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EU

India-EU Free Trade Agreement भारतीय Industries को मिलेगा फायदा

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लंबे समय से चली आ रही बातचीत के बाद ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे विशेषज्ञ अक्सर “सभी समझौतों की माँ” भी कहते हैं। यह समझौता लगभग 2 अरब लोगों के बाजार और विश्व GDP के लगभग 25% हिस्से को कवर करता है। इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच अधिकतर सामान पर शुल्क कम या खत्म हो जाएगा। इसका मतलब है कि भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय मार्केट तक पहुंच आसान होगी, और यूरोपीय कंपनियों के लिए भी भारत में व्यापार करना सरल होगा। कौन से सेक्टर होंगे सबसे ज्यादा फायदे में? अमेरिकी प्रशासन की राय ट्रंप प्रशासन के समय के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर ने कहा कि यह समझौता भारत के लिए काफी लाभकारी साबित होगा। उन्होंने बताया कि भारत को यूरोप में व्यापार का बेहतर अवसर और कुछ मामलों में वर्कर वीज़ा जैसी सुविधाएँ भी मिल सकती हैं। ग्रीयर ने यह भी कहा कि अमेरिका के हाल के वर्षों के प्रोटेक्शनिस्ट टैरिफ और घरेलू उत्पादन प्रोत्साहन की नीतियों के चलते, भारत ने EU के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा चुनी। क्यों है यह समझौता खास? पिछले कुछ सालों में अमेरिका ने भारत से जुड़े कई मामलों में 25% तक टैरिफ लगाए, जिससे भारत ने यूरोप के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना जरूरी समझा। इस समझौते से भारत को न केवल निर्यात में फायदा, बल्कि वैश्विक व्यापार में अधिक विकल्प और रणनीतिक ताकत भी मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत और यूरोप के संबंधों को नए आयाम देगा और अमेरिका की प्रोटेक्शनिस्ट नीतियों के बीच भारत की जीत साबित होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Parliament

Parliament में ‘कानून वापस लो’ के नारे राष्ट्रपति के अभिभाषण में उठी बहस

संसद (Parliament) में राष्ट्रपति के अभिभाषण (Speech) के दौरान हंगामा मच गया। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में देश के विकास, सामाजिक सुधार और नई नीतियों का जिक्र किया। लेकिन जैसे ही VB–जी राम जी कानून का नाम आया, विपक्षी सदस्य जोर-जोर से नारे लगाने लगे। ‘कानून वापस लो’ के नारे गूंजे सदन में सदन में “कानून वापस लो” के नारे गूंजने लगे और हंगामा इतना बढ़ गया कि कुछ समय के लिए कार्यवाही रोकनी पड़ी। विपक्ष ने कानून के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त की, जबकि सत्तापक्ष ने सदन में शांति बनाए रखने की कोशिश की। राजनीतिक विशेषज्ञों की राय विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में विधायी और राजनीतिक बहसों (Legislative & Political Debates) में अहम भूमिका निभा सकता है। हालांकि, राष्ट्रपति ने अपने भाषण में देश की प्रगति और सामाजिक सुधार पर जोर देना जारी रखा। संसद में गहराते मतभेद इस घटना ने यह दिखा दिया कि संसद में संवैधानिक मुद्दों (Constitutional Issues) और कानूनों (Laws) पर राजनीतिक मतभेद कितने गहरे हैं। आगामी सत्रों में ऐसे मुद्दे फिर से बहस और हंगामे को जन्म दे सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

Magh Mela प्रशासन से नाराज़ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला

