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छत्तीसगढ़ कांग्रेस में PCC पद को लेकर सियासत तेज, उमेश पटेल के समर्थन में पोस्ट पर नेता को नोटिस

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष (PCC) पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच संगठन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस नेता अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर की गई एक पोस्ट के बाद हुई है। कांग्रेस संगठन ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ मानते हुए जवाब मांगा है। उमेश पटेल के समर्थन में साझा की थी पोस्ट जानकारी के मुताबिक, अरुण मालाकार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने उमेश पटेल के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की पैरवी की थी। पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद प्रदेश कांग्रेस संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया। संगठन ने बताया अनुशासनहीनता प्रदेश कांग्रेस कमेटी का कहना है कि पार्टी के महत्वपूर्ण संगठनात्मक पदों को लेकर सार्वजनिक रूप से किसी नेता के पक्ष में अभियान चलाना आंतरिक प्रक्रिया और अनुशासन के अनुरूप नहीं है। संगठन ने आशंका जताई कि इस तरह की गतिविधियों से पार्टी की छवि प्रभावित हो सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के निर्देश पर प्रभारी महामंत्री की ओर से अरुण मालाकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। तीन दिन में मांगा जवाब जारी नोटिस में अरुण मालाकार से तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। कांग्रेस संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय सीमा में जवाब नहीं दिया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो पार्टी संविधान के अनुसार आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए PCC अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। दिल्ली दौरे से वरिष्ठ नेताओं के लौटने के बाद इन चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। इसी बीच कई नेता और कार्यकर्ता सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग नेताओं के समर्थन में अपनी राय जाहिर कर रहे हैं। संगठन की यह कार्रवाई पार्टी में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। आने वाले दिनों में PCC अध्यक्ष पद को लेकर कांग्रेस संगठन का रुख और स्पष्ट हो सकता है। अधिक जानकारी और ताज़ा राजनीतिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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बिलासपुर की 65 साल पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग जर्जर, कर्मचारियों ने कलेक्टर से लगाई सुधार की गुहार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 65 साल पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग की खराब हालत को लेकर 27 से अधिक विभागों के कर्मचारियों ने बुधवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल से मुलाकात की। कर्मचारियों ने भवन में पानी रिसाव, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी समस्याओं को लेकर पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा। कर्मचारियों ने बताया कि वर्ष 1959 में निर्मित यह सरकारी भवन लंबे समय से उचित रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है। उन्होंने प्रशासन से नई कंपोजिट बिल्डिंग के निर्माण की मांग भी रखी। कलेक्टर ने PWD अधिकारियों को दिए निर्देश कर्मचारियों की शिकायत सुनने के बाद कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तत्काल लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों से फोन पर चर्चा कर भवन की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। कर्मचारियों ने भवन की आंशिक मरम्मत, रंग-रोगन, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था, पुरुष और महिला शौचालयों के जीर्णोद्धार, नया ट्रांसफार्मर लगाने और नई विद्युत लाइन की व्यवस्था करने की मांग की। बारिश के बाद बढ़ी सीपेज की समस्या हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग में कई स्थानों पर सीपेज की समस्या बढ़ गई है। कई कार्यालयों में पानी भरने से कर्मचारियों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि भवन की मौजूदा स्थिति में काम करना मुश्किल हो रहा है और जल्द स्थायी समाधान की आवश्यकता है। सितंबर से शुरू हो सकते हैं रखरखाव कार्य कलेक्टर ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद सितंबर से पुरानी कंपोजिट बिल्डिंग में आवश्यक रखरखाव कार्य शुरू करने की प्रक्रिया की जाएगी। प्रतिनिधिमंडल में सुनील यादव, आर.के. गुप्ता, सूर्यप्रकाश कश्यप, राहुल यादव, देवेंद्र ठाकुर, किशोर शर्मा, जियाली राम सुरक्षित, एच.एन. पुरैना, डी.के. पाटिल, मनीष रात्रे, श्वेता दुबे और मीनू अग्रवाल सहित अन्य कर्मचारी शामिल थे। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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मंत्री बनने के सपने नहीं, जमीनी हकीकत में रहना चाहिए: धरमलाल कौशिक

