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खेत से लौट रहे किसान को बाइक सवार ने मारी टक्कर, मौके पर मौत — गांव में छाया मातम

खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र के ग्राम निहालवाड़ी में बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में 48 वर्षीय किसान लक्ष्मीनारायण पिता हीरालाल पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। वह रात में अपने खेत से पैदल घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने जोरदार टक्कर मार दी। आरोपी भी उसी गांव का, हादसे के बाद बेहोश हुआ हादसे में बाइक सवार युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि वह भी निहालवाड़ी गांव का ही रहने वाला है। टक्कर के बाद वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया था। ग्रामीणों की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ लक्ष्मीनारायण की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं। पिता की मौत की खबर मिलते ही परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो रोज की तरह उस दिन भी खेत से घर लौट रहे थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।गांव के संगमेश्वर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 👉 ऐसी ही और खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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भोपाल में आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान ट्रैफिक में बदलाव, पुलिस ने जारी किया विशेष प्लान

भोपाल के घासीपुरा ईंटखेड़ी में 14 से 17 नवंबर तक आयोजित होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। लाखों धर्मावलंबियों के आने की संभावना को देखते हुए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है। 17 नवंबर को सबसे अधिक दबाव रहेगा आयोजन के अंतिम दिन 17 नवंबर की सुबह दुआ की नमाज के दौरान पुराने शहर से इज्तिमा स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति रहेगी।सुबह 6 बजे से ही मुबारकपुर, पटेल नगर नया बायपास, गांधी नगर, अयोध्या नगर बायपास, रत्नागिरी, लांबाखेड़ा, करोंद, भोपाल टॉकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रॉयल मार्केट, लालघाटी, नादरा बस स्टैंड और भारत टॉकीज इलाकों में ट्रैफिक का दबाव रहेगा।पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग भारी वाहनों पर रोक और डायवर्जन 15 नवंबर की सुबह 7 बजे से बैरसिया रोड से करोंद चौक तक भारी वाहनों, डंपर और मिक्सर पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। वहीं, 17 नवंबर की सुबह 4 बजे से भोपाल की सीमाओं में सभी भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। पार्किंग व्यवस्था 120 एकड़ में पंडाल, 300 एकड़ में पार्किंग आयोजन समिति के मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ. उमर हफीज ने बताया कि इस बार पंडाल का क्षेत्रफल 100 एकड़ से बढ़ाकर 120 एकड़ कर दिया गया है, जबकि पार्किंग एरिया को 300 एकड़ तक फैला दिया गया है।कुल 70 पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट सुचारू रहे। ट्रैफिक हेल्पलाइन अगर किसी नागरिक को असुविधा होती है, तो वे संपर्क कर सकते हैं: पुलिस ने अपील की है कि सभी लोग यातायात नियमों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि आयोजन के दौरान व्यवस्था बनी रहे। 👉 और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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Bhopal

Bhopal Metro CMRS Inspection के बाद जल्द मिलेगी Green Signal

भोपाल की जनता का इंतज़ार अब खत्म होने वाला है। राजधानी की पहली Bhopal Metro अब लॉन्च के एक कदम पहले है।Commissioner of Metro Rail Safety (CMRS) की टीम फिलहाल शहर में है और Subhash Nagar Depot से AIIMS Bhopal तक के 7 किलोमीटर लंबे Priority Corridor का निरीक्षण कर रही है। 98% Construction Complete – अब सिर्फ Final Approval बाकी मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अधिकारियों ने बताया कि इस रूट का करीब 98% काम पूरा हो चुका है।इस रूट में कुल 8 स्टेशन हैं — Subhash Nagar Depot, DB Mall, Board Office, MP Nagar, Habibganj, DRM Office और AIIMS Bhopal जैसे महत्वपूर्ण पॉइंट शामिल हैं। इससे पहले RDSO (Research Designs & Standards Organisation) ने मेट्रो के ट्रैक और टेक्निकल सिस्टम को मंजूरी दे दी थी। अब CMRS द्वारा सुरक्षा और संचालन मानकों की जांच की जा रही है। CMRS Report के बाद मिलेगी ‘OK’ Signal – Launch Possible Soon सूत्रों के अनुसार, CMRS Inspection Report अगर पॉजिटिव आती है तो भोपाल मेट्रो को जल्द ही संचालन की मंजूरी मिल जाएगी। Bhopal Metro Route & Benefits पहले चरण में यह रूट राजधानी के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ेगा। आने वाले चरणों में पूरे शहर को नेटवर्क से कवर किया जाएगा।मेट्रो शुरू होने के बाद — अभी बाकी हैं ये काम भले ही Trial Runs सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी कुछ स्टेशन पर फिनिशिंग टच, साइनबोर्ड, सुरक्षा और सिग्नलिंग सिस्टम का अंतिम निरीक्षण जारी है।अगर सब कुछ ठीक रहा, तो भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक जनता के लिए शुरू हो सकती है। Modern Features of Bhopal Metro हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर रेल हादसा: एक और छात्रा की मौत, अब तक 12 लोगों की जान गई

