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इंदौर: ऑनलाइन पैसे लेकर MD ड्रग्स सप्लाई करने वाला युवक गिरफ्तार, टीन चादर की दुकान की आड़ में चल रहा था कारोबार

इंदौर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया है जो ऑनलाइन पैसे लेकर MD ड्रग्स की सप्लाई करता था। आरोपी टीन चादर की दुकान की आड़ में इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था और हर सौदे पर मोटा कमीशन कमाता था। कुछ दिन पहले क्राइम ब्रांच ने दो बदमाशों को 22 ग्राम MD ड्रग्स के साथ पकड़ा था। पूछताछ में उनका कनेक्शन परवेज खान नामक युवक से सामने आया, जिसके बाद पुलिस ने धार निवासी परवेज को गिरफ्तार कर लिया। एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि पहले शहीम पिता सलीम खान और मोहम्मद शारिक पिता मोहम्मद शकील को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से बरामद ड्रग्स की कीमत लगभग 3 लाख रुपए बताई जा रही है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि परवेज खान ही जावरा से ड्रग्स लाकर सप्लाई करवाता था। पुलिस के मुताबिक, परवेज पहले ऑनलाइन पैसा अपने खाते में मंगवाता था, फिर ड्रग्स की डिलीवरी करवाता था। इस गिरफ्तारी से MD ड्रग्स की सप्लाई चेन को तोड़ने में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। अब पुलिस उससे जुड़ी आगे की कड़ियां भी तलाश रही है। ढाई लाख रुपए की ब्राउन शुगर भी जब्त एडिशनल डीसीपी ने बताया कि अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ लगातार कार्रवाई चल रही है। इसी सिलसिले में बाणगंगा और रावजी बाजार क्षेत्रों में भी कार्रवाई की गई। दोनों से कुल ढाई लाख रुपए मूल्य की ब्राउन शुगर जब्त की गई है। पुलिस अब इनसे भी आगे की लिंक तलाशने में जुटी है। 👉 ऐसी और खबरों के लिए पढ़ते रहेंwww.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ सरकार NEET-PG में 25 लाख रुपए की NOC शर्त बदल सकती है – छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत

छत्तीसगढ़ में NEET-PG स्टेट काउंसलिंग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार उन नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत सरकारी सेवा कर रहे डॉक्टरों को NOC के लिए 25 लाख रुपए की जमीन या FD बतौर सुरक्षा जमा करनी पड़ती है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल ने बताया कि, “यह नियम पिछली सरकार के समय लागू किया गया था। वर्तमान सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। छात्रों से भी इस संबंध में चर्चा हुई है। प्रक्रिया शुरू हो गई है और जल्द ही सभी के हित में समाधान निकाला जाएगा।” 25 लाख रुपए की शर्त से छात्रों की मुश्किलें बढ़ीं NEET-PG में चयनित कई सरकारी डॉक्टर इस शर्त के कारण आगे की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कई के पास इतनी संपत्ति या नकदी नहीं है कि वे बॉन्ड की शर्त पूरी कर सकें। डॉ लक्ष्य शर्मा, जो पिछले 7 महीने से सुकमा में ड्यूटी कर रहे हैं, ने बताया — “मेरी NEET में 20,000 रैंक आई है। मैं पीजी करना चाहता हूं, लेकिन गांव की जमीन पर पहले से लोन है और FD के लिए पैसे नहीं हैं। माता-पिता ने कह दिया कि इतनी बड़ी रकम नहीं दे सकते, इसलिए पढ़ाई छोड़ दो।” वहीं अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की डॉ आफरीन खान ने कहा, “हम दो साल की बॉन्ड पोस्टिंग की शर्त पूरी करने को तैयार हैं। मैंने एक साल पूरा भी कर लिया है, लेकिन 25 लाख की संपत्ति जुटाना हमारे लिए असंभव है।” डॉक्टर फेडरेशन ने कहा – नियम संविधान के खिलाफ छत्तीसगढ़ डॉक्टर फेडरेशन ने इस नियम को आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के खिलाफ बताया है। संगठन का कहना है कि यह शिक्षा के अधिकार और समान अवसर के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है।फेडरेशन ने मांग की है कि आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों के लिए नोटरी कृत एफिडेविट को वैकल्पिक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों की प्रमुख मांगों पर जरूरी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। 🔗 For more such updates, visit:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में आधी रात गैंगवार: रिंकू कमरिया गैंग की ताबड़तोड़ फायरिंग, हवलदार का बेटा समेत दो घायल