बिलासपुर, देशहरपाल। छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार को लेकर जारी चर्चाओं के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीति में पद की अपेक्षा संगठन और जनता के प्रति जिम्मेदारी अधिक महत्वपूर्ण होती है। बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में शामिल हुए बिल्हा विधायक धरमलाल कौशिक ने मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने से जुड़े सवाल पर कहा, “मंत्री बनने के सपने देखने के बजाय जमीनी हकीकत में रहना चाहिए। मुझे मंत्री से भी बड़ा दायित्व विधानसभा अध्यक्ष के रूप में मिला था। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है और आज भी मैं विधायक एवं संगठन की जिम्मेदारी निभा रहा हूं।” विकास कार्यों का किया उल्लेख धरमलाल कौशिक ने कहा कि भाजपा सरकार के दो वर्षों के कार्यकाल में बिल्हा विधानसभा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में विकास कार्यों को नई गति मिली है। उन्होंने सड़क, सिंचाई, बिजली, शिक्षा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में लगातार प्रगति का दावा किया। उन्होंने बताया कि अरपा-भैंसाझार सिंचाई परियोजना अंतिम चरण में है, जिसके पूरा होने पर लगभग 67 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। इसके अलावा पथरिया बैराज के लिए 55 करोड़ रुपये और दगौरी क्षेत्र में सिंचाई विस्तार के लिए 70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं मनियारी परियोजना पर भी तेजी से कार्य जारी है। 14 साल वकालत के बाद राजनीति में आए अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कौशिक ने बताया कि सार्वजनिक जीवन में आने से पहले उन्होंने करीब साढ़े 14 वर्ष तक अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। इसके बाद संगठन और सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिला। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय बिलासपुर में हाईकोर्ट की स्थापना के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। साथ ही कहा कि क्षेत्र में 132 केवी, 220 केवी और 400 केवी विद्युत उपकेंद्र, सड़क नेटवर्क, औद्योगिक क्षेत्रों और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से विकास को नई दिशा मिली है। ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ नहीं देखने चाहिए मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में कौशिक ने कहा कि राजनीति में केवल बड़े-बड़े सपने देखने से कुछ नहीं होता। उन्होंने कहा, “मुंगेरीलाल के हसीन सपने नहीं देखने चाहिए। व्यक्ति को जमीनी हकीकत में रहना चाहिए। मुझे विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व मिले हैं। पार्टी ने मुझे बहुत सम्मान दिया है।” धरमलाल कौशिक के इस बयान को राजनीतिक हलकों में संगठन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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जबलपुर: नाम और धर्म छिपाकर शादी का झांसा देने का आरोप, महिला आरक्षक की शिकायत पर वकील के खिलाफ केस दर्ज