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में घायल कॉलेज छात्रा महविश परवीन (19) ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या 12 पहुंच गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल थी छात्रा महविश बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में बीएससी गणित की नियमित छात्रा थी। वह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली थी और बिलासपुर में रहकर पढ़ाई करती थी।4 नवंबर को वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होकर घर से कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से लौट रही थी। लालखदान स्टेशन के पास यह ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई। महविश ट्रेन के महिला कोच में सवार थी। टक्कर इतनी तेज थी कि उसके दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे दब गए और कई जगह फ्रैक्चर हो गए। झटके के कारण उसकी कॉलर बोन और पसलियों की चार हड्डियां भी टूट गईं। घटना के तुरंत बाद उसे सिम्स लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। एक सप्ताह तक जिंदगी से लड़ती रही, फिर मौत ने छीन ली जिंदगी अपोलो अस्पताल में डॉक्टर लगातार उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई।मंगलवार रात इलाज के दौरान महविश ने अंतिम सांस ली। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर अकलतरा रवाना हो गए। दिल की मरीज रह चुकी थी महविश, भाई की शादी में गई थी घर महविश के चाचा मोहम्मद रहमान ने बताया कि बचपन में उसे हृदय संबंधी बीमारी थी और रायपुर के एस्कॉर्ट अस्पताल में उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी थी।12वीं के बाद उसे बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था।वह अपने चचेरे भाई की शादी के लिए घर गई थी — शादी 2 नवंबर को हुई थी और 4 नवंबर को वह बिलासपुर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया। मुआवजे के लिए फर्जी दावा करने की कोशिश का खुलासा इस बीच, सोमवार को एक अन्य व्यक्ति पवन गढ़ेवाल को मृत अवस्था में सिम्स लाया गया।साथ आए लोगों ने दावा किया कि वह भी इसी रेल हादसे में घायल था। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि पवन की कोई मेडिकल हिस्ट्री या इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला।सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि मुआवजे के लिए उसकी मौत को रेल हादसे से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। रेल हादसे की जांच अब भी जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन ने ली है। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com — सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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शादी के 9 साल बाद महिला ने की आत्महत्या, मायके वालों का आरोप — “ससुराल वालों ने किया प्रताड़ित

सागर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पथरिया जाट गांव में मंगलवार को एक महिला ने अपने ही घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जब परिजन घर पहुंचे तो महिला का शव फंदे पर झूलता मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, पंचनामा तैयार कर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मायके वालों का आरोप — ससुराल वालों ने किया अत्याचार घटना की खबर मिलते ही मृतका के मायके पक्ष के लोग पथरिया पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला को लंबे समय से ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था।परिजनों ने कंट्रोल रूम पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 9 साल पहले हुई थी शादी मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी करीब 9 साल पहले हुई थी और उसके दो बच्चे हैं।उन्होंने कहा कि दामाद आए दिन बेटी से मारपीट करता था और बुलेट गाड़ी मायके से लाने की मांग करता था।दहेज और अत्याचार से परेशान होकर बेटी कुछ महीने पहले मायके आ गई थी। पिता ने बताया कि बाद में दामाद के बड़े भाई आए और भरोसा दिलाया कि अब ऐसा कुछ नहीं होगा। इस भरोसे के बाद बेटी को वापस ससुराल भेज दिया गया।लेकिन मंगलवार को पुलिस से सूचना मिली कि बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी है। परिजनों का दावा — “मारपीट कर हत्या की गई” परिजनों ने कहा कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या का मामला है।उनका कहना है कि बेटी को मारपीट कर फंदे पर लटकाया गया।ससुराल पक्ष के लोग लगातार उसे प्रताड़ित करते थे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी पहलुओं पर जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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हॉस्टल से 15 वर्षीय छात्रा की मौत — परिजन कहते हैं — “हादसा नहीं, हत्या”

