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Yashwant Verma

Allahabad High Court Controversy जले नोटों के बीच Justice Yashwant Verma का Resignation

क्या है पूरा मामला? देश की न्यायपालिका से जुड़ा एक गंभीर मामला इन दिनों सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा (Justice Yashwant Verma) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला उस विवाद के बाद आया, जिसमें उनके घर से ₹500 के नोटों के जले हुए बंडल मिलने की बात सामने आई थी। न्यायिक कार्यों से पहले ही किया गया था अलग जैसे ही यह मामला सामने आया, हाईकोर्ट प्रशासन ने एहतियातन उन्हें न्यायिक कामकाज से दूर कर दिया था। शुरुआती जांच में मामला गंभीर नजर आया, जिसके बाद उनके ऊपर दबाव लगातार बढ़ता गया। जले हुए नोटों ने खड़े किए बड़े सवाल सूत्रों के अनुसार, घर में जली हुई नकदी मिलने की घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में कैश आखिर वहां तक पहुंचा कैसे। फिलहाल, इस पूरे मामले पर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है। न्यायपालिका की साख पर उठे सवाल इस विवाद ने न्यायपालिका की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर भी बहस छेड़ दी है। आम लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है और हर कोई सच्चाई जानना चाहता है। आगे क्या? जांच पर टिकी सबकी नजर Justice Yashwant Verma का इस्तीफा इस मामले में एक बड़ा कदम जरूर माना जा रहा है, लेकिन असली कहानी अभी बाकी है। अब सबकी नजर जांच एजेंसियों पर है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की कोशिश करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कुछ मंदिरों में प्रसाद में शराब दी जाती है: सरकार का Supreme Court में बयान

कुछ मंदिरों में प्रसाद में शराब दी जाती है: सरकार का Supreme Court में बयान

देश में आस्था और परंपराओं से जुड़े मामलों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। सबरीमाला मंदिर से जुड़े केस की सुनवाई के दौरान सरकार ने Supreme Court में एक अहम बात कही है। सरकार ने अदालत को बताया कि देश के कई मंदिरों में प्रसाद के रूप में शराब भी चढ़ाई जाती है और यह वहां की परंपरा का हिस्सा है। ऐसे में कोर्ट यह नहीं कह सकता कि वहां शराब का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए। यह सुनवाई केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से जुड़ी है, जहां महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक परंपराओं को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस दौरान धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों की सीमा को लेकर भी चर्चा हो रही है। सरकार ने कहा कि भारत में अलग-अलग जगहों पर धार्मिक परंपराएं अलग होती हैं। कुछ मंदिरों में शराब को भी प्रसाद के रूप में स्वीकार किया जाता है। यह सदियों पुरानी मान्यता है, जिसे अदालत बदलने का निर्देश नहीं दे सकती। सरकार का यह भी कहना है कि कोर्ट को धार्मिक परंपराओं में दखल देने से बचना चाहिए, क्योंकि यह लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है। सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि क्या अदालत को धार्मिक परंपराओं की समीक्षा करने का अधिकार है। इस पर कोर्ट ने कहा कि उसे संविधान के तहत रिव्यू करने का पूरा अधिकार है। यह मामला सिर्फ सबरीमाला मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं के अधिकार से जुड़ा हुआ है। आने वाला फैसला यह तय कर सकता है कि धार्मिक मामलों में कोर्ट की सीमा कहां तक है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Badruddin Ajmal Impact in Assam Politics: BJP या Congress—किसे हो रहा ज्यादा नुकसान?

Badruddin Ajmal Impact in Assam Politics: BJP या Congress—किसे हो रहा ज्यादा नुकसान?