मध्य प्रदेश के जबलपुर में पदस्थ एक महिला आरक्षक ने एक अधिवक्ता पर नाम और धर्म छिपाकर शादी का झांसा देने, दुष्कर्म करने और धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के आधार पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला आरक्षक का आरोप है कि आरोपी ने खुद को “सौरभ सिंह राजपूत” बताकर उससे दोस्ती की, जबकि बाद में उसका वास्तविक नाम शोहराब शेख अख्तर होने की जानकारी मिली। महिला का कहना है कि शादी का भरोसा दिलाकर आरोपी ने कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। अब वह गर्भवती है, लेकिन आरोपी बच्चे को अपना मानने से इनकार कर रहा है। महिला ने डीएनए जांच कराने की भी मांग की है। कोर्ट में हुई थी मुलाकात पीड़िता के अनुसार, वर्ष 2024 में कोर्ट में ड्यूटी के दौरान उसकी मुलाकात मक्का नगर निवासी अधिवक्ता से हुई थी। बातचीत के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आरोपी ने शादी का प्रस्ताव रखा। महिला ने उसे पहले ही बता दिया था कि वह तलाकशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। इसके बावजूद आरोपी ने शादी करने का भरोसा दिया। महिला का आरोप है कि आरोपी अक्सर वकील की वर्दी पहनकर उसके घर आता था, जिससे परिवार को भी उस पर विश्वास हो गया। बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से उसे पता चला कि आरोपी का नाम और धर्म दोनों अलग हैं तथा उसकी पहले से शादी हो चुकी है। मारपीट और गर्भपात का दबाव बनाने का आरोप महिला का आरोप है कि सच्चाई सामने आने के बाद जब उसने विरोध किया तो आरोपी और उसके परिजनों ने उसके साथ मारपीट की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म किया और अब गर्भपात कराने का दबाव बना रहा है। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी उसे अपने घर ले गया, जहां उससे धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करवाया गया। महिला का कहना है कि इसके बावजूद आरोपी ने शादी नहीं की और बाद में उससे दूरी बना ली। एक बच्चे की कस्टडी छोड़ने का भी आरोप महिला का दावा है कि आरोपी ने सरकारी नौकरी में अधिक बच्चों को लेकर परेशानी होने की बात कहकर उसे अपने एक बच्चे की अभिरक्षा (कस्टडी) पूर्व पति को देने के लिए भी तैयार किया। इसके लिए कोर्ट में प्रकरण भी दायर कराया गया। संगठन ने कार्रवाई की मांग की पीड़िता के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे एक सामाजिक संगठन के कार्यकर्ताओं ने आरोपी की जल्द गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। पुलिस ने शुरू की जांच सीएसपी भगत सिंह गठोरिया ने बताया कि महिला की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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सेक्स सीडी कांड में भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, CBI कोर्ट की आगे की कार्रवाई पर रोक

छत्तीसगढ़ के चर्चित सेक्स सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने राजेश मूणत के कथित मॉर्फ्ड अश्लील वीडियो मामले में CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अब अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट में बघेल के खिलाफ कोई आगे की कार्रवाई नहीं होगी। न्यायमूर्ति राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने भूपेश बघेल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश जारी किया। बघेल ने 24 जनवरी 2026 को CBI की विशेष अदालत के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें मार्च 2025 में मिली डिस्चार्ज (आरोपमुक्त) राहत को रद्द करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने के निर्देश दिए गए थे। वकील ने कोर्ट में रखी ये दलील भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने दलील दी कि यदि ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने की प्रक्रिया जारी रही, तो हाईकोर्ट में दायर याचिका का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। इसलिए अंतिम निर्णय आने तक ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि CBI की विशेष अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर डिस्चार्ज आदेश को पलट दिया और आरोपों की प्रकृति में भी बदलाव किया, जबकि ऐसा निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा उचित समय पर लिया जाना चाहिए। क्या है पूरा मामला? यह मामला वर्ष 2017 का है। आरोप है कि तत्कालीन मंत्री राजेश मूणत की छवि खराब करने के उद्देश्य से उनका एक कथित अश्लील मॉर्फ्ड वीडियो तैयार कर उसे प्रसारित किया गया था। मामले की जांच बाद में CBI को सौंपी गई। जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में भूपेश बघेल समेत अन्य आरोपियों पर आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के इस्तेमाल और अश्लील सामग्री के प्रसार जैसे आरोप लगाए थे। पहले मिली थी डिस्चार्ज राहत मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त नहीं मानते हुए भूपेश बघेल को इस मामले से डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में CBI की विशेष अदालत ने उस आदेश को रद्द कर उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया, जिसके बाद बघेल ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने दी अंतरिम राहत सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि भूपेश बघेल कथित साजिश में शामिल थे। केवल सह-आरोपियों के साथ होटल में ठहरना किसी आपराधिक षड्यंत्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता। साथ ही गवाहों के बयानों से केवल इतना स्पष्ट होता है कि उन्होंने सह-आरोपी विनोद वर्मा की गिरफ्तारी के विरोध में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, न कि कथित सीडी के प्रसार में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका थी। इन दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने CBI की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट में कोई नई कार्रवाई नहीं होगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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बिलासपुर में किसान युवक की संदिग्ध मौत, घर के पीछे मिला शव; परिजनों ने प्रेम प्रसंग में हत्या की जताई आशंका