हत्या जूर गांव के माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर में 15 साल की छात्रा पूजा किरेड़े की मौत ने परिवार और इलाके में गहरा सदमा पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि पूजा हॉस्टल की चौथी मंजिल से धक्का देकर गिराई गई थी, जबकि हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी पर पहले से ही प्रताड़ना के आरोप लगे हुए हैं। क्या हुआ: पूजा का एग्जाम था और एक दिन पहले ही उसे हॉस्टल से घर छोड़ा गया था। अगले दिन खबर मिली कि वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरी मिली। इलाज के दौरान जब पूजा होश में आई तो उसने परिजनों को बताया — “मुझे किसी ने धक्का दिया है।”आठ दिन इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में इलाज के बाद 9 नवंबर को पूजा की मौत हो गई। परिजनों की मांग — हत्या का केस दर्ज किया जाए परिजन कलेक्टर, एसपी और सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण को ज्ञापन देकर मांग कर चुके हैं कि घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।पिता सुंदर सिंह और रिश्तेदारों का कहना है कि पूजा के शरीर पर चोट के भी निशान मिले हैं और वह खुद नहीं मर सकती थी। उनका पूरा संदेह हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी प्राची पर है — जिन्होंने कथित रूप से पूजा को लगातार प्रताड़ित किया था। वार्डन की दलील और जांच वार्डन कोकिला बौरासी का कहना है कि पूजा पर “भूत-प्रेत” का साया था और वह अक्सर बीमार रहती थी। परिजन इस दावे को खारिज करते हैं।कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।कमेटी का नेतृत्व संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई कर रही हैं; उसमें मिट्टी परीक्षण अधिकारी कविता गवली और पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की इंस्पेक्टर सुनीता मुवेल शामिल हैं।जांच टीम ने हॉस्टल का निरीक्षण किया, स्टाफ व छात्राओं के बयान लिए और परिजनों से भी तफ्तीश की। चौंकाने वाले तथ्य जांच में यह भी पता चला कि वार्डन कोकिला के पास 60% दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र है, बावजूद इसके उन्हें वार्डन का पद दिया गया था — जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।और सबसे बड़ी बात यह कि वार्डन का अधिकांश काम उसकी बेटी प्राची ही संभालती थी, जिसे पीटीआई (स्पोर्ट्स टीचर) के रूप में नियोजित किया गया था।परिजन और छात्राएं बताती हैं कि प्राची अक्सर छात्राओं से मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करती थी, और पूजा तथा प्राची के बीच कई बार विवाद हो चुका था। निलंबन और स्थानीय प्रतिक्रिया जनजातीय कार्य आयुक्त ने जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद वार्डन को निलंबित कर इंदौर संभागीय कार्यालय में अटैच कर दिया है।आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि आदिवासी हॉस्टलों में बच्चों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं सामान्य हैं और संदिग्ध मौतों को अक्सर हादसा बताकर दबा दिया जाता है।टंट्या मामा आदिवासी संगठन की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मोरे ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिजन अब न्याय की उम्मीद में हैं — वे चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएं। अधिकारिक जांच रिपोर्ट और आगे के कदमों पर हम नजर बनाए रखेंगे। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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दिल्ली धमाका: अब जुड़ा कनेक्शन मध्यप्रदेश के महू से, आरोपी डॉक्टर की यूनिवर्सिटी के चेयरमैन पर जांच की नजर

