भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग 20 साल की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक Trade Deal / Free Trade Agreement (FTA) पर आज सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह समझौता भारत और EU दोनों के लिए बड़े आर्थिक अवसर लेकर आएगा।
FTA से भारत और EU को क्या मिलेगा?
- इस डील के तहत मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, चमड़ा और ज्वेलरी जैसे उद्योगों को विशेष लाभ मिलेगा।
- EU में कारों और अन्य उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को कम करके व्यापार को आसान बनाया जाएगा। उदाहरण के लिए, कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 10% होगा।
- यह समझौता वैश्विक जीडीपी का 25% और विश्व व्यापार का लगभग एक‑तिहाई हिस्सा कवर करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह डील दुनियाभर में चर्चा का विषय बन रही है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और निवेश के अवसर बढ़ेंगे।”
अमेरिका की प्रतिक्रिया
इस डील को लेकर अमेरिका ने अपनी नाराजगी जताई। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता कुछ मामलों में अमेरिकी हितों के विपरीत हो सकता है। विशेष रूप से रूस से तेल आयात और टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका ने आपत्ति व्यक्त की है।
पिछले कुछ समय से अमेरिका और भारत के बीच टैरिफ और व्यापारिक तनाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में भारत ने EU के साथ यह समझौता कर अपने विकल्प मजबूत किए हैं।
Global Impact और भविष्य
विश्लेषकों के अनुसार, यह समझौता वैश्विक व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत और EU के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करेगा और दुनिया के व्यापारिक संतुलन पर असर डाल सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह डील सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान को और मजबूत करेगी।”
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