प्रयागराज माघ मेला 2026 में बड़ा घटनाक्रम प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला बीच में ही छोड़ दिया। उनके इस फैसले ने संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच गहरी चर्चा छेड़ दी है। मौनी अमावस्या पर संगम स्नान नहीं हो सका मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर शंकराचार्य संगम स्नान के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी पालकी को पुलिस और मेला प्रशासन ने रोक दिया। प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण का हवाला देते हुए उन्हें संगम तट तक जाने की अनुमति नहीं दी। प्रशासनिक रोक से आहत हुए शंकराचार्य इस घटना से व्यथित होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उसी दिन संगम स्नान करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि संगम स्नान केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आस्था, सम्मान और परंपरा से जुड़ा विषय है। धरने पर बैठे, संत सम्मान का मुद्दा उठाया स्नान न होने के बाद शंकराचार्य ने मेला क्षेत्र में अपने शिविर के बाहर धरना शुरू किया। उन्होंने प्रशासन पर संत समाज की गरिमा की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि यह मामला व्यक्तिगत नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादाओं से जुड़ा है। कोई समाधान नहीं, माघ मेला छोड़ने का फैसला कई दिनों तक चले विरोध और बातचीत के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तो शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ने का निर्णय ले लिया। भारी मन से प्रयागराज से विदाई मेला छोड़ते समय उन्होंने कहा,“मैं श्रद्धा लेकर यहां आया था, लेकिन बिना संगम स्नान किए लौट रहा हूं। ऐसी स्थिति की मैंने कभी कल्पना नहीं की थी।”उनके शब्दों में पीड़ा और निराशा साफ झलक रही थी। संत समाज और प्रशासन के बीच बढ़ी दूरी इस पूरे घटनाक्रम ने माघ मेला प्रशासन और संत समाज के संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई संत संगठनों ने इस पर नाराज़गी जताई है, वहीं सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। माघ मेला व्यवस्था पर उठे सवाल हालांकि प्रशासन का कहना है कि व्यवस्था सामान्य है, लेकिन शंकराचार्य के माघ मेला छोड़ने की घटना ने संतों के सम्मान, धार्मिक परंपराओं और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ajit Pawar

Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar Plane Crash बारामती में लैंडिंग के दौरान बड़ा हादसा

महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) का एक विमान हादसे में निधन हो गया। यह दर्दनाक दुर्घटना पुणे जिले के बारामती में लैंडिंग के दौरान हुई, जिसमें विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई। कैसे हुआ Ajit Pawar Plane Crash? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अजित पवार जिस छोटे विमान (Charter Aircraft) से यात्रा कर रहे थे, वह बारामती एयरस्ट्रिप पर उतरने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह ज़मीन से टकराकर क्रैश हो गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के तुरंत बाद मौके पर दमकल और राहत दल पहुंचा, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। विमान में कौन-कौन सवार थे? इस दुर्घटना में: सभी की मौके पर ही मौत हो गई। किसी भी यात्री को बचाया नहीं जा सका। बारामती जा रहे थे Ajit Pawar बताया जा रहा है कि अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे, जहां उन्हें कुछ स्थानीय कार्यक्रमों और बैठकों में शामिल होना था। बारामती उनका गृह क्षेत्र भी माना जाता है, जिससे यह हादसा और भी भावनात्मक हो गया है। हादसे की वजह क्या थी? फिलहाल दुर्घटना के सटीक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।संभावित कारणों में: DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) और अन्य जांच एजेंसियां मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। देशभर में शोक की लहर Ajit Pawar Death News सामने आने के बाद महाराष्ट्र ही नहीं, पूरे देश में शोक का माहौल है। राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने इस दुर्घटना को अपूरणीय क्षति बताया है। सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई है। राजनीति के लिए बड़ा झटका Ajit Pawar को महाराष्ट्र की राजनीति का एक मजबूत और निर्णायक चेहरा माना जाता था। उनका अचानक इस तरह जाना राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EU

भारत‑EU Trade Deal 2026 मोदी बोले “दुनियाभर में इसकी चर्चा हो रही है”

भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग 20 साल की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक Trade Deal / Free Trade Agreement (FTA) पर आज सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह समझौता भारत और EU दोनों के लिए बड़े आर्थिक अवसर लेकर आएगा। FTA से भारत और EU को क्या मिलेगा? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह डील दुनियाभर में चर्चा का विषय बन रही है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।” अमेरिका की प्रतिक्रिया इस डील को लेकर अमेरिका ने अपनी नाराजगी जताई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता कुछ मामलों में अमेरिकी हितों के विपरीत हो सकता है। विशेष रूप से रूस से तेल आयात और टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका ने आपत्ति व्यक्त की है। पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ और व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में भारत ने EU के साथ यह समझौता कर अपने विकल्प मजबूत किए हैं। Global Impact और भविष्य विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत और EU के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा और दुनिया के व्यापारिक संतुलन पर असर डाल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह डील सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान को और मजबूत करेगी।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Alankar Agnihotri