ग्वालियर में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को घासमंडी, कोटेश्वर रोड पर वर्चस्व की लड़ाई और 5 लाख रुपए के लेन-देन को लेकर गैंगवार हुआ। बदमाश रिंकू कमरिया गैंग ने कार सवार दो दोस्तों पर करीब 15 मिनट तक 35 से ज्यादा गोलियां दागीं। इस फायरिंग में एक हवलदार का बेटा समेत दो युवक घायल हुए। वर्चस्व और पैसे की लड़ाई में चली गोलियां पुलिस के मुताबिक, शिवनगर घोसीपुरा जनकगंज निवासी विजय सिंह गौड़, जिनके पिता मध्यप्रदेश पुलिस में हवलदार हैं, रविवार रात अपने दोस्तों बल्लू सरदार और हाकिम सिंह बघेल पाटनकर के साथ कार से घासमंडी गए थे। लौटते समय कोटेश्वर रोड पर रिंकू कमरिया, अन्नी कमरिया, छोटू कमरिया, कालू कमरिया और रमेश कमरिया ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। करीब 15 मिनट तक चली गोलीबारी में विजय गौड़ को पैर में तीन गोलियां और हाकिम को एक गोली लगी। घटना के बाद बदमाश हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। इलाके में देर रात दहशत फैल गई। 5 लाख के लेन-देन को लेकर विवाद घायल विजय ने पुलिस को बताया कि यह हमला 5 लाख रुपए के लेन-देन के विवाद को लेकर हुआ। रिंकू कमरिया पैसे की वसूली के बाद रकम वापस नहीं कर रहा था और धमकी दे रहा था कि “पैसा मांगा तो गोली मार दूंगा।”रिंकू कमरिया ग्वालियर थाने का लिस्टेड बदमाश है, जिस पर फायरिंग, मारपीट और हत्या के प्रयास जैसे कई केस पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दर्ज किया हत्या के प्रयास का मामला घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को हजीरा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।पुलिस ने रिंकू कमरिया गैंग के सभी बदमाशों के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया है और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। सीएसपी कृष्णपाल सिंह के मुताबिक, “घायल युवकों के बयान लिए जा रहे हैं। हमलावरों की पहचान हो चुकी है और उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।” 🔗 For more such updates, visit:www.deshharpal.com
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भोपाल में रंजिश के चलते युवक पर तलवार से हमला, चार हमलावर फरार – हालत गंभीर

भोपाल के बागसेवनिया इलाके में पुरानी रंजिश का खौफनाक नतीजा सामने आया। देर रात चार युवकों ने एक युवक को घेरकर उस पर तलवार और डंडों से हमला कर दिया। आरोपी युवक को अधमरी हालत में छोड़कर मौके से भाग निकले। राहगीरों की सूचना पर पहुंचे परिजनों ने घायल को लहूलुहान हालत में अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल युवक का इलाज एम्स अस्पताल में चल रहा है, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। रास्ते में घेरकर किया हमला पुलिस के मुताबिक, 26 वर्षीय रिजवान खान, निवासी पिपालिया पेंदे खां, कार धोने का काम करता है। शनिवार रात वह दुकान बंद कर घर लौट रहा था। तभी उस्मान, साहिब, अनस और उनके साथी ने रास्ते में घेरकर उस पर हमला कर दिया। आरोपियों ने पहले मारपीट की और फिर तलवार से रिजवान के सिर और हाथों पर कई वार किए। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए, जबकि रिजवान खून से लथपथ सड़क पर पड़ा रहा। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले रिजवान का एक आरोपी से झगड़ा हुआ था — उसी का बदला लेने यह हमला किया गया। पुलिस ने दर्ज किया हत्या के प्रयास का मामला घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और पुलिस मौके पर पहुंचे और घायल को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में रविवार-सोमवार की दरमियानी रात में कई ठिकानों पर छापे मारे, लेकिन अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 🔗 For more such updates, visit: www.deshharpal.com
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Jaipur