दिल्ली धमाके का एक सिरा अब मध्यप्रदेश के महू से जुड़ता नजर आ रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि धमाके का मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी, जो फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता था, उसी यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी मूल रूप से महू का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि डॉ. उमर नबी ने अपनी i-20 कार में विस्फोटक रखकर खुद को उड़ा लिया, जबकि उसी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले डॉ. मुजम्मिल शकील को विस्फोटक जमा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।इस यूनिवर्सिटी को चलाने वाला अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट भी महू निवासी जवाद अहमद सिद्दीकी ने ही स्थापित किया था। वही ट्रस्ट का अध्यक्ष और यूनिवर्सिटी का कुलाधिपति भी है। यूनिवर्सिटी का बयान: “हर काम कानून के हिसाब से” बुधवार को अल फलाह यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर प्रो. भूपिंदर कौर आनंद ने पहली बार बयान जारी करते हुए कहा— “हमारे दो डॉक्टर (डॉ. मुजम्मिल और शाहीन सईद) हिरासत में हैं। लेकिन यूनिवर्सिटी का उनसे जुड़ी किसी भी अवैध गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। यूनिवर्सिटी में न कोई केमिकल और न ही विस्फोटक रखा गया था। हमारी लैब सिर्फ MBBS स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग के लिए है और हर काम कानून के हिसाब से किया जाता है।” जवाद का अतीत: इन्वेस्टमेंट कंपनी से लेकर यूनिवर्सिटी तक जांच में पता चला है कि जवाद ने पहले अल फलाह इन्वेस्टमेंट कंपनी के नाम से कारोबार शुरू किया था। उसने लोगों को मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया, लेकिन 2001 में आर्थिक गड़बड़ी के बाद वह परिवार समेत दिल्ली भाग गया। इसके बाद फरीदाबाद में कॉलेज शुरू किया, जो आगे चलकर यूनिवर्सिटी बन गया। महू में खाली पड़ा मकान, जांच जारी महू के एडिशनल एसपी रूपेश द्विवेदी ने बताया कि जवाद और उसके परिवार के पुराने रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी गई है।उनके अनुसार, “जवाद करीब 25 साल पहले तक महू के कायस्थ मोहल्ले में रहता था। उसके पिता मोहम्मद हम्माद सिद्दीकी शहर काजी रह चुके हैं। वहीं, उसका सौतेला भाई अफाम हत्या के मामले में जेल जा चुका है।” वर्तमान में जवाद के महू स्थित चार मंजिला मकान पर ताला लगा है। यह मकान उसके पिता के नाम पर है और स्थानीय लोग इसे ‘मौलाना की बिल्डिंग’ के नाम से जानते हैं। आईजी (ग्रामीण) अनुराग सिंह ने कहा— “हमें इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। संबंधित रिकॉर्ड जुटाकर जांच की जा रही है।” 🔗 Source: Deshharpal News Portal — सच्ची और संवेदनशील खबरों के लिए जुड़ें deshharpal.com
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Bihar