Alankar Agnihotri बरेली CM Office में विवाद और सस्पेंशन

उत्तर प्रदेश के बरेली में City Magistrate अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने 26 जनवरी को अचानक अपने पद से इस्तीफा (resignation) दे दिया, जिससे प्रशासन में हलचल मच गई। उन्होंने यह कदम मुख्य रूप से नई UGC नियमों और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में उठाया। उनके इस्तीफे के बाद, उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए इसकी वापसी की मांग की। Allegations और Administrative Response इस्तीफा देने के तुरंत बाद, Alankar Agnihotri ने आरोप लगाया कि उन्हें बरेली DM कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया। उनका कहना था कि उन्हें कार्यालय में रोका गया और उनके साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जान का खतरा महसूस हुआ। वहीं, प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि मजिस्ट्रेट को सिर्फ बातचीत के लिए बुलाया गया था। किसी तरह का बंधक बनाने या अपमान करने का मामला नहीं था। Suspension और Departmental Inquiry उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) को सस्पेंड कर दिया। उनके खिलाफ departmental inquiry शुरू कर दी गई है। सरकार के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर उनका व्यवहार अनुशासनहीन प्रतीत हुआ। सस्पेंड के दौरान उन्हें सीमित भत्ता मिलेगा। धरना और विरोध सस्पेंशन के बाद, Alankar Agnihotri कलेक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। उनका कहना है कि जब तक DM यह स्पष्ट नहीं करेंगे कि उन्हें अपमानजनक शब्द किसने कहे, धरना जारी रहेगा। मजिस्ट्रेट ने इसे अपनी न्याय की लड़ाई और प्रशासन पर विश्वासघात का प्रतीक बताया। विवाद के मुख्य पहलू यह मामला न केवल बरेली प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है, बल्कि राज्य सरकार की संवेदनशीलता और अधिकारी-सरकारी नीतियों पर सवाल भी उठा रहा है। अब देखना होगा कि departmental inquiry और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UGC

UGC New Rules विवाद शिक्षा नीति से सियासत तक, बीजेपी में असंतोष और विपक्ष की चुप्पी

University Grants Commission (UGC) के नए नियम इन दिनों सिर्फ शिक्षा जगत में ही नहीं, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहां आमतौर पर ऐसे मुद्दों पर विपक्ष सबसे पहले मोर्चा खोलता है, इस बार तस्वीर उलटी है। सत्तारूढ़ बीजेपी के भीतर ही असहजता और विरोध के स्वर उभर रहे हैं, जबकि विपक्ष अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रहा है। यह पूरा विवाद अब केवल नियमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघीय ढांचे, राज्यों के अधिकार और आने वाले चुनावों की राजनीति से भी जुड़ गया है। UGC New Rules पर बीजेपी के अंदर विरोध क्यों? UGC के नए नियमों को लेकर सबसे बड़ा सवाल राज्यों की भूमिका पर उठ रहा है। शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आती है, यानी इसमें केंद्र और राज्य दोनों को अधिकार हैं। लेकिन नए प्रावधानों से यह धारणा बन रही है कि केंद्र सरकार का दखल राज्यों के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा व्यवस्था में बढ़ जाएगा। खास तौर पर कुलपतियों की नियुक्ति, प्रशासनिक ढांचे और अकादमिक स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर कई राज्य सरकारें खुद को असहज महसूस कर रही हैं। यही वजह है कि बीजेपी-शासित राज्यों के कुछ नेता भी खुलकर या अंदरखाने इन नियमों पर सवाल उठा रहे हैं। उनकी चिंता सिर्फ सैद्धांतिक नहीं है। ज़मीनी हकीकत यह है कि विश्वविद्यालयों में अगर शिक्षक संगठनों या छात्र समूहों का विरोध तेज़ होता है, तो उसका सीधा असर राज्य सरकारों और स्थानीय नेतृत्व पर पड़ेगा। चुनावी सालों में कोई भी नेता ऐसा जोखिम नहीं लेना चाहता। पार्टी के भीतर एक और खींचतान भी साफ दिखती है। एक धड़ा मानता है कि उच्च शिक्षा में एकरूपता और तेज़ सुधार के लिए केंद्रीकरण ज़रूरी है। वहीं दूसरा धड़ा इसे “ओवर-रेगुलेशन” और संघीय ढांचे पर हमला बता रहा है। इसी टकराव ने बीजेपी के अंदर विरोध को हवा दी है। विपक्ष की चुप्पी के मायने क्या हैं? विपक्ष की चुप्पी पहली नज़र में अजीब लगती है, लेकिन इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति दिखती है। पहली बात, UGC के नियम आम जनता के लिए तकनीकी और जटिल हैं। यह ऐसा मुद्दा नहीं है जो तुरंत भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करे। विपक्ष शायद इंतज़ार कर रहा है कि शिक्षक संगठन, छात्र संघ या राज्य सरकारें पहले खुलकर विरोध करें, ताकि इसे जन-आंदोलन का रूप दिया जा सके। दूसरी बात, विपक्ष बीजेपी के भीतर उभर रही दरार को अपने आप गहराने देना चाहता है। अगर सत्तारूढ़ पार्टी अपने ही फैसले पर बंटी हुई दिखती है, तो विपक्ष के लिए यह राजनीतिक रूप से फायदेमंद है। ऐसे में सीधे हमला करने के बजाय “वेट एंड वॉच” की नीति ज्यादा सुरक्षित मानी जा रही है। तीसरी वजह राज्यों की राजनीति से जुड़ी है। तमिलनाडु और केरल जैसे विपक्ष-शासित राज्यों में केंद्र के शिक्षा में हस्तक्षेप का विरोध पहले से ही होता रहा है। वहां यह मुद्दा नया नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष फिलहाल महंगाई, बेरोज़गारी, जाति जनगणना और किसानों जैसे हाई-वोल्टेज मुद्दों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। राजनीति में इसके संकेत क्या हैं? इस पूरे विवाद से तीन बड़े संकेत मिलते हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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India