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक किसान युवक का शव उसके ही घर के पीछे स्थित बाड़ी में संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक के गले पर चोट के निशान मिलने के बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। उनका आरोप है कि प्रेम प्रसंग के चलते युवक की हत्या की गई है। मामला सीपत थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, ग्राम कौड़िया निवासी 28 वर्षीय चंद्रप्रकाश पटेल खेती-किसानी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। वह शादीशुदा था और उसके चार बच्चे हैं। उसके पिता स्वर्गीय नान दाऊ पटेल थे। बताया जा रहा है कि बुधवार को परिवार के अन्य सदस्य खेत में काम करने गए हुए थे, जबकि चंद्रप्रकाश घर पर ही मौजूद था। शाम को जब परिजन वापस लौटे तो उन्होंने घर के पीछे स्थित बाड़ी में चंद्रप्रकाश का शव पड़ा देखा। घटना की सूचना तत्काल सीपत थाना पुलिस को दी गई। परिजनों का कहना है कि चंद्रप्रकाश का एक युवती से प्रेम प्रसंग था। उनका आरोप है कि इसी विवाद के चलते युवती और उसके परिजनों ने मिलकर उसकी हत्या की है। हालांकि, पुलिस ने अभी हत्या की पुष्टि नहीं की है और मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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रायपुर में साइबर ठगी के पैसों से खरीदे सोने के सिक्के, तीन आरोपी गिरफ्तार

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में साइबर ठगी की रकम से सोने के सिक्के खरीदकर सराफा कारोबारियों को चूना लगाने वाले तीन आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और टिकरापारा थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को तकनीकी जांच के आधार पर पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 1.80 लाख रुपये कीमत के 12 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए हैं। फिलहाल उनसे पूछताछ कर साइबर ठगी की रकम के स्रोत और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। UPI से किया भुगतान, बाद में फ्रीज हुई रकम पुलिस के अनुसार, 18 जुलाई को टिकरापारा स्थित श्री ओम शांति ज्वेलर्स में दो युवक पहुंचे। इनमें से एक ने 7 ग्राम सोने का सिक्का खरीदने की इच्छा जताई। दुकान में एक साथ 7 ग्राम का सिक्का उपलब्ध नहीं होने पर उसे 1-1 ग्राम के सात सिक्के दिए गए, जिनकी कीमत 99,900 रुपये थी। आरोपी ने JAGDAMBA TC नाम की UPI आईडी के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान किया। दो दिन बाद ज्वेलर्स संचालक को बैंक से सूचना मिली कि यह राशि साइबर फ्रॉड से जुड़ी होने के कारण फ्रीज कर दी गई है। जांच में पता चला कि भुगतान जिस खाते से हुआ था, उसमें साइबर ठगी की रकम जमा थी। दूसरे ज्वेलर्स को भी बनाया शिकार जांच में सामने आया कि 17 जुलाई को एक आरोपी ने अजय ज्वेलर्स से भी 5 ग्राम सोने का सिक्का खरीदा था। इसके लिए 76,220 रुपये का भुगतान उसी UPI आईडी से किया गया। इसके बाद आरोपी ने 23,500 रुपये अतिरिक्त ट्रांसफर किए और बाद में सोना नहीं लेने की बात कहकर यह राशि वापस ले ली। बैंक जांच में कुल 1,99,440 रुपये का लेन-देन संदिग्ध और साइबर ठगी से जुड़ा पाया गया। तकनीकी जांच से तीन आरोपी गिरफ्तार मामले की जांच के दौरान पुलिस ने UPI ट्रांजेक्शन, बैंक खातों, मोबाइल नंबर, CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर पुलिस ने मनजीत मंडल, शाहिल नेताम और आयुष साहू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने तीनों आरोपियों के कब्जे से 12 ग्राम सोने के सिक्के जब्त किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। देश और दुनिया की ताजा, निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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कारगिल विजय दिवस पर रायपुर में निकली साइकिल रैली, 100 से अधिक साइकिलिस्टों ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