असम की राजनीति में Badruddin Ajmal एक ऐसा नाम है, जो हर चुनाव में चर्चा का केंद्र बन जाता है। उनकी पार्टी AIUDF का प्रभाव खासकर कुछ क्षेत्रों में काफी मजबूत है, और यही वजह है कि उनके राजनीतिक कदम सीधे तौर पर BJP और Congress—दोनों पर असर डालते हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर अजमल की मौजूदगी से सबसे ज्यादा नुकसान किसे हो रहा है? Congress के वोट बैंक पर सीधा असर राजनीतिक विश्लेषण की बात करें तो Badruddin Ajmal की पार्टी का सबसे बड़ा प्रभाव Congress के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ता है। इस वजह से Congress को कई बार ऐसे क्षेत्रों में नुकसान उठाना पड़ता है, जहां पहले उसकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी। BJP को कैसे मिलता है फायदा? जहां एक तरफ वोटों का बंटवारा होता है, वहीं इसका अप्रत्यक्ष फायदा BJP को मिल सकता है। जब विपक्षी वोट एकजुट नहीं रहते, तो चुनावी नतीजों में BJP को बढ़त मिलना आसान हो जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में Badruddin Ajmal की बयानबाजी और राजनीति BJP के लिए भी चुनौती खड़ी कर देती है, खासकर जब मुद्दे सांप्रदायिक रूप ले लेते हैं। क्या बदल रहे हैं सियासी समीकरण? असम में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह साफ है कि अजमल की भूमिका ‘किंगमेकर’ जैसी बनती जा रही है। इन सभी पहलुओं में उनका प्रभाव साफ नजर आता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar Politics Update: नीतीश कुमार के इस्तीफे की अटकलें तेज, सम्राट चौधरी CM पद की रेस में सबसे आगे

Bihar Politics Update: नीतीश कुमार के इस्तीफे की अटकलें तेज, सम्राट चौधरी CM पद की रेस में सबसे आगे

Bihar Politics Update: क्या बदलने वाला है सत्ता का समीकरण? Bihar की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। खबरें सामने आ रही हैं कि Nitish Kumar के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इस संभावित बदलाव के बीच Samrat Choudhary का नाम नए मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे आगे चल रहा है। क्यों उठ रही हैं इस्तीफे की अटकलें? पिछले कुछ समय से बिहार में गठबंधन की राजनीति में लगातार बदलाव देखने को मिले हैं। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि सत्ता में एक बड़ा फेरबदल हो सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो इसका असर सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। Samrat Choudhary क्यों हैं मजबूत दावेदार? Samrat Choudhary को संगठन में मजबूत पकड़ और तेजतर्रार नेता के रूप में देखा जाता है। इन्हीं कारणों से उन्हें CM पद की रेस में आगे माना जा रहा है। क्या कहते हैं सियासी समीकरण? बिहार की राजनीति हमेशा से गठबंधनों और रणनीतियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। Nitish Kumar का राजनीतिक अनुभव और फैसले अक्सर चौंकाने वाले रहे हैं, इसलिए अंतिम निर्णय क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जनता पर क्या होगा असर? अगर मुख्यमंत्री पद में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर राज्य की नीतियों और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। लोगों के बीच भी इस खबर को लेकर उत्सुकता बनी हुई है — क्या यह बदलाव नई दिशा देगा या सिर्फ राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Volkswagen Taigun SUV लॉन्च: 40+ Safety Features, 8 Gear Transmission के साथ Creta को देगी कड़ी टक्कर

Volkswagen Taigun SUV लॉन्च: 40+ Safety Features, 8 Gear Transmission के साथ Creta को देगी कड़ी टक्कर