India-EU Summit 2026 राजघाट विज़िट से लेकर Trade Deal तक, दिल्ली में सुरक्षा और ट्रैफिक अलर्ट

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों में आज का दिन खास बन गया। राजधानी दिल्ली में 16वां India-EU Summit आयोजित हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और EU के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने माहौल को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। एक तरफ राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि, तो दूसरी ओर ट्रेड डील और रणनीतिक साझेदारी पर बड़ी बातचीत — आज का हर पल सुर्खियों में है। राजघाट दौरा: सुरक्षा के चलते ट्रैफिक पर असर सुबह EU नेताओं के राजघाट पहुंचने से पहले ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कई इलाकों में ट्रैफिक कर्फ्यू और डायवर्जन लागू कर दिए थे।बहादुर शाह ज़फर मार्ग, ITO चौक, दिल्ली गेट, शांतिवन चौक, IP फ्लाईओवर और असफ अली रोड जैसे रास्तों पर कुछ घंटों तक गाड़ियों की आवाजाही सीमित रही। राजघाट में EU प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। यह पल सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि भारत-EU संबंधों में सम्मान और साझेदारी का प्रतीक भी माना गया। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने पहले ही यात्रियों से अपील की थी कि वे सुबह के समय इन मार्गों से बचें और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें। कई लोगों को दफ्तर और स्कूल पहुंचने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे एक अहम अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए जरूरी कदम बताया। Summit की बड़ी तस्वीर: रिश्तों में नया अध्याय राजघाट कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन से मुलाकात की। बातचीत में व्यापार, निवेश, क्लाइमेट चेंज, टेक्नोलॉजी, डिफेंस और ग्लोबल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। उर्सुला वॉन डर लेयेन ने कहा कि“एक मजबूत और सफल भारत पूरी दुनिया के लिए स्थिरता और समृद्धि लेकर आता है।”उनके इस बयान को दोनों पक्षों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत माना जा रहा है। Free Trade Agreement: दो दशकों बाद बड़ी उम्मीद इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा फोकस रहा India-EU Free Trade Agreement (FTA)। करीब 20 साल से अटका यह समझौता अब अंतिम दौर में पहुंचता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अगर यह डील अगले कुछ महीनों में औपचारिक रूप से साइन हो जाती है, तो इससे भारत के मैन्युफैक्चरिंग, IT, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर को बड़ा फायदा मिल सकता है। EU पहले से ही भारत का एक प्रमुख ट्रेड पार्टनर है, और यह समझौता रिश्तों को नई ऊंचाई दे सकता है। Republic Day से Summit तक: मजबूत होता भरोसा गौर करने वाली बात यह भी है कि EU नेताओं ने 26 जनवरी को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया था। परेड देखने के बाद ही यह साफ हो गया था कि इस बार का India-EU Summit सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी साझेदारी की नींव रखने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Uttarakhand

Uttarakhand Temple बदरीनाथ-केदारनाथ में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का प्लान