Bihar Exit Poll 2025 नितीश कुमार की NDA को भारी बढ़त, RJD महागठबंधन हुआ पीछे

Bihar Assembly Election 2025 Exit Poll Results: Bihar विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल नतीजों ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य में नितीश कुमार (Nitish Kumar) के नेतृत्व वाली एनडीए (NDA) सरकार एक बार फिर सत्ता में लौट सकती है। लगभग सभी सर्वेक्षणों में बीजेपी-जेडीयू (BJP-JDU) गठबंधन को बहुमत से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की महागठबंधन (Mahagathbandhan) को पिछड़ता हुआ दिखाया गया है। एग्जिट पोल्स में NDA को बड़ी बढ़त विभिन्न मीडिया एजेंसियों और सर्वे कंपनियों द्वारा जारी एग्जिट पोल्स के मुताबिक, एनडीए को 145 से 167 सीटों तक मिलने का अनुमान है। वहीं, महागठबंधन को 70 से 101 सीटों के बीच बताया गया है।जन सुराज पार्टी (Jan Suraaj) का प्रदर्शन कमजोर रहा है, जहां पार्टी को 0 से 5 सीटों तक ही मिलने की संभावना है। प्रमुख एजेंसियों के आंकड़े: इन नतीजों से साफ है कि बिहार की जनता ने नितीश कुमार और भाजपा पर भरोसा जताया है। महागठबंधन को झटका तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की अगुवाई वाले महागठबंधन (RJD-Congress-Left) को इस बार के एग्जिट पोल्स में उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिलते दिख रहे हैं।बेरोजगारी, शिक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर प्रचार करने के बावजूद, जनता ने एनडीए को स्थिरता और अनुभव का विकल्प माना है। जन सुराज का प्रदर्शन फीका प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की नई पार्टी जन सुराज को इस चुनाव में बहुत सीमित समर्थन मिलता दिख रहा है।राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पार्टी का प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गया है, जिससे वह निर्णायक भूमिका में नहीं दिखती। बिहार ने बनाया रिकॉर्ड इस बार बिहार ने 64.7% मतदान (Voting Turnout) दर्ज किया है, जो राज्य के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है।महिलाओं और युवाओं की भागीदारी इस बार सबसे ज्यादा रही, जिससे यह चुनाव बेहद रोचक बन गया है। 14 नवंबर को आएंगे नतीजे एग्जिट पोल केवल पूर्वानुमान हैं, असली तस्वीर 14 नवंबर 2025 को साफ होगी जब मतगणना पूरी होगी और बिहार चुनाव 2025 (Bihar Election 2025 Results) के वास्तविक परिणाम सामने आएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर में हाईकोर्ट वकील की संदिग्ध मौत: परिजनों और अधिवक्ताओं ने उठाए पुलिस जांच पर सवाल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईकोर्ट के वकील राहुल अग्रवाल की रहस्यमयी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस इसे आत्महत्या या हादसा बता रही है, लेकिन परिवार और साथी वकील इसे संदिग्ध मान रहे हैं। अब वकीलों ने कलेक्टर और एसएसपी से मिलकर विशेष जांच टीम (Special Investigation Team) बनाने की मांग की है। घटना की रात घर नहीं लौटे राहुल, 22 घंटे बाद नदी में मिला शव जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय वकील राहुल अग्रवाल 10 नवंबर की रात करीब एक बजे अपने साथी वकील के घर से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे। अगले दिन उनकी बाइक पुराने अरपा पुल के पास संदिग्ध हालत में खड़ी मिली। इसके करीब 22 घंटे बाद राहुल की लाश अरपा नदी से बरामद हुई। उनके शरीर पर चोट के निशान पाए गए, जिससे मामला और भी रहस्यमय बन गया। वकीलों ने जताई हत्या की आशंका वकीलों का कहना है कि यह न तो आत्महत्या है और न ही कोई साधारण हादसा। उनके अनुसार, यह किसी “संदेहास्पद या अप्राकृतिक कारण” से हुई मौत है। अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस की जांच कई सवालों के जवाब नहीं दे पा रही है, जिससे परिवार और कानूनी समुदाय दोनों ही असंतुष्ट हैं। स्पेशल टीम से जांच की मांग अधिवक्ताओं के एक दल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात कर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण किया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। घटना से पहले क्या हुआ था राहुल अग्रवाल, जो मूल रूप से भाटापारा के रहने वाले थे, पिछले 7-8 साल से बिलासपुर के मंगला स्थित ग्रीन गार्डन कॉलोनी में रह रहे थे। 6 नवंबर को वे हाईकोर्ट में प्रेक्टिस के लिए गए थे। शाम को नेहरू चौक पर अपने दोस्त मुकेश राठिया से मिले, फिर दोनों सिरगिट्टी स्थित महिंद्रा शोरूम से कार लेकर ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्टी की। इसके बाद वे मुकेश के मोपका स्थित घर गए, जहां एक और दोस्त अभिषेक आचार्य भी थोड़ी देर के लिए आया। इसके बाद राहुल घर नहीं लौटे, और अगली सुबह उनकी लाश नदी में मिली। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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गुना पुलिस की बड़ी सफलता: महीनों से लापता दो नाबालिग लड़कियां गुजरात और राजस्थान से बरामद