रायपुर। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शनिवार सुबह राजधानी रायपुर में भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया। रैली में 100 से अधिक साइकिलिस्टों ने हिस्सा लेकर कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान सेना के जवान, पूर्व सैनिक, महिलाएं, युवा और बच्चों ने एक साथ साइकिल चलाकर देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इस रैली का आयोजन मुख्यालय मध्य भारत एरिया के अंतर्गत छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा सब एरिया ने नवा रायपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (NRDA), टूर डी रायपुर साइक्लिंग ग्रुप और आईटीएसए हॉस्पिटल के सहयोग से किया। रैली रायपुर से शुरू होकर नवा रायपुर स्थित सेंद लेक तक पहुंची। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों ने कारगिल के वीर जवानों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए देशभक्ति का संदेश दिया। सेना और नागरिकों ने दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश आयोजकों के अनुसार, रैली का उद्देश्य कारगिल युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना और नई पीढ़ी को उनके शौर्य, साहस और बलिदान से प्रेरित करना था। सेना के जवानों के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। रैली के दौरान आईटीएसए हॉस्पिटल की मेडिकल टीम पूरी यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सहायता के लिए मौजूद रही, जबकि एनआरडीए ने यातायात और रूट प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालकर आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराया। ब्रिगेडियर टी.एस. बावा ने प्रतिभागियों का किया सम्मान समापन समारोह में छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा सब एरिया के कमांडर ब्रिगेडियर टी.एस. बावा ने सभी प्रतिभागियों की सराहना की और कारगिल युद्ध के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस और बलिदान देश के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं और नई पीढ़ी को देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की गाथा से जोड़ते हैं। कार्यक्रम के अंत में रैली में शामिल सभी साइकिलिस्टों को सम्मानित भी किया गया। छत्तीसगढ़, देश और प्रेरणादायक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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रायपुर में छात्रों ने मनाया जश्न, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया लोकतंत्र की जीत

रायपुर। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर के बाद राजधानी रायपुर में छात्र-युवाओं ने खुशी जाहिर करते हुए जश्न मनाया। डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर एकत्रित प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि देशभर के छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही मांग आखिरकार सरकार तक पहुंची। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति की हार या जीत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वाले लाखों छात्रों और युवाओं की आवाज की जीत है। छात्रों ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग लगातार उठाई जाती रही है। उनका मानना है कि यह घटनाक्रम छात्रों के लंबे संघर्ष का महत्वपूर्ण परिणाम है। पहले भी हुआ था आंदोलन और भूख हड़ताल रायपुर में हाल ही में विभिन्न छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने सोनम वांगचुक के समर्थन में प्रदर्शन किया था। इस दौरान एनएसयूआई के पांच कार्यकर्ता अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठे थे। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने खून से “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” लिखकर विरोध दर्ज कराया था। उस समय केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग आंदोलन का प्रमुख मुद्दा रही। अब शिक्षा सुधार की मांग तेज प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल इस्तीफा नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं, परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी एवं ठोस कदम उठाए जाएं। देश, राजनीति और शिक्षा से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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नकटी विस्थापन मामला: कांग्रेस के चार बड़े फैसले, राज्यपाल को फिर भेजेगी अनुरोध पत्र

