहा है कि जिस विमान से टीम ने यात्रा की, उसकी कार्गो क्षमता सीमित थी। इसी वजह से कई खिलाड़ियों और अधिकारियों का सामान बेलफास्ट एयरपोर्ट पर ही रह गया। एयरलाइन ने बाद में सामान को अगली उपलब्ध उड़ान से भेजने की प्रक्रिया शुरू की। इन खिलाड़ियों का सामान नहीं पहुंचा रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन खिलाड़ियों और अधिकारियों का सामान पीछे रह गया, उनमें शामिल हैं— इन खिलाड़ियों के बैग में बॉक्सिंग ग्लव्स, ट्रेनिंग किट, निजी सामान और उद्घाटन समारोह में पहनने वाली आधिकारिक ड्रेस रखी हुई थी। Opening Ceremony से पहले बढ़ी चिंता कॉमनवेल्थ गेम्स का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित होना है, जबकि बॉक्सिंग प्रतियोगिता अगले ही दिन से शुरू होगी। ऐसे में खिलाड़ियों के पास अभ्यास और अंतिम तैयारियों के लिए सीमित समय बचा है। यदि सामान समय पर नहीं पहुंचता, तो खिलाड़ियों को नए उपकरण और ड्रेस की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। हालांकि भारतीय दल को उम्मीद है कि एयरलाइन जल्द ही पूरा सामान ग्लासगो पहुंचा देगी। दूसरी बार सामने आई ऐसी समस्या भारतीय बॉक्सिंग टीम के साथ यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले दोहा से बेलफास्ट की यात्रा के दौरान भी कुछ खिलाड़ियों का सामान निर्धारित समय पर नहीं पहुंचा था। लगातार दूसरी बार ऐसी स्थिति बनने से टीम प्रबंधन ने लॉजिस्टिक व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। रहने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि टीम की आवास व्यवस्था भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महिला टीम की कोच को खिलाड़ियों से अलग होटल में ठहराया गया है। इससे खिलाड़ियों और कोच के बीच समन्वय प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि भारतीय ओलंपिक संघ और टीम अधिकारी इन सभी मुद्दों को जल्द सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि खिलाड़ियों का पूरा ध्यान प्रतियोगिता पर बना रहे। भारत को बॉक्सिंग से बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बॉक्सिंग टीम हमेशा मजबूत दावेदार रही है। इस बार भी टीम से कई पदकों की उम्मीद की जा रही है। अनुभवी और युवा मुक्केबाज शानदार फॉर्म में हैं और उनका लक्ष्य देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है। शुरुआती परेशानियों के बावजूद खिलाड़ियों का मनोबल ऊंचा है। टीम का विश्वास है कि जैसे ही सामान पहुंच जाएगा, वे पूरी तैयारी के साथ रिंग में उतरेंगे और भारत का नाम रोशन करने की कोशिश करेंगे.
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PV Sindhu

PV Sindhu Victory: मुश्किल दौर के बाद शानदार Comeback, विराट Kohli को दिया जीत का Credit

भारतीय बैडमिंटन की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु (PV Sindhu) ने आखिरकार दो साल के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए इंटरनेशनल बैडमिंटन में दमदार वापसी की है। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने खिताब अपने नाम किया और जीत के बाद ऐसा खुलासा किया, जिसने खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सिंधु ने कहा कि इस कमबैक के पीछे सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि विराट कोहली (Virat Kohli) की एक सलाह ने भी बड़ी भूमिका निभाई। PV Sindhu ने बताया कि जब उनका करियर मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तब विराट कोहली से हुई बातचीत ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनने की प्रेरणा दी। उसी बातचीत के बाद उन्होंने अपने खेल और सोचने के तरीके में बदलाव किया, जिसका नतीजा अब खिताब के रूप में सामने आया है। संघर्ष के दौर में मिली विराट की सीख पीवी सिंधु पिछले कुछ समय से चोट, खराब फॉर्म और लगातार हार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही थीं। कई बड़े टूर्नामेंट में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं हो