Jaipur Bus Accident मजदूरों से भरी Private Bus में दौड़ा करंट

राजस्थान के Jaipur जिले से एक दर्दनाक खबर सामने आई है। सोमवार सुबह मजदूरों से भरी एक Private Bus अचानक High Voltage Electric Wire की चपेट में आ गई। कुछ ही सेकंड में Bus में करंट दौड़ गया, जिससे कई मजदूर झुलस गए। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। हादसा कैसे हुआ जानकारी के अनुसार, यह बस Jaipur से मजदूरों को लेकर पास के औद्योगिक इलाके की ओर जा रही थी। रास्ते में बस का ऊपरी हिस्सा ऊपर से गुजर रहे High-Tension Electric Wire से टकरा गया। टकराते ही बस में ज़ोरदार करंट दौड़ गया और सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि बस के ऊपर रखे लोहे के पाइप बिजली के तार से छू गए, जिसके कारण करंट पूरे वाहन में फैल गया। Driver ने तुरंत बस रोकी, लेकिन तब तक कई मजदूर झुलस चुके थे। मौके पर अफरा-तफरी घटना के बाद ग्रामीण और राहगीर मौके पर पहुंचे और बस में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। पुलिस, बिजली विभाग और एंबुलेंस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और घायलों को नज़दीकी अस्पताल पहुंचाया गया। कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। पहले भी हो चुके ऐसे हादसे Rajasthan में यह कोई पहला मामला नहीं है जब राजस्थान में बस बिजली के तार की चपेट में आई हो। इन हादसों के बावजूद कई इलाकों में बिजली के तार अब भी सड़क के बहुत पास हैं, जो किसी भी वक्त बड़ा खतरा बन सकते हैं। प्रशासन की जांच शुरू जयपुर जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। बिजली विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि आखिर इतने निचले स्तर पर हाई-वोल्टेज लाइन कैसे चल रही थी। वहीं, पुलिस ने बस चालक और मालिक से पूछताछ शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप – लापरवाही से गया हादसा घटना के बाद लोगों में गुस्सा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद बिजली विभाग ने तारों की ऊंचाई नहीं बढ़ाई। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कब तक ऐसे हादसे मजदूरों की जान लेते रहेंगे। सुरक्षा को लेकर क्या कहना है विशेषज्ञों का सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए बिजली विभाग और परिवहन विभाग दोनों को जॉइंट सेफ्टी ड्राइव चलानी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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AIIMS

Bhopal AIIMS ब्रेन डेड युवक का Organ Donation बना मिसाल 5 को मिली नई जिंदगी

भोपाल के AIIMS (एम्स) अस्पताल में इंसानियत और करुणा की एक अनोखी मिसाल देखने को मिली। एक 37 वर्षीय युवक, जो सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुआ था, उसे डॉक्टरों ने ब्रेन डेड (Brain Dead) घोषित किया। इसके बाद उसके परिवार ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान (Organ Donation) का फैसला लिया, जिससे पाँच मरीजों को नई जिंदगी मिल गई। ब्रेन डेड के बाद भी बना ‘लाइफसेवर’ डॉक्टरों के अनुसार युवक को सिर में गंभीर चोट लगी थी, जिसके चलते उसे AIIMS भोपाल में भर्ती किया गया। इलाज के दौरान स्थिति बिगड़ती चली गई और अंततः उसे ब्रेन डेड घोषित किया गया। इस बीच अंगदान टीम ने परिजनों को जागरूक किया और वे तैयार हो गए। परिवार की इस सहमति से युवक के हार्ट (Heart), दो किडनी (Kidneys) और दो कॉर्निया (Corneas) दान किए गए, जिससे पाँच मरीजों को नई उम्मीद की किरण मिली। एम्स भोपाल में तीसरा सफल Heart Transplant AIIMS भोपाल में यह तीसरा सफल हार्ट ट्रांसप्लांट (Heart Transplant) रहा। डॉक्टरों की टीम ने बताया कि करीब छह घंटे चली सर्जरी पूरी तरह सफल रही। ट्रांसप्लांट के बाद अस्पताल के स्टाफ और पुलिस कर्मियों ने युवक को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम विदाई दी। Medico-Legal केस में भी दिखी संवेदनशीलता क्योंकि मामला मेडिको-लीगल (Medico-Legal Case) था, इसलिए पोस्टमॉर्टम सीधे ऑपरेशन थिएटर (OT) में किया गया। यह AIIMS भोपाल में दूसरी बार हुआ जब ब्रेन डेड मरीज का पोस्टमॉर्टम OT में किया गया हो। इस प्रक्रिया से समय की बचत और अंगों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई। परिजनों ने कहा – “उसका जाना बेकार नहीं जाएगा” परिजनों ने कहा, “हमारा बेटा अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसके अंग अब दूसरों की जिंदगी बनेंगे – यही उसके जाने का सुकून है।” उनके इस कदम से अस्पताल का पूरा स्टाफ भावुक हो गया। डॉक्टरों ने की अपील AIIMS भोपाल की टीम ने कहा कि अगर समाज में अधिक लोग ऑर्गन डोनेशन (Organ Donation) के लिए आगे आएं, तो हजारों मरीजों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने सभी को अंगदान के प्रति जागरूक होने की अपील की। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Metro