उत्तराखंड (Uttarakhand ) के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों बदरीनाथ धाम और केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आ सकता है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। यह प्रस्ताव समिति की आगामी बोर्ड बैठक में पेश किया जाएगा। BKTC के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के अनुसार, इस कदम का मकसद देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता को बनाए रखना है। उनका कहना है कि परंपरागत रूप से इन धामों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश नहीं होता था, लेकिन समय के साथ यह नियम ढीला पड़ गया। अब समिति इसे फिर से सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। Gangotri Dham में पहले ही लागू हो चुका है बैन इस फैसले की पृष्ठभूमि में गंगोत्री धाम का उदाहरण भी अहम माना जा रहा है। वहां पहले ही गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई जा चुकी है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया था और इसका उद्देश्य मंदिर की धार्मिक गरिमा की रक्षा बताया गया था। अब गंगोत्री के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह के नियम लागू करने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों पर प्रवेश नियम और सख्त हो सकते हैं। अभी फैसला नहीं, सिर्फ प्रस्ताव महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई अंतिम निर्णय नहीं। BKTC की बोर्ड बैठक में इस पर चर्चा होगी और यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो आगे राज्य सरकार और प्रशासन के साथ समन्वय कर इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। समिति के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह का नियम लागू करने से पहले कानूनी पहलुओं और सामाजिक प्रभावों पर भी विचार किया जाएगा। समर्थन और विरोध, दोनों तरफ प्रतिक्रियाएँ इस प्रस्ताव को लेकर प्रतिक्रियाएँ मिलीजुली हैं।समर्थकों का कहना है कि इससे मंदिरों की पवित्रता और परंपराएं सुरक्षित रहेंगी। उनका मानना है कि चारधाम जैसे तीर्थस्थलों को केवल श्रद्धा और आस्था के नजरिए से देखा जाना चाहिए। वहीं आलोचकों का तर्क है कि ऐसा कदम सामाजिक समावेशन और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ जा सकता है। कुछ लोग इसे संवैधानिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सबकी निगाहें BKTC की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं।अगर प्रस्ताव पास होता है, तो बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर परिसर में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर औपचारिक रोक लग सकती है। यह फैसला न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी स्तर पर भी बड़ी बहस को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शंकराचार्य

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उठाया संगम स्नान का मुद्दा Deputy CM Keshav Maurya का बयान

प्रयागराज माघ मेले (Prayagraj Magh Mela 2026) में इस बार धार्मिक और राजनीतिक तनाव (Religious & Political Tension) देखने को मिला। मामला तब गरमा गया जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) को संगम में स्नान करने से रोका गया और प्रशासन के साथ उनका विवाद तेज हो गया। इस घटना ने सिर्फ धार्मिक समुदाय ही नहीं बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी। विवाद की पृष्ठभूमि (Background of the Controversy) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 18 जनवरी से मेला प्रशासन (Mela Administration) के खिलाफ विरोध करना शुरू किया। उनका कहना था कि बिना सम्मान और माफी के वह संगम में स्नान (Holy Dip in Sangam) नहीं करेंगे। इस बीच उनके शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई और प्रशासन ने सीसीटीवी कैमरे लगाए। स्वामी ने प्रशासन की चूक को सार्वजनिक रूप से उठाया और शांतिपूर्ण समाधान की मांग की। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का डिप्टी सीएम पर बयान इस विवाद के बीच स्वामी ने डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Maurya) की तारीफ की। उन्होंने कहा: “ऐसे समझदार नेता को दबाया नहीं जाना चाहिए। उन्हें उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री होना चाहिए।” यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। स्वामी ने मौर्य को संयमित और समझदार नेतृत्व वाला नेता बताया और प्रशासन की गलतियों को सुधारने की क्षमता पर भी जोर दिया। डिप्टी CM केशव मौर्य का रुख (Deputy CM Keshav Maurya’s Response) केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि वे स्वामी से औपचारिक मुलाकात नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने सकारात्मक संवाद की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की गलती की जांच होगी और विवाद को शांति से सुलझाना चाहिए। मौर्य ने स्वामी को आग्रह किया कि वे संगम में स्नान कर लोगों को एक सकारात्मक संदेश (Positive Message) दें। सुरक्षा और प्रशासनिक पहलू (Security & Administrative Aspect) स्वामी के शिविर के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई और कुछ समूहों के तनावपूर्ण रुझान के चलते प्रशासन सतर्क है। यह विवाद अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है। सियासी और सामाजिक प्रभाव (Political & Social Impact) प्रयागराज माघ मेले का यह विवाद केवल स्नान और धार्मिक अधिकार तक सीमित नहीं है। यह प्रशासनिक फैसलों, राजनीतिक संदेशों और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन का जीवंत उदाहरण बन चुका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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