पाया, जिससे उन पर सवाल भी उठने लगे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात विराट कोहली से हुई। सिंधु के मुताबिक, विराट ने उन्हें सलाह दी कि किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे जरूरी उसकी मानसिक मजबूती होती है। उन्होंने कहा कि परिणाम की चिंता छोड़कर अपने खेल पर पूरा ध्यान देना चाहिए। यह बात सिंधु के मन में बैठ गई और उन्होंने उसी दिशा में खुद को तैयार करना शुरू किया। बदली सोच, बदल गए नतीजे सिंधु का कहना है कि पहले वह जीत-हार को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचती थीं। लेकिन अब उन्होंने अपना पूरा फोकस सिर्फ बेहतर प्रदर्शन पर रखा। यही बदलाव उनके खेल में भी साफ दिखाई दिया। हालिया टूर्नामेंट में उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबले खेले। कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखा और निर्णायक मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब दो साल बाद इंटरनेशनल खिताब जीत लिया। दो साल बाद फिर बनीं चैंपियन यह खिताब सिंधु के लिए सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि संघर्ष के बाद मिली बड़ी सफलता है। पिछले दो वर्षों में उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हार नहीं मानी। लगातार मेहनत, फिटनेस पर काम और मानसिक तैयारी ने उन्हें फिर से जीत की राह पर पहुंचा दिया। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यह जीत आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले भारतीय बैडमिंटन के लिए भी सकारात्मक संकेत है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सिंधु का बयान खिताब जीतने के बाद जब सिंधु ने सार्वजनिक रूप से विराट कोहली का जिक्र किया, तो सोशल मीडिया पर उनकी बातें तेजी से वायरल हो गईं। फैंस ने विराट की सोच और सिंधु की ईमानदारी दोनों की जमकर तारीफ की। कई लोगों ने लिखा कि महान खिलाड़ी सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि अपने अनुभव और शब्दों से भी दूसरों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। खिलाड़ियों के लिए बड़ा संदेश पीवी सिंधु की कहानी यह बताती है कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता सिर्फ शारीरिक फिटनेस पर निर्भर नहीं होती। मानसिक मजबूती, सही मार्गदर्शन और खुद पर भरोसा भी उतना ही जरूरी होता है। कभी-कभी एक छोटी-सी सलाह पूरे करियर की दिशा बदल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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स्पेन बना फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 का चैंपियन, अर्जेंटीना को हराकर दूसरी बार जीता खिताब

Sports News: स्पेन ने फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्थित मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया। मैच का फैसला एक्स्ट्रा टाइम में हुआ, जहां फेरान टोरेस के निर्णायक गोल ने स्पेन को ऐतिहासिक जीत दिलाई। स्पेन की जीत के बाद 23 वर्षीय मिडफील्डर पेड्री की 13 महीने पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने ट्रॉफी के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “यह पहले से लिखा था! 190726… वह दिन, जब पूरे देश का सपना सच हुआ। वह दिन, जब हम वर्ल्ड चैंपियन बने।” दरअसल, 10 जून 2025 को पेड्री ने इंस्टाग्राम पर केवल “190726” पोस्ट किया था। अब फैंस इसे 19 जुलाई 2026, यानी वर्ल्ड कप फाइनल की तारीख से जोड़ रहे हैं और इसे उनकी भविष्यवाणी मान रहे हैं। पूरे टूर्नामेंट में पेड्री ने स्पेन के लिए हर मुकाबला खेला और मिडफील्ड में शानदार प्रदर्शन किया। उनकी सटीक पासिंग, खेल पर नियंत्रण और रचनात्मकता ने टीम को लगातार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। फाइनल मुकाबले में निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं। अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई शानदार बचाव किए, जबकि इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडेज़ दूसरे पीले कार्ड के बाद मैदान से बाहर हो गए, जिससे अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया। एक्स्ट्रा टाइम में पहले निको विलियम्स का गोल फाउल के कारण रद्द हुआ, लेकिन 106वें मिनट में निको विलियम्स के हेडर पर फेरान टोरेस ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया। यही गोल स्पेन की जीत का कारण बना। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता। कोच लुइस डे ला फुएंते के नेतृत्व में टीम ने लगातार 38वां अंतरराष्ट्रीय मैच बिना हार के पूरा कर यूरोपीय टीमों का नया रिकॉर्ड भी बनाया। UEFA यूरो 2024 जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे पेड्री ने अब अपने करियर में विश्व कप ट्रॉफी भी जोड़ ली। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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पूर्व शतरंज स्टार जुडित पोलगर बन सकती हैं हंगरी की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने दिया प्रस्ताव

विश्व शतरंज की दिग्गज खिलाड़ी जुडित पोलगर जल्द ही हंगरी की राष्ट्रपति बन सकती हैं। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने उन्हें राष्ट्रपति पद संभालने का प्रस्ताव दिया है। प्रधानमंत्री ने फेसबुक पोस्ट के जरिए घोषणा करते हुए कहा कि वह जुडित पोलगर के नाम का प्रस्ताव राष्ट्रपति पद के लिए रखेंगे। 49 वर्षीय जुडित पोलगर को दुनिया की सबसे महान महिला शतरंज खिलाड़ियों में गिना जाता है। उन्होंने महज 15 साल और 4 महीने की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनकर सबसे कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने का रिकॉर्ड बनाया था। इसी वर्ष उनके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘द क्वीन ऑफ चेस’ भी रिलीज हुई है। महिला वर्ग की बजाय ओपन टूर्नामेंट चुने जुडित ने छह साल की उम्र से शतरंज खेलना शुरू किया और अपने पूरे करियर में महिला प्रतियोगिताओं की बजाय ओपन टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेना पसंद किया। उन्होंने पुरुष खिलाड़ियों के खिलाफ भी लगातार मुकाबले खेले। वर्ष 2005 में वह विश्व शतरंज रैंकिंग में आठवें स्थान तक पहुंचीं, जो किसी महिला खिलाड़ी की अब तक की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग मानी जाती है। वह 2700 से अधिक एलो रेटिंग हासिल करने वाली पहली और इकलौती महिला खिलाड़ी भी हैं। कई विश्व चैंपियनों को दी मात जुडित पोलगर ने सबसे कम उम्र में ग्रैंडमास्टर बनकर बॉबी फिशर का रिकॉर्ड तोड़ा था। अपने करियर में उन्होंने गैरी कास्पारोव, विश्वनाथन आनंद, अनातोली कार्पोव, बोरिस स्पास्की और मैग्नस कार्लसन समेत 11 विश्व चैंपियनों को क्लासिकल या रैपिड मुकाबलों में हराया। 26 साल तक रहीं दुनिया की नंबर-1 महिला खिलाड़ी जुडित 1 फरवरी 1989 से 1 मार्च 2015 तक लगातार 26 साल 28 दिनों तक महिला विश्व रैंकिंग में नंबर-1 रहीं। उन्होंने पांच बार शतरंज ओलंपियाड का खिताब जीता और उन्हें हंगरी के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल ‘ऑर्डर ऑफ सेंट स्टीफन’ से भी सम्मानित किया गया। भारतीय खिलाड़ियों की भी कर चुकी हैं तारीफ मार्च 2026 में दिए एक इंटरव्यू में जुडित पोलगर ने कहा था कि अगली बड़ी महिला शतरंज खिलाड़ी भारत से निकल सकती है। उन्होंने भारतीय जूनियर खिलाड़ियों और देश में तेजी से बढ़ रहे शतरंज के स्तर की सराहना की थी। प्रधानमंत्री बोले- देश को ऐसी राष्ट्रपति चाहिए जिस पर हर नागरिक गर्व करे प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने कहा कि हंगरी को ऐसी राष्ट्रपति की जरूरत है जो देश को एकजुट कर सके और जिस पर हर नागरिक गर्व महसूस करे। उन्होंने कहा कि जुडित पोलगर ने अपनी पहचान राजनीति से नहीं, बल्कि प्रतिभा, मेहनत और ईमानदारी के दम पर बनाई है। यदि वह यह जिम्मेदारी स्वीकार करती हैं तो यह पूरे देश के लिए सम्मान की बात होगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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