रायपुर। नवा रायपुर के नकटी गांव में तोड़फोड़ और विस्थापन के मुद्दे पर कांग्रेस ने अपना अगला कदम तय कर लिया है। इस मामले को लेकर गठित कांग्रेस समिति की बैठक में चार अहम फैसले लिए गए। पार्टी ने प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए राज्यपाल को दोबारा अनुरोध पत्र भेजने, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और विस्थापितों को उसी स्थान पर मकान देने की मांग दोहराई है। बैठक के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि घटना को लगभग एक महीना बीत चुका है, लेकिन राज्य सरकार अब तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और राहत को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं ले सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार कलेक्टर, राज्यपाल और सरकार के मंत्रियों तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। बारिश के मौसम में कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। दीपक बैज ने बताया कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पहले भी प्रभावित परिवारों के साथ राज्यपाल से मिला था। उस समय राज्यपाल ने विधानसभा सत्र के बाद मुख्यमंत्री से चर्चा कर समाधान निकालने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। कांग्रेस समिति के चार प्रमुख फैसले बैठक में तय किया गया कि नकटी विस्थापन मामले के समाधान के लिए राज्यपाल को दोबारा अनुरोध पत्र भेजा जाएगा। प्रभावित परिवारों की कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कांग्रेस के विधि विभाग की पांच सदस्यीय टीम गठित की जाएगी, जो पूरे मामले की कानूनी प्रक्रिया और न्यायिक पहलुओं पर काम करेगी। इसके अलावा पार्टी ने मांग की है कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें उसी स्थान पर दोबारा आवास उपलब्ध कराया जाए। कांग्रेस ने नकटी गांव और आसपास की जमीनों की राजस्व ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई है। दीपक बैज का कहना है कि राजस्व ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस क्षेत्र में किन प्रभावशाली लोगों की जमीन है और किन परिस्थितियों में गरीब परिवारों के घरों पर कार्रवाई की गई। छत्तीसगढ़ की राजनीति और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल में पहले बिक चुका प्लॉट दोबारा बेचा, 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी का केस दर्ज

भोपाल के नीलबड़ स्थित गोरा गांव में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कमलेश राजपूत ने पहले ही बिक चुके 800 वर्गफीट के प्लॉट का दोबारा सौदा कर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से 3 लाख रुपए एडवांस ले लिए। रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने आरोपी कमलेश राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम देखकर किया सौदा पुलिस के अनुसार, आरोपी ने प्लॉट के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपना नाम दिखाकर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से सौदा किया था। 800 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 3.30 लाख रुपए तय हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र ने किस्तों में आरोपी को 3 लाख रुपए एडवांस दे दिए। हालांकि, जांच में सामने आया कि आरोपी करीब दो महीने पहले ही यह प्लॉट शुभम यादव को बेच चुका था। शुभम के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री भी हो चुकी थी, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं हुआ था। रजिस्ट्री कराने नहीं पहुंचा आरोपी पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर प्लॉट का दोबारा सौदा कर रकम ले ली। जब रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, तो धर्मेंद्र को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी ने किस तरह प्लॉट का दोबारा सौदा किया और रकम लेने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

इंदौर में ‘Gen Z Protest 2.0’ जारी, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े युवा

इंदौर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन जारी है। 5 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने अपने आंदोलन को ‘Gen Z Protest 2.0’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। 19 अक्टूबर को भंवरकुआं चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें समय रहते हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुटने की अपील की गई थी। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें थीं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियों के जरिए अपनी मांगें भी रखीं। 50-60 पुलिसकर्मियों ने हटाया, प्रदर्शनकारी का दावा प्रदर्शनकारी योगित गुप्ता के मुताबिक, 19 अक्टूबर को वह अपने 10 साथियों के साथ भंवरकुआं चौराहे पर पहुंचे थे। उनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं और वे आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान करीब 50 से 60 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया। योगित ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोकने के बाद करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और वे अपनी मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।
Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

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