Volkswagen Taigun New SUV: दमदार फीचर्स और सेफ्टी के साथ बाजार में एंट्री भारतीय ऑटो मार्केट में SUV सेगमेंट लगातार तेजी से बढ़ रहा है, और इसी रेस में अब Volkswagen Taigun एक बार फिर चर्चा में है। नए अपडेट्स और एडवांस फीचर्स के साथ यह SUV सीधे तौर पर Hyundai Creta और आने वाली Tata Sierra जैसी गाड़ियों को टक्कर देने के लिए तैयार है। इस नई Taigun में कंपनी ने न सिर्फ परफॉर्मेंस पर ध्यान दिया है, बल्कि सेफ्टी और कम्फर्ट को भी खास प्राथमिकता दी गई है, जो आज के ग्राहकों की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है। 40+ सेफ्टी फीचर्स: सेफ्टी में कोई समझौता नहीं नई Taigun का सबसे बड़ा हाईलाइट इसका सेफ्टी पैकेज है। इसमें 40 से ज्यादा सेफ्टी फीचर्स दिए गए हैं, जो इसे अपने सेगमेंट में मजबूत बनाते हैं। ये सभी फीचर्स मिलकर ड्राइविंग को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाते हैं, खासकर भारतीय सड़कों के हिसाब से। 8 Gear Transmission: स्मूद और पावरफुल ड्राइविंग एक्सपीरियंस इस SUV में 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिया गया है, जो स्मूद ड्राइविंग के साथ बेहतर माइलेज और परफॉर्मेंस देता है। सिटी ड्राइव हो या हाईवे, गाड़ी हर जगह संतुलित और कंट्रोल में महसूस होती है। इंजन और परफॉर्मेंस: पावर के साथ एफिशिएंसी Taigun में टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन दिया गया है, जो पावर और माइलेज दोनों का अच्छा बैलेंस देता है। यह SUV उन लोगों के लिए खास है जो डेली यूज़ के साथ-साथ लॉन्ग ड्राइव का भी आनंद लेना चाहते हैं। इंटीरियर और कम्फर्ट: प्रीमियम फील के साथ Taigun का इंटीरियर काफी मॉडर्न और प्रीमियम बनाया गया है। ड्राइवर और पैसेंजर्स दोनों के लिए यह SUV आरामदायक अनुभव देती है। Creta और Sierra को देगी टक्कर भारतीय मार्केट में Hyundai Creta पहले से ही एक मजबूत खिलाड़ी है, वहीं Tata Sierra की वापसी भी चर्चा में है। ऐसे में Taigun अपने सेफ्टी फीचर्स, जर्मन इंजीनियरिंग और मजबूत बिल्ड क्वालिटी के दम पर इन दोनों को कड़ी टक्कर देने वाली है। निष्कर्ष: क्यों है Taigun एक स्मार्ट चॉइस? अगर आप एक ऐसी SUV ढूंढ रहे हैं जिसमें सेफ्टी, परफॉर्मेंस और स्टाइल तीनों का बैलेंस हो, तो Volkswagen Taigun एक मजबूत विकल्प बनकर सामने आती है। यह गाड़ी सिर्फ फीचर्स की बात नहीं करती, बल्कि ड्राइविंग एक्सपीरियंस को बेहतर बनाने पर फोकस करती है — और यही इसे भीड़ से अलग बनाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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COP33 Hosting Update: भारत ने वापस लिया Climate Summit का प्रस्ताव | 2028 में होना था आयोजन

COP33 Hosting Update: भारत ने वापस लिया Climate Summit का प्रस्ताव | 2028 में होना था आयोजन

एक अहम वैश्विक फैसले में भारत ने 2028 में होने वाले COP33 की मेजबानी का प्रस्ताव वापस ले लिया है। यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर दुनिया के देशों को एक मंच पर लाने के लिए जाना जाता है। क्या है पूरा मामला? भारत को 2028 में COP33 की मेजबानी करनी थी, लेकिन अब उसने यह प्रस्ताव वापस लेने का फैसला किया है। हालांकि इसके पीछे के सटीक कारणों की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन इसे एक बड़ा कूटनीतिक निर्णय माना जा रहा है। क्यों अहम है COP33? COP (Conference of the Parties) जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का एक प्रमुख सम्मेलन है, जहां दुनियाभर के देश पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इस मंच पर लिए गए फैसले वैश्विक नीतियों को प्रभावित करते हैं। भारत के फैसले के मायने भारत का यह कदम कई सवाल खड़े करता है। एक ओर यह देश वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस तरह का फैसला कूटनीतिक और रणनीतिक पहलुओं से जुड़ा हो सकता है। आगे क्या? अब यह देखना दिलचस्प होगा कि COP33 की मेजबानी किस देश को मिलती है और भारत इस वैश्विक मुद्दे पर अपनी भूमिका कैसे आगे बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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LPG Supply Update: गैस की नहीं होगी किल्लत | Government का नया प्लान, इन लोगों को मिलेगा Priority Cylinder

LPG Supply Update: गैस की नहीं होगी किल्लत | Government का नया प्लान, इन लोगों को मिलेगा Priority Cylinder

देशभर में LPG सिलेंडर की संभावित कमी को लेकर चिंताओं के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ऐसा सिस्टम तैयार किया है जिससे जरूरतमंद लोगों तक गैस की सप्लाई बिना रुकावट के पहुंच सके। नई योजना के तहत अब LPG सिलेंडर की डिलीवरी को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इसका मतलब है कि कुछ खास वर्गों को सबसे पहले गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। किन लोगों को मिलेगी सबसे पहले LPG? सरकारी योजना के अनुसार, उज्ज्वला योजना से जुड़े परिवार, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग और जिनके पास गैस का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है—उन्हें सबसे पहले LPG सिलेंडर दिया जाएगा। इसके अलावा अस्पतालों, छोटे ढाबों और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है। क्यों उठाना पड़ा यह कदम? हाल के समय में बढ़ती मांग और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के कारण कई जगहों पर LPG की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही थी। ऐसे में सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है कि कोई भी जरूरतमंद गैस से वंचित न रहे। कैसे काम करेगा नया सिस्टम? इस नई व्यवस्था में गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पहले प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध कराएं। इसके बाद सामान्य उपभोक्ताओं की बारी आएगी। साथ ही, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए सप्लाई पर नजर रखी जाएगी, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। आम लोगों पर क्या होगा असर? इस फैसले से आम उपभोक्ताओं को थोड़ी देरी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसका मकसद है कि जिनके लिए LPG बेहद जरूरी है, उन्हें समय पर सिलेंडर मिल सके।
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Government vs Court : धार्मिक परंपरा पर बहस, किसका है अंतिम अधिकार?