गुना की कैंट पुलिस ने शानदार काम करते हुए महीनों से लापता दो नाबालिग लड़कियों को सकुशल खोज निकाला है। एक लड़की को गुजरात के पोरबंदर से और दूसरी को राजस्थान के कोटा से बरामद किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों को उनके परिवारों के हवाले कर दिया गया है। फरवरी और जून से थीं लापता पहली 16 वर्षीय किशोरी 23 फरवरी को बिना बताए घर से चली गई थी, जबकि दूसरी 15 साल की लड़की 19 जून से लापता थी। दोनों के परिवारों ने कैंट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके बाद पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई थी। ऑपरेशन मुस्कान के तहत मिली सफलता प्रदेशभर में 1 से 30 नवंबर तक “विशेष ऑपरेशन मुस्कान” चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत SP अंकित सोनी ने सभी थाना प्रभारियों को लापता बच्चों की खोज तेज करने के निर्देश दिए थे। ASP मानसिंह ठाकुर और CSP प्रियंका मिश्रा के निर्देशन में कैंट थाना प्रभारी निरीक्षक अनूप कुमार भार्गव और उनकी टीम ने तकनीकी साधनों और मुखबिरों की मदद से दोनों लड़कियों का लोकेशन ट्रेस किया। दो राज्यों में भेजी गईं पुलिस टीमें जांच में पता चला कि एक लड़की गुजरात के पोरबंदर में है जबकि दूसरी राजस्थान के कोटा में। इसके बाद पुलिस की दो टीमें तुरंत दोनों राज्यों के लिए रवाना हुईं और सफलतापूर्वक दोनों नाबालिगों को सुरक्षित गुना लेकर आईं। बाल कल्याण समिति ने किया सुपुर्द गुना पहुंचने के बाद दोनों लड़कियों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। समिति अध्यक्ष नीरू शर्मा ने आवश्यक कार्रवाई पूरी कर उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया। पुलिस टीम की सराहना इस पूरी कार्रवाई में TI अनूप कुमार भार्गव, उप निरीक्षक ज्योति राजपूत, SI अरुंधति राजावत, प्रधान आरक्षक मनोज कलावत, आरक्षक माखन चौधरी, सचिन शर्मा, सूर्यभान जाट, महिला आरक्षक प्रीति राठौड़, रक्षा रघुवंशी, धनकुवर जाटव और साइबर सेल के आरक्षक कुलदीप यादव व भूपेंद्र खटीक की अहम भूमिका रही। 👉 ऐसी और खबरों के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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X पर अब लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे $1 की टिप, मस्क ने नए फीचर का किया ऐलान

नई दिल्ली। इलॉन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को फाइनेंशियल सर्विसेज से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं। मस्क ने ऐलान किया है कि X पर यूजर्स लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर की टिप भेज सकेंगे। यह पेमेंट कंपनी के फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म X मनी के जरिए किया जाएगा। मस्क ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि X मनी के माध्यम से किसी को भी 1 डॉलर भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस करने का विकल्प जोड़ा जा रहा है। कैसे काम करेगा नया टिपिंग फीचर? इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक या क्रिएटर को सीधे आर्थिक मदद दे सकेंगे। इसके लिए लाइक बटन को कुछ देर तक दबाना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट सिस्टम के जरिए 1 डॉलर ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है, ताकि यूजर्स को अलग से पेमेंट ऐप या लंबी प्रक्रिया का सहारा न लेना पड़े। हालांकि, X ने अभी तक इस फीचर के लॉन्च की तारीख और इसकी उपलब्धता से जुड़ी शर्तों की जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजर्स 1 डॉलर की तय रकम को बदल सकेंगे या भविष्य में अलग-अलग रकम भेजने के विकल्प भी मिलेंगे। क्या है X मनी और इसमें कौन-सी सुविधाएं हैं? X मनी, X का फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए यूजर्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, डिपॉजिट अकाउंट और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका पेमेंट और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्रॉस रिवर बैंक के साथ जुड़ा है। X मनी खुद बैंक नहीं है, बल्कि बैंकिंग पार्टनर के माध्यम से वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़ी सुविधाओं में पात्र डिपॉजिट पर ब्याज, खरीदारी पर कैशबैक और डेबिट कार्ड को Apple Pay से कनेक्ट करने जैसे विकल्प शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता यूजर की पात्रता और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। X को ‘एवरीथिंग ऐप’ बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘एवरीथिंग ऐप’ यानी सुपर ऐप के रूप में विकसित करना है, जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। X मनी के जरिए टिप भेजने का फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है। अगर यह सुविधा व्यापक स्तर पर शुरू होती है, तो क्रिएटर्स को अपने कंटेंट के जरिए सीधे आर्थिक सहयोग पाने का एक और माध्यम मिल सकता है। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी या नए टिपिंग फीचर को लॉन्च करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में पहले से ही UPI आधारित डिजिटल पेमेंट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में X मनी को भारत में वित्तीय सेवाएं शुरू करने के लिए देश के लागू बैंकिंग, भुगतान और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। क्या होता है ‘एवरीथिंग ऐप’? एवरीथिंग ऐप या सुपर ऐप ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें एक ही ऐप के जरिए कई तरह की सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग और बैंकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। चीन का WeChat इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां मैसेजिंग के साथ भुगतान और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं। मस्क X को भी इसी तरह का बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं।

पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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