Bhopal Metro CMRS ने शुरू की Metro Safety जांच, जल्द शुरू हो सकती Services

Bhopal Metro परियोजना के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में CMRS (Commissioner of Metro Rail Safety) की टीम भोपाल पहुंची और मेट्रो के मुख्य कॉरिडोर, स्टेशनों और डिपो की व्यापक जांच की। यह निरीक्षण मेट्रो के सुरक्षा और तकनीकी मानकों की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CMRS टीम का Metro Inspection CMRS टीम ने सब्जी नगर से एम्स तक के मेट्रो स्टेशनों और मुख्य ट्रैक का निरीक्षण किया। टीम ने ट्रेन, डिपो, सिग्नल, ट्रैक के बोल्ट और स्टेशन सुविधाओं की पूरी जांच की। मेट्रो के संचालन और सॉफ्टवेयर का भी अध्ययन किया गया। टीम ने निरीक्षण के दौरान सभी सुरक्षा और तकनीकी मानकों को संतोषजनक पाया। अगर कोई कमी नहीं पाई जाती है, तो CMRS जल्द ही मेट्रो के व्यावसायिक संचालन (Commercial Operations) की अनुमति दे सकती है। पहले चरण का निरीक्षण 25 सितंबर को CMRS की टीम ने मेट्रो डिपो और ट्रेनों का पहला निरीक्षण किया था। इस दौरान ट्रैक के बोल्ट, सिग्नल और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच की गई थी। यह कदम मेट्रो के सुरक्षित और भरोसेमंद संचालन के लिए आवश्यक था। CMRS की भूमिका CMRS (Metro Rail Safety Commissioner) भारतीय रेलवे मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह आयोग मेट्रो परियोजनाओं की सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन करता है। वर्तमान में इस आयोग के अध्यक्ष हैं श्री जनक कुमार गर्ग (IRSEE:1987)। भोपालवासियों के लिए खुशखबरी इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के बाद, भोपाल मेट्रो जल्द ही संचालन के लिए तैयार हो सकती है। राज्य सरकार की योजना है कि इस महीने के अंत तक मेट्रो सेवा शुरू कर दी जाए। यह शहरवासियों को तेज़, सुरक्षित और आधुनिक Metro सुविधा प्रदान करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi Pollution दिवाली पर फिर गिरी Air Quality, कई इलाकों में Severe Category

Delhi में दिवाली की सुबह हवा हुई ‘जहरीली’, AQI Very Poor Category में दर्ज दिवाली 2025 की खुशियों के बीच दिल्ली की हवा फिर से जहरीली (Toxic Air) हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार सुबह दिल्ली का औसत Air Quality Index (AQI) 335 दर्ज किया गया, जो “Very Poor” श्रेणी में आता है। रविवार रात दिवाली के मौके पर लोगों ने पटाखे (Firecrackers) जलाए, जिससे सुबह राजधानी के आसमान में धुंध और धुआं छा गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कम तापमान, धीमी हवाएं और प्रदूषण के अन्य स्रोतों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। दिल्ली के इन इलाकों में सबसे ज्यादा प्रदूषण दिल्ली के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से ज्यादातर का AQI 300 से ऊपर रहा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों में हवा और बिगड़ सकती है और AQI “Severe” स्तर तक पहुँच सकता है। स्वास्थ्य पर गंभीर असर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, AQI के 300 से ऊपर पहुँचने का मतलब है कि हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों, आंखों और दिल पर असर डाल सकते हैं। पटाखों पर बैन के बावजूद जलते रहे Crackers दिल्ली सरकार ने इस साल भी पटाखों की बिक्री और जलाने पर सख्त प्रतिबंध (Ban) लगाया था, लेकिन कई इलाकों में नियमों का उल्लंघन हुआ। रातभर आतिशबाज़ी और फायरवर्क्स से हवा में प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ गया। CPCB और Delhi Police को सैकड़ों शिकायतें मिलीं, मगर प्रदूषण का स्तर नियंत्रित नहीं हो सका। अगले 48 घंटे हो सकते हैं और खतरनाक SAFAR और IMD (Indian Meteorological Department) के अनुसार, अगले 48 घंटे में प्रदूषण “Severe” श्रेणी में जा सकता है।कम हवा की गति, पराली जलना (Stubble Burning) और ठंड के कारण दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग बढ़ने के आसार हैं। AQI श्रेणियाँ (Air Quality Categories) श्रेणी AQI स्तर स्थिति अच्छा 0-50 स्वच्छ हवा संतोषजनक 51-100 सामान्य मध्यम 101-200 हल्का प्रदूषण खराब 201-300 स्वास्थ्य पर असर बहुत खराब 301-400 गंभीर प्रभाव गंभीर 401-500 अत्यंत खतरनाक Delhi Air Pollution एक बार फिर चेतावनी स्तर पर पहुँच गया है। दिवाली के बाद की सुबह में हवा में धुएं और पटाखों की गंध फैली हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा और “Toxic” हो सकती है। सरकार, प्रशासन और जनता — तीनों को मिलकर इस प्रदूषण संकट से निपटने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JDU

Bihar चुनाव 2025 JDU ने जारी की दूसरी Final Candidate List

JD(U) ने जारी की दूसरी और अंतिम सूची पटना। Bihar Assembly Elections 2025 की तैयारी तेज़ हो गई है। जनता दल (यूनाइटेड) JDU ने अपनी दूसरी और अंतिम सूची जारी की है, जिसमें कुल 44 उम्मीदवारों को घोषित किया गया है। इससे पहले, पहली सूची में 57 उम्मीदवारों का ऐलान किया गया था, जिससे JD(U) की 101 उम्मीदवारों की पूरी सूची तैयार हो गई है। NDA गठबंधन और सीट शेयरिंग रणनीति यह घोषणा NDA गठबंधन के साथ सीट साझा समझौते के तहत की गई है। JD(U) ने इस सूची में कई सitting ministers और senior leaders को शामिल किया है, जो पार्टी की महत्वपूर्ण सीटों पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति को दर्शाता है। दूसरी सूची के प्रमुख उम्मीदवार JD(U) की रणनीति और चुनावी तैयारी JDU की यह रणनीति पार्टी को बिहार के key constituencies में मजबूत स्थिति देने के लिए बनाई गई है। आगामी विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का 11 नवंबर को होगा। राजनीतिक विश्लेषण राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि JD(U) की यह अंतिम सूची पार्टी को NDA गठबंधन के भीतर strategic advantage देगी और चुनावी मैदान में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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सिवनी हवाला कांड में नया मोड़: हाईकोर्ट ने कार चालक सोहनलाल को सुरक्षित घर पहुंचाने का दिया आदेश

सिवनी हवाला कांड में अब एक और बड़ा मोड़ सामने आया है। जिस कार से हवाला का पैसा बरामद हुआ था, उसके चालक सोहनलाल परमार को हाईकोर्ट ने सुरक्षित रूप से घर तक छोड़ने का आदेश दिया है। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिए हैं कि जहां-जहां सोहनलाल को रखा गया, वहां के CCTV फुटेज सुरक्षित रखे जाएं। यह मामला तब सामने आया जब जालना निवासी गंगाबाई परमार, जो सोहनलाल की पत्नी हैं, ने अपने पति की रिहाई के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। उनका आरोप है कि पुलिस ने उनके पति को कई दिनों तक गैरकानूनी हिरासत में रखा। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की। गंगाबाई ने बताया कि उनके पति को 10 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था और 12 अक्टूबर को छोड़ा गया, लेकिन इसके बाद जालना पुलिस ने दोबारा गिरफ्तार कर उन्हें सिवनी पुलिस के हवाले कर दिया। इसके बाद हवाला केस के चालक सोहनलाल को पुलिस ने हाईकोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने पुलिस को सोहनलाल की मेडिकल जांच कराने और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाने के आदेश दिए। गंगाबाई का यह भी कहना है कि इस दौरान न तो ट्रांजिट रिमांड ली गई, न ही मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जिससे गिरफ्तारी की वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस पूरे प्रकरण में एसडीओपी पूजा पांडे, एसआई अर्पित भैरम समेत 9 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 2 पुलिसकर्मी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। क्या है पूरा मामला?सिवनी पुलिस ने नागपुर निवासी सोहन परमार से करीब 2.96 करोड़ रुपए बरामद किए थे। आरोप है कि पुलिस ने रिपोर्ट में जब्त रकम सिर्फ 1.45 करोड़ रुपए दिखाई और बाकी रकम छिपा ली। इतना ही नहीं, आरोपी को बिना कार्रवाई के छोड़ भी दिया गया। मामला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। 9 अक्टूबर को सीएसपी पूजा पांडे और एसआई अर्पित भैरम ने 1.45 करोड़ रुपए जमा कराए, लेकिन इसके बाद आईजी प्रमोद वर्मा ने 9 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। अगले दिन डीजीपी कैलाश मकवाना ने एसडीओपी पूजा पांडे को भी सस्पेंड कर दिया। यह मामला अब न्यायालय की निगरानी में है और इसके हर पहलू की जांच जारी है। अधिक खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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बिलासपुर केंद्रीय जेल से 19 बंदी रिहा, 15 से 16 साल की सजा काटने के बाद मिली मुक्ति

बिलासपुर केंद्रीय जेल में लंबे समय से बंद 19 पुरुष बंदियों को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। ये बंदी 15 से 16 साल तक जेल में सजा काट चुके थे। सजा की अवधि पूरी होने के बावजूद शासन स्तर से माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई लंबित थी। जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता के निरीक्षण के दौरान यह मामला सामने आया था। इसके बाद संबंधित बंदियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई और रिहाई का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। स्वीकृति मिलने के बाद सभी 19 बंदियों को जेल से रिहा कर दिया गया। बंदियों से बातचीत में सामने आई थी समस्या केंद्रीय जेल के निरीक्षण के दौरान जेल महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बंदियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। इस दौरान कुछ बंदियों ने बताया कि वे अपनी सजा की अवधि पूरी कर चुके हैं, लेकिन माफी संबंधी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी रिहाई नहीं हो पा रही है। मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित बंदियों के आचरण और जेल के अभिलेखों की जांच कराई गई। परीक्षण के दौरान अच्छे आचरण वाले और अधिक उम्र के बंदियों के प्रकरणों पर विचार करते हुए रिहाई के प्रस्ताव तैयार किए गए और शासन को भेजे गए। परिवार के बीच लौटकर नई शुरुआत का अवसर शासन से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को 19 पुरुष बंदियों की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद अब ये बंदी अपने परिवारों के बीच लौट सकेंगे और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर नई शुरुआत कर सकेंगे। रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी, जेलर विजयानंद सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के अनुसार, सभी 19 बंदियों को शासन के निर्देश पर रिहा किया गया है।

ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे पर कार्रवाई की मांग, 4 दिन में तालाबंदी का अल्टीमेटम

ग्वालियर के एजी ऑफिस स्थित ‘दारुल कुरआन’ मदरसे में मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद विवाद बढ़ गया है। मदरसे में बच्चों की देखरेख, साफ-सफाई और जरूरी दस्तावेजों को लेकर सामने आई कथित अनियमितताओं के विरोध में राष्ट्रीय सनातन सेना ने प्रदर्शन किया। संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर ताला नहीं लगाया गया, तो उसके कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करेंगे। संगठन के पदाधिकारियों ने बच्चों के साथ किसी भी तरह की गलत हरकत सामने आने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की। निरीक्षण के दौरान मिले थे 26 बच्चे शुक्रवार को मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता ने बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम के साथ मदरसे का औचक निरीक्षण किया था। मौके पर 4 से 14 वर्ष की उम्र के 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले थे। इस तरह कुल 26 बच्चे मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान बताया गया कि रजिस्टर्ड 15 बच्चियों में से मौके पर केवल 8 मौजूद थीं। खबर के अनुसार, कुछ बच्चियों को पिछले रास्ते से बाहर भेजे जाने की आशंका भी जताई गई। हालांकि, इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी हैं। टीम के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन मौके पर मान्यता और पंजीकरण से जुड़े जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। रसोई और टॉयलेट में मिली गंदगी निरीक्षण के दौरान टीम को रसोईघर और टॉयलेट में गंदगी मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जगहों पर दरवाजे भी नहीं थे। बच्चों के सोने की व्यवस्था पर भी सवाल उठे। बताया गया कि 42 पंजीकृत बच्चों के लिए एक छोटे हॉल में पलंग के बजाय पतली चादरों पर सोने की व्यवस्था थी। इन स्थितियों को लेकर बाल अधिकारों और बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही बुनियादी सुविधाओं पर सवाल उठाए गए हैं। राष्ट्रीय सनातन सेना ने की सख्त कार्रवाई की मांग राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला ने मदरसे में कथित अनियमितताओं पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे संस्थानों में बच्चों को भड़काऊ शिक्षा दी जा रही है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। फिलहाल, मदरसे के संचालन, निर्माण, जमीन और फंडिंग के स्रोतों से जुड़े पहलुओं की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्षों पर नजर रहेगी।
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang खेड़ापति हनुमान मंदिर पहुंचे मंत्री, कॉरिडोर और दशहरा मैदान का लिया जायजा

राजधानी भोपाल के छोला स्थित श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर को आने वाले समय में नई पहचान मिलने जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से यहां भव्य श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। मंत्री विश्वास सारंग (Vishwas Sarang) ने रावतपुरा सरकार के साथ मंदिर में दर्शन किए और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों और छोला दशहरा मैदान का निरीक्षण कर अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली। इस परियोजना का मकसद सिर्फ मंदिर परिसर का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर दर्शन व्यवस्था, आधुनिक सुविधाएं और धार्मिक वातावरण उपलब्ध कराना भी है। योजना को ‘विरासत भी और विकास भी’ की भावना के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। 100 करोड़ रुपये से बदलेगा खेड़ापति हनुमान मंदिर का स्वरूप श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को लगभग 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। जुलाई 2026 में प्रकाशित परियोजना संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, इसके निर्माण में राजस्थान के व्हाइट मार्बल और प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला का इस्तेमाल किया जाना है। मंत्री विश्वास सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो। साथ ही मंदिर के पुराने गर्भगृह की मूल संरचना और धार्मिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया है। सुंदरकांड की झलक से सजेगा भव्य कॉरिडोर हनुमान लोक कॉरिडोर की खास बात यह होगी कि इसमें सुंदरकांड से जुड़े प्रसंगों की झलक देखने को मिलेगी। इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव भी मिलेगा। कॉरिडोर को पारंपरिक वास्तुकला और आधुनिक निर्माण के मेल से विकसित करने की योजना है। इससे मंदिर परिसर की सुंदरता बढ़ने के साथ भोपाल की धार्मिक पहचान को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं को मिलेंगी ये आधुनिक सुविधाएं परियोजना के तहत श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खासतौर पर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों को कम करना है। Chhola Dussehra Maidan का भी होगा विकास मंत्री विश्वास सारंग ((Vishwas Sarang)) ने छोला दशहरा मैदान का भी निरीक्षण किया। योजना के तहत मैदान के खुले स्वरूप को बनाए रखते हुए सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जानी हैं। यहां दर्शक दीर्घा, मंच और दशहरा जैसे आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना तैयार करने की योजना है। इससे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। स्थानीय लोगों और कारोबारियों का भी रखा जाएगा ध्यान निर्माण कार्यों के दौरान श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय रहवासियों और व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। परियोजना से संबंधित पूर्व में प्रकाशित जानकारी में दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों के निर्माण का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसका उद्देश्य स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। Bhopal की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई पहचान श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। ऐसे में कॉरिडोर का विकास शहर के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद मंदिर परिसर में दर्शन व्यवस्था और सार्वजनिक आयोजनों के लिए सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण पूरा होने की निश्चित तारीख और वर्तमान प्रगति की ताजा आधिकारिक स्थिति की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है। कुल मिलाकर, श्री खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल में आस्था और आधुनिक विकास को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है। अब श्रद्धालुओं को इंतजार है कि यह भव्य परिसर कब पूरी तरह तैयार होकर उनके लिए नई सुविधाओं के साथ खुलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Philippines

Philippines Plane Crash: ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, 4 पायलटों की गई जान

फिलीपींस (Philippines) से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां ट्रेनिंग के दौरान वायुसेना के दो सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस हादसे में चार पायलटों की मौत हो गई। घटना के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियात के तौर पर SF-260 ट्रेनिंग विमानों की उड़ान पर रोक लगा दी है। वहीं, दुर्घटना की असली वजह जानने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। Philippines Plane Crash: कहां और कब हुआ हादसा? यह हादसा 23 अक्टूबर 2026 को फिलीपींस के बटांगस प्रांत के लिपा शहर में स्थित फर्नांडो एयर बेस के पास हुआ। वायुसेना के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 3:51 बजे हुई। दोनों विमान ट्रेनिंग फ्लाइट पर थे। शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि उड़ान के दौरान दोनों विमान हवा में टकरा गए, जिसके बाद वे दुर्घटनाग्रस्त हो गए। हालांकि, टक्कर किन परिस्थितियों में हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। हादसे में चार पायलटों की मौत इस दुर्घटना में दोनों विमानों में सवार चारों पायलटों की जान चली गई। इस खबर के सामने आने के बाद वायुसेना ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों ने परिवारों को जरूरी सहायता देने की बात भी कही है। वायुसेना के मुताबिक, हादसा एयर बेस की सीमा के भीतर हुआ। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जमीन पर मौजूद किसी अन्य व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। दुर्घटना के बाद SF-260 विमानों की उड़ान पर रोक हादसे के बाद फिलीपींस एयर फोर्स ने एहतियाती कदम उठाते हुए SF-260 ट्रेनिंग विमानों के पूरे बेड़े की उड़ानें अस्थायी रूप से रोक दी हैं। जांच के दौरान इन विमानों को उड़ान भरने की अनुमति नहीं होगी। इस फैसले का उद्देश्य दुर्घटना की वजह का पता लगाना और विमानों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच करना है। फिलहाल तकनीकी खराबी, मानवीय चूक या किसी अन्य कारण की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के नतीजे आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी हो चुका है SF-260 विमान हादसा फिलीपींस में SF-260 विमान से जुड़ी दुर्घटना पहले भी सामने आ चुकी है। मई 2026 में उत्तरी फिलीपींस के बेंगुएट प्रांत में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस हादसे में दो सैन्य पायलटों की मौत हुई थी। ताजा दुर्घटना के बाद सैन्य ट्रेनिंग विमानों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद सामने आएगी हादसे की वजह फिलीपींस एयर फोर्स ने दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दोनों विमान किस परिस्थिति में दुर्घटनाग्रस्त हुए और क्या इसमें किसी तकनीकी समस्या की भूमिका थी। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि हादसे में चार पायलटों की जान चली गई है। वायुसेना ने संबंधित विमानों की उड़ान रोक दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath जिस जमीन पर था भू-माफिया का कब्जा, वहां अब बना फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भू-माफिया से सरकारी जमीन वापस लेने की कहानी सुनाते हुए बताया कि जिस जमीन को कभी कब्जे से मुक्त कराना मुश्किल हो रहा था, आज उसी पर स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट (State Forensic Science Institute) बनाया गया है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने प्रदेश में जमीनों को कब्जे से मुक्त कराने, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों का जिक्र किया। सीएम योगी ने यह बात 15 जून 2026 को लखनऊ में आयोजित डिजिटल डेमोक्रेसी डायलॉग ‘त्रिवेणी’ के समापन सत्र में कही। उन्होंने बताया कि सरकारी जमीन को वापस लेकर उसका इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण संस्थान बनाने के लिए किया गया। कैसे भू-माफिया के कब्जे में पहुंची सरकारी जमीन? लखनऊ के सरोजनी नगर इलाके में स्थित इस जमीन का मामला कई साल पुराना है। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 एकड़ जमीन वर्ष 1955 में एक ट्रैक्टर कंपनी को 10 साल की लीज पर दी गई थी। लीज की अवधि पूरी होने के बाद जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। बाद में जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उसे दूसरे नाम पर दर्ज कराने के आरोप सामने आए। जांच में जमीन को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कराने और फिर रियल एस्टेट कंपनियों के बीच हस्तांतरित करने से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें हुईं। इसके बाद प्रशासन और पुलिस ने दस्तावेजों की जांच शुरू की। जमीन के स्वामित्व और कथित अवैध हस्तांतरण का मामला प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंचा। 2015 में वापस मिली जमीन, फिर शुरू हुई संस्थान बनाने की तैयारी उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 17 दिसंबर 2015 को जिला प्रशासन ने जमीन को कब्जे से मुक्त कराया। इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान राजस्व विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जमीन वापस मिलने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर योजना बनाई गई। आगे चलकर इसी जगह उत्तर प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट स्थापित करने का फैसला हुआ। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया, क्योंकि जमीन को लेकर विवाद और कब्जे की शिकायतों के बाद उसका इस्तेमाल सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किए जाने की योजना बनी। ₹200 करोड़ की लागत से बना Forensic Science Institute लखनऊ के सरोजनी नगर में इस संस्थान की आधारशिला 1 अगस्त 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रखी थी। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। शुरुआती रिपोर्टों में परियोजना की लागत करीब 200 करोड़ रुपये बताई गई थी। संस्थान का उद्देश्य फॉरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करना और पुलिस व जांच एजेंसियों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। यहां वैज्ञानिक जांच, साइबर सुरक्षा और अपराध से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। आज के समय में आपराधिक मामलों की जांच केवल गवाहों और बयानों तक सीमित नहीं है। डीएनए जांच, डिजिटल साक्ष्य और दूसरे वैज्ञानिक तरीकों की मदद से जांच को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। ऐसे संस्थान इसी जरूरत को पूरा करने में अहम भूमिका निभाते हैं। CM Yogi ने क्यों सुनाया जमीन का यह किस्सा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराकर उसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है। उनके बयान का मुख्य संदेश यह था कि जिस जमीन पर कभी कब्जे की समस्या थी, उसी पर अब शिक्षा और आधुनिक तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाया गया है। सीएम योगी ने इसे प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधारने और भू-माफिया के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर पेश किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। हालांकि, जमीन से जुड़े आरोपों और कानूनी दावों को समझने के लिए प्रशासनिक रिकॉर्ड तथा जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। भू-माफिया से मुक्त जमीन पर आवास योजना भी चर्चा में उत्तर प्रदेश में कब्जे से मुक्त कराई गई जमीनों का सार्वजनिक इस्तेमाल हाल के महीनों में भी चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2026 में प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके में माफिया अतीक अहमद से जुड़ी बताई गई जमीन पर आवासीय परियोजना की शुरुआत की खबर सामने आई। 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्मलोक आवास योजना के तहत 602 फ्लैटों की परियोजना का भूमि पूजन किया। परियोजना की लागत 191 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई। इसी दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पीपलगांव में बने 556 घरों के लाभार्थियों को चाबियां सौंपने की जानकारी भी सामने आई। इन परियोजनाओं को राज्य सरकार जमीन के इस्तेमाल को आम लोगों के आवास और विकास से जोड़ने के उदाहरण के तौर पर पेश कर रही है। सरकारी जमीन से संस्थान तक, क्या है इस खबर का महत्व? लखनऊ के फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट की कहानी में जमीन का पुराना विवाद, प्रशासनिक कार्रवाई और सार्वजनिक उपयोग के लिए संस्थान बनाने की प्रक्रिया शामिल है। यह मामला दिखाता है कि सरकारी जमीन को लेकर विवाद सुलझने के बाद उसका इस्तेमाल शिक्षा और वैज्ञानिक जांच जैसी जरूरतों के लिए किया जा सकता है। सीएम योगी के बयान ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। अब यह कहानी सिर्फ जमीन वापस लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात पर भी ध्यान खींचती है कि सरकारी संपत्ति का इस्तेमाल किस तरह सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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