Government vs Court : धार्मिक परंपरा पर बहस, किसका है अंतिम अधिकार?

देश में एक बार फिर धर्म और कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। Government vs Court के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि धार्मिक परंपराओं को अंधविश्वास माना जाए या नहीं, और इसका फैसला कौन करेगा। सरकार का कहना है कि किसी भी धार्मिक परंपरा को अंधविश्वास बताना कोर्ट का काम नहीं है। सरकार के मुताबिक, इस तरह के फैसले लेना विधायिका (Legislature) का अधिकार है, क्योंकि वही जनता द्वारा चुनी गई संस्था है।सरकार ने यह भी कहा कि कोर्ट इस मामले में एक्सपर्ट नहीं है, इसलिए उसे सीमित दायरे में ही रहकर काम करना चाहिए। वहीं, कोर्ट ने साफ कहा कि उसे किसी भी मामले की समीक्षा (Review) करने का पूरा अधिकार है। अगर किसी परंपरा से लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं, तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है।कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह संविधान के आधार पर हर मुद्दे को देखने के लिए स्वतंत्र है। इस बहस का असर सीधे आम लोगों की आस्था और अधिकारों पर पड़ सकता है। एक तरफ लोग अपनी धार्मिक परंपराओं को बचाना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ यह भी जरूरी है कि किसी भी परंपरा के नाम पर किसी के अधिकारों का हनन न हो। यह मुद्दा सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि देश में संविधान, आस्था और कानून के बीच संतुलन कैसे बनेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC का आरोप- चुनाव आयोग ने 5 मिनट में बाहर निकाला

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गर्मी बढ़ गई है। Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया है कि जब उनके नेता चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर Election Commission of India (EC) के पास पहुंचे, तो उन्हें सिर्फ 5 मिनट के भीतर ही बाहर कर दिया गया। TMC नेताओं का कहना है कि वे SIR (Special Intensive Revision) को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने गए थे। उनका आरोप है कि आयोग ने उनकी बात ठीक से सुनी भी नहीं और उन्हें जल्दबाजी में बाहर जाने को कह दिया। इस घटना के बाद TMC ने चुनाव आयोग के रवैये पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अगर उनकी बात ही नहीं सुनी जाएगी, तो निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव होंगे। वहीं, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को गंभीरता से लिया है, लेकिन साफ कहा है कि इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव पूरी तरह “भयमुक्त और निष्पक्ष” होंगे। आयोग का कहना है कि वह हर मतदाता को सुरक्षित माहौल देने के लिए पूरी तरह तैयार है। राजनीतिक माहौल को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले चुनावों में राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या इस बार चुनाव वास्तव में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो पाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kanpur Kidney Scam: ‘मेरी किडनी निकाल ली’—Hospital से आए Phone Call ने खोली साजिश की परतें

Kanpur Kidney Scam: ‘मेरी किडनी निकाल ली’—Hospital से आए Phone Call ने खोली साजिश की परतें

Kanpur से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। शहर की पुलिस को एक ऐसा फोन कॉल मिला, जिसने पूरे सिस्टम को हिला दिया। कॉल करने वाले ने घबराई आवाज में बताया कि उसकी किडनी धोखे से निकाल ली गई है। जैसे ही यह सूचना मिली, पुलिस बिना समय गंवाए सीधे उस अस्पताल पहुंची, जहां से कॉल किया गया था। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझा और तुरंत जांच शुरू कर दी। पीड़ित की बात सुनकर साफ था कि यह कोई सामान्य मामला नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। शुरुआती जांच में कई सवाल खड़े हुए—क्या यह किसी गिरोह का काम है? क्या अस्पताल के अंदर ही कोई मिलीभगत है? इस घटना ने लोगों के मन में डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। कोई भी यह सोचने पर मजबूर है कि अगर अस्पताल जैसी जगह पर भी ऐसा हो सकता है, तो भरोसा किस पर किया जाए। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और हर एंगल से जांच